एनीमिया (खून की कमी) का इलाज:एनीमिया के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार (Home Remedies for Anemia in Hindi

एनीमिया (खून की कमी) का इलाज

एनीमिया (खून की कमी) का इलाज:एनीमिया के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार (Home Remedies for Anemia in Hindi

रोग की उत्पत्ति 

जब किसी स्त्री-पुरुष के शरीर में हीमोग्लोबिन नामक तत्त्व में लौह की कमी हो जाती है तो उसे एनीमिया (खून की कमी) हो जाता है। इसके अलावा पौष्टिक भोजन की कमी, हरे पत्ते वाली सब्जियों तथा फलों का सेवन न करने आदि के कारण भी यह रोग हो जाता है। कई बार किसी लम्बी बीमारी के बाद भी व्यक्ति के शरीर में खून की कमी (रक्ताल्पता) मालूम पड़ती है। 

रोग के लक्षण 

शरीर में खून की कमी के कारण शक्ति घट जाती है। चेहरे की कान्ति नष्ट हो जाती हो। नाखूनों का रंग सफेद पड़ जाता है। परिश्रम करने की इच्छा नहीं होती। मनुष्य को लगता है कि जैसे वह थक गया हो। भूख कम लगती है। पेट में कब्ज रहता है। मल साफ नहीं होता। यदि रक्ताल्पता की बीमारी स्त्रियों को हो जाती है तो उनको मासिक धर्म बड़े कष्ट के साथ होता है। 

घरेलू निदान 

आलूबुखारा का शरबत रोज एक गिलास पीने से खून की कमी दूर होती है।

एनीमिया के रोगी को प्रतिदिन एक गिलास (लगभग 200 ग्राम) अनार का रस पिलाएं। 

जामुन का रस आधा कप, आंवले का रस दो चम्मच तथा गुलाब के फूलों का रस एक चम्मच-तीनों को मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन कराएं।

10 ग्राम मक्खन में दो चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन प्रयोग करें। 

 दो चम्मच प्याज के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर लें। 

आंवले का चूर्ण एक चम्मच तथा तिल का चूर्ण दो चम्मच-दोनों को मिलाकर शहद के साथ खाएं।

आधा कप अनार का रस तथा दो चम्मच मूली का रस-दोनों को मिलाकर सेवन करें। 

प्रतिदिन दो कप गाजर का रस पिलाएं। 

नित्य सुबह के समय आधा कप चुकंदर का रस पीने से खून की कमी दूर हो जाती है।

गाजर, पालक तथा टमाटर का रस-तीनों मिलाकर पिएं।

आधा कप पालक का रस रोज गुनगुना करके सेवन करें।

चीकू शरीर में खून की मात्रा बढ़ाता है।

अत: चार-पांच चीकू प्रतिदिन खाना चाहिए।

रक्ताल्पता के लिए आम का रस दूध में मिलाकर पीना चाहिए।

दस काजू चबाकर ऊपर से आधा लीटर दूध नित्य पिएं। यह शरीर में रक्त की कमी दूर करता है। 

चार चम्मच शुद्ध शहद को पानी में मिलाकर 15-20 दिनों तक पीने से रक्ताल्पता दूर हो जाती है।

2 ग्राम दालचीनी तथा 10 ग्राम काले तिल-दोनों को पीस लें। इस चूर्ण को खाकर ऊपर से दूध पी जाएं।

पपीता शरीर में खून की वृद्धि करता है। अतः प्रतिदिन पपीते का सेवन करना चाहिए।

रक्ताल्पता दूर करने के लिए 200 ग्राम अंगूरों का उपयोग 15 दिनों तक करें। 

होमियोपैथिक चिकित्सा 

यदि बीमारी के बाद शरीर में खूनी की कमी हो तो लेसिथिन का प्रयोग करें।

यदि खून की कमी के कारण मासिक धर्म बंद हो जाए तो फेरम म्यूर का सेवन करें।

रक्त में लाल कण कम हो जाने की दशा में बैराइटा म्यूर दें। 

यदि शरीर में पीलापन हो, एकाएक चेहरा लाल होकर तमतमा जाए तथा शरीर में खून की कमी हो जाए तो फेरम मेटालिकम 3 या 30 का प्रयोग करें। 

यदि खून की कमी के कारण पैरों में सूजन हो तो डिजिटेलिस 30 दें। 

याद शरीर में दम न हो, दोनों घुटनों से पैरों तक ठंडापन एवं अचेतावस्था हो तो कार्बोवेज लेना चाहिए।

