शनि के चन्द्रमा ‘टाइटन’ में वैज्ञानिकों की इतनी अधिक दिलचस्पी क्यों है ?

शनि के चन्द्रमा 'टाइटन' में वैज्ञानिकों की इतनी अधिक दिलचस्पी क्यों है ?

शनि के चन्द्रमा ‘टाइटन’ में वैज्ञानिकों की इतनी अधिक दिलचस्पी क्यों है ?Why are scientists so much interested in Saturn’s moon Titan?

टाइटन, सौरमण्डल का अकेला ऐसा चाँद है, जो वायुमण्डल से सम्पन्न है. यह शनि का सबसे बड़ा चाँद है. यह केवल वायु मण्डल ही नहीं, बल्कि सैकड़ों झीलों से युक्त है. वायुमण्डल और झीलों की उपस्थिति के कारण, वैज्ञानिकों का विश्वास है कि संभवतः टाइटन पर किसी तरह का जीवन हो. 

नासा का अंतरिक्षयान कैसिनी वर्षों में कई बार टाइटन के पास से गुजरा और इसकी सतह के विभिन्न कोणों से चित्र लिए. हाल ही में कैसिनी ने टाइटन की सतह पर मौजूद झीलों के बारे में खुलासा किया है कि ये झीलें पृथ्वी की झीलों की तरह पानी से नहीं, बल्कि मीथेन और ईथेन से बनी हैं और अगर आप मीथेन और ईथेन से बनी झीलों में तैरना चाहें, तो यह सम्भव नहीं है. कैसिनी अभियान के तहत हासिल आँकडों से वैज्ञानिकों को पता चला कि टाइटन के उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणी गोलार्द्ध की तुलना में ज्यादा झीलें हैं. दोनों गोलार्डों में झीलों की असममिति की वजह शनि की कक्षा है कि सर्य की परिक्रमा के दौरान शनि की कक्षा उत्केन्द्रित रहती है, इसकी वजह से टाइटन के वायुमण्डल में दक्षिण से उत्तर की तरफ मीथेन का स्थानांतरण होता रहता है. इस प्रभाव को “एस्ट्रोनॉमिकल क्लाइमेट फोर्सिंग’ कहा जाता है. पृथ्वी पर हिमयुग की भी यह एक वजह मानी जाती है. 

अब तक वैज्ञानिकों का सोचना था कि टाइटन के उत्तरी गोलार्द्ध की रचना दक्षिणी गोलार्द्ध की तुलना से भिन्न है, लेकिन कैसिनी द्वारा लिए गए चित्रों में पाया गया कि दक्षिणी गोलार्द्ध की तुलना में उत्तरी गोलार्द्ध के 20 गुना ज्यादा क्षेत्र में मीथेन और ईथेन की झीलें हैं. इतना ही नहीं, उत्तर में आधी भरी हुई और सूखी झीलों की संख्या भी ज्यादा है. टाइटन पर झीलों के इस असमान वितरण के पीछे मौसम की भिन्नता की भूमिका है.

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