वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य | किसानों की आय दोगुनी करने के उपाय Drishti IAS

 किसानों की आय दोगुनी करने के उपाय Drishti IAS

वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य | किसानों की आय दोगुनी करने के उपाय Drishti IAS

एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भारत के किसान बदहाल रहते हैं। वे आर्थिक तंगी के शिकार रहते हैं और कभी-कभी तो यह आर्थिक तंगी इस हद तक बढ़ जाती है कि कर्ज में डूबा भारतीय किसान आत्महत्या करने को विवश हो जाता है। किसान की आत्महत्या एक लोकतांत्रिक देश के लिए कलंक जैसी होती है। यह दुख का विषय है किसान हमारा अन्नदाता होते हए भी स्वयं अत्यंत वंचना में जीवन गुजारता है और खुशहाली से दूर रहता है। ऐसे में यह हम सभी का दायित्व बनता है कि हम ऐसे उपाय करें, जिनसे किसानों की आय बढ़े। वे अभिशप्त जीवन गुजारने के बजाय खुशहाली के तरफ बढ़े और राष्ट्र निर्माण में बढ़-चढ़कर योगदान दें। 

यह एक अच्छी बात है कि हमारे केंद्रीय नेतृत्व ने किसानों को आर्थिक रूप से सबल बनाने का मन बना लिया है। यह माना जा रहा है कि नए भारत का निर्माण तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक कि देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होगा। इसीलिए किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने एक लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य है वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का। देश में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने किसानों की समग्र भलाई के लिए इस तरह का कोई लक्ष्य देशवासियों के सामने रखा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 

कृषि मंत्रालय को इस काम को 2022 तक अंजाम देना है। कृषि मंत्रालय पूरे मनोयोग और ईमानदारी के साथ प्रधानमंत्री के इस सपाने को साकार करने में लगा हुआ है। देश के सभी जिलों में 15 अगस्त, 2017 से केवीके के संयोजन में किसानों की आय दुगुनी करने के लिए संकल्प सम्मेलनों में बड़ी संख्या में किसान एवं अधिकारी संकल्प भी ले रहे हैं। 

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि मंत्रालय योजनाबद्ध तरीके से 7 सूत्री कार्य योजना पर काम कर रहा है। यह सात सूत्रीय कार्य योजना हमारे प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए सात सूत्रों पर केंद्रित है। पहला सूत्र है, उत्पादन में वृद्धि, मोटे तौर पर इसका मतलब है पर्याप्त संसाधन के साथ सिंचाई पर ध्यान केंद्रित करना। यही वजह है कि सर्वप्रथम हमने सिंचाई में बजटीय आवंटन बढ़ाकर इस पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत के पास 142 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि है जिसमें से केवल 48 प्रतिशत संस्थागत सिंचाई के तहत है। ‘हर खेत को पानी’ के उद्देश्य के साथ 1 जुलाई, 2015 से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की गई ताकि सिंचाई आपूर्ति श्रृंखला, जल संसाधनों, नेटवर्क वितरण और फार्म लेवल अनुप्रयोगों में सर्वांगीण समाधान किया जा सके। हम इसमें समग्र दृष्टिकोण अपना रहे हैं जो सिंचाई और जल संरक्षण को मिलाता है। उद्देश्य ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ पाना है। साथ ही, वर्षों से लंबित मध्यम एवं बड़ी सिंचाई योजनाओं को 4 वर्षों में प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जल संचयन एवं प्रबंधन के साथ ही वॉटर शेड डेवलपमेंट का कार्य भी तेज गति से कार्यान्वित हो रहा है। 

दूसरा सूत्र है, इनपुट का प्रभावी उपयोग, जिसका अर्थ है गुणवत्तापूर्ण बीज, रोपण सामग्री, जैविक खेती एवं प्रत्येक खेत को मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं अन्य योजनाओं के माध्यम से उत्पादन में वृद्धि। दूसरे सूत्र में हम श्रेष्ठ बीजों एवं पोषकता पर जोर दे रहे हैं। जैविक खेती के लिए भी पहली बार नई योजना प्रारंभ की गई है। इसी प्रकार नीम कोटेड यूरिया के माध्यम से यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता तथा यूरिया का अवैध रूप से रासायनिक उद्योग में दुरुपयोग भी समाप्त हो गया है। साथ ही सॉयल हेल्थ कार्ड्स के प्रावधान से संतुलित उर्वरकों के उपयोग के कारण किसानों की लागत कम हो रही है एवं उत्पादन में बढ़ोत्तरी भी हो रही है। इसके अतिरिक्त कृषि प्रक्षेत्र में नई तकनीक का उपयोग जैसे- कृषि प्रक्षेत्र के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय कार्यक्रम, किसान कॉलसेंटर, किसान सुविधा एप जैसे दूरसंचार एवं ऑनलाइन माध्यमों से किसानों तक समय सूचना एवं एडवाइजरी भी पहुंचाई जा रही है। 

