यदि मैं प्रधानमंत्री होता निबंध-Essay if i were prime minister

यदि मैं प्रधानमंत्री होता निबंध

यदि मैं प्रधानमंत्री होता निबंध-yadi mai pradhan mantri hota nibandh

विश्व के वर्तमान माहौल में किसी भी राष्ट्र का शासनाध्यक्ष होना कांटों का ताज पहनना है, विपत्तियों का पहाड़ उठाना है, जलते अंगारों पर चलना है या आग के दरिया में कूदना है। दूसरे शब्दों में साक्षात काल के मुंह में जाना है। अब्राहम लिंकन ब्रदर्स, हिटलर, जुल्फिकार अली भुट्टो, जिया-उल-हक, प्रेमदास आदि की मौत इसके गवाह हैं। फिर समस्याग्रस्त भारत के प्रधानमंत्री भला इस हादसे से कैसे बचे रह सकते हैं। श्री लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की असामयिक मृत्यु इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। 

भारतीय संविधान में प्रधानमंत्री का पद सर्वोच्च बनाया गया है। प्रत्येक नागरिक इस पद का हकदार है। सभी इस जोखिमपूर्ण पद पर आरूढ़ होने के लिए लालायित रहते हैं। पद की प्राप्ति हो या न हो, लेकिन मनमोदक तो खाया ही जा सकता है। अतः अवसर मिलने पर जनता के प्रबल बहुमत और प्रेम को ठुकराना मेरे लिए भी मुश्किल हो जाएगा। सत्तासीन होकर एक राष्ट्रभक्त की भांति मेरा हर पल राष्ट्र की उन्नति में गुजरेगा। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और लालबहादुर शास्त्री मेरे आदर्श होंगे। 

भारत एक प्रजातांत्रिक देश है। समानता प्रजातंत्र का मूलमंत्र है। आज भारत में सर्वत्र विषमता व्याप्त है। विहंसती अट्टालिकाओं के पार्श्व में रोती झोंपड़ियां इसकी गवाह हैं। इसी विषमता के कारण आज सर्वत्र अराजकता एवं अशांति है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के शब्दों में 

शांति नहीं तब तक जब तक, सुख-भाग न नर का सम हो,

नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो। 

अतः प्रधानमंत्री बनने पर विषमता की इस खाई को मिटाना मेरा प्रथम कार्य होगा। अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी, जातीयता, सांप्रदायिकता एवं आतंकवाद हमारे देश की प्रमुख समस्याएं हैं। मेरी समझ में अशिक्षा एवं क्षुद्र स्वार्थ इन सबके मूल में है। इससे निजात पाने के लिए लॉर्ड मैकाले की वर्तमान शिक्षा प्रणाली को सात समुद्र पार भगाकर इसकी जगह रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रणाली लागू की जाएगी। भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि में सहकारिता एवं विज्ञान को सम्मिलित कर हरित क्रांति लाई जाएगी। घर-घर कुटीर उद्योगों का जाल बिछाकर बेरोजगारी के लौह दुर्ग पर वज्रघात किया जाएगा। गौ-पालन पर ध्यान देकर दुग्ध-उत्पादन में श्वेत क्रांति लाना भी मेरी सरकार का प्रमुख कार्य होगा। संक्षेप में, ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे हर हाथ को काम मिले।। 

जातीयता, जो सामाजिक सरसता के मार्ग में इन दिनों सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी है, के दमन के लिए अंतर्जातीय विवाह करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा। अंतर्जातीय विवाह करने वालों के लिए विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा एवं राज्यसभा में सीटें आरक्षित की जाएंगी। 

सांप्रदायिक ताकतों को पूर्णतः कुचलकर ही हमारी सरकार दम लेगी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तटस्थता की नीति कायम रखी जाएगी। विश्व कल्याण हेतु दक्षेस, निर्गुट सम्मेलन एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मेरा जोरदार प्रयास होगा। भारत का मूलमंत्र अहिंसा और विश्व बंधुत्व को सारे विश्व में फैलाने के लिए अशोक महान की भांति मेरा प्रयास रहेगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कार्यक्रमों को ईमानदारी पूर्वक कार्यान्वित करने से भारत एक बार फिर ‘सोने की चिड़िया’ और ‘विश्व गुरु’ बन जाएगा 

जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़ियां करती हैं बसेरा,

यह भारत देश है मेरा, यह भारत देश है मेरा।

जहां सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा,

यह भारत देश है मेरा, यह भारत देश है मेरा।

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