रातो रात अमीर कैसे बने-रातोरात नहीं मिलती सफलता

रातो रात अमीर कैसे बने

रातो रात अमीर कैसे बने-रातोरात नहीं मिलती सफलता

“जिस कार्य को तुम करना चाहते हो, उसी में लगे रहो। अपनी बुद्धि के अनुकूल मार्ग को मत छोड़ो। सफलता जरूर मिलेगी, क्योंकि सफलता रातोरात नहीं मिलती।” -जॉन एन्जिलो

कोई भी रातोरात अमीर नहीं बन सकता। इसके लिए कठोर परिश्रम, लगन, प्रयास और अनेक तरह के उतार-चढ़ाव से गुजरने के बाद ही कामयाबी मिलती है। बिल गेट्स हों या प्रेमजी, शिव नाडर हों या करसन भाई, तेंदुलकर हों या सानिया मिर्जा, अमिताभ बच्चन हों या किरण मजूमदार, धीरूभाई अंबानी हों या लक्ष्मी मित्तल ऐसे ही अनेक नाम हैं जिन्होंने कामयाबी की बुलंदियों को छुआ, लेकिन किसी को भी रातोरात सफलता नहीं मिली। 

विवेक अमीर बनने के लिए कोई बिजनेस करना चाहता था। उसे उम्मीद थी कि बिजनेस से काफी जल्दी रुपये कमाए जा सकते हैं। वह अपने दोस्तों से कहता कि देखना मैं बिजनेस करके रातोरात करोड़पति बन जाऊंगा। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है। 

किसी भी बिजनेस को जमने में कुछ समय अवश्य लगता है। इसके साथ ही साथ अपनी पहचान बनाने के लिए कुछ वर्षों का समय भी जरूर लग जाता है। यदि कोई सोचे कि वह कंपनी शुरू करके रातोरात अमीर हो जाएगा, तो ऐसा होना संभव नहीं है। इसके लिए अनेक तरह की तैयारी करने की आवश्यकता होती है तब जाकर आप अमीर बन सकते हैं। 

अमीर बनने के लिए काफी कोशिश करनी पड़ती है। बाजार में दूसरों के उपभोक्ताओं को अपना उपभोक्ता बनाने के लिए जंग जैसी तैयारी करनी होती है। अपने प्रतिस्पर्धी को हर पग पर मात देने की कोशिश करनी पड़ती है। तब जाकर आप भीड़ में कुछ अलग दिखाई दे सकते हैं। इन सबके लिए आपको समय का इंतजार करना होगा। अपनी पहचान बनाना और कमाई करना, कंपनी को लाभ में लाना आदि अलग-अलग बातें हैं। 

विशेषज्ञों का मानना है कि आप कितना भी सर्वे या रिसर्च करके किसी नई चीज का बिजनेस करें। उसे अपनी पहचान बनाने में कुछ समय तो लग ही जाता है। हां, कुछ प्रॉडक्ट जल्दी कमाई देने लगते हैं पर कमाई देने और पहचान बनाने में फर्क होता है। चाहे आपके प्रॉडक्ट की गुणवत्ता कितनी भी अच्छी क्यों न हो, उसकी कीमत बाजार में मिलने वाले अन्य प्रॉडक्ट से कम क्यों न हो, ग्राहकों को यकीन दिलाने में कुछ तो समय लगता है। ग्राहक आपकी बातों पर तब तक विश्वास नहीं करेंगे जब तक वे उसे इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसके बावजूद ग्राहक में लोकप्रिय होने में समय तो लगता ही है। 

अमीर बनने वालों में आज तक ऐसा कोई नहीं मिला जिसने रातोरात सफलता हासिल की हो। कहा जाता है कि पहले इण्डियन आइडियल अभिजीत सावंत, ग्रेट लाफ्टर चैनल के चैम्पियन सुनील पाल, अमूल वायस ऑफ इण्डिया के इशमित को रातोरात सफलता मिल गई। जबकि यह सही नहीं है, इस सफलता को हासिल करने में उनकी कई वर्षों की मेहनत, लगन, प्रयास आदि की भूमिका महत्वपूर्ण थी, तभी वे फाइनल में जीत पाए। उन्होंने जीत हासिल करने के लिए सिर्फ वर्षों की तैयार ही नहीं की थी, बल्कि कई राउंड में उन्हें प्रतियोगिता में शामिल प्रतियोगियों को हराना पड़ा था। 

सपनों के बीज, मेहनत के बीज, प्रयास के बीज कर्म की मिट्टी में हम बोते हैं, वह समय के साथ एक सफलता रूपी पेड़ के रूप में मिलता है। जाहिर बात है कि बीज से पेड़ रातोरात नहीं बन सकता। कुछ वर्षों का समय जरूर लगता है। 

