अलादीन और जादुई चिराग की कहानी | The story of Aladdin and the Magic lamp

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी | The story of Aladdin and the Magic lamp

बहुत समय पहले की बात है। बगदाद में एक खलीफा का राज था। एक दिन राज्य में एक गरीब दर्जी मुस्तफा की मौत हो गई। घर में उसकी पत्नी और आलसी बेटा ही रह गए। बेटे का नाम अलादीन था। वह आवारा लड़कों के साथ सारा दिन खेल में बिता देता था। 

एक दिन एक अजनबी ने अलादीन से पूछा कि क्या वह मुस्तफा का बेटा है। 

“हां, लेकिन वह तो अल्लाह को प्यारे हो गए।” अलादीन बोला। 

“हाय अल्लाह! ये तूने क्या किया। बच्चे! मैं रिश्ते में तुम्हारा चाचा लगता हूं।” वह आदमी अलादीन को गले लगाकर रोने लगा। 

अलादीन उस आदमी को अपनी मां से मिलवाने के लिए घर ले गया। अलादीन हैरान हो रहा था कि अब्बा ने कभी अपने भाई के बारे में नहीं बताया। उसकी मां की भी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, लेकिन उन्होंने उसका स्वागत किया। 

दरअसल, मां और बेटा-दोनों नहीं जानते थे कि वह अजनबी एक दुष्ट जादूगर है, जो अपना कोई काम निकलवाने के लिए अफ्रीका से आया है। 

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

अलादीन का चाचा उसे शहर घुमाने ले गया और पहनने के लिए अच्छे कपड़े भी दिलवाए। एक दिन वे पहाड़ियों पर घूमने गए। अलादीन थकान के कारण वापस जाना चाहता था, लेकिन चाचा ने वहीं रुकने को कहा। फिर उसने आग जलाई और उसमें एक रंगीन चूर्ण फेंक दिया। ऐसे में धरती हिली और एक बड़ा-सा पत्थर सामने आ गया, जिस पर एक कुंडा लगा था।

चाचा ने अलादीन को एक अंगूठी देते हुए कहा, “दरवाजा खींचकर भीतर जाओ। पहले तीन कमरों में रखी किसी चीज को मत छूना। जब बाग में जाओगे, तो वहां एक पुराना चिराग मिलेगा। उसे लाकर मुझे दे देना। यह अंगूठी तुम्हारी रक्षा करेगी।”

अलादीन हैरान था, लेकिन चाचा की बात मानकर वह सीढ़ियों से नीचे चला गया। थोड़ी देर बाद वह हाथ में चिराग लिए सामने आया, लेकिन अब वहां सीढ़ियां नहीं थीं। चाचा ने झुककर उससे चिराग मांगा। अलादीन ने कहा, “पहले आप मुझे यहां से बाहर निकालें। मैं चिराग हाथ में ले आऊंगा।” 

“नहीं, पहले चिराग दो। तुम बाद में आते रहना।” जादूगर बोला। 

अलादीन भी अपनी बात पर अड़ गया। जादूगर को गुस्सा आया और वह उसे वहीं बंद करके चला गया। अब अलादीन की समझ में आ गया था कि वह आदमी उसका चाचा नहीं था। 

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

उसने घबराकर अपने हाथ जोड़े, तभी अचानक उसकी अंगूठी से धुआं निकलने लगा। उसमें से निकले जिन्न ने कहा, “मैं अंगूठी का जिन्न हूं। मेरे लिए क्या हुक्म है, आका!” 

