पंचतंत्र की कहानी-दुष्ट बगुला व केकड़ा 

पंचतंत्र की कहानी-दुष्ट बगुला व केकड़ा 

पंचतंत्र की कहानी-दुष्ट बगुला व केकड़ा की कहानी

घने जंगल के बीच एक बहुत ही सुंदर झील थी। उस झील में बहुत सी मछलियां रहती थीं। वहां रहने वाले पक्षियों के साथ एक चालाक बगुला भी रहता था। बहुत बूढ़ा हो जाने के कारण मछली पकड़ना अब मुश्किल हो गया था। इसीलिए अक्सर उसे भूखा ही सोना पड़ता था। इसी वजह से वह दिनोदिन और भी कमजोर होता जा रहा था। लेकिन ऐसा होने पर भी उसकी दुष्टता में कोई अंतर नहीं आया था। बल्कि वह और भी बढ़ गई थी। 

एक दिन उसने सभी दूसरे जीवों को मूर्ख बनाने की योजना बनाई ताकि उसे मेहनत किए बिना ही अपने लिए भोजन मिल सके। वह झील के किनारे बैठ कर जोर-जोर से रोने और विलाप करने लगा। सभी उसे ऐसा करते देखकर हैरान थे। 

पंचतंत्र की कहानी-दुष्ट बगुला व केकड़ा 

उन्होंने पूछा, “क्या हुआ बगुला चाचा! आप रो क्यों रहे हैं?” मछलियां, कछुए, केकड़े और मेंढ़क सब उससे उसका दुख जानना चाहते थे।

“मैं अपने जीवन में बहुत सारी मछलियों का शिकार कर चुका हूं। लेकिन अब मैंने तय किया है कि आज के बाद किसी भी बेगुनाह मछली का शिकार नहीं करूंगा,” उसने बड़ी बेचारगी से उन सबसे कहा। 

“पर आप रो क्यों रहे हो?” उन्होंने हैरानी से पूछा। 

“ओह! मुझे एक ज्योतिषी ने बताया है कि आने वाले बारह सालों तक इस क्षेत्र में कोई वर्षा नहीं होगी। यह झील सूख जाएगी और आप सभी मारे जाएंगे। बड़े जानवर तो जंगल के पास एक बड़ी झील की ओर जा रहे हैं, यह झील कभी सूखती नहीं है। अब आप सब क्या करेंगे, यही सोच कर मेरा मन दुखी हो रहा है,” ऐसा कहकर वह और जोर-जोर से रोने लगा। 

“क्या हम वहां नहीं जा सकते, बगुला चाचा,” डरे हुए जल में रहने वाले जीवों ने पूछा। “हां-हां, क्यों नहीं! अगर तुम सब चाहो, तो मैं अपनी पीठ पर तुम्हें बिठा कर वहां ले चलूंगा,” बगुले ने मन ही मन खुश होते हुए कहा। 

इसके बाद वह उन्हें एक-एक कर वहां से ले जाने लगा। दुष्ट बगुला उन्हें किसी झील पर नहीं ले जाता था। कुछ दूर ले जाकर वह उन्हें एक चट्टान पर पटक कर मार देता और खा जाता। 

एक दिन केकड़े के जाने की बारी आई। बगुला कई दिन से मछलियां खा रहा था और आज उसे केकड़े का स्वाद मिलने वाला था। वह मन ही मन बहुत खुश था। जब वे उड़ते हुए चट्टान के पास पहुंचे तो केकड़े को वहां मछलियों की हड्डियां दिखाई दीं। वह समझ गया कि बगुला उन्हें मूर्ख बना रहा है और अब वह उसे भी मार देगा। उसने झट से बगुले की गर्दन को अपने सख्त और तेज पंजों में दबोचा तथा मौत के घाट उतार दिया। 

जब वह झील पर वापस आया तो सभी उससे बगुले के बारे में पूछने लगे क्योंकि वे सभी अपनी-अपनी बारी आने के इंतजार में खड़े थे। “बगुला चाचा कहां हैं? वे हमें कब ले जाएंगे,” उन्होंने पूछा।

 “मूर्ख कहीं के! वह तो हम सबको पागल बना रहा था,” केकड़े ने उन्हें फटकारते हुए कहा, “न तो वहां कोई झील है और न ही किसी ज्योतिषी ने ही ऐसी कोई भविष्यवाणी की है। वह तो हमें खाना चाहता था। मैंने उसे मार दिया है और अब हम सब सुरक्षित हैं।”

 “अरे! हमें तो यही लगा था कि वह हमारे भाई-बहनों को बड़ी झील पर ले जा रहा है,” एक मछली बोली।

 बगुला व केकड़ा 

“नहीं, वह किसी को भी कहीं नहीं ले जा रहा था। यह तो उसने अपना भोजन आसानी से पाने के लिए चाल चली थी। आज के बाद याद रखना, हमें आसानी से किसी दुष्ट की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए,” केकड़ा बोला। इस पर बाकी सबने भी अपनी हामी भरी। अब वे अफवाहों में नहीं आते हैं।

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