कोई चाहे इस बारे में कुछ भी कहे, इसे मानना ही पड़ेगा कि कोई भी रातोरात अमीर नहीं बन सकता। एवरेस्ट पर कोई एक दिन में चढ़ सकता है क्या? एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए चढ़ाई शुरू करने से पहले भी अनेक तरह की तैयारी करनी पड़ती है। 

विपुल की एक्टिंग में रुचि थी। वह हमेशा सोचा करता था कि उसकी एक फिल्म आ जाएगी तो वह रातोरात सुपरस्टार बन जाएगा। विपुल की सोच बिलकुल गलत थी। सुपरस्टार बनने के लिए उसे एक्टिंग सीखने की जरूरत थी। एक्टिंग एक दिन में नहीं सीखी जा सकती। इसके लिए कड़ी मेहनत, रिहर्सल, फिटनेस, वॉयस डिलीवरी, बॉडी मूवमेंट, डिसीप्लीन, पर्सनैलिटी आदि बातों पर ध्यान देकर उसे डेवलप करने की जरूरत होती है। 

सुपरस्टार बनने की तैयारी में विपुल को काफी समय देना होगा, तब जाकर उसे एक्टिंग के बारे में समझ आएगी। जब वह एक्टिंग सीख जाएगा, तो हीरो बन जाएगा, ऐसा नहीं है। उसे एक्टिंग सीखने के बाद फिल्मों में काम पाने के लिए स्ट्रगल करना होगा। डायरेक्टर व प्रोड्यूसरों के पास जाना होगा। बॉलीवुड में ऐसा कोई नहीं है जो विपुल के वहां पहुंचते ही उसे फिल्मों में चांस दे देगा।

फिल्मों में चांस मिलने के बाद फिल्म बनने में भी एक साल का समय लग जाएगा। फिल्म हिट होगी या नहीं यह कहा नहीं जा सकता। मान लीजिए फिल्म हिट हो गई तो विपुल की पहचान बन जाएगी पर इसे रातोरात सफलता मिली, यह कैसे कह सकते हैं। विपुल ने एक्टिंग सीखने में भी लंबा समय लगाया था। 

विपुल को जब फिल्म मिली तो उसे बनने में एक साल का समय लगा। उस समय को भी इसके साथ जोड़ा जाएगा। इस तरह से विपुल को कई साल संघर्ष करने के बाद सफलता मिली है। इतिहास गवाह है कि आज तक किसी को रातोरात सफलता नहीं मिली है। इसके लिए कई सालों की लगातार मेहनत व कोशिश की आवश्यकता होती है। __खेल हो या एक्टिंग, बिजनेस हो या फैक्ट्री, पढ़ाई हो या नुक्कड़ नाटक किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ना है, उसमें सफल होना है तो उसके लिए समय देना पड़ता है। उसकी तैयार करनी होती है। साधारण तैयारी द्वारा आप सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। पूरी तैयारी के लिए लंबा समय देना पड़ता है। अगर आप चाहते हैं कि बिना तैयारी किए, बिना समय दिए रातोरात अमीर बन जाएं तो यह किसी भी हालत में संभव नहीं है। 

अमीर बनने के मंत्र-कड़ी मेहनत 

“मेहनत से जी चुराना भी एक प्रकार की बीमारी है। जो गरीबी के चंगुल से मुक्त नहीं होने देना चाहती।” -नेपोलियन हिल्स

अमीर बनने के लिए आपको कड़ी मेहनत की आवश्यकता है। दूसरों से कई गुना अधिक मेहनत करके ही आप अमीर बन सकते हैं। दुनिया के धनी व्यक्तियों में से लक्ष्मी मित्तल का कहना है कि बहुत सारे लोग कड़ी मेहनत करते हैं। इसलिए आपको उनसे भी अधिक कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। तभी आप अमीर बन सकते हैं। 

किसी भी काम की सफलता इस बात पर निर्भर होती है कि आप कितनी कड़ी मेहनत करते हैं। कड़ी मेहनत करने वाले कभी अपने क्षेत्र में असफल नहीं होते। आप अपना काम करना चाहते हैं। अपने काम को ऊंचाई तक ले जाना चाहते हैं। अपने काम में सफल होना चाहते हैं तो कड़ी मेहनत ही आपको अपने लक्ष्य तक ले जाएगी। 

यदि आप सफल लोगों की बराबरी में पहुंचना चाहते हैं, तो आपको जी तोड़ मेहनत करनी पड़ेगी। औरों से अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। तब जाकर आपको सफलता मिलेगी। जॉर्ज बर्नार्ड शा का कहना है कि मैं नहीं चाहता था कि मेरा जीवन असफल हो इसलिए मैंने दो गुणा अधिक मेहनत की तब जाकर मुझे सफलता मिली।

