अमीर बनने के टोटके-अपनी ऊर्जा बचाएं 

अमीर बनने के टोटके-अपनी ऊर्जा बचाएं 

अमीर बनने के टोटके-अपनी ऊर्जा बचाएं 

“हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम समय किस प्रकार व्यतीत कर रहे हैं, क्योंकि हम अपने भाग्य के निर्माण में अपनी सहायता कर रहे हैं।” -रॉबर्ट हीप

आप अमीर बनना चाहते हैं तो अपनी ऊर्जा को बचाना सीखें। ‘हाऊ टू डू व्हाट यू वान्ट टू डू’ के लेखक डॉ. वाल हॉक का कहना है कि लोग अपनी गलती से कम और अपनी ऊर्जा का सही इस्तेमाल न करने की वजह से अधिक असफल होते हैं। स्वेट मार्डन कहते हैं कि लोग भूल जाते हैं कि उन्हें अपनी ऊर्जा का कहां इस्तेमाल करना है। अपनी ऊर्जा का गलत इस्तेमाल उन्हें सफलता से दूर बनाए रखता है। 

डॉ. मनोज कहते हैं कि कई बार लोग यह नहीं समझ पाते हैं कि वे गलत तरीके से ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। जब उन्हें पता होता है, तब तक देर हो चुकी होती है। युवा ही नहीं अधिक उम्र के लोग भी अपनी ऊर्जा (एनर्जी) को नष्ट करने में लगे रहते हैं। आप गांव में जाएं तो देखेंगे कि लोग अपना अधिकतर समय एक जगह बैठ कर गप्पे मारने में व्यतीत कर देते हैं। शहरों में वीडियो गेम या मोबाइल गेम खेलते हुए बिता देते हैं। कुछ लोग दूसरों की बुराई करने में, तो कभी किसी के काम में कमी निकालने में समय व्यतीत करते रहते हैं। 

अमीर बनना है तो अपनी ऊर्जा को इस तरह की व्यर्थ बातों में खर्च नहीं करना चाहिए। अपनी ऊर्जा को जितना अधिक से अधिक बचा कर रख सकते हो, रखो और उसका उचित जगह पर उचित समय आने पर व्यय करो, उससे आपको कई गुना लाभ मिलेगा। 

सूरज एक कार मैकेनिक था। उसका काम भी अच्छा था। लोग अपनी कार उसी से ठीक करवाने के लिए आते थे। सूरज के पास काम इतना अधिक बढ़ गया था कि उसे अपनी सहायता के लिए दो-चार नौकरों को रखना पड़ा। सूरज के पास काम करने वाले नौकरों में एक था राजकुमार। उसे चुटकुले व कहानी सुनाने का बहुत शौक था। वह काम के बीच-बीच में एक-दो चुटकुले सुना दिया करता था। उसके चुटकुले सुनकर दूसरे नौकर भी अपना काम छोड़कर चुटकुले सुनने व सुनाने लगते। 

सूरज को भी उनकी बातों में मजा आने लगा। वह भी उनके साथ बैठ कर चुटकुले और कहानियां सुनने लगा। किस्से-कहानियां सुनते-सुनाते कभी-कभी वे इतना मगन हो जाते कि उन्हें अपने काम की ओर ध्यान ही नहीं रहता। समय पर काम नहीं होता। जब कोई अपनी गाड़ी लेने आता तो उसे बाद में आने का कह देते। 

सूरज ने अपनी ऊर्जा गलत जगह पर लगा कर अपना काम ठीक से नहीं किया। इसका परिणाम उसे भुगतना पड़ा। समय से गाड़ी ठीक करके वापस न मिलने की वजह से लोगों का आना कम हो गया। लोग अपनी कार सुधारने के लिए दूसरी जगह पर देने लगे। 

धीरे-धीरे सूरज को काम मिलना बंद हो गया। उसे दोहरी मार झेलनी पड़ रही थी। एक तो काम कम हो गया था, दूसरा उसे नौकरों को भी वेतन देना पड़ रहा था। सूरज को जब अपनी गलती का एहसास हुआ। तब तक काफी देर हो चुकी थी। फिर भी सुबह का भूला शाम को लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। 

उसने अपने यहां से नौकरों की छुट्टी कर दी और एक बार फिर से अपना काम शुरू किया। इस बार उसने अपनी ऊर्जा का सही इस्तेमाल किया और अपना काम फिर जमा लिया। आजकल उसका कारोबार तेजी से चल रहा है। 

थ्योरी ऑफ सक्सेज फोर्सेस में लिखा है कि अधिकतर लोग अपनी ऊर्जा को व्यर्थ में खर्च देते हैं। जिसकी वजह से वे सफल नहीं हो पाते हैं। यदि वे अपनी ऊर्जा को सही जगह पर खर्च करें तो सुखद परिणाम पा सकते हैं।

अमीर बनने का एक खास मंत्र है-अपनी ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना। ऊर्जा का सही इस्तेमाल करके ही आप अमीर बन सकते हैं। जब हम ऊर्जा को गलत इस्तेमाल में खत्म कर देते हैं। तब उसका लाभ कैसे ले सकते हैं? ऊर्जा को बचा कर सही इस्तेमाल में लाएं। तभी आपको सफलता मिल सकती है। 

