Upsc nibandh book in hindi-जीवन हेतु जल का अधिकार 

Upsc nibandh book in hindi-

Upsc nibandh book in hindi-जीवन हेतु जल का अधिकार (Right to Water for Life)  

जल, जीवन का पर्याय है, अतएव जीवन हेतु जल का अधिकार भी आवश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखकर प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक’ के रूप में जीवन हेतु जल के अधिकार की सनिश्चितता की दिशा में कदम आगे बढाए गए हैं। 3 जन. 2016 को केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक, 2016’ (National Water Framework Bill, 2016) का मसौदा वेबसाइट पर जारी कर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। 

इस प्रस्तावित विधेयक की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को ‘जीवन हेतु जल का अधिकार’ (Right to Water for Life) होगा तथा इस हेतु भुगतान में असमर्थता के आधार पर किसी को इससे वंचित नहीं किया जाएगा। इस प्रस्तावित विधेयक में ‘जीवन हेतु जल’ को मूलभूत आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया गया है, जो कि पेयजल, खाना पकाने, स्नान, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं संबंधित व्यक्तिगत और घरेलू उपयोगों सहित प्रत्येक मानव के जीवन के मूल अधिकार के लिए आवश्यक है। इसमें महिलाओं की विशेष आवश्यकताओं हेतु तथा घरेलू मवेशियों हेतु आवश्यक जल को भी शामिल किया गया है। 

“चूंकि हमारे देश में जल राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार में आता है, अतएव इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इस विधेयक को मॉडल कानून का स्वरूप प्रदान किया गया है, ताकि राज्य सरकारें इसे अपना सकें।” 

प्रस्तावित राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक एक सुचिंतित एवं व्यापक पहल है, क्योंकि इसमें जीवन के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक जल रूपी महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण, सुरक्षा, विनियमन एवं प्रबंधन के सिद्धांतों के आधार पर एक विस्तृत राष्ट्रीय कि रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इस रूपरेखा के आधार पर शायर सभी स्तरों पर जल के संदर्भ में विधायी एवं अधिशासी कार्यवाही की जा सकेगी।

चूंकि हमारे देश में जल राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार में आता है, अतएव इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इस विधेयक को मॉडल कानून का स्वरूप प्रदान किया गया है, ताकि राज्य सरकारें इसे अपना सकें। इसमें प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित जल की न्यूनतम मात्रा के अधिकार का प्रावधान करने के साथ राज्य के लिए जल संरक्षण एवं सुरक्षा को कर्त्तव्य बाध्य किया गया है। न्यूनतम जल आवश्यकता का निर्धारण समुचित (Appro priate) सरकारों द्वारा समय-समय पर किया जाएगा। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार राज्य सभी स्तरों पर जल को ‘सार्वजनिक न्यास’ (Public Trust) में रखेगा और जीवन हेत जल को इसके सभी अन्य अनुप्रयोगों (कृषि, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक सहित) पर अधिमान दिया जाएगा। सभी स्तरों पर राज्य, नागरिकों एवं जल प्रयोक्ताओं की सभी श्रेणियों का यह कर्त्तव्य होगा कि वे जल स्रोतों की सुरक्षा, परिरक्षण एवं संरक्षण करें तथा उन्हें अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित करें। 

इस विधेयक की एक अच्छी बात यह भी है कि इसे समावेशा स्वरूप प्रदान करते हुए इसके मसौदे में घरेलू जलापूर्ति हेतु ‘श्रेणीबद्ध मूल्य निर्धारण प्रणाली’ (Graded Pricing System) लाने की बात कही गई है, जिसमें उच्च आय वर्गों से पूर्ण लागत मूल्य एवं मध्य वों से वहनीय मल्य वसला जाएगा, जबकि निर्धन वगा का जल निश्चित मात्रा की निःशुल्क आपूर्ति की जाएगी। 

