सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी |The story of the fifth journey of Sindbad

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी |The story of the fifth journey of Sindbad

“मुझे खाली बैठना पसंद नहीं था। मैं फिर से यात्रा पर जाना चाहता था, लेकिन इस बार योजना यह थी कि मैं अपना जहाज तैयार करूं।” सिंदबाद ने अपने मेहमानों से कहा, “मैंने दूसरे देशों से आए व्यापारियों को अपने साथ चलने का निमंत्रण दिया और वे लोग तैयार हो गए।” 

इस बार नाविक और व्यापारी व्यापार करने के लिए सिंदबाद के जहाज में सवार हुए। कई सप्ताह तक समुद्री यात्रा करने के बाद वे एक वीरान टापू पर पहुंचे। वहां घूमते हुए उन्होंने रॉक पक्षी का अंडा देखा, जिसमें से बच्चा बाहर आने वाला था। 

सिंदबाद ने साथियों से कहा कि वे वहां से हट जाएं, लेकिन उन्होंने उसकी एक न सुनी। उन्होंने कुल्हाड़ी से अंडा तोड़ डाला और रॉक के बच्चे को मार दिया। फिर वे उसे आग में भूनकर खा गए। 

सिंदबाद समझ गया कि अब कोई अनहोनी होने वाली है। रॉक पक्षी कोई छोटा पक्षी नहीं था। ऐसा कैसे हो सकता था कि उसे अपने बच्चे के मरने का पता न चले। सिंदबाद ने उन्हें वहां से चलने को कहा, लेकिन व्यापारी अभी वहीं आराम करना चाहते थे। 

अचानक आकाश में दो बड़ी परछाइयां दिखाई दीं। पक्षियों ने अपने बच्चे की मौत देखी, तो वे दुख के कारण पागल हो गए। व्यापारी अपनी जान बचाने के लिए भागे, लेकिन पक्षियों ने उन पर हमला कर दिया। 

वे लोग जहाज पर चढ़ गए और उसे आगे बढ़ाने लगे। पक्षी अपने मुंह में भारी चट्टानें दबाए साथ-साथ उड़ रहे थे। उनमें से एक ने भारी चट्टान फेंकी, जो पानी में गिर गई। लेकिन दूसरे भारी पत्थर का वार नहीं बचाया जा सका। ऐसे में जहाज चूर-चूर हो गया। सारे लोग पानी में गिर पड़े और तैरने लगे। फिर सिंदबाद को दूसरों के बारे में कुछ पता नहीं चला। 

सिंदबाद लकड़ी के टुकड़े के साथ तैरता हुआ एक ऐसे टापू पर जा पहुंचा, जहां तीखी चट्टानों वाला किनारा था। वह घास पर बैठ गया, तो उसे पेड़ों पर लगे फल दिखाई दिए। सिंदबाद फल खाकर वहीं लेट गया।

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

पानी में कई घंटे तैरने के कारण उसके शरीर में बहुत दर्द हो रहा था। उसने सोचा कि नींद से उठने पर अपने बचाव का कोई उपाय किया जाएगा। फिर जल्द ही उसे गहरी नींद आ गई। 

जब सिंदबाद की आंख खुली, तो वह टापू पर इधर-उधर घूमने लगा। तभी उसे एक बूढ़ा आदमी मिला। वह बोल नहीं सकता था, लेकिन उसने उसे इशारे से बताया कि वह नदी के दूसरे किनारे पर उगे फल खाना चाहता था। सिंदबाद ने बूढ़े को पीठ पर बिठा लिया। 

वह उसे फल के पेड़ तक ले गया, लेकिन बूढ़े ने उसकी पीठ से उतरने से इन्कार कर दिया। बेचारा सिंदबाद थकान से बेहोश हो गया। जब उसकी आंख खुली, तो देखा कि बूढ़ा आदमी फल खाने के बाद भी उसकी पीठ से चिपका हुआ था। 

एक दिन सिंदबाद ने कुछ अंगूर तोड़कर एक बड़े फल के खोखल में डाल दिया। इस तरह वे शराब में बदल गए। फिर वह बूढ़े को लेकर घूमने लगा। सिंदबाद को उसे अपनी पीठ से उतारने का यही एक उपाय सूझा। उसने सोचा कि वह शराब का लालच देकर बूढ़े को अपने काबू में कर सकता है। अगर यह तरकीब भी काम न आई, तो शायद उसे अपनी पीठ के भार के साथ ही उस वीराने में अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। 

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

सिंदबाद ने बूढ़े के सामने वह शराब पी और झूमते हुए नाचने का दिखावा करने लगा। पीठ पर बैठे बूढे को लगा कि वह कोई कमाल की चीज होगी। वह सिंदबाद से शराब छीनकर पी गया। । 

ज्यों ही बूढ़े पर नशा छाया, उसकी पकड़ ढीली हो गई। सिंदबाद ने उसे धरती पर पटका और वहां से अपनी जान बचाकर भागा। तभी उसे अपनी ओर आता एक जहाज दिखाई दिया। जब उसने नाविकों को अपनी कहानी सुनाई, तो वे हैरान रह गए। 

