पहाड़ों के बीच टॉय ट्रेन का सफर

टॉय ट्रेन का सफर

पहाड़ों के बीच टॉय ट्रेन का सफर 

भारत के हिल स्टेशनों की खूबसूरत वादियों का नजारा देखने के लिए टॉय ट्रेन से अच्छा साधन हो ही नहीं सकता। रोचक बात यह है कि दुनिया भर में इस तरह की कुल 20 छोटी लाइनों की रेलों में से भारत में ही छह-सात माउंटेन रेल लाइनें हैं। इन्हें 19वीं व 20वीं सदी में ब्रिटिश काल में बनाया गया था। 

कश्मीर रेलवे की शुरुआत 2005 में हुईहै।इन माउंटेन रेल में से चार दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’, ‘कालका शिमला रेलवे, कांगड़ा वैली रेलवे’ और कश्मीर रेलवे’ उत्तर भारत में हिमालय की वादियों में चलती हैं। दो माउंटेन रेल दक्षिण में वेस्टर्न घाट में चलती हैं।

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इनमें तमिलनाडु में नीलगिरि माउंटेन रेलवे’ और महाराष्ट्र में ‘माथेरान हिल रेलवे’ है, जबकि ‘लांबडिंग-सिल्वर लाइन को 20 वीं सदी में बनाया गया है। यह असम की कैचर हिल की गहरी वादियों में बड़ा रोमांचक सफर तय कराती है। ‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे’,’नीलगिरि माउंटेन रेलवे’ और ‘कालका शिमला रेलवे’ को यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया है। 

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे 

टॉय ट्रेन दार्जिलिंग की एक खास पहचान है। इस हैरिटेज ट्रेन की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1881 में हुई थी। करीब 2 फुट की छोटी लाइन पर चलने वाली यह ट्रेन पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच चलती है। इसका 88 किलोमीटर का मार्ग है, जिसमें 906 मोड़ आते हैं। करीब 15 किलोमीटर की धीमी रफ्तार से यह टॉय ट्रेन पर्यटकों को प्रकृति के बड़े मनोरम दृश्य दिखाती है। 1999 में इसे विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया है। 

कांगड़ा वैली रेलवे 

कांगड़ा टॉय ट्रेन हिमालय की घाटियों में पठानकोट से जोगिंदर नगर तक 163 किलोमीटर की रोमांचक यात्रा करवाती है। हरी-भरी सुंदर घाटियों के बीच बहुत से प्राचीन मंदिर आते हैं। यह टॉय ट्रेन 2 फुट 6 इंच की छोटी लाइन पर चलती है। इसकी शुरुआत 1929 में ब्रिटिश काल में हुई थी। पहाड़ों की इस यात्रा के दौरान कांगड़ा व मंगवाल के बीच धौलाधर पर्वतमाला की बड़ी खूबसूरत चोटियां और कांगड़ा फोर्ट के खंडहर दिखाई देते हैं। 

नीलगिरि माउंटेन रेलवे 

तमिलनाडु के मैदानों, जंगलों और पहाड़ों को पार करती यह टॉय ट्रेन 46 किलोमीटर का सफर मेटुपलयम से ऊटी तक तय करती है। इसकी शुरुआत 1899 में ब्रिटिश काल में हुई थी। इस रोमांचक यात्रा के दौरान 208 मोड़,6सुरंग और 250 पुल आते हैं। 2005 में इसे विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया है। 

कालका-शिमला रेलवे 

हिमाचल प्रदेश का शिमला 7,234 फुट की ऊंचाई पर है, जबकि कालका हरियाणा में पंचकुला जिले में है। इस टॉय ट्रेन की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1898 में हुई थी। करीब 2 फुट 6 इंच के ‘नैरो गेज’ पर चलने वाली यह टॉय ट्रेन 95 किलोमीटर का रोमांचक सफर तय करती है। यात्रा में 103 सुरंग और 864 पुल आते हैं। इस टॉय ट्रेन से हिमालय की वादियों की सैर का आनंद कुछ और ही है। 2008 में इसे विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया है। 

माथेरान हिल स्टेशन

माथेरान महाराष्ट्र में मुंबई से 110 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले में प्राकृतिक खूबसूरती से भरा एक छोटा सा हिल स्टेशन है। माथेरान हिल रेलवे की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1907 में हुई थी। यह टॉय ट्रेन 2 फुट की छोटी लाइन पर चलती है। पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में नेरेल और माथेरान के बीच यह टॉय ट्रेन 20 किलोमीटर प्रति घंटा की धीमी गति से 20 किलोमीटर का मनोरम सफर तय करती है।

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