Truth of life quotes in hindi-दोस्ती और दुश्मनी आपकी विचारधारा पर निर्भर करती है,जैसी भावनायें, वैसी संभावनायें

Truth of life quotes in hindi

 Truth of life quotes in hindi- दोस्ती और दुश्मनी आपकी विचारधारा पर निर्भर करती है (Friends & Foes Depend on Your Attitude) 

1.आपका व्यक्तित्व आपके व्यवहार पर निर्भर करता है और व्यवहार आपकी विचारधारा पर. विचारधारा पर ही निर्भर करती है, मित्रता और शत्रुता. मित्रता और शत्रुता पर निर्भर करती है, आपकी सफलता. आप जितने मित्रता से भरे होंगे, उतने ही सफलता से भरे होंगे. जितने सफलता से भरे होंगे, उतने ही मित्रवत होते चले जायेंगे. शत्रुता से भरे होकर आप कभी सफल नहीं हो सकते.

2. आपके कितने ही मित्र हों, कितने ही शत्रु हों, वे आपको न सुख पहुँचा सकते हैं, न दुख. यदि कोई सुख या दुख पहुँचा सकता है तो वह केवल आप खुद ही हैं. आपके अलावा आपको न कोई सुख पहुँचा सकता है, न कोई दुख. याद रखें, दुनिया में न कोई आपका दोस्त है, न दुश्मन. दोस्ती और दुश्मनी के लिए तो बस आपका व्यवहार ही जिम्मेदार है.

Truth of life quotes in hindi

3. मित्र ऐसा हो, जिसके सामने दिल खोलकर रखा जा सके. मित्र ऐसा हो, जिसके सामने ‘अहम्’ को उतारकर रखा जा सके. ऐसा मित्र बनाने में कई साल लग जाते हैं, किन्तु उसे खोने में एक मिनट भी नहीं लगता. सम्पन्नता मित्र बनाती है और विपन्नता उनकी परख करती है. जो विपन्नता में मित्रता निभाये, वही सच्चा मित्र हो सकता है. सच्ची मित्रता आदान प्रदान पर नहीं, बल्कि शुद्ध भावनाओं पर टिकी होती है,

4. आपके सौ मित्र हों, तब भी कम है, किन्तु शत्रु तो एक ही काफी है. जो आपको पसंद न हो, उसके लिए एक क्षण भी बर्बाद न करें. उसे दुश्मन बनने से रोकने के लिए बस इतना ही काफी है. आप लोगों को कितना महत्व देते हैं ? सार्वजनिक रूप से आप किसी की कितनी प्रशंसा करते हैं ? कितनी बुराई करते हैं ? इसी से आपकी मित्रता अथवा शत्रुता की भावनाओं का पता चलता है.

5. अपने मित्रों की मदद के लिए सदैव तैयार रहें. जब कोई मित्र किसी दुविधा में हो, तब उसकी अवश्य मदद करें. और जब भी आप पर कोई संकट आये, तब ऐसे मित्र से सलाह करके तो देखें. आपको निराश नहीं होना पड़ेगा. आज की इस भागमभाग और आपाधापी से भरी जिन्दगी में रोजाना नये-नये लोगों से सम्पर्क होता रहता है. इसलिए जिसके साथ भी व्यवहार करना पड़े, मित्रवत व्यवहार ही करें, जानबूझकर या अवैध तरीके से किसी को नुकसान पहुँचाने की चेष्टा न करें, दोस्ती न कर सकें, न सही, किन्तु किसी से दुश्मनी न करें. इतना सब कुछ करने पर भी कुछ लोग आपकी आलोचना अवश्य करेंगे. उन्हें करने दें, आगे बढ़ने के लिए प्रशंसा से अधिक आलोचनाओं की आवश्यकता पड़ती है, 

6.कोई भी व्यक्ति मित्रों के बिना नहीं रह सकता. मैत्री भाव के बिना काम चल भी नहीं सकता. जो मित्रों के बिना रह सकता है, वह या तो पागल हो सकता है या परमात्मा. याद रखें, जहाँ मित्र होंगे, वहाँ शत्रु भी होंगे. समय एवम् आवश्यकतानुसार मित्र, शत्रु बन जाते हैं और शत्रु, मित्र. लेकिन जिससे कभी मित्रता न रही हो, उससे कभी शत्रुता भी नहीं हो सकती. अर्थात् मित्रता और शत्रुता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, किन्तु मित्रता वाला पहलू पहले आता है.