तीसरा सूत्र है, उपज के बाद नुकसान कम करना, फसलों की उपज के बाद उसका भंडारण करना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। भंडारण की सुविधा के अभाव में मजबूरी में कम कीमत पर उपज की बिक्री करनी पड़ती है। इसलिए सरकार का मुख्य ध्यान किसानों को प्रोत्साहित करना है ताकि वे वेयर हाउस का उपयोग कर अपनी फसल को मजबूरी में न बेंचे। प्राप्त जमा रसीद के आधार पर किसानों को बैंकों से ऋण मुहैया कराया जा रहा है एवं ब्याज में छूट भी दी जा रही है। किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण भंडारण एवं एकीकृत शीत श्रृंखला (Inte grated Cold Chain) पर है।

चौथा सूत्र है, गुणवत्ता में वृद्धि। सरकार खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) के माध्यम से कृषि में गुणवत्ता को बढ़ावा दे रही है। छह हजार करोड़ रु. के आवंटन (Allocation) से प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टरों के फॉरवर्ड एवं लिंकेज पर कार्य करके फूड प्रोसेसिंग क्षमताओं का विकास किया जाएगा जिससे 20 लाख किसानों को लाभ मिलेगा और करीब साढ़े पांच लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

पांचवां सूत्र है, विपणन (कृषि बाजार) में सुधार, हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मूल्य का बड़ा हिस्सा किसान तक पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका न्यूनतम हो। इसके लिए केंद्र सरकार कृषि बाजार में सुधार पर जोर दे रही है। तीन सुधारों के साथ ई राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना की शुरुआत की गई है जिसमें अभी तक 455 मंडियों को जोड़ा जा चुका है। कई मंडियों में ऑनलाइन कृषि बाजार ट्रेडिंग भी शुरू हो चुकी है। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में बाजार सुधार की दिशा में एक मॉडल एपीएमसी एक्ट राज्या को जारी किया गया है, जिसमें निजी क्षेत्र में मंडी स्थापना, प्रत्यक्ष विपणन मंडी यार्ड के बाहर करने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त संविदा कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक मॉडल बनाने का कार्य भी कर रही है। साथ ही, किसानों को फॉरमर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन के रूप में संगठित भी किया जा रहा है जिससे उन्हें सिर्फ इकोनॉमी ऑफ स्केल मिले, बल्कि व्यापारियों के समक्ष उनकी सौदेबाजी शक्ति भी बढ़े।

छठा सूत्र है, जोखिम, सुरक्षा एवं सहायता, जिसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है। यह किसानों की आय का सुरक्षा कवच है। खरीफ व रबी फसल में अब तक की सबसे न्यूनतम दर तय की गई है, जो क्रमशः अधिकतम 2 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत है। इसमें खड़ी फसल के साथ-साथ बुवाई से पहले और कटाई के बाद के जोखिमों को भी शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, नुकसान के दावों का 25 प्रतिशत भुगतान भी तत्काल ऑनलाइन किया जा रहा है। इस योजना में किसानों को फसल नुकसान के त्वरित भुगतान हेतु उपज के अनुमान के लिए ड्रोन तकनीक तथा फसल कटाई के लिए स्मार्ट फोन जैसी नई तकनीकों का उपयोग भी कई राज्यों में प्रारंभ किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, किसानों की सुविधा के लिए इस खरीफ मौसम से कस्टमर सर्विस सेंटर एवं बैंक ऑनलाइन जैसी नई तकनीकी सुविधाओं के माध्यम से प्रीमियम राशि जमा कराने का भी प्रावधान किया गया है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के राहत नियमों में भी सरकार ने बदलाव किए हैं। अब केवल 33 प्रतिशत फसल नुकसान होने पर भी सरकार अनुदान दे रही है। साथ ही अनुदान की राशि को 1.5 गुना बढ़ा दिया गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को भी कम करने के लिए अधिक सहनशीलता वाली किस्मों और पशुओं की प्रजातियों का विकास तथा प्रभावित जिलों के लिए कॉनटिनजेंसी प्लान भी तैयार किए गए हैं। 

सातवां और अंतिम सूत्र है, सहायक गतिविधियों से अर्थात कृषि के अनुषंगी कार्य-कलापों जैसे बागवानी, डेयरी विकास, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, श्वेत क्रांति, नीली क्रांति, कृषि वानिकी, एकीकृत फार्मिंग (Integrated Farming) और रूरल बैकयार्ड पोल्ट्री डेवलपमेंट के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाना। हम सहायक गतिविधियों से किसानों की आय में बढ़ोत्तरी करेंगे। अंशतः यह मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्यपालन के माध्यम से किया जाएगा। हम किसानों को उनकी भमि के उस हिस्से का उपयोग करने का प्रोत्साहन दे रहे हैं जो जोता हआ नहीं है, खासकर खेतों के बीच की सीमा वाला हिस्सा जिसका प्रयोग लकड़ी वाले वृक्ष उगाने एवं सौर सेल बनाने में किया जा सकता है। इसे अतिरिक्त बागवानी, कृषि वानिकी एवं समेकित कृषि  पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। 

स्पष्ट है कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधार कर उनके जीवन को खुशहाल बनाने के लिए हमारी सरकार कटिबद्ध है। रणनीतिक, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष सहित प्रायः सभी स्तरों पर किसानों की बेहतरी के प्रयास हो रहे हैं। हम उस नए भारत की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसका किसान अपनी बदहाली के लिए नहीं, बल्कि खुशहाली और समृद्धि के लिए जाना जाएगा। तभी सही अर्थों में भारत भी खुशहाल होगा। 

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