Amir banne ke totke-आलस्य त्यागें 

“केवल कर्महीन ऐसे हैं जो भाग्य को कोसते हैं और जिनके पास शिकायतों का पुलिंदा होता है।” -जवाहरलाल नेहरू

आलस्य का दूसरा नाम है असफलता, गरीबी, निराशा। अमीर बनना चाहते हैं तो सबसे पहले आलस्य को छोड़ना होगा। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो आलस्य को अपने पास न आने दें। आलसी की तुलना उस तालाब से की जा सकती है, सीमा में बंध जाने की वजह से जिसके पानी में सड़ांध व काई जम जाती है। जबकि अनवरत चलने वाली नदी का पानी सदैव निर्मल रहता है। 

यदि आप दिनभर घर में पड़े रहते हैं तो आपके हाथ-पैर जकड़ जाएंगे। आपको चलने-फिरने में दिक्कत होगी। मनुष्य तो मनुष्य मशीन से यदि लगातार काम न लिया जाए तो उसमें भी जंग लग जाती है। उसके कलपुर्जे काम करना बंद कर देते हैं। 

बहुत पुरानी बात है। किसी देश में एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था। वह काफी मेहनती था और खेत में काम करके अपना गुजारा करता था। उसके तीन लड़के थे जो बड़े ही आलसी थे। उनके आलस्य की वजह से बूढ़ा व उसकी पत्नी काफी परेशान रहते थे। 

वे तीनों लड़कों को समझाने की कोशिश करते लेकिन वे अपने आलसीपन से बाज नहीं आते। एक दिन बूढ़ा किसान मर गया। बुढ़िया ने अपने बेटों को खेत पर जाकर काम करने के लिए कहा, लेकिन वे नहीं गए। 

जब तक घर में अनाज था बुढ़िया ने अपने बेटों को बना-बना कर खिला दिया। आखिर में वह दिन भी आ गया जब घर का सारा अनाज खत्म हो गया। घर में एक भी दाना नहीं बचा तो बुढ़िया ने अपने बेटों से काम धंधे पर जाने के लिए कहा। लेकिन क्योंकि सबकी आदत बिगड़ चुकी थी, इसलिए कोई भी काम पर जाने को राजी नहीं हुआ। 

एक दिन सुबह बुढ़िया उठ कर रोने लगी। मां को रोते देखकर उसके बेटों ने पूछा, “क्या हुआ, तुम क्यों रो रही हो?” 

बुढ़िया ने कहा, “सपने में तुम्हारे पिता आए थे। उन्होंने बताया कि यदि तुम लोग खेत में से गड़ा हुआ धन निकाल कर ले आओ तो हमारी गरीबी दूर हो सकती है।” 

“तो इसमें रोने की बात क्या है?” लड़कों ने पूछा। 

बुढ़िया बोली, “मैं तो यह सोच कर रो रही हूं कि अब खेत खोद कर कौन धन निकाल कर लाएगा? किसी दूसरे से भी नहीं कह सकती हूं। इसीलिए रो रही हूं।” 

बुढ़िया की बात सुनकर तीनों बेटे खेत में जाकर जमीन खोदने के लिए तैयार हो गए। वे खेत में जाकर जमीन खोदने लगे। तीनों बेटे एक ही जगह खुदाई कर रहे थे। यह देखकर बुढ़िया ने कहा, “धन खेत में कहीं भी हो सकता है, इसलिए पूरे खेत की अच्छे ढंग से खुदाई करो।”

पूरा खेत खुद जाने के बाद जब धन नहीं मिला तो तीनों बेटे बुढ़िया पर नाराज होने लगे। बुढ़िया ने समझाते हुए कहा, “ठीक है सपने में तुम्हारे पिता के आने पर मैं उनसे इसकी शिकायत करूंगी। जब खेत की खुदाई हो गई है तो क्यों न इसमें अनाज बो दिया जाए।” 

बुढ़िया के कहे अनुसार बेटों ने खेत में अनाज बो दिया। कुछ ही दिनों में खेत फसल से लहलहाने लगी। फसल काटने का वक्त आ गया तो एक दिन बुढ़िया फिर रोने लगी। 

बेटों ने पूछा, “अब क्या हुआ? 

“तुम्हारे पिता सपने में आए थे। कहने लगे कि फसल को काट कर बाजार में बेच कर आओ, तब उन्हें धन के बारे में बताएंगे,” बुढ़िया ने कहा। 

बेटों ने धन के लालच में फसल काटी और बाजार में बेचने के लिए ले गए। फसल बेचने पर उन्हें काफी धन मिला। इतना सारा धन देखकर तीनों खुशी से झूम उठे। 

तीनों बेटे पैसे लेकर अपनी बूढ़ी मां के पास पहुंचे। 

मां ने उनसे कहा, “अब पता चला, तुम्हारे पिता ने धन कहां गाड़ कर रखा था।” मां की बात सुन कर तीनों काफी शर्मिंदा हो गए। उस दिन से तीनों आलस्य त्याग कर खेत में काम करने लगे। 

आप अमीर बनना चाहते हैं तो आलस्य से बचें। आलस्य को त्याग कर ही आपको अपने लक्ष्य में सफलता मिल सकती है। 

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