7. मित्रता में व्यक्तिगत लाभ हानि का हिसाब नहीं लगाया जाता. जहाँ गणित है, वहाँ मित्रता नहीं. जहाँ मित्रता है, वहाँ गणित नहीं. याद रखें, मित्र पर लुटाया गया प्यार सूद सहित लौट कर आता है. नये-नये मित्र बनाते चलें, किन्तु पुराने को भी न भूलें. वक्त पड़ने पर पुराना ही अधिक काम आता है.

8. अपने आपको इतना व्यस्त रखो कि दुश्मनों से नफरत करने का वक्त ही न मिले. याद रखें, जब आप अपने दुश्मनों से नफरत करते हैं, तब उन्हें हावी होने की ताकत प्रदान करते हैं. जब आप किसी से बदला लेने की सोचते हैं, तब अपने आपका ही नुकसान करते हैं. इसलिए दुश्मनों से प्यार करो और भूल जाओ. दोस्तों पर अहसान करो और भूल जाओ, किन्तु दोस्तों को कभी मत भूलो. दोस्तों के अहसान को भी कभी मत भूलो. मित्रों को कभी अनावश्यक कष्ट मत पहुँचाओ, कभी दुविधा में मत डालो. कभी गलती हो जाय तो फौरन माफी मांग लो. दोस्तों और दुश्मनों के साथ ऐसा व्यवहार करो कि कभी आपको स्पष्टीकरण न देना पड़े. मजा तो तब है, जब दोस्त और दुश्मन दोनों ही आपके व्यवहार के कायल हों.

9. कहा जाता है कि किसी वस्तु का बंटवारा करने पर ही दोस्ती या दुश्मनी का असली चेहरा सामने आ जाता है. संकट की घड़ी आने पर ही मित्रता का मूल्यांकन हो पाता है. किसी मित्र के लिए जान देना उतना कठिन नहीं है, जितना कि ऐसा मित्र खोजना, जिसके लिए जान दी जा सके.

दृष्टान्त- एक ग्वाले को पक्षियों से बड़ा प्रेम था. जैसे ही वह जंगल में । पहुँचता, आस-पास के पक्षी उड़कर उसके पास आ जाते. कोई उसके सिर पर बैठता, कोई कंधे पर बैठता, कोई उसकी हथेली पर बैठ जाता. न ग्वाले के मन में कोई मैल था, न पक्षियों के मन में कोई डर था. एक दिन ग्वाले के बूढ़े बाप ने ग्वाले से कहा-‘मैनें सुना है, तुम्हारी पक्षियों से बड़ी दोस्ती है. कल दो-चार पक्षी मेरे लिए पकड़ लाना, मैं तो जंगल में जा नहीं सकता, घर पर ही पक्षियों से मन बहला लूंगा.’ ग्वाले ने कहा-‘ठीक है.’ रोज की भांति ग्वाला अगले दिन भी जंगल गया और निर्धारित स्थान पर जाकर बैठ गया, किन्तु आज एक भी पक्षी उसके नजदीक नहीं आया. उसने पक्षियों को आवाज लगाई तो पक्षी आने की बजाय उड़ कर दूर चले गये. आज पक्षी डरे हुए थे. ग्वाला वहीं था, पक्षी भी वही थे, किन्तु आज ग्वाले की विचारधारा अलग थी, वह कुछ को पकड़ कर घर ले जाना चाहता था, उसकी मनःस्थिति को पक्षी भांप चुके थे. 

