जिन्न की कहानी-व्यापारी और जिन्न 

जिन्न की कहानी

जिन्न की कहानी-व्यापारी और जिन्न 

बहुत समय पहले की बात है। किसी स्थान पर एक धनी व्यापारी रहता था। उसके पास बहुत धन-दौलत और माल-असबाब था। वह कई स्थानों पर व्यापार करके काफी धन कमा चुका था। 

एक दिन व्यापारी काम के सिलसिले में सुदूर स्थान की यात्रा पर गया। उसे रास्ते में एक रेगिस्तान को पार करना था, जहां दूर-दूर तक खाने के लिए कुछ नहीं मिलता था। इसलिए उसने अपने साथ कुछ बिस्कुट और खजूर रख लिए थे।

व्यापारी का काम खत्म होने पर वह उसी रेगिस्तान से होकर अपने घर वापस चल पड़ा। जब रास्ते में एक नखलिस्तान आया, तो उसने घोड़े से उतरकर वहां आराम करने का निश्चय किया। उसने अपने घोड़े को एक पेड़ से बांध दिया और खजूर खाकर उनके बीज इधर-उधर फेंक दिए। गहरी थकान के बीच मीठे खजूरों का स्वाद उसे बहुत अच्छा लगा। उसने काफी खजूर खा लिए थे। 

जिन्न की कहानी

थोड़ी देर बाद व्यापारी ने पानी से अपना हाथ-मुंह धोया। तभी अचानक उसके सामने एक विशाल और भयंकर जिन्न आ गया। उसके हाथ में एक तलवार थी। 

“तूने मेरे बेटे को मार दिया। अब तुझे इसकी कीमत चुकानी होगी। मैं तुझे मार डालूंगा।” जिन्न बोला। 

“लेकिन मैं आपके बेटे को कैसे मार सकता हूं। मैं तो यहां बैठकर अपना खाना खा रहा था।” व्यापारी ने कहा।

“तूने खजूर के जो बीज फेंके थे, उनमें से एक बीज मेरे बेटे की आंख में लगा और वह मर गया। अब तुझे भी अपनी जान देनी होगी।” जिन्न ने गुस्से से कहा।

व्यापारी बोला, “लेकिन मैं तो आपके बेटे को जानता भी नहीं था। मैं उसे क्यों नुकसान पहुंचाने लगा। आप मेरी जान बख्श दें।” 

व्यापारी ने जिन्न से बहुत विनती की, लेकिन सब व्यर्थ गया। जिन्न तो उसे मारने पर तुला था। 

जिन्न बोला, “तूने मेरे बेटे की जान ली है। मैं तुझे किसी कीमत पर नहीं छोडूंगा। अब अपने भगवान को याद कर ले।” 

व्यापारी बोला, “आप मुझे घर जाने दें, ताकि मैं अपनी पत्नी और बच्चों से मिल सकूँ। मुझे उन्हें अलविदा कहना है। मैं अपनी वसीयत लिखकर सबके लिए उचित व्यवस्था करना चाहता हूं, ताकि मेरे मरने के बाद किसी को कोई परेशानी न हो। फिर मैं एक साल बाद वापस आऊंगा। तब आप जो जी चाहे, मुझे सजा दे देना।” । 

जिन्न की कहानी

जिन्न को मनाना आसान नहीं था। उसने सोचा कि अगर यह आदमी चला गया, तो कभी वापस नहीं आएगा। लेकिन जब व्यापारी ने बार-बार वादा किया, तो उसने हामी भर दी। 

जिन्न बोला, “याद रखना, अगर तुम नहीं आए, तो मैं तुम्हारे शहर में आकर तुम्हारे पूरे परिवार को तबाह कर दूंगा।”

व्यापारी बोला, “मैं अपने वादे का पक्का आदमी हूं। ऐसी नौबत नहीं आएगी कि तुम्हें मेरे शहर आकर मेरे परिवार को तबाह करना पड़े। मैं अपने-आप अगले साल सही समय पर यहां हाजिर हो जाऊंगा।” 

यह सुनकर जिन्न वहां से चला गया। व्यापारी ने भारी मन से अपना सामान उठाया और अपने घर की ओर चल पड़ा। 

