प्युनिक युद्ध |The Punic Wars History in hindi

The Punic Wars History in hindi

प्युनिक युद्ध (The Punic Wars) (264 से 146 ई०पू०) 

रोम और कार्थेज (Carthage) के बीच 264 से 146 ई०पू० तक तीन बड़े प्युनिक युद्ध लड़े गए। इन युद्धों ने प्राचीन इतिहास कार्थेज राज्य का नक्शा बदल दिया। कार्थेज नामक शक्तिशाली राज्य उत्तरी अफ्रीका में स्थित हुआ करता था। वर्तमान समय में कार्थेज, टयुनिस (Tunis) नाम से स्थित है। 300 ई०पू० में सागर तट पर स्थित कार्थेज राज्य एक शक्तिशाली राज्य के रूप में जाना जाता था।

प्रथम प्युनिक युद्ध (264 से 241 ई०पू०) 

कार्थेज लोग फियेनिसियन नामक मूल सभ्यता के माने जाते थे। ई०पू० 9वीं शताब्दी में फियोनिसियन्स (Phoenicians) की विकसित होती सभ्यता कार्थेज राज्य की स्थापना करने में सक्षम हुई। उसने टायर (Tyre) नामक स्थान को अपने राज्य की राजधानी बनाया। 

इटैलियन क्षेत्रों की ओर रोमनों की बढ़ती जनसंख्या को अपना भू-क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने उत्तरी अफ्रीका की ओर अपना प्रसार करना आरम्भ किया। उत्तरी अफ्रीका के पश्चिमी क्षेत्र लीबिया (Libya) और जिब्रेल्टर (Gibraltar) को अपने पूर्व प्रभाव में लेकर रोमनों ने स्पेन (Spain) के दक्षिणी भू-भाग को तथा कोर्सिका (Corsica) तथा सरदानिया (Sardania) के रेगिस्तानी भू-भाग को अपने पूर्ण प्रभुत्व में ले लिया। रोमनों के बढ़ते प्रभाव के प्रति फियोनिसियन जाति के लोग सावधान हो चुके थे। फियोनिसियन को लैटिन भाषा में पियोनी (Poeni) कहा गया है। पियोनियों से होने वाले रोमनों को युद्ध को रोमनों ने ‘प्युनिक’ (Punic) युद्ध नाम दिया। 

प्युनिक (प्रथम प्युनिक युद्ध 264-241 ई०पू०) की बुनियाद इस बात से पड़ी जबकि मेसासाना (Messana) के सिसिलियन नगर (Sicilian City) वासियों की 

ओर से कार्थेज राज्य में विद्रोह छेड़ दिया गया। सिसिलियन नगर वासी उस समय तक रोमनों के पूरी तरह प्रभाव में आ चुके थे-सिसिलियन नगर के लोगों के विद्रोह को दबाने के लिए आए, सिसिलियन नागरिकों के पक्ष में रोमन सेना युद्ध भूमि में खड़ी नजर आयी। 

इस तरह सिसिलियन नगर का विद्रोह दो शक्तियों के युद्ध में बदल गया। यह युद्ध अब विद्रोह को दबाने तक ही सीमित न रहकर सिसली नगर पर कब्जे के वर्चस्व के लिए था। कार्थेज राज्य सिसली पर किसी भी तरह अपना अधिकार छोड़ने को तैयार न था तथा रोमन राज्य की सेना अब जिस हद तक आगे बढ़कर युद्ध कर रही थी। उसमें सिसली से उसे अपने कदम पीछे हटाना स्वीकार न था। 

रोमनों के लिए यह युद्ध पूरी तरह समुन्द्री शक्ति पर निर्भर करता था। रोम से समुन्द्री सेनाएं आती रहीं और युद्ध की भेंट चढ़ती रहीं। जबकि कार्थेज के लोगों की सेना, भूमि मार्ग से आगे बढ़कर रोमनों से लड़ रही थी तब कार्थेजों को, इस लड़ाई में हैमिलकर (Hamilkar) नामक एक योद्धा प्राप्त हुआ, जिसके नेतृत्व में कार्थेज की सारी सेना लड़ रही थी। 

प्रथम प्युनिक युद्ध 264 ई०पू० से आरम्भ होकर 241 ई०पू० तक, 23 वर्षों तक चलता रहा। अपने अन्तिम चरण 241 ई०पू० में यह युद्ध सिसली में ही सिमट कर रह गया था। कार्थेजों ने अन्य भू-भाग अपने अधिकार में कर लिया था। दोनों ओर से भयानक युद्ध का रक्तपात हुआ था। दोनों ओर के असंख्य सैनिक मारे गए थे। अन्तिम चरण में दोनों ही ओर से इस बात के प्रयास आरम्भ हुए कि युद्ध रोककर शान्ति वार्ता हो। इस शान्तिवार्ता के परिणाम में सिसली पर रोमनों का अधिकार रह गया। कार्थेज की सेना पीछे सिमट गयी।

द्वितीय प्युनिक युद्ध (218 से 201 ई०पू०)

