अरेबियन नाइट्स की कहानियाँ Arabian Nights story in Hindi -राजा शहरयार 

Arabian Nights story in Hindi

अरेबियन नाइट्स की कहानियाँ-राजा शहरयार Arabian Nights story in Hindi

प्राचीन ससानियन सल्तनत में एक महान राजा था। वह अपनी ताकत और समझदारी के लिए बहुत प्रसिद्ध था। उसकी बहादुरी तथा विशाल सेनाओं की दूर-दूर तक प्रशंसा होती थी। फारस से चीन तक उसका प्रभाव था। उस राजा के दो बेटे थे-शहरयार और शाहजमान। दोनों राजकुमार अत्यंत बहादुर, समझदार और साहसी थे। 

शहरयार को अपने पिता से विरासत में सिंहासन मिला। छोटे भाई शाहजमान ने उसकी बहुत सेवा की। शहरयार ने उसे एक बहुत बड़े इलाके का शासन सौंप दिया और वह समरकंद में रहने लगा। 

एक दिन शहरयार को शाहजमान की बहुत याद आने लगी। उसने अपने वजीर को बहुत से उपहारों के साथ शाहजमान के पास भेजा। वह उससे मिलना चाहता था, लेकिन वहां शाहजमान पर एक मुसीबत आई हुई थी। एक दिन उसे पता चला कि उसकी पत्नी उसके प्रति वफादार नहीं है, इसलिए उसने अपनी पत्नी को मार डाला। अब वह खुद को बहुत अकेला और उदास महसूस कर रहा था। 

काफी समय बाद शहरयार को अपने छोटे भाई शाहजमान से मिलकर बहुत खुशी हुई। वह शाहजमान की उदासी नहीं देख सकता था, लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह शाहजमान के लिए क्या करे। 

शहरयार शाहजमान को अपने साथ दावतों और शिकार पर ले जाने लगा, ताकि उसका मन बहल सके। 

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एक दिन शहरयार शिकार पर गया, तो शाहजमान महल में ही था। उसने शहरयार की पत्नी अर्थात् अपनी भाभी को देखा। वह भी उसकी पत्नी की तरह बेवफाई कर रही थी। यह देखकर उसने सोचा कि उसका भाई भी वही परेशानी झेल रहा है, अतः उसे इन बातों के लिए उदास नहीं होना चाहिए। 

जब शहरयार ने शाहजमान को खुश देखा, तो उसने इसका कारण पूछा। उसने शहरयार को अपनी पत्नी और भाभी के बारे में सब कुछ बता दिया। यह सुनकर शहरयार को बहुत गुस्सा आया। उसने अपनी रानी को धक्का देकर बाहर निकाल दिया और फांसी पर लटकाने का आदेश दे दिया। 

इसके बाद शहरयार ने कसम खाई कि अब वह किसी स्त्री पर भरोसा नहीं करेगा। उसने अपने वजीर को हुक्म दिया कि उसके लिए हर रोज एक 

नई स्त्री लाई जाए और अगले दिन उसे जान से मार दिया जाए। वजीर ने ऐसा करने से मना किया, लेकिन अंततः उसे राजा का हुक्म मानना ही पड़ा।

अब रोजाना एक सुंदरी को राजा की नई रानी बनाया जाता और अगली सुबह वजीर उसे मार डालता। यह सब जानकर वहां के लोग बहुत नाराज थे, लेकिन वे राजा का हुक्म मानने के सिवा कुछ नहीं कर सकते थे। 

वजीर की दो सुंदर बेटियां थीं-शहरजादी और दीनारजादी। शहरजादी बहुत समझदार और साहसी थी। उसने देखा कि उसके पिता रोजाना एक लड़की की जान लेने के बाद दुखी होकर वापस आते थे। उसने पिता से कहा, “मेरे पास एक योजना है। अगर आप मान जाएं, तो हम बहुत-सी लड़कियों को मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं।” 

जब वजीर ने योजना पूछी, तो शहरजादी ने कहा कि उसकी शादी राजा से करा दी जाए। यह सुनकर वजीर आश्चर्यचकित रह गया। वह अपनी ही बेटी की जान कैसे ले सकता था। शहरजादी बोली, “मैंने सारी योजना तैयार कर ली है। मैं इतनी अच्छी-अच्छी कहानियां जानती हूं कि उनसे किसी का भी मन बहलाया जा सकता है। मेरी हर कहानी सुबह होने से थोड़ा पहले आरंभ होगी और सुबह तक खत्म नहीं हो सकेगी।” 

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“भला राजा तुम्हें कहानी सुनाने के लिए क्यों कहेगा? उसे क्या पता कि तुम्हें कहानियां आती हैं?” वजीर ने कहा। 

“मैं दीनारजादी को साथ वाले कमरे में सुला दूंगी। इस तरह राजा को जगाए रखूगी। तब वह अगले दिन आपको मुझे मारने का हुक्म नहीं दे सकेगा।” शहरजादी ने कहा। 

वजीर ने अपनी बेटी को बहुत मनाना चाहा, पर उसने एक न सुनी। जब राजा ने यह बात सुनी, तो वह हैरान हो गया, “तुम्हारी अपनी बेटी? जानते हो, तुम्हें उसे भी मारना होगा।” वजीर कुछ नहीं बोला। वह अपनी बेटी के फैसले के आगे लाचार था। 

राजा ने वजीर की बेटी से शादी कर ली। उस रात शहरजादी ने राजा से कहा कि उसकी बहन साथ वाले कमरे में सोएगी। यह उसकी आखिरी इच्छा है। 

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जब सुबह होने वाली थी, तो दीनारजादी ने कहा, “बहन! तुम कितनी दिलचस्प कहानियां सुनाती हो। मुझे एक कहानी सुनाओ।” 

राजा को भी यह बात सुनाई दी। उसने हैरान होकर शहरजादी की ओर देखा और पूछा, “क्या तुम सचमुच कहानियां सुना सकती हो? मुझे कहानी सुनना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन अगर तुम्हारी कहानी अच्छी न हुई, तो मुझे गुस्सा आ जाएगा।” 

“महाराज! आप पहले सुनें तो सही।” शहरजादी ने कहा। 

शहरजादी ने कहानी सुनानी शुरू की। राजा सुन रहा था। सूरज निकल आया, लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई। राजा कहानी का अंत जानना चाहता था। उसने उस दिन शहरजादी को मारने का हुक्म नहीं दिया। वह चाहता था कि रानी जिंदा रहे और कहानी पूरी करे।। 

रानी की कहानियां सुबह के समय आधी हो जातीं। इस तरह राजा उसे अगले दिन भी जीने की मोहलत दे देता…एक और दिन…एक और दिन…। इस तरह उसे रानी की कहानियां सुनने का शौक हो गया। फिर वह रानी से प्यार करने लगा। शहरजादी बहुत समझदार और ईमानदार लड़की थी। यह देखकर वजीर को खुशी हुई कि उसकी बेटी अभी तक सुरक्षित थी और अब उसे बेगुनाह लड़कियों का खून नहीं करना पड़ेगा। इस तरह शहरजादी के साहस और बुद्धिमत्ता ने राज्य को बचा लिया। 

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अगर शहरजादी ऐसी तरकीब न सोचती, तो न जाने कितनी लड़कियों को राजा की रानी बनने के बाद अपनी जान से हाथ धोना पड़ता। वजीर को अपनी बेटी शहरजादी पर बड़ा गर्व था, जिसने उसे ज्यादा हत्याएं करने से बचा लिया। वह मन ही मन उसे दुआएं देता रहता था। 

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