अर्थ ऑफ चेस्टरफिल्ड का कहना है कि मेरी सलाह यह है कि तुम अपने मिनटों का ध्यान रखो। घंटे अपनी परवाह खुद कर लेंगे। चार्ल्स डार्विन का कहना है कि जो व्यक्ति एक घंटे का समय बर्बाद करने की जुर्रत करता है। वह जीवन के मूल्य को नहीं समझ पाया। 

हेलेना रूबन्स्टिीन का कहना है कि मैंने दिन में 20 घंटे काम किया। हर दिन जिसमें रविवार भी शामिल हैं। काम से जी चुराने वाले कभी भी 

सफलता का स्वाद नहीं चख सकते हैं। उनका समय रेत की तरह हाथ से फिसलता जाता है। अधिक कड़ी मेहनत सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाती है। आज जितने भी लोग अमीर बने हैं, उन्होंने दूसरों से कहीं अधिक मेहनत की है। 

टी-सीरिज के मालिक भूषण कुमार 14-15 घंटे कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी पत्नी दिव्या खोसला से जब मैं मिला तो उन्होंने अपने पति को वर्कोटोलिक बताया। दिव्या का कहना था कि उनकी इस आदत पर मैं फिदा हूं। यह उनकी सफलता का राज है। अमिताभ बच्चन 66 साल की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन आज भी वे 12 से 14 घंटे काम करते हैं। इंटरव्यू के दौरान जब मैंने उनसे पूछा कि उनकी सफलता का राज क्या है? तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, “कड़ी मेहनत।” रतन टाटा कहते हैं कि मेहनत के बिना आप सफलता का स्वाद नहीं चख सकते। अजीम प्रेमजी कहते हैं कि यदि इंसान के पास सपना, कड़ी मेहनत करने की ताकत और सीखने की प्रबल इच्छा हो तो वह सफलता हासिल कर सकता है। 

आप अमीर बनना चाहते हैं। इसके लिए आप बिजनेस करते हैं, लेकिन मेहनत नहीं करते हैं तो ऐसे बिजनेस से आपको लाभ नहीं मिलने वाला। क्योंकि बिना मेहनत के कामयाबी नहीं मिलती। बिना मेहनत के यदि बिजनेस चलता तो हर कोई बिजनेस खोलकर बैठ जाता और दुनिया का अमीर व्यक्ति बन जाता। 

निठल्ले बने रहना, काम के प्रति रुचि न रखना, मेहनत से जी चुराना, असफलता, निराशा व गरीबी की निशानी है। यदि आप इसे खत्म करना चाहते हैं तो कड़ी मेहनत करें। कड़ी मेहनत आपको उन्नति के शिखर पर ले जाती है। सफलता का मीठा फल खाना है तो कड़ी मेहनत का कड़वा चूंट पीना ही पड़ेगा। 

फ्लाइंग किंग के नाम से मशहूर मल्खा सिंह का कहना है कि जिंदगी में चैंपियन बनना है तो हर पल की योजना बना कर कड़ी मेहनत करना सीखना होगा। प्रत्येक खिलाड़ी को योजना बना लेनी चाहिए कि उसे कितने समय एक्सरसाइज, कंडीशनिंग और रनिंग करनी है। योजना के अनुसार उसे अभ्यास करना होगा। तभी वह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन सकता है। 

एक कहावत है कि मेहनत के बिना कुछ भी नहीं मिलता, भगवान भी नहीं। राल्फ वाल्डो एमर्सन कहते हैं कि सफलता निरंतर कड़ी मेहनत करने से मिलती है। लापरवाही से, आधे-अधूरे मन से किए गए काम से सफलता हाथ नहीं आती। माइकल एंग्लो कहते हैं कि अगर लोग यह जान जाएं कि मैंने अपने काम में निपुणता पाने के लिए कितनी ज्यादा मेहनत की है तो उन्हें मेरी सफलता को देख कर आश्चर्य नहीं होगा। 

बिना मेहनत के रुपये कमाने की बात सोचना बेवकूफ व आलसी लोगों का काम है। यदि आप भी कुछ ऐसा ही सोच कर बिजनेस शुरू कर रहे हैं तो आप कभी भी अमीर नहीं बन सकते। अमीर बनने के लिए आपको कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी। 

धनवान बनने के गुप्त रहस्य-गुस्से से बचें 

“जिस क्षण क्रोध मस्तिष्क पर अपना शासन जमा लेता है, उसी क्षण विचार-शक्ति शून्य हो जाती है।”  -एम. हेनरी