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अट्ठारह साल तक चलने वाले इस दूसरे प्युनिक युद्ध में, जो रोमनों ओर कार्थेजों के बीच लड़ा गया-कार्थेजों के लिए सबसे क्षति का भयानक युद्ध था। यह युद्ध उस सन्धि की भूल का नतीजा था, जिसमें कार्थेज, सिसली को रोमनों के अधिकार में छोड़कर पीछे हट गए थे। 

रोमनों ने अपने आपको सिसली तक ही सीमित नहीं रखा था। वे 237 ई०पू० तक क्रोपिया और सरदानिया को कार्थेजों के अधिकर से अपने अधिकार में छीन चुके थे। 

237 ई०पू० 219 ई०पू० के बीच कार्थेजो के नायक हैमिलकर के पुत्र हैनिबल (Hannibal) का काल रहा। वह अपने पिता की तरह योद्धा न होकर शान्ति प्रिय था। अलबत्ता हैमिलकर के दामाद ने आगे बढ़कर रोमनों को चुनौती देते हुए 226 ई०पू० में स्पेन का कुछ भू-भाग कार्थेजों के अधीन कर लिया था। 

रोमनों ने 219 ई०पू० में इब्रो नदी (Ebroriver) पार कार्थेजो का काफी सारा भू-भाग जीत लिया। कार्थेजो के राजा हैनिबल ने 218 ई०पू० में जब इस बात को आभास कर लिया कि रोमनों की बढ़ती शक्ति पूरे कार्थेज राज्य को अपने अधिकार में करने का इरादा रखती है, तब उसने शान्ति की रीति छोड़कर युद्ध की तैयारी की। उसने विशाल स्तर पर सेना की भर्ती की। उसने हाथियों की विशाल सेना सजाई। एल्प्स पर्वत और 300 कि०मी० समुन्द्री और द्वीपीय मार्ग पार करते हुए, रोमनों पर धावा बोल दिया। 

परन्तु तब तक हैनीबल को युद्धभूमि में उतरने का निर्णय लेने में काफी विलम्ब हो गया था। रोमनों ने अपनी जमीनी और समुन्द्री सैनिक शक्ति में बहुत बढ़ोतरी कर ली थी। 

रोमन योद्धाओं द्वारा कार्थेजो का विनाश कर दिया गया। कहा जाता है कि हैनीबल को दूसरे प्युनिक युद्ध में इतनी भीषण हानि उठानी पड़ी; कि कुछ समय के लिए कार्थेज सभ्यता के लोग, बगैर भूमि और राज्य के निवासी होकर रह गए थे। 

परन्तु कार्थेजों की वह भूमि थी, जहां रोमनों ने अपना अधिकार जमाया था। कार्थेजों को उस भूमि के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी। वे किसी भी स्थान पर एकत्र होकर रोमनों पर धावा बोलकर उनकी सेना का संहार करते और जब तक नयी रोमन सेना वहां आती वे बचकर जंगलों और पहाड़ों में निकल जाते। 

अन्ततः रोमनों ने कार्थेजों से समझौता किया। उनके लिए स्पेन का पूरा क्षेत्र खाली कर दिया।

प्युनिक का तीसरा युद्ध (149-146 ई०पू०) 

स्पेन के क्षेत्र में सिमट जाने वाले कार्थेजों को 50 वर्ष से अधिक तक इस बात का दुःख सताता रहा कि उनका एक बड़े भू-भाग पर राज्य था, जो अब रोमनों के अधिकार में जा चुका है। कार्थेजों के पास खेतों और चरागाह के साधन सीमित हो गए थे। पचास वर्षों में उनकी जनसंख्या भी बढ़ चुकी थी। 

कार्थेजों ने चरागाह और खेती की भूमि को पाने के लिए संगठित होकर 149 ई०पू० में रोमनों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। 

यह गलत समय पर, गलत निर्णय के साथ कार्मेजों द्वारा छेड़ा गया युद्ध था। उस समय तक रोम एक अतिविकसित और शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में दुनिया के सामने आ चुका था। जहां तक रोमन फैल चुके थे पूरा क्षेत्र रोमन साम्राज्य कहलाने लगा था। रोम साम्राज्य के पास मजबूत सैन्य शक्ति हो चुकी थी। 

149 ई०पू० में छेड़ा गया कार्थेजों का रोमनों के विरुद्ध युद्ध, छिट-पुट रूप में दो वर्ष तक आगे खिंचा फिर समुन्द्री मार्ग से रोमन साम्राज्य की विशाल सेना आ गयी। रोमन साम्राज्य की सेना आते ही एक सप्ताह के अन्दर-अन्दर स्पेन की नागरिक आबादियों में जा घुसी। रोमन साम्राज्य की सेना ने कार्थेजों का भीषण संहार किया। शहर में आग लगाकर नागरिकों और नागरिक आबादियों को जला डाला। जो भी कार्थेज सेना के हाथ पड़े उन्हें या तो कत्ल कर डाला गया या फिर उन्हें गुलाम बना लिया गया। इस तरह प्युनिक के तीन भीषण युद्धों में कार्थेज सभ्यता और राज्य का पूरी तरह अन्त हो गया था। 

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