पंचतंत्र की कहानियाँ Short Story-सांप और कौए 

पंचतंत्र की कहानियाँ Short Story

पंचतंत्र की कहानियाँ Short Story-सांप और कौए की कहानियाँ