अमीर बनने के रास्ते में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। ऐसे में तनाव न पाल कर खुद को कूल रखने की आवश्यकता होती है। दुनिया के सफल व अमीर व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में शांति और धैर्य से काम लेते हैं। समस्याओं या परेशानियों का हल गुस्से या झगड़े से नहीं बल्कि बौद्धिक कौशलता और शांति से सुलझाते हैं। 

विशाल को गुस्सा बहुत आता था। वह गुस्से में बेकाबू हो जाता था। गुस्सा आने पर वह यह नहीं देखता था कि उस वक्त उसके सामने कौन है। वह बुरी तरह से चीखने-चिल्लाने लगता था। गालियां देने के साथ-साथ वह लोगों को भला-बुरा कहने से भी नहीं चूकता था। उसके गुस्से की आदत से उसके अधीनस्थ कर्मचारी उससे खफा रहते थे।

एक दिन किसी कारणवश वह अपने किसी कर्मचारी पर चिल्ला रहा था। तभी वहां उसका बॉस आ गया। बॉस ने जब उसे शांत करने की कोशिश की तो वह उन पर ही बिगड़ पड़ा। गुस्से की वजह से उसे यह भी याद न रहा कि वह किससे बात कर रहा। 

विशाल के द्वारा कहे गए अपशब्द बॉस को ठीक नहीं लगे। उन्होंने उसी समय विशाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। उनका मानना था कि जो व्यक्ति गुस्से में आकर पागलपन जैसी हरकतें करने लगे, उसे यह भी पता न चले कि उसके सामने कौन खड़ा है, ऐसा व्यक्ति गुस्से में कुछ भी कर सकता है। जब विशाल का दिमाग शांत हुआ तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने अपने बॉस से जाकर माफी मांगी, लेकिन बॉस ने उसे माफ नहीं किया। इस तरह गुस्से की वजह से विशाल को अपनी अच्छी-खासी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। 

यह कहावत शत-प्रतिशत सच है कि गुस्सा इंसान का सर्वनाश कर देता है। इतिहास में ऐसे अनेक किस्से भरे पड़े हैं। जिन्हें गुस्से की वजह से घर, राज्य या देश तक छोड़ना पड़ा था। बाईबल में कहा गया है कि जो क्रोध करने में विलम्ब करता है वह महान विवेक से सम्पन्न है, किन्तु जिसमें उतावलापन है वह मूर्खता का उपासक है। गुस्से की बजाय जो शांति और धैर्य से काम लेते हैं, उनके लिए अंग्रेजी में ‘कूल डूड’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है जिसका मतलब होता है धैर्यशील। 

क्रिएशंस ऑफ कॉमन सेंस के लेखक डॉ. सूसन क्रसर गुस्से को भावनात्मक विद्रोह करार देते हैं। वे कहते हैं कि जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से आहत होता है तो उसकी तकलीफ गुस्से के रूप में फूट पड़ती है, जबकि वे इस बात को भी शायद ही जानते हों कि उन्हें गुस्सा क्यों आया |

पायथागोरस कहते हैं कि गुस्सा मूर्खता से शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है। चीनी लोकोक्ति है कि गुस्से में कभी भी किसी पत्र का उत्तर नहीं देना चाहिए। प्लुटार्क कहते हैं कि गुस्सा समझदारी को घर से बाहर निकाल देता है और दरवाजे की चटखनी लगा देता है। 

डॉ. संदीप बोरा कहते हैं कि गुस्से के चलते मानसिक दबाव झेलने पड़ते हैं, वे चीजों को बेहतर बनाने की अपेक्षा बिगाड़ बैठते हैं और उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगता है। वे मानसिक रोग के भी शिकार हो जाते हैं। बोरा कहते हैं कि गुस्से का मैनेजमेंट आसानी से हो सकता है। गुस्से में गहरी-गहरी सांस लें या उल्टी गिनती गिनना शुरू कर दें। गुस्सा काबू में हो जाएगा। डॉ. बेरी नेक कहते हैं कि क्या आप नहीं जानते कि थोड़ा-सा प्यार बहुत बड़े गुस्से को छूमंतर कर देता है। 

गुस्सा करना एक बुरी आदत है। गुस्सा करने वाला व्यक्ति यह समझ नहीं पाता है कि वह कब-किस पर गुस्सा कर रहा है। क्योंकि किसी तरह के नुकसान की वजह से गुस्सा करने से उस नुकसान की भरपाई तो नहीं होती है लेकिन गुस्से की वजह से स्वयं का जरूर नुकसान हो जाता है।

अमीर बनने के रास्ते पर कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। उस पर चलते हुए कई तरह के लोगों से सामना होता है। यदि आप उनसे हमेशा गुस्से से पेश आएंगे तो वह आपको सहयोग देने की बजाय नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। इससे आप कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। इसलिए अपने गुस्से पर कंट्रोल रखें। 

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