Quotes on life in hindiजैसी भावनायें, वैसी संभावनायें (Possibilities Are Subject To Your Feelings) 

1.जो जीत के विषय में सोचता है, वही अन्ततः जीतता है. जो जीत में भी हार देखता है, वह अन्ततः हार जाता है. जो हार में भी जीत देखता है, वह कभी हार ही नहीं सकता. हार और जीत कोई गीत नहीं है, जिसे बार-बार गाया जाय. हार और जीत के जोड़ से ही जिन्दगी बनती है, इसलिए दोनों को ही सहज भाव से लिया जाए. हार और जीत तो वस्तुतः मन की है. हार और जीत का कोई अन्तिम छोर भी नहीं है. आप हार या जीत को किस रूप में लेते हैं, यही महत्वपूर्ण है,

Truth of life quotes in hindi

2. दिन का मूल्यांकन उस फसल से न करें, जो आपने काटी है, बल्कि उन बीजों से करें, जो आपने बोये हैं. किसी के व्यवहार का मूल्यांकन उस व्यवहार से न करें, जो उसने किया है, बल्कि उस व्यवहार से करें, जो आपने किया है. किसी के व्यवहार पर नाराज होने से पहले उन परिस्थितियों पर भी गौर करें, जिन परिस्थितियों में उसने व्यवहार किया है. आपके व्यवहार पर ही सब कुछ निर्भर करता है और व्यवहार भावनाओं पर निर्भर करता है.

3. लोगों से घृणा करना ठीक वैसा ही है, जैसा कि अपने आप से घृणा करना. अहम् एवम् क्रोध से भरना ठीक वैसा ही है, जैसा कि गुब्बारे में हवा भरना. भरे हुए गुब्बारे की जिन्दगी कितनी छोटी रह जाती है. दुनिया एक शीशमहल है, इसमें आप अपने आपको जैसा देखते हैं, वैसे ही लोग दिखाई देते हैं. इसलिए बत्ती बुझाकर अंधेरा मत देखो. जिस प्रकार खण्डित आइने में तस्वीर भी खण्ड-खण्ड ही नजर आयेगी, उसी प्रकार खण्डित भावनाओं में हर संभावना भी विखण्डित ही दिखाई देगी.

4. यदि हम दूसरों के लिए आग लगायेंगे तो सबसे पहले खुद को ही जलता हुआ पायेंगे. “बस्ती जो बढ़ रही, जलती हुई अपनी ओर, आग वो अपनी ही, लगाई हुई सी लगे.” इसलिए आग नहीं, अनुग्रह के दीप जलायें, जब हम अनुग्रह से भरे होंगे, तब हमें सब कुछ अनुग्रह से भरा हुआ ही लगेगा. किसी भी सफलता का रास्ता अनुग्रह के गाँव से होकर ही गुजरता है और अनुग्रह पर ही समाप्त होता है.

5. यदि आपने किसी को कष्ट पहुँचाकर धन कमाया है तो याद रखें, ऐसा धन आपको भी कष्ट ही पहुँचायेगा. यदि आपने अनैतिक तरीकों से धन कमाया है तो समाज भी आपके साथ यही सब दोहरायेगा. आप किसी को मूर्ख बनाकर बहुत आगे नहीं जा सकते, पर हाँ मूर्ख बनकर अवश्य जा सकते हैं. सबको मूर्ख बनाना आसान भी नहीं है, ऐसा भी मत समझ लेना कि समझदारी का ठेका केवल आपके नाम ही छूटा है. हर आदमी अपने हिसाब से समझ रखता है. 

6.हम अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं, जो कुछ भी प्राप्त करते है, किसी न किसी भावना से प्रेरित होकर ही करते हैं. यदि हमारी भावनायें सकारात्मक होंगी तो हमारे कार्य भी सकारात्मक ही होंगे, हमारी उपलब्धियाँ भी सकारात्मक ही होंगी. अर्थात् कुछ भी करने से पहले भावनात्मक जागरूकता की आवश्यकता होती है. भावनाओं के स्तर पर हम जितने सकारात्मक होंगे, उतने ही सफल होंगे.