व्यापारी ने अपने घर पहुंचकर सबको यह घटना बताई, तो रोना-पीटना मच गया। सभी लोग घबरा गए। व्यापारी ने परिवार को बताया कि उसके पास अभी जीने के लिए एक साल बाकी है। 

इस दौरान उसने अपनी वसीयत लिख दी। सामान का बंटवारा करके परिवार की सुख-सुविधा का सारा प्रबंध कर दिया।

अंततः एक साल बीत गया और वह समय आ गया, जब व्यापारी को घर छोड़ना था। उसने अपने कफन के कपड़े को एक पोटली में बांधा और वहीं वापस चला गया, जहां जिन्न से मिलने का वादा किया था। लेकिन वहां उसने एक बूढ़े को एक हिरण के साथ बैठा पाया। 

जिन्न की कहानी

बूढ़ा बोला, “तुम इस खतरनाक जगह पर क्या करने आए हो?” 

व्यापारी ने बूढे को सारी बात बताई, तो वह हैरान रह गया। वह अपने हिरण को वहीं बांधकर बोला, “बड़ा अजीब मामला है। मैं देखना चाहता हूं कि इसके बाद क्या होगा।” अब बूढ़ा भी वहीं रुक गया। 

तत्पश्चात् वहां दो काले कुत्तों के साथ एक दूसरा बूढ़ा आया। उसके बाद तीसरा बूढ़ा आया, जिसके पास एक खच्चर था। अब सभी लोग जिन्न के आने का इंतजार करने लगे। वे इस मामले का नतीजा देखना चाहते थे। अचानक आसमान में काले बादल छा गए। जब बादल पास आए, तो सबने देखा कि जिन्न अपनी तलवार लिए खड़ा है। 

वह व्यापारी को मारकर अपने बेटे की मौत का बदला लेने आया था। तीनों बूढों ने उससे विनती की कि वह व्यापारी की जान न ले। 

बूढों ने उससे कहा, “जरा सोचो, यह आदमी अपना भरा-पूरा परिवार छोड़कर यहां तुम्हारे पास अपना वादा निभाने आया है। अगर इसकी जगह कोई दूसरा होता, तो वह कभी न आता। अगर तुम इसे शहर में खोजने जाते, तो कभी न खोज पाते, क्योंकि शहर बड़े होते हैं। यह उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह भी जा सकता था, लेकिन यह एक ईमानदार आदमी है। क्या इसने जान-बूझकर तुम्हारे बेटे की जान ली होगी। तुम हमसे कुछ भी मांग लो, लेकिन इसकी जान बख्श दो।”

जिन्न की कहानी

जिन्न बोला कि उन तीनों को एक-एक कहानी सुनानी होगी। अगर वे कहानियां उसे व्यापारी के मामले से ज्यादा दिलचस्प लगीं, तो वह उसे माफ कर देगा। 

पहले बूढ़े ने हिरण की तथा दूसरे बूढ़े ने दो काले कुत्तों की कहानी सुनाई। इस तरह जिन्न ने दोनों कहानियां सुनने के बाद व्यापारी को माफ कर दिया। जिन्न को वे कहानियां काफी पसंद आई थीं। वह खुशी से झूम उठा था, इसलिए उसने तीसरे बूढ़े से खच्चर की कहानी नहीं सुनी। 

तीनों बूढ़ों की दयालुता देखकर व्यापारी ने उन्हें धन्यवाद दिया और खुशी-खुशी अपने घर लौट गया। 

जिन्न की कहानी

जब वह अपने घर पहुंचा, तो उसके परिवार के सभी सदस्य उसे देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने तो यह मान लिया था कि जिन्न ने उसे मार डाला होगा और अब वे उसे कभी नहीं देख सकेंगे। लेकिन वह लौट आया था। सभी लोग उसे देखकर खुशी से फूले नहीं समाए।

व्यापारी ने अपने बेटों को समझाया, “देखो, जीवन में चाहे कैसा भी समय क्यों न आए, तुम्हें अपनी ईमानदारी और दयालुता को नहीं छोड़ना चाहिए। सच्चे इन्सान का तो अल्लाह भी मददगार होता है, अत: सच्चाई का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। मैं तो अपनी जान देने गया था, लेकिन उन बूढों ने मेरी जान बचा ली।” 

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