मछुआरा की कहानी | Story of fisherman

मछुआरा की कहानी

मछुआरा की कहानी | Story of fisherman

बहुत समय पहले की बात है। किसी जगह एक गरीब मछुआरा रहता था। वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों का पेट मुश्किल से भर पाता था। वह रोजाना अपने जाल को चार बार समुद्र में डालता था। 

एक दिन जब मछुआरे ने समुद्र में जाल डाला, तो एक मरा हुआ गधा जाल में फंस गया। उसने जाल को ठीक किया और फिर से डाला। इस बार बहुत-सा कचरा और गंदगी बाहर आ गई। उसने तीसरी बार जाल को साफ करके समुद्र में डाला। इस बार पत्थर, सीपियां और कीचड़ ही हाथ लगा। 

तब मछुआरे ने दुखी होकर चौथी बार समुद्र में जाल डाला। इस बार जाल में पीले तांबे का भारी बर्तन आ गया। वह ऊपर से बंद था। 

मछुआरे ने सोचा, ‘मैं इसे बेचकर अनाज खरीद लूंगा, लेकिन पहले यह देख लूं कि इसके अंदर क्या है।’ 

उसने बर्तन का ढक्कन खोलने के लिए बहुत जोर लगाया, लेकिन वह कई वर्षों से बंद था और पानी में रहने के कारण उसमें जंग लग गया था। लेकिन थोड़ी देर की मेहनत के बाद उस बर्तन का ढक्कन खुल गया। 

मछुआरा की कहानी

ढक्कन खुलते ही उसमें से काला धुआं उठने लगा, फिर एक जिन्न बाहर निकला। उसे देखकर मछुआरा डर गया। 

उसने पूछा, “तुम कौन हो? इस बर्तन में कैसे आए?” जिन्न बोला, “ओ मोटे! तमीज से बात कर, वरना जान से मार दूंगा।” 

मछुआरे ने कहा, “मैंने तेरी जान बचाई। तुझे आजाद किया और तू मुझे ही मार देगा, क्यों?” 

जिन्न बोला, “अब तू आराम से बता दे कि किस तरह मरना चाहता है। वैसे तेरी मौत पक्की है।” 

जिन्न ने मछुआरे को बताया कि उसकी जिन्नों के राजा से दुश्मनी थी, इसलिए उसे बर्तन में डालकर समुद्र में फेंक दिया था।

जिन्न बोला, “जब मैं बर्तन में बंद था, तो पहले साल सोचा कि जो भी व्यक्ति मुझे आजाद करेगा, मैं उसे ढेरों धन-दौलत दूंगा, लेकिन मेरी मदद करने कोई नहीं आया। फिर दो साल बाद सोचा कि जो मुझे इस बर्तन से छुटकारा दिलाएगा, मैं उसे किसी प्रदेश का राजा बना दूंगा, लेकिन किसी ने भी मुझे बोतल से आजाद नहीं किया।” 

काफी दिनों तक बर्तन में कैद रहने के कारण जिन्न बहुत कठोर और गुस्सैल हो गया था। 

वह बोला, “आखिर में मैंने तय किया कि जो मुझे आजाद करेगा, मैं उसे जान से मार डालूंगा।” 

मछुआरा की कहानी

जिन्न ने मछुआरे की विनती नहीं सुनी। अंततः मछुआरे ने कहा, “अच्छा, मुझे मार डालना, लेकिन पहले यह बताओ कि तुम इस छोटे से बर्तन में किस तरह गए थे?” 

मछुआरे की बात सुनकर जिन्न ने धुएं का रूप धारण किया और बर्तन में जाकर बोला, “देखो, मैं इस तरह अंदर गया था।” 

मछुआरे ने तुरंत उस बर्तन का मुंह बंद कर दिया। 

जिन्न चिल्लाता रहा, लेकिन मछुआरे ने उसे आजाद करने से मना कर दिया। अंततः जब जिन्न ने मछुआरे को न मारने और बहुत-सी मछलियां देने का वादा किया, तो उसने उसे आजाद कर दिया। मछुआरे ने सारी मछलियां राजा को उपहार में दे दीं। उस दिन के बाद मछुआरा गरीब नहीं रहा। 

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