मलमास क्या होता है | What is Malmas?

मलमास क्या होता है

मलमास क्या होता है-What is Malmas?

भारत में दिनों, महीनों और साल की गणना का कलैंडर दो तरह से बनता है। चंद्रमा की गति के आधार पर और सूर्य की गति के आधार पर। चंद्रमा की गति के अनुसार की जाने वाली गणना को चंद्रवर्ष और सूर्य की गति के अनुसार की जाने वाली गणना को सौर वर्ष के रूप में देखा जाता है। 

अपने देश में समस्त मांगलिक कार्यों और पर्व-त्योहार में चंद्र गणना पर आधारित कलैंडर का प्रयोग किया जाता है। इसमें चंद्रमा की सोलह कलाओं के आधार पर एक महीने में दो पक्ष (शुक्ल एवं कृष्ण) होते हैं। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (पहले दिन) से पूर्णिमा तक प्रत्येक चंद्रमास में साढे 29 दिन होते हैं। इस प्रकार एक वर्ष 354 दिनों का होता है, जबकि पृथ्वी द्वारा सूर्य के परिभ्रमण में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट एवं लगभग 46 सेकंड लगते हैं। अतः प्रत्येक वर्ष 11 दिन 3 घड़ी और लगभग 48 पल का अंतर पड़ जाता है और वह अंतर तीन वर्षों में बढ़ते-बढ़ते लगभग एक मास का हो जाता है। काल गणना के इसी अंतर को पाटने के लिए तीसरे वर्ष (लगभग 30 माह पश्चात) एक अधिमास की व्यवस्था है, जो बहुत ही वैज्ञानिक है। यही तेरहवां मास हो जाता है, क्योंकि चंद्रमा की कला का बढ़ना-घटना तो यथावत जारी ही रहता है। इसके बाद भी काल गणना में जो थोड़ा-बहुत सूक्ष्म अंतर रह जाता है, वह क्षय मास से पूरा हो जाता है। 

मलमास क्या होता है

जब एक मास में दो संक्रांति हों तो क्षयमास कहलाता है। इस प्रकार चंद्रवर्ष सौरवर्ष के लगभग समान हो जाता है। जिस महीने में सूर्य संक्रांति न हो, वह महीना अधिकमास (मलमास) होता है एवं जिसमें दो संक्रांति हों, वह क्षयमास होता है। चंद्रमास का संबंध चंद्रमा से है। अमावस्या के बाद चंद्रमा जब मेष राशि और आश्विन नक्षत्र में उदित होकर प्रतिदिन एक-एक कला बढ़ता हुआ 15 वें दिन चित्रा नक्षत्र में पूर्णता को प्राप्त करता है, तब वह महीना ‘चित्रा नक्षत्र के कारण चैत्र कहलाता है। जिस पक्ष में चंद्रमा क्रमशः बढ़ता हुआ शुक्लता (प्रकाश) को प्राप्त करता है, वह शुक्ल पक्ष और जिसमें घटता हुआ कृष्णता (अंधकार) की ओर बढ़ता है, वह कृष्ण पक्ष कहा जाता है। मास का नाम उस नक्षत्र के अनुसार होता है, जो महीने भर सायंकाल से प्रात:काल तक दिखाई पड़े और जिसमें चंद्रमा पूर्णता प्राप्त करे। चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कृतिका, मृगशिरा, पुष्य, मघा एवं फाल्गुनी नक्षत्रों के अनुसार ही चंद्रमासों के नाम क्रमशः चैत्र, बैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ एवं फाल्गुन होते हैं। 

जिस महीने अधिमास आता है, उसमें 4 पक्ष होते हैं। प्रथम और चतुर्थ पक्ष शुद्ध एवं द्वितीय और तृतीय पक्ष अधिकमास कहलाते हैं। इस वर्ष श्रावण अधिकमास है। प्रथम श्रावण का कृष्ण पक्ष शुद्ध एवं शुक्ल पक्ष अधिकमास है। द्वितीय श्रावण का कृष्ण पक्ष अधिकमास तथा शुक्ल पक्ष शुद्ध है। सभी धार्मिक एवं मांगलिक कार्य एवं पर्व-उत्सव शुद्ध पक्षों में ही किए जाते हैं, अधिकमास इन कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। प्रथम श्रावण के शुक्लपक्ष एवं द्वितीया श्रावण के कृष्णपक्ष को मिलाकर पुरुषोत्तम मास माना जाएगा। 

श्रावण कृष्ण पक्ष के व्रत-पर्व, जैसे-अशून्यशयन व्रत, गणेश चतुर्थी, कामदा एकादशी, महाशिवरात्रि एवं हरियाली अमावस्या आदि पर्व प्रथम श्रावण के कृष्ण पक्ष (शुद्ध) में मनाए जाएंगे। श्रावण शुक्ल पक्ष के पर्व. जैसे-हरियाली, तीज, नागपंचमी, तुलसी जयंती, पुत्रदा एकादशी. श्रावणी पर्णिमा, रक्षाबंधन एवं श्रावणी कर्म (यज्ञोपवीत पूजन) आदि द्वितीय श्रावण के शुक्लपक्ष में मनाए जाएंगे। 

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