चन्द्रमा की कहानी-चन्द्रमा की चमक कैसे खोई

चन्द्रमा की कहानी

चन्द्रमा की कहानी-चन्द्रमा की चमक कैसे खोई

चन्द्रदेव अन्यंत सुन्दर और गौर वर्ण के थे। वस्तुतः उन्हें अपने सौन्दर्य पर गर्व था। हाथ में गदा और कमल पुष्प लेकर, अपने रथ पर आरूढ़ होकर, प्रत्येक रात वह आकाश में भ्रमण किया करते थे। 

राजा दक्षप्रजापति की सत्ताईस पुत्रियाँ थीं। उन सबका विवाह चन्द्रदेव के साथ इस शर्त पर हुआ कि चन्द्र सभी के साथ समान व्यवहार करेंगे। उन्हें प्रसन्न रखने के लिए चन्द्र हर रात एक के पास जाते थे। रोहिणी सभी बहनों में सबसे सुन्दर थी और चन्द्रदेव को सर्वाधिक प्रिय थी। कोई भी यह कह सकता था कि उन्हें रोहिणी अधिक पसंद है क्योंकि वे जिस रात रोहिणी के पास जाते थे उस रात उनका तेज अत्यधिक होता था। शेष पत्नियों को रोहिणी से ईज़्या होने लगी। दुःखी होकर उन्होंने अपने पिता से शिकायत करी। राजा ने चन्द्र देव से कहा, “तुमने मेरी सभी पुत्रियों को समान प्रेम करने की प्रतिज्ञा करी थी पर तुम एक को शेष सभी से अधिक चाहते हो। अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने के कारण मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि तुम्हारी दीप्ति नष्ट हो जाएगी।” 

श्राप पाकर चन्द्र देव अत्यंत दुःखी हो उठे। उन्हें अपनी दीप्ति पर अत्यन्त गर्व था पर अब उनकी सुंदरता का भान किसी को नहीं होगा। चन्द्र देव ही जीवन रूपी अमृत बिखेरते थे जिसका पान कर शेष देव दीर्ध और शक्तिशाली जीवन प्राप्त करते थे। इस श्राप के कारण 

जीवन रूपी अमृत भी नष्ट हो गया। सभी देवताओं की शक्ति क्षीण होने लगी। वे ब्रह्मा के पास सहायतार्थ गए। 

ब्रह्मा ने कहा, “चन्द्र आप दस करोड़ “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप करें। इससे शिव भगवान प्रसन्न होंगे वही आपकी दीप्ति लौटा सकते हैं।” 

चन्द्रमा की कहानी

कोई उपाय न देखकर चन्द्र ने मंत्र जपना प्रारम्भ कर दिया। कई वर्षों तक कठिन तपस्या में बैठकर जप करते रहे। अंततः शिव ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और कहा, “तुम्हारी तपस्या से मैं प्रसन्न हुआ, वर माँगो।” । 

चन्द्रमा ने कहा, “प्रभु, मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपनी दीप्ति पा सकूँ।” शिव भगवान ने कहा, “तुम्हें महान् राजा दक्षप्रजापति ने श्राप दिया है। मैं उससे मुक्त तो नहीं कर सकता पर हाँ आंशिक रूप से आपकी दीप्ति वापस आ जाएगी। तभी से चन्द्र कुछ ही रातों में देदीप्यमान होते हैं। 

उनकी सत्ताइस पत्नियाँ आज सत्ताईस नक्षत्र के नाम से जानी जाती हैं। ऋग्वेद में भी ऐसा वर्णन है। ये सत्ताइस नक्षत्र एक पट्टे के रूप में धरती के चारों ओर स्थित हैं। चन्द्र का उदय हर रात एक-एक नक्षत्र में होता है और वह बारी बारी से अपनी हर पत्नी के साथ एक रात व्यतीत करते हैं। 

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