सिंदबाद की समुद्री यात्राएं की कहानी | सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी

सिंदबाद की समुद्री यात्राएं की कहानी

सिंदबाद की समुद्री यात्राएं की कहानी | सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

बगदाद में खलीफा हारून अल-रशीद के समय हिंदबाद नामक एक गरीब कुम्हार रहता था। वह बर्तनों को सिर पर लादे सारे शहर का चक्कर लगाया करता था। 

एक दिन हिंदबाद शहर के अमीर इलाके में आराम करने के लिए रुका। वह पसीने से बेहाल और थककर चूर था। उसने अपना बोझ सिर से उतारकर जमीन पर रखा, तो सामने एक सुंदर महल दिखाई दिया। हिंदबाद ने जब एक राहगीर से उसके बारे में पूछा, तो वह बोला, “यह महान नाविक सिंदबाद का महल है, जो बहुत अमीर है।” 

हिंदबाद को उसकी दौलत और महल से जलन होने लगी। वह कुछ देर सोचता रहा, फिर खीझकर अपने आपसे बोला, “कुछ लोग कितने किस्मत वाले होते हैं। उनके पास सारी दुनिया की दौलत होती है। ये लोग किसी काम को हाथ नहीं लगाते। इन्हें अपने बाप-दादा की जायदाद मिल जाती है और ये सारी जिंदगी बैठकर मजे से खाते हैं। लेकिन मेरे जैसे लोग दिन-रात काम करके भी कुछ नहीं कर पाते।” वह अभी इस बात पर कुढ़ ही रहा था कि महल से एक नौकर निकलकर बाहर आया और बोला, “मेहरबानी करके भीतर चलिए। मालिक आपसे मिलना चाहते हैं।” 

यह सुनकर हिंदबाद डर गया। उसने सोचा कि कहीं उसकी बात सिंदबाद ने सुन तो नहीं ली। हिंदबाद को पूरा यकीन था कि अब उसे सजा मिलने वाली है। 

वह नौकर के साथ महल में गया, जहां एक वृद्ध व्यक्ति बैठा था। उसने हिंदबाद का स्वागत किया और उसे खाने की मेज के सामने बैठने को कहा, जिस पर भोजन और शराब रखी थी।

सिंदबाद की समुद्री यात्राएं की कहानी

वह बोला, “दोस्त, मैं सिंदबाद हूं। मैंने तुम्हारी बात सुन ली। लेकिन मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि मैंने ये दौलत कड़ी मेहनत करके और खतरे मोल लेकर कमाई है। मैं तुम्हें अपने जीवन में आए रोमांचक पड़ावों के बारे में बताना चाहता हूं।” 

यह सुनकर हिंदबाद हैरान रह गया। उसने सोचा था कि अमीर आदमी उसके साथ बुरा बर्ताव करेगा, लेकिन वह तो बहुत नेकदिल आदमी निकला। उसने हिंदबाद से भोजन करने के लिए कहा। हिंदबाद ने जीवन में इतना स्वादिष्ट खाना कभी नहीं खाया था। इसके बाद जब वह आराम से बैठ गया, तो सिंदबाद उसे अपने जीवन के किस्से सुनाने लग

सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

“मेरा जन्म अमीर घर में हुआ था, लेकिन मैं मूर्ख था। मैंने अपने पिता से मिला सारा धन यूं ही गंवा दिया।” 

इसके बाद सिंदबाद ने अपना बचा-खुचा सामान बेचा और उससे कुछ जरूरी सामान खरीद लिया। वह ऐसे नाविक व्यापारियों के दल में शामिल हो गया, जिनके पास एक जहाज था। वे फारस की खाड़ी से होते हुए पूर्वी इंडीज के टापुओं की ओर जा रहे थे। उन्होंने बगदाद के बलसारा बंदरगाह से अपनी यात्रा आरंभ की। रास्ते में उन्होंने बहुत से नगरों और बंदरगाहों से माल खरीदा। 

एक दिन वे एक ऐसे टापू पर ठहरे, जहां हरियाली दिख रही थी। उनमें से कुछ लोगों ने सोचा कि वहां कुछ देर आराम कर लिया जाए। वे लोग अलाव जलाकर बैठ गए। तभी उन्होंने देखा कि जहाज पर सवार उनके दूसरे साथी हाथ से कुछ इशारे कर रहे थे। लेकिन उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या कह रहे हैं। 

सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

दरअसल, उनके साथी यह बताना चाहते थे कि वे जिसे टापू समझकर अलाव जलाए बैठे थे, वह एक बड़ी व्हेल मछली है। इससे पहले कि उन्हें कुछ समझ में आता, मछली ने एक सांस ली और वे पानी में गिर गए। 

सभी लोग समुद्र में तैरते हुए चीखने-चिल्लाने लगे। उनके पेट में खारा पानी जाने लगा। सिंदबाद जानता था कि अपनी जान बचाने के लिए हाथ-पैर मारना छोड़ देना चाहिए और किसी ऐसी चीज को पकड़ना चाहिए, जो पानी में न डूब सके। 

