सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी | The Story of the second journey of Sindbad

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी |

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी | The Story of the second journey of Sindbad

अगले दिन जब हिंदबाद आया, तो मेज पर स्वादिष्ट भोजन और शराब रखी थी। सिंदबाद ने उसे और अन्य मेहमानों को खाने का निमंत्रण दिया, फिर अपनी रोमांचक यात्राओं के बारे में सुनाने लगा। 

सिंदबाद ने उन्हें बताया कि किस तरह कुछ समय बाद फिर से यात्रा पर जाने के लिए उसका मन मचलने लगा। वह अपना माल लेकर नाविकों के साथ रवाना हो गया। वे लोग टापुओं पर जाकर अपना माल बेचते रहे।

एक दिन वे एक ऐसे टापू पर पहुंचे, जहां चारों ओर हरियाली थी और पेड़ों पर फल लदे थे। झरनों से पानी बह रहा था, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि वहां कोई आदमी दिखाई नहीं दे रहा था। वह जगह एकदम वीरान थी। यह देखकर उसे आश्चर्य हुआ कि इतने उपजाऊ टापू पर कोई आबादी क्यों नहीं थी। इसका मतलब यही निकाला जा सकता था कि वहां कोई न कोई मुसीबत अवश्य होगी। उसने तय किया कि वह 

उस टापू पर ज्यादा देर तक नहीं रुकेगा। लेकिन जब सिंदबाद के साथी फल खाते हुए टापू पर इधर-उधर घूम रहे थे, तो वह एक पेड़ के नीचे जाकर सो गया। 

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी |

जब सिंदबाद की आंख खुली, तो पाया कि उसके साथी और जहाज वापस जा चुका था। उसने सोचा कि अगर वह ऊंचाई पर चढ़ जाए, तो उसके लिए वहां से दूर तक देखना आसान हो जाएगा। 

सिंदबाद एक पेड़ पर चढ़कर समुद्र की ओर देखने लगा, लेकिन उसे कोई जहाज नहीं दिखाई दिया। उसने टापू पर देखा-एक बड़ी-सी सफेद चीज पड़ी थी। वह पेड़ से उतरकर उस ओर चल दिया। 

जब वह वहां पहुंचा, तो वह एक बड़ी-सी सफेद गेंद लगने लगी। वह उसके पास गया और चारों ओर से देखा। लेकिन उसे उसके अंदर जाने या ऊपर चढ़ने का कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया। तभी अचानक आकाश में काले-काले बादल छा गए। 

यह देखकर सिंदबाद डर गया। अनजान जगह पर अचानक अंधेरा होने से कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। ऐसे में खतरा बढ़ गया था। उसकी समझ में नहीं आया कि वह क्या करे। 

जब अंधेरा हुआ, तो सिंदबाद को लगा कि बारिश होने वाली है। उसने देखा कि एक बादल उसकी ओर आ रहा था। लेकिन वह बादल नहीं, एक विशाल पक्षी था। सिंदबाद को वह कहानी याद आ गई, जो उसने नाविकों द्वारा उस पक्षी के बारे में सुनी थी। उस पक्षी को ‘रॉक’ कहते थे। उसे एहसास हुआ कि वह सफेद गेंद उसका अंडा होगा। 

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी |

रॉक नीचे आया और उस अंडे को अपने पंखों से ढककर बैठ गया। सिंदबाद उसे देखता रहा। जब रॉक बैठ गया, तो सिंदबाद ने अपनी पगड़ी उतारी और खुद को उसके पैर से कसकर बांध लिया। 

उसने सोचा, ‘कल सुबह यह भोजन की तलाश में उड़ेगा। तब मैं इस टापू से बाहर निकल जाऊंगा। शायद इस तरह मेरी जान बच जाए।’

अगली सुबह रॉक ने भारी पंख फैलाकर उड़ान भरी। वह कई सागरों और धरती को लांघता चला गया। वह समुद्र से बहुत दूर एक टापू पर उतरा। सिंदबाद कुछ देर के लिए बेसुध हो गया। बेहोश होने से पहले उसे इतना याद था कि वह एक पक्षी के पैरों से बंधा था और वह उसे आसमान में उड़ाए लिए जा रहा था। यह बहुत खतरनाक खेल था। वह किसी भी समय उसके पैर से छूटकर कहीं भी गिर सकता था। 

जब सिंदबाद की आंख खुली, तो रॉक टापू पर बैठा था। उसने झट से अपने-आपको खोला। रॉक एक बड़े से सांप को लेकर उड़ गया। 

सिंदबाद ने देखा कि वह खड़ी चट्टानों से घिरी एक संकरी घाटी में था। घाटी में चारों ओर हीरों का ढेर था, लेकिन वहां सैंकड़ों छोटे-बड़े सांप भी थे। उसने कभी अपने जीवन में ऐसे सांप नहीं देखे थे। छोटे से छोटा सांप भी हाथी निगल सकता था। दिन निकलने पर वे सब गुफाओं में चले जाते थे। वे रात को ही बाहर निकलते थे। सिंदबाद ने सोचा, ‘इन सांपों को रॉक पक्षी से डर लगता होगा।’