7. यदि किसी के पास केवल अंधकार, अहम्, घृणा, लालच, अज्ञानता, अस्वच्छता और अस्वस्थता ही हो, तो वह दूसरों को भी इनके अलावा क्या दे सकता है. बदले में उसे इनसे अधिक कुछ मिल भी नहीं सकता. अर्थात् यदि आप नकारात्मक ऊर्जाओं से घिरे रहेंगे तो आपको अपने आसपास सब कुछ नकारात्मक ही नजर आयेगा. और याद रखें, जैसा नजर आयेगा, वैसा ही उपलब्ध होगा.

8. यह मत भूलिए कि जब आप किसी की तरफ अंगुली उठाते हैं, तब शेष तीन अंगुलियाँ तो आपकी तरफ ही उठी हुई होती हैं. जब आप किसी पर क्रोध करते हैं, तब क्रोध की लकीरें आपके ही चेहरे पर खिंची हुई होती हैं. अगला यदि आपके क्रोध को ग्रहण ही न करे, तब तो स्थिति और भी भयानक हो जायेगी. क्रोध मूल ही लौट आने पर आप दुगुने क्रोधित हो जायेंगे. यदि आप किसी के लिए खाई खादेंगे तो आपके लिए पूरा कुआं तैयार मिलेगा. किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध आवाज न उठायी जाए.

Truth of life quotes in hindi

9. मानव मस्तिष्क की क्षमतायें असीमित हैं। अभी पूरी क्षमताओं का पता भी नहीं चल पाया है. जैसे-जैसे सभ्यता आगे बढ़ती है, क्षमताओं का विकास होता चलता है और यह क्रम चलता ही रहेगा. इसलिए अपेक्षित होगा कि अपने मस्तिष्क को सभ्यता की दौड़ से पिछड़ने नहीं दिया जाय. मस्तिष्क को सदा उपजाऊ एवम् खुला रखें, ताकि विचारों की नयी-नयी फसलें उगाई जा सकें और सबकी प्रशंसा एवम् सहानुभूति प्राप्त कर सकें.

दृष्टान्त- एक कारीगर (राजगीर) ने अपनी उम्र की ढलान पर अपने नियोक्ता (ठेकेदार) से सेवानिवृत्त होने की इच्छा प्रकट की. इस पर ठेकेदार ने पूछा-‘अब क्या करोगे ?’ कारीगर ने कहा-‘आपकी कम्पनी में रहकर मैंने लोगों के लिए सैकड़ों मकान बनाये, किन्तु अपने लिए छोटा-सा घर भी नहीं बना सका, सो अब अपने लिए एक छोटा-सा घर बनाऊँगा और बाकी का जीवन अपनी पत्नी के साथ बिताऊँगा.’ ठेकेदार ने कहा-‘ठीक है, लेकिन काम छोड़ने से पहले मेरे लिए भी एक छोटा-सा घर बनाकर जाओ. अब मैं भी बच्चों से अलग अपनी पत्नी के साथ किसी छोटे से घर में सुकून से रहना चाहता हूँ.’ कारीगर ने हाँ कर ली. उसने ठेकेदार के नक्शे के अनुसार एक अत्यन्त ही खूबसूरत घर का निर्माण किया. इस खूबसूरत एवम् मजबूत भवन के निर्माण के पीछे उसकी यही भावनायें थीं कि वह अपने सेठ जी के लिए घर बना रहा है. सेठ जी ने उस कारीगर की सेवानिवृत्ति पर एक छोटा-सा कार्यक्रम आयोजित किया और सभी कारीगरों-कर्मचारियों की उपस्थिति में उस कारीगर के कार्यों की जमकर प्रशंसा की. कार्यक्रम के अन्त में सेठ जी ने वह नवनिर्मित घर अपनी ओर से उपहार स्वरूप उस कारीगर को संभला दिया. कारीगर को अपनी शुद्ध भावनाओं के बदले इतना बड़ा उपहार मिला, जिसे वह जिन्दगी भर नहीं भुला 

सका. 

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