सिंदबाद ने लकड़ी के उस टुकड़े को पकड़ लिया, जिससे अलाव जलाया गया था। फिर वह उस लकड़ी को पकड़कर तैरने लगा। व्हेल मछली समुद्र में चली गई थी। उसे अपने साथियों के बारे में कुछ पता नहीं था। 

सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

सिंदबाद तैरते हुए किसी तरह एक टापू पर पहुंच गया। वह थककर चूर हो चुका था। वहां खड़ी चट्टानें दिख रही थीं। उसने अपने आसपास देखा, तो पेड़ों की जड़ें लटक रही थीं। सिंदबाद ने सोचा कि वह उन जड़ों को पकड़कर घास के मैदान तक जा सकता था। 

जब वह किसी तरह ऊपर पहुंचा, तो थकान के मारे नींद आ गई। दोपहर का सूरज सिर पर आया, तो उसकी आंख खुली। उसे खाने के लिए कुछ कंद-मूल मिल गए। फिर उसने पास के झरने से ताजा पानी पिया। 

सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

थोड़ी देर बाद उसे कुछ लोगों द्वारा बातें करने का स्वर सुनाई दिया। वह उन लोगों का पीछा करने लगा और एक आदमी के पास पहुंचा। उस आदमी ने बताया कि वे सब टापू के राजा मिराज के घोड़ों को चराने के लिए हर साल उस ओर आते थे। अगले दिन वे वापस जाने वाले थे। 

वे लोग सिंदबाद को भी अपने साथ शहर ले गए। राजा ने सिंदबाद की मेहमान-नवाजी की। उसने अपने महल के मेहमानखाने में उसके रहने का इंतजाम करवा दिया और उससे कहा कि उसे जिस चीज की भी जरूरत हो, वह बेहिचक मांग सकता है। राजा को यात्राओं के किस्से सुनने का बहुत शौक था।

अगले दिन राजा ने सिंदबाद को अपने पास बुलाया। सिंदबाद उसे अपने साहसिक कारनामों के बारे में बताने लगा। राजा को सिंदबाद की बातें बहुत अच्छी लगती थीं। उसने सोचा कि काश! वह भी सिंदबाद की तरह समुद्र की सैर पर जा पाता। लेकिन वह राजा होते हुए भी लाचार था। उसे अपने राज्य की देखरेख करनी थी। 

सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

सिंदबाद अपने घर वापस जाना चाहता था, इसलिए वह व्यापार करने वाले नाविकों से मेल-जोल बढ़ाने लगा। इसी दौरान वह शहर की सैर भी करता रहता। एक दिन वह कैसल नामक टापू पर गया, जिसकी रखवाली एक जिन्न डेगियल कर रहा था। उसने वहां बड़ी अजीब मछलियां देखीं, जिनमें से कई तो उल्लू जैसे मुंह वाली थीं। 

ऐसी अजीब मछलियां देखकर सिंदबाद को बहुत हंसी आई। फिर उसे ऐसे फूल दिखे, जिन्हें उसने अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखे थे। फूलों के रंग बहुत चटकीले थे। जब वह उनके पास गया, तो उनमें से बदबू आने लगी। वह हैरान रह गया। दूर से तो सुगंध आ रही थी। तभी उसकी समझ में आया कि फूलों के पास जाते ही उनमें से बदबू इसलिए आने लगती है, ताकि कोई इन्हें तोड़ न सके। यह देखकर वह मुस्कराए बिना नहीं रह सका। 

एक दिन सिंदबाद ने देखा कि एक नाविक बंदरगाह पर खड़े एक जहाज में माल लाद रहा है। सिंदबाद ने उसे पहचान लिया। वह उसी जहाज का कप्तान था, जिस पर वह अपने घर से आया था। उस जहाज में उसका माल भी पड़ा था।

सिंदबाद को जिंदा देखकर कप्तान बहुत खुश हुआ। सिंदबाद ने उसे बताया कि उसके साथ क्या-क्या हुआ था। कप्तान ने सिंदबाद को उसका सारा माल लौटा दिया। सिंदबाद ने वह माल बेचा और अमीर आदमी बन गया। फिर वह अपने घर लौट आया। यहां उसने एक महल बनवाया और नौकर-चाकरों के साथ रहने लगा। 

सिंदबाद की पहली यात्रा की कहानी 

कहानी सुनाने के बाद बूढे सिंदबाद ने हिंदबाद को सौ दीनारें इनाम में दी और कहा कि वह अगले दिन भी उसके पास आए, ताकि वह उसे अन्य कहानियां सुना सके। हिंदबाद को यह कहानी भी बहुत रोमांचक लगी। उसने मन ही मन में सिंदबाद के साहस की प्रशंसा की। 

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