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी |

उस रात सिंदबाद वहीं छिप गया। सुबह होने पर वह अपने बचाव का उपाय सोचने लगा। उसे किसी न किसी तरह उस घाटी से बाहर जाना था। 

सिंदबाद उस जगह ज्यादा देर तक नहीं रह सकता था, क्योंकि वहां उसके खाने-पीने के लिए कुछ नहीं था। इसके अलावा कोई भी जहरीला सांप कभी भी उसकी जान ले सकता था। उस समय वह चारों ओर से खतरों से घिरा था। यह उसके लिए परीक्षा की घड़ी थी। 

तभी सिंदबाद ने देखा कि घाटी में मांस के टुकड़े आवाज के साथ गिरने लगे। उसे पुरानी कहानियां याद आ गईं। जब चीलों को अपने बच्चों के लिए भोजन खोजने जाना होता था, तो नाविक और व्यापारी घाटी में मांस के टुकड़े डाल देते थे, ताकि हीरे उनसे चिपक जाएं। फिर वे चीलें नीचे आकर मांस उठा लेती थीं। उनके घोंसलों पर नाविकों की नजर रहती थी। जब चीलें मांस लेकर आतीं, तो नाविक उन्हें वहां से उड़ाकर हीरे उठा लेते थे। 

सिंदबाद ने बड़े-बड़े हीरों को मांस में चुभोया और मांस को अपने शरीर पर लगाकर पगड़ी से कसकर बांध लिया। फिर वह अपना मुंह नीचे करके लेट गया। 

सिंदबाद को उम्मीद थी कि कोई बड़ा पक्षी उसे मांस के लालच में घाटी से बाहर उड़ा ले जाएगा। सिंदबाद ने किसी भी मुसीबत से घबराना नहीं सीखा था। हालांकि उसे ऐसा करने में थोड़ा डर लगा, लेकिन वह जानता था कि जीवन में डर के आगे ही तो सफलता छिपी होती है। वह बड़ी बहादुरी से वहां लेटा रहा, मानो उसके शरीर में जान ही न हो। 

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी |

तभी एक बड़ी चील उसे मांस का टुकड़ा समझकर अपने घोंसले की ओर उड़ा ले गई। चील के घोंसले के पास उसका मालिक व्यापारी ताक में बैठा था। वह सिंदबाद को वहां देखकर हैरान रह गया। 

सिंदबाद ने उसे अपने रोमांच के बारे में बताया और वे हीरे देने चाहे। लेकिन वह व्यापारी बहुत ईमानदार था। उसने केवल एक हीरा लिया। फिर सिंदबाद को उसके साथियों के पास जहाज पर पहुंचा दिया। 

इसके बाद सब लोग अपनी धरती की ओर वापस चल दिए। रास्ते में वे रोहत टापू से गुजरे, जहां उन्होंने कपूर के पेड़ देखे।

इन यात्राओं में सिंदबाद को ऐसे-ऐसे पेड़-पौधे और पशु-पक्षी देखने को मिलते, जिनके बारे में उसने कहानियों में या बड़े-बुजुर्गों से सुना होता था। उस समय सिंदबाद घबराने या डरने के बजाय दिमाग से काम लेता था और परेशानी से बचने का कोई न कोई उपाय निकाल लेता था। 

“मैं वहां गैंडा नामक पशु देखकर चौंक गया। वह हाथियों को खदेड़ देता था और उन्हें अपने सींगों पर उठा लेता था। लेकिन वे गैंडे हाथियों का खून आंखों में लग जाने पर अंधे हो जाते थे और जमीन पर गिर पड़ते थे। तब रॉक पक्षी उन्हें उठाकर ले जाते और अपने बच्चों को खिलाते।” सिंदबाद ने अपने मेहमानों को बताया। 

सिंदबाद की दूसरी यात्रा की कहानी |

इस यात्रा में सिंदबाद बहुत से हीरे लाया था। इसके बाद वह काफी अमीर हो गया। वह बलसारा के बंदरगाह से होता हुआ बगदाद में स्थित अपने घर पहुंच गया। 

सिंदबाद ने कहानी पूरी करने के बाद हिंदबाद को पुनः सौ दीनारें इनाम में दीं। सिंदबाद ने उसे अगले दिन भी आने का निमंत्रण दिया। हिंदबाद ने खुशी-खुशी हामी भर दी।

जब हिंदबाद अपने घर लौटा, तो वह सिंदबाद के बारे में सोचता रहा। उससे मिलकर तो अमीरों के बारे में उसकी सोच ही बदल गई थी। 

हिंदबाद को लगता था कि अमीर आदमी बहुत जालिम होते हैं। वे गरीबों को अपने आगे न तो कुछ समझते हैं और न ही उनकी परवाह करते हैं, लेकिन सिंदबाद ऐसे लोगों में से नहीं था। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

17 − sixteen =