राक्षसी की कहानी-राजकुमार और राक्षसी

राक्षसी की कहानी

राक्षसी की कहानी-राजकुमार और राक्षसी

बहुत समय पहले की बात है। किसी राजा का एक बेटा था। उसे शिकार खेलने का बहुत शौक था। राजा ने राजकुमार को शिकार खेलने की इजाजत दे दी। लेकिन जब राजकुमार शिकार खेलने जाता, तो राजा को उसकी बहुत चिंता होती थी। 

राजा ने अपने बड़े वजीर से कहा कि वह राजकुमार के साथ जाए और उसे अपनी नजरों से ओझल न होने दे। इस तरह वजीर हमेशा राजकुमार के साथ रहता था। 

एक दिन राजकुमार को एक बारहसिंगा दिखाई दिया और वह उसका पीछा करते-करते घने जंगल में पहुंच गया। वजीर राजकुमार को नहीं ढूंढ सका। बारहसिंगा जल्द ही जंगल में कहीं खो गया। राजकुमार घोड़ा लेकर वापस लौटने लगा। उसे यकीन था कि हमेशा की तरह वजीर उसके पीछे आ रहा होगा, लेकिन वजीर का कोई अता-पता नहीं था। वजीर उसका पीछा करते-करते भटक गया था। लेकिन उसे शीघ्र ही रास्ता मिल गया और वह महल की ओर चल दिया, ताकि अपने साथ सेना लेकर आ सके। 

राजकुमार अपने महल वापस लौटना चाहता था, लेकिन उसे जाने का रास्ता नहीं सूझ रहा था। अचानक उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। उसने देखा कि एक सुंदर लड़की ऊंचे पत्थर पर बैठी रो रही थी। 

राजकुमार बहुत दयालु था। वह घोड़े से उतरा और उस लड़की से पूछा कि वह क्यों रो रही थी।

लड़की बोली, “मैं एक भारतीय राजा की बेटी हूं। मैं घोड़े पर सवार थी। अचानक मेरी आंख लग गई और घोड़ा मुझे गिराकर भाग गया।” 

राजकुमार ने राजकुमारी को अपने घोड़े पर बिठा लिया, ताकि उसे उसके घर छोड़ आए। तभी रास्ते में एक टूटा-फूटा घर दिखाई दिया। राजकुमारी ने कहा कि वह वहां उतरना चाहती है। राजकुमार ने उसे घोड़ से उतार दिया और वहीं इंतजार करने लगा। 

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राजकुमार को वह राजकुमारी बेहद पसंद आ गई थी। वह मन ही मन सोचने लगा कि अगर राजकुमारी तैयार हो जाए, तो वह उससे शादी कर लेगा। इस तरह वह खुशी-खुशी जीवन बिताएगा। 

तभी उसे राजकुमारी की आवाज सुनाई दी। वह कह रही थी, “मेरे बच्चे! देखो, कितना मोटा-ताजा माल लाई हूं। हम इस नौजवान को भूनकर खाएंगे। इस तरह हममें से कोई भूखा नहीं रहेगा।” 

यह सुनकर राजकुमार डर गया। वह समझ गया कि वह कोई राजकुमारी नहीं, एक आदमखोर राक्षसी थी, जो उसे बहलाकर वहां तक लाई थी। वह झटपट घोड़े पर चढ़ा और वहां से जाने ही वाला था कि राजकुमारी बाहर आ गई। उसने राजकुमार को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसका जादू टूट चुका था, इसलिए वह नहीं रुका। 

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राजकुमार ने कहा, “मुझे अपने घर जाना है।” 

राजकुमारी ने उसे रास्ता बता दिया और वह वहां से सही-सलामत निकल गया। जब वह महल में गया, तो उसने राजा को सारी बात बताई। राजा को वजीर पर बहुत गुस्सा आया कि वह उसके बेटे को वहां मुसीबत में अकेला छोड़ आया था। राजकुमार भी उस दिन के बाद सावधान रहने लगा। 

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