इस प्रस्तावित विधेयक की व्यापकता का पता इसी से चलता इसमें सिर्फ जीवन हेतु जल का अधिकार ही नहीं सुनिश्चित किया गया है, बल्कि जल की महत्वपूर्ण स्रोत जीवनदायिनी नदियों के कायाकल्प का भी प्रावधान किया गया है। इसमें न सिर्फ नदियों की निर्मल और अविरल धारा पर बल दिया गया है, बल्कि उनके किनारों को भी स्वच्छ रखने पर जोर दिया गया है। सोने पर सुहागा यह है कि इस प्रस्तावित विधेयक के मसौदे के साथ ही मंत्रालय द्वारा पृथक् रूप से ‘भू-जल मॉडल विधेयक, 2016’ (Ground Water Model Bill, 2016) का मसौदा भी जारी किया गया है, जो देश में भू-जल के संरक्षण, सुरक्षा, विनियमन एवं प्रबंधन के लिए विधिक रूपरेखा प्रदान करेगा। यह विधेयक एकीकृत दृष्टिकोण में आनुषांगिक समान वितरण के सिद्धांतों पर आधारित है। इस विधेयक के अनुसार राज्य को भू जल के लिए एक सार्वजनिक न्यासी के तौर पर कार्य करना चाहिए, जिसका प्रबंधन समान निकाय सिद्धांत के आधार पर होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भू-जल संरक्षित, रक्षित, विनियमित एवं प्रबंधित हो। स्पष्ट है कि पृथक रूप से जारी किए गए इस विधेयक का समर्थन भी राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक को मिलेगा, क्योंकि दोनों का संदर्भ जल ही है। 

“चूंकि यह विधेयक नदियों को कायाकल्य के लिए भी प्रेरित करता है, अतएव इसके जरिए प्रदूषण की जबरदस्त मार झेल रही देश की नदियों की हालत सुधरेगी। नदी तंत्र एवं नदी प्रणाली दुरुस्त होगी।” 

राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक अभी प्रस्तावित है। इस पर सुझाव मिलने के बाद इसमें और सुधार आएगा। भविष्य में इसके कानून की शक्ल लेने की स्थिति में हम इससे अनेक स्तरों पर लाभान्वित होंगे। सबसे अच्छी बात तो यह है कि इसके जरिए मानव के जीवन के मूल अधिकार के रूप में जल का अधिकार मिलने से सभी के लिए जल की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस प्रकार हम किसी हद तक जल संकट की समस्या से भी उबर सकेंगे। निम्न वर्गों को विशेष रूप से राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें जल की निश्चित मात्रा की निःशुल्क आपूर्ति की जाएगी। चूंकि यह विधेयक नदियों को कायाकल्प के लिए भी प्रेरित करता है, अतएव इसके जरिए प्रदूषण की जबरदस्त मार झेल रही देश की नदियों की हालत सुधरेगी। नदी तंत्र एवं नदी प्रणाली दुरुस्त होगी।

प्रस्तावित राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक जल के संदर्भ में एक व्यापक अभिशासन सृजित करता है, जिससे जल से संबंधित प्रकरणों में पारदर्शिता आएगी। इस विधेयक के जरिए जहां जल का संरक्षण एवं सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं जल का उपयोग भी विनियमित होगा। जल प्रदूषण की रोकथाम होगी, तो जल प्रबंधन का एक बेहतर तंत्र भी विकसित होगा। समग्र रूप से ये सारी बातें भारत में भयावह रूप से विद्यमान जल संकट एवं जल प्रदूषण की समस्या के निवारण में सहायक सिद्ध होंगी। 

सारतः यह कहा जा सकता है कि ‘राष्ट्रीय जल प्रारूप विधेयक’ के रूप में जीवन हेतु जल के अधिकार, जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल प्रबंधन तथा जल के विनियमन की दिशा में एक सार्थक पहल होती दिख रही है, जो कि देशवासियों के लिए लाभप्रद सिद्ध होनी चाहिए। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

5 + eleven =