सारे शरीर में स्पन्दन (कंपकंपी), मासिक धर्म में देरी, युवतियों में खून की कमी, वमन, शरीर में जलन, केवल सोते रहने की इच्छा-ऐसी हालत में पल्सेटिला 30 का प्रयोग कर। 

यदि पौष्टिक भोजन के अभाव के कारण खन की कमी हो तो कैल्केरिया कार्ब दें। 

चेहर पर मलिनता, अत्यधिक कमजोरी, कानों में आवाजें आना. खाते समय तन्द्रा. रात में मेहनत करने से कमजोरी आदि लक्षणों में सुबह-शाम पानी में मिलाकर चायना दें। 

बायोकैमिक चिकित्सा 

खून की कमी, दिनभर काम में मन न लगना तथा परिश्रम से जी घबराना-ऐसी हालत में कैल्केरिया फ्लोर 3x, कैल्केरिया फॉस 3x तथा कॉलि म्यूर 3x-तीनों मिलाकर दें।

बच्चों में खून का अभाव, दुर्बलता, मोटे शरीर में शुद्ध खून की कमी के कारण कमजोरी-इन लक्षणों को देखकर साइलीशिया 6x या 30x का प्रयोग करें। 

शरीर में आलस, उदासी, रोने जैसी स्थिति, भोजन के बाद भी दुबलापन, सिर दर्द, कब्ज, रोगी को नमक अधिक अच्छा लगता हो-ऐसी हालत में नैट्रम म्यूर 30x का सेवन करें। 

अजीर्ण, खट्टा वमन, डकारें, सारे शरीर में कमजोरी, चलने-फिरने या सीढ़ी पर चढ़ने से थकान आदि लक्षणों में नैट्रम फॉस 6x या 12x लें।

प्रमेह रोग, सूजन, शरीर में दिन-प्रतिदिन कमजोरी, आंखों के आगे अंधेरा आदि लक्षणों में नैटम सल्फ 3x या 6x का सेवन करें। 

जीभ पर सफेद लेप-सा, यकृत विकार, रक्ताल्पता अथवा खाज-खुजली की शिकायत आदि लक्षणों में कैल्केरिया फॉस का प्रयोग करें। 

यस्तिष्क में कमजोरी के कारण रक्ताल्पता, अधिक कमजोरी, शोक, चिन्ता, परिश्रम से जी घबराना आदि लक्षणों में कॉलि फाँस 6४ या 30x दें। 

शरीर में रक्त का पतला होना, किशोरियों में खून की कमी, मलेरिया की शिकायत, छाती में धड़कन, सुस्ती, जीभ पर सफेद लेप आदि की हालत में नैट्रम म्यूर 6x दें। 

लम्बी बीमारी के बाद सांस तेज चले, शरीर में कमजोरी, थोड़े-से परिश्रम के बाद थकावट, बेचैनी आदि लक्षणों में कैल्केरिया सल्फ 3x का प्रयोग करें। 

कॉलि फाँस 3x, नेटम म्यूर 3x तथा नैट्रम फाँस 3x-तीनों मिलाकर देने से भी रक्ताल्पता दूर होती है। 

एलोपैथिक चिकित्सा 

यहाँ दी गई दवाएं अपने डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद प्रयोग करें- पैरामिलैक (Paramilac), हेमफर (Hemfer), आईसोलिक-12 (Isolic-12), फेरोमिन (Feromin), हीमप (Hearnup) तथा डेक्सोरेंज (Dexorange) सीरप या कैप्सूल।

निर्देश 

सादा, सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन रोगी को दें।

शराब, पान-बीड़ी, गुटका आदि नशीले पदार्थों का सेवन न करें।

रोगी को यथासंभव आठ घंटे की निद्रा लेनी चाहिए।

मन में निराशा, क्रोध, चिंता, क्षोभ तथा शोक के भाव मत लाएं।

अधिक शारीरिक परिश्रम एवं मानसिक चिंतन से बचें।

कोई विशेष परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श करें। 

डॉक्टर के निर्देशानुसार ही किसी दवा का नियमित रूप से सेवन करें।

प्रसिद्ध फार्मेसियों की पेटेन्ट दवाएं 

झंडु –लिवोट्रीट गोली, लिवोट्रीट प्रवाही।

गर्ग- पाण्डुहारी कैप्सूल।

धूत पापेश्वर- विमलिव सीरप एवं ड्रॉप्स।

बैद्यनाथ- लीवरीय पेय।

बुन्देलखंड –इन्द्रायण सूचीवेध।

विभिन्न फार्मेसी- लोध्रासव, कुमार्यासव, लोहासव, पटोलादिगण क्वाथ। 

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