पहले तो अलादीन घबरा गया, फिर उसने वहां से बाहर निकालने की विनती की। उसने बाहर आने से पहले चिराग के अलावा बाग से हीरों जैसे कुछ फल भी ले लिए थे। शीघ्र ही वह अपने सामान के साथ मां के पास पहुंच गया और उस दुष्ट जादूगर के बारे में बताया। मां ने सोचा कि वे लोग उस चिराग को बेचकर पैसे प्राप्त कर सकते हैं। 

जब मां उस गंदे चिराग को रगड़कर धोने लगी, तो उसमें से एक बड़ा जिन्न निकल आया। उसे देखते ही वह बेहोश हो गई।

अलादीन ने जिन्न को हुक्म दिया, “हमारे लिए शाही खाना लाओ।” 

अलादीन को उस समय भूख लगी थी, इसलिए उसे जिन्न से खाना मांगने के सिवा और कुछ नहीं सूझा। 

जिन्न चांदी की बारह थालियों और कटोरियों में बहुत से पकवान ले आया। मां-बेटे ने जी भरकर उन्हें खाया। फिर वे कटोरियां और थालियां बेचकर बहुत अमीर हो गए। 

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

एक दिन अलादीन बाजार से गुजर रहा था। अचानक उसने सुलतान की सुंदर बेटी का चेहरा देख लिया। अलादीन को उससे प्यार हो गया। 

उसने घर आकर मां से कहा कि वह सुलतान के पास उसकी बेटी का हाथ मांगने जाए। उसकी मां हंसने लगी और अलादीन को समझाया कि उसे ऐसी बातें दिमाग से निकाल देनी चाहिए। सुलतान अपनी बेटी का विवाह उससे क्यों करेगा। 

लेकिन अलादीन अपनी जिद पर अड़ा रहा। उसने अपने संदेश के साथ सुलतान के लिए हीरों जैसे फल भिजवाए। 

अलादीन की मां ने उसके उपहार के साथ सुलतान को संदेश दिया। सुलतान ने वजीर से राय मांगी। सुलतान को रिश्ता अच्छा लग रहा था, लेकिन उसने सोचा कि अगर वजीर की भी राय मिल जाए, तो बेहतर होगा। वजीर चाहता था कि उसके बेटे का विवाह राजकुमारी से हो, इसलिए उसने कहा कि सुलतान अलादीन को तीन महीने इंतजार करने को कहे। सुलतान ने ऐसा ही अलादीन की मां से कह दिया। 

लेकिन दो महीने बाद अलादीन की मां को पता चला कि सुलतान की बेटी का विवाह वजीर के बेटे से होने जा रहा था। उसने यह बात अपने बेटे अलादीन को बताई। 

अलादीन को इस धोखे पर बहुत गुस्सा आया। उसने अपने चिराग के जिन्न को बुलाया और उससे कहा कि वह राजकुमारी तथा वजीर के बेटे को उसके पास ले आए। जिन्न ने ऐसा ही किया। अलादीन के कहने पर जिन्न ने वजीर के बेटे को सारी रात बाहर ठंड में रखा। 

फिर उसने राजकुमारी को बताया कि उसके पिता ने उसे धोखा दिया है। शादी का रिश्ता पहले उसके घर से गया था। 

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

सुबह अलादीन ने दोनों को उनके घर भेज दिया। अगली रात फिर वही हुआ। राजकुमारी को कोई कष्ट नहीं दिया गया, पर वजीर के बेटे को सारी रात ठंड में रहना पड़ा। ऐसे में वजीर का बेटा इतना डर गया कि उसने राजकुमारी से शादी के लिए मना कर दिया। 

वजीर ने सुलतान से कहा कि वह अलादीन के घर से आठ नौकरों को बुलवाए, जो उसकी बेटी के लिए गहनों से भरे थाल पकड़े हों। अलादीन ने तत्काल जिन्न को बुलाया और सुलतान की इच्छा पूरी कर दी। फिर वह सज-धजकर, बारात लेकर सुलतान के महल की ओर रवाना हुआ। उसके नौकर रास्ते भर सोने के सिक्के न्योछावर करते रहे। 

