Vision ias essay in hindi-सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की तरक्की का लक्ष्य 

Vision ias essay in hindi-

Vision ias essay in hindi-सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की तरक्की का लक्ष्य 

जीवंत और सार्थक लोकतंत्र वही है, जिसमें सबसे निचले पायदान पर खड़ा व्यक्ति तरक्की करे और राष्ट्रीय मुख्य धारा में शामिल होकर राष्ट्र के विकास का पथ प्रशस्त करे। सबसे निचल पायदान पर खड़े व्यक्ति से अभिप्राय उस व्यक्ति से है, जिस तक आर्थिक विकास का लाभ न पहुंचा हो, जो अपनी निचली स्थिति के कारण राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल न हो पाया हो, जो शिक्षा के उजियार, सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से वंचित हो तथा आजीविका के संदर्भ में स्वावलंबी न बन पाया हो। यानी तरक्की की सीढ़ियों के पहले पायदान तक भी उसकी पहुंच न बन पाई हो।

जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तरक्की करते हैं, तभी समावेशी विकास को बल मिलता है और लोक-कल्याण को ऊंचाई मिलती है, साथ ही लोकतंत्र भी सबल होता है। अन्त्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भी अपने दर्शन में सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की पैरोकारी की थी। एक सार्थक लोकतंत्र के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय की अन्त्योदय की अवधारणा प्रेरक है। यही वह अवधारणा है, जो समाज के गरीब, असहाय एवं अंतिम व्यक्ति के उत्थान एवं उनके कल्याण की सीख देती है। अन्त्योदय का अर्थ ही है सबसे नीचे के व्यक्ति का उदय। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अपने दर्शन में यही रेखांकित किया है कि सरकारों को ऐसे प्रयास सुनिश्चित करने चाहिए कि सबसे नीचे का व्यक्ति उत्थान करे। 

जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तरक्की करते हैं, तभी समावेशी विकास को बल मिलता है और लोक-कल्याण को ऊंचाई मिलती है, साथ ही लोकतंत्र भी सबल होता है। 

पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन से प्रेरणा लेकर हमारी केंद्र और राज्य सरकारें समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति के कल्याण और उत्थान के लिए समर्पित दिख रहीं हैं। सबसे निचले व्यक्ति की तरक्की व उत्थान तथा लोक-कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, साथ ही ऐसे प्रयास भी सुनिश्चित कर रही है कि प्रशासनिक व्यवस्था की किसी खामी का खामियाजा कमजोर वर्ग को न उठाना पड़े। यानी पारदर्शिता पर भी जोर है। सरकार का प्रयास है कि कमजोर व्यक्ति के लिए सामाजिक न्याय, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो तथा तरक्की की सीढ़ियों पर उसके कदम आगे बढ़ें। सरकार बड़ी शिद्दत से सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में खुशहाली के बीज अंकुरित करने में लगी है।

देश के सबसे निचले पायदान पर खड़ व्यक्ति की तरह लक्ष्य सामने रखकर सरकार ने अन्त्यादय की अवधारणा को दना शुरू कर दिया है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा उत्थान लोक-कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है जैसे-प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना, अब पेंशन योजना आदि। विषयवस्तु को सार्थकता प्रदान करने के उद्देश्य से यहां कुछ उन योजनाओं के बारे में जान लेना उचित रहेगा जी सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। 

केंद्र सरकार द्वारा ‘आयुष्मान भारत’ (Ayushman Bharat) योजना का शुभारंभ किया जा चुका है, जिसे विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना माना जा रहा है। इस योजना का प्रारूप सहकारी संघवाद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है तथा इसका उद्देश्य ‘सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना-2011’ के आधार पर 10 करोड़ कमजोर वर्ग के परिवारों को 5 लाख रुपये वार्षिक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना है। गरीबों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ का शभारंभ किया गया, जिसे अप्रैल, 2018 में विस्तार दिया गया। विस्तारित उज्ज्वला योजना के तहत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक आ करोड़ गरीबों को घरेलू गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना है। 

असंगठित क्षेत्र के नागरिकों को 60 वर्ष की आयु के बाद | उनके अंशदान के आधार पर न्यूनतम निर्धारित पेंशन प्रदान करने के | उद्देश्य से जहां ‘अटल पेंशन’ योजना का शुभारंभ सरकार द्वारा किया | गया है, वहीं ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ (PMMY) द्वारा छोटे और | सूक्ष्म स्तर के उद्योगों की स्थापना हेतु अल्प ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसी क्रम में 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से ‘वरिष्ठ नागरिक पेंशन बीमा योजना’ का शुभारंभ किया गया है, जो कि सरकार के सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय समावेशन कार्यक्रम का एक हिस्सा है। 

‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ का लक्ष्य वित्तीय समावेशन है। यह एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसका उद्देश्य आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित | करना है। इसमें समग्र आर्थिक भागीदारी और देश के प्रत्येक परिवार | को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का एकीकृत उद्देश्य निहित है। 

‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत काम करने वाली महिलाओं को संबल प्रदान किया गया है। इसके तहत प्रसव के कारण महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मुआवजा देना तथा उनके उचित आराम व पोषण को सुनिश्चित करना है। कमजोर वर्ग के लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना’ अत्यंत लाभकारी है, जिसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेघरों को घर मुहैया कराए जा रहे हैं। कमजोर वर्ग के लिए ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (मनरेगा) अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुई है, जिसके तहत अब तक सभी श्रमिकों में महिलाओं की भागीदारी 54%, अनुसूचित जाति की भागीदारी 22% तथा अनुसूचित जनजाति की भागीदारी लगभग 17% हो गई है। (आंकड़े 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण पर आधारित) फरवरी, 2016 में मनेरगा के 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 

‘दीनदयाल अन्त्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत 8 से 9 करोड़ ग्रामीण निर्धन घरों तक पहुंच कर हर घर से एक महिला को लेकर गांव एवं उच्चतर स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूहों एवं संघों का निर्माण करना सुनिश्चित किया गया है, ताकि निर्धन महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा सके। ‘स्टैंडअप इंडिया स्कीम’ का उद्देश्य कम से कम एक अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) या कम से कम एक महिला को हरा-भरा उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक से 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये का ऋण लेने की सुविधा प्रदान करना है। ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-सौभाग्य’ के तहत भी गरीबों-वंचितों पर ध्यान केंद्रित किया गया है और मुफ्त बिजली कनेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वर्ष 2018 में शुरू की गई ‘वन धन योजना’ आदिवासी समुदायों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इसका उद्देश्य वनोत्पादों के मूल्यवर्धन के जरिए जनजातीय समुदायों का सशक्तीकरण करना है। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए सरकार द्वारा सराहनीय पहलें की जा रही हैं, जिससे जहां भरोसा जागा है, वहीं समावेशी विकास को भी बल मिला है। तात्पर्य यह कि विभिन्न योजनाओं और आर्थिक प्रगति का रिसाव गरीबों और वंचितों तक पहुंचने लगा है। खास बात यह है कि यह काम पूरी पारदर्शिता के साथ हो रहा है, यानी इसमें भ्रष्टाचार अपने दांत नहीं गड़ा पाया है। लाभार्थियों को मिलने वाली राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है और बिचौलियों की दाल नहीं गल रही है। सरकारी कामकाज में डिजिटलाइजेशन, ई-गवर्नेस व एम गवर्नेस आदि से जहां सरकारी कार्यों में होने वाली धांधली और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है, वहीं ई-ऑफिस व्यवस्था से फाइलों की गति तेज हुई है। यह कहना असंगत न होगा कि हमने उस नए भारत की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है, जो गरीबी और शोषण से मुक्त होगा तथा जिसमें सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान होगी। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए सरकार द्वारा सराहनीय पहलें की जा रही हैं, जिससे जहां भरोसा जागा है, वहीं समावेशी विकास को भी बल मिला है। तात्पर्य यह कि विभिन्न योजनाओं और आर्थिक प्रगति का रिसाव गरीबों और वंचितों तक पहुंचने लगा है। खास बात यह है कि यह काम पूरी पारदर्शिता के साथ हो रहा है, यानी इसमें भ्रष्टाचार अपने दांत नहीं गड़ा पाया है। 

सरकारी पहले तो श्लाघनीय हैं, मगर इन पहलों का पूरा लाभ पाने के लिए निचले पायदान पर खड़े व्यक्तियों को भी जागरूक होना पड़ेगा। ये बेहद जरूरी है कि ये लोग अपने हकों-अधिकारों के बारे में जाने तथा उन योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें, जो सरकार द्वारा इनके कल्याण एवं लाभ के लिए शुरू की जाती हैं। इसके लिए इन्हें प्रचार-प्रसार के साधनों से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, तो सरकारी तंत्र से भी जुड़ाव बढ़ाना होगा। यह भी जरूरी है कि कमजोर तबके का सहयोग और समर्थन भी जन-कल्याण की योजनाओं को मिले। जन सहभागिता को भी बढ़ाना होगा। 

जब सबसे निचले पायदान पर खड़ा व्यक्ति सशक्त और सबल होता है, तभी राष्ट्र के विकास को सही अर्थों में गति और लय मिलती है। यह सुखद है कि पं. दीनदयाल उपाध्याय की अन्त्योदय की अवधारणा को साकार कर रही केंद्र सरकार ने निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अनेका एक पहले शुरू कर रखी हैं। जल्द ही ये पहलें रंग लाएंगी और तभी उदित होगा एक नया भारत। 

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