नाविकों की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उन्हें सिंदबाद की बात पर यकीन भी नहीं हो रहा था। तभी एक नाविक ने कहा कि हमारे जहाज पर एक बूढ़ा नाविक है, वह उसके बारे में अवश्य जानता होगा। 

सभी नाविक जहाज की छत पर बैठ गए। उनमें बूढ़ा नाविक भी शामिल था। उन्होंने बूढ़े नाविक को सिंदबाद की सारी कहानी सुनाई। 

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

तब बूढ़ा नाविक बोला, “वह तो समुद्र का बूढ़ा आदमी है। जो उसके चंगुल में फंस जाता है, वह कभी जिंदा वापस नहीं आता। तुम बड़े किस्मत वाले हो, जो अपनी जान बचाकर भाग आए।” 

थोड़ी देर बाद जहाज आगे बढ़ गया। अब वे ऐसे शहर में पहुंचे, जहां सारे घर पत्थरों से बने थे और अजनबियों के रहने का भी इंतजाम था। 

अगले दिन एक व्यापारी दोस्त ने सिंदबाद को एक बोरी देकर कहा कि वह इन लोगों के साथ जाए। वे जो भी करें, उसे भी वही काम करना होगा। उसने चेतावनी दी, “इन लोगों से दूर मत होना। अगर कहीं भटक गए, तो खतरा सिर पर नाचने लगेगा।” । 

सिंदबाद ने देखा कि वे लोग बोरियों में नारियल भर रहे थे, लेकिन उन्हें नारियल इकट्ठा करना नहीं आता था। नारियल के पेड़ लंबे थे और वे उन पर नहीं चढ़ सकते थे। सिंदबाद सोचने लगा कि वे लोग नारियल तोड़ने के लिए कौन-सा तरीका इस्तेमाल करते होंगे। हर जगह के लोग कोई काम करने के लिए अपना अलग दिमाग लगाते हैं। 

तभी सिंदबाद की नजर ऊपर की ओर गई। पेड़ों पर बहुत से बंदर बैठे दिखाई दिए। उसे यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि वे लोग बंदरों पर पत्थर उछाल रहे थे। 

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

बंदर भी उनकी नकल करना चाहते थे। जब उन्हें पत्थर मिलते, तो वे पेड़ों से नारियल तोड़कर फेंकते। व्यापारी तुरंत उसे बोरी में डाल देते। 

फिर वे लोग शहर जाकर नारियल बेच देते। यह देखकर सिंदबाद को हंसी आई। लेकिन उसने भी ऐसा ही किया और कुछ समय बाद वह बहुत अमीर हो गया।

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

एक दिन उसे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले जहाज के बारे में पता चला। उसने एक जहाज के कप्तान को अपने बारे में बताया। वे लोग सिंदबाद को अपने साथ ले जाने के लिए तैयार हो गए। 

सिंदबाद ने अपने साथियों से विदा ली। जहाज पर नारियल की खेप लादकर वह अपने घर की ओर चल दिया। सिंदबाद बहुत समय पश्चात् अपने घर जा रहा था, इसलिए उसका मन बहुत खुश था। उसे अपने परिवार की याद बहुत सता रही थी। 

वे लोग रास्ते में एक ऐसे टापू पर रुके, जहां काली मिर्च मिलती थी। वह बहुत अच्छी जगह थी। वहां कोई शराब नहीं पीता था। उन्होंने वहां से माल खरीदा। आसपास का समुद्र मोतियों के लिए बहुत प्रसिद्ध था। उन्होंने भी मोतियों की खोज की और किस्मत ने उनका साथ दिया। 

वे लोग माल तथा मोतियों को बेचकर बहुत अमीर हो गए। सिंदबाद अपने घर पहुंचा। उसके पास भी बहुत-सा धन और अमूल्य उपहार थे। 

एक बार फिर सिंदबाद ने हिंदबाद को सौ दीनारें भेंट की और अगले दिन आने को कहा। वह उसे अपनी अगली यात्रा के बारे में बताना चाहता था, जो पूर्व की यात्रा से भी ज्यादा रोमांचक थी।

जब हिंदबाद अपने घर पहुंचा, तो उसकी पत्नी ने पूछा, “आप हर रोज कहां जाते हैं? आपके पास इतनी दीनारें कहां से आती हैं? मैं कई दिनों से यह सब देख रही हूं। क्या आपके हाथ कोई खजाना लग गया है?” 

सिंदबाद की पांचवीं यात्रा की कहानी

हिंदबाद ने कहा, “मेरे हाथ जो खजाना लगा है, उसके आगे तो उन दीनारों का भी कोई मोल नहीं है। मैं जल्द ही तुम्हें सारी बात बताऊंगा। तुम उन्हें सुनकर आश्चर्य में पड़ जाओगे।” 

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