अलादीन ने सोने, चांदी और हीरों से सजा एक सुंदर महल तैयार करवाया तथा अपनी पत्नी के साथ खुशी-खुशी रहने लगा। सभी लोग उन दोनों से प्यार करते थे। सुलतान ने अलादीन को अपना सेनापति बना दिया।

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

अलादीन के जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रही। वह एक दयालु इन्सान था। इतना धन पाने के बाद भी उसका स्वभाव नहीं बदला। प्रजा उसे बहुत चाहती थी। जब वे पति-पत्नी शहर में घूमने जाते, तो गरीबों की मदद करते तथा भूखों को भोजन करवाते। इसके अलावा अलादीन सबकी भलाई के लिए कोई न कोई योजना बनाता रहता था। 

सुलतान को इस बात की खुशी थी कि उसने वजीर के बेटे के बजाय अलादीन को अपना दामाद चुना। वह चाहता था कि उसके बाद अलादीन ही उसका राज्य संभाले। 

उधर अफ्रीका में बैठे दुष्ट जादूगर को यह पता था कि अलादीन किस तरह पैसे वाला बन गया और उसकी शादी सुलतान की बेटी से हो गई। वह 

अलादीन से बदला लेना चाहता था। अतः जादूगर शहर में चिराग विक्रेता बनकर आ गया। वह पुराने चिरागों के बदले नए चिराग दे रहा था। 

उस दिन अलादीन शिकार खेलने गया था। उसकी पत्नी को जादुई चिराग के बारे में कुछ पता नहीं था। उसने पुराने चिराग के बदले नया चिराग ले लिया। फिर जादूगर ने चिराग के जिन्न से कहा कि वह राजकुमारी सहित महल को अफ्रीका ले चले। 

जब सुलतान को यह पता चला कि महल और बेटी-दोनों गायब हैं, तो उसे गुस्सा आ गया। उसने अलादीन को सजा देनी चाही, लेकिन लोगों के कहने पर उसे छोड़ दिया गया।

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

अलादीन अपनी पत्नी की तलाश में चल दिया। जब वह प्रार्थना करने लगा, तो अंगूठी का जिन्न हाजिर हो गया। वह अलादीन को उसकी पत्नीके पास ले गया। उसकी पत्नी अपने पति को देखकर बहुत खुश हुई और बोली कि जादूगर उस चिराग को अपने चोगे में रखता है। 

अलादीन ने अपनी पत्नी से कहा कि वह खुश होने का दिखावा करे और जादूगर को खूब शराब पिलाए। जब जादूगर शराब लेने भीतर जाए, तो वह उसके प्याले में जहर डाल दे। फिर अलादीन ने उसे एक पुड़िया थमा दी। अलादीन की पत्नी ने अलादीन के कहने के अनुसार जादूगर को काफी मात्रा में शराब पिलाई और जब जादूगर मदहोश हो गया, तो उसने उसकी शराब में अलादीन द्वारा दिया गया जहर मिला दिया। जहर मिली शराब पीते ही जादूगर वहीं मर गया। अलादीन ने चिराग ले लिया और अपनी पत्नी सहित सही-सलामत अपने शहर वापस आ गया। 

अलादीन और जादुई चिराग की कहानी

जादूगर तो मर गया, लेकिन उसका दुष्ट भाई फातिमा नामक औरत का रूप धारण करके अपने भाई का बदला लेने पहुंच गया। उसने अलादीन की पत्नी से दोस्ती कर ली और यह सलाह दी कि उसे रॉक पक्षी का अंडा महल में रखना चाहिए। इससे महल सुंदर लगेगा। 

जादूगर के भाई ने सोचा कि रॉक जिन्न का मालिक है। जब अलादीन जिन्न से यह मांग रखेगा, तो जिन्न उसे मार डालेगा। लेकिन जिन्न ने उसकी सारी योजना अलादीन को बता दी। अलादीन ने जादूगर के भाई को भी मार डाला। इसके बाद अलादीन अपनी पत्नी के साथ खुशी-खुशी रहने लगा। 

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