जले अंग पर ठंडा पानी देना चाहिए क्यों?

जले अंग पर ठंडा पानी देना चाहिए क्यों?

जले अंग पर ठंडा पानी देना चाहिए क्यों? क्जयालने पर ठंडा पानी नहीं डालना चाहिए?

ग़लतफ़हमी का आधार- जले अंग पर ठंडा पानी देना चाहिए

आम लोगों के मन में यह ग़लतफ़हमी है कि जली हुई त्वचा का पानी से संपर्क होने पर फफोले पड़ जाते हैं तथा उनके फूटने से जख्म बन जाते हैं। इसलिए जले हुए अंग पर पानी नहीं डालना चाहिए। 

वास्तविकता

त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जलने का सबसे अच्छा प्राथमिक उपचार यह है कि जलन खत्म होने तक जख्म पर ठंडा पानी डालते रहना चाहिए। यदि संभव हो, तो ठंडे पानी में जले हुए भाग को तुरंत डुबोकर तब तक रखें, जब तक कि जलन बंद न हो जाए। जले हुए अंगों पर ठंडे पानी में भिगोया हुआ साफ कपड़ा भी लपेट सकते हैं। फिर इस पर बार-बार ठंडा पानी डालकर तर करते रहें। 

जले पर ठंडे पानी के लाभ

जले हुए अंग पर तुरंत ठंडा पानी डालने से न केवल जलन में आराम मिलेगा, बल्कि त्वचा पर फफोले नहीं पड़ेंगे। अतः जले का निशान भी नहीं पड़ेगा। 

जब हमारी त्वचा जलती है, तो उसके आसपास का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में डाला गया ठंडा पानी जलन का दर्द कम करके त्वचा के भीतर उत्पन्न होने वाली गरमी को फैलने नहीं देता, जिससे भीतरी टिश्यू कम क्षतिग्रस्त होते हैं। उल्लेखनीय है कि जले अंग पर ठंडा पानी डालना मात्र एक प्राथमिक उपचार है। यह पर्याप्त उपचार नहीं है। 

आमतौर पर देखा गया है कि किसी भी जख्म पर पानी लगने से उसके पक जाने की पूर्ण संभावना रहती है, क्योंकि जख्म की नमी कीटाणुओं को फलने-फूलने का पूर्ण मौका देती है। अतः जख्म को यूं ही खुला न छोड़ें। मामूली जलने पर कच्चे आलू को पीसकर बनाया लेप लगाएं या नमक की परत चढ़ा दें और अच्छी तरह ढक दें, ताकि हवा न लगे। इन उपायों से जलन तुरंत शांत होकर फफोले नहीं पड़ेंगे। चिकित्सक की राय से जख्म पर न्यूओस्पिरिन एंटीबायोटिक पाउडर या सोफ्रामाइसिन क्रीम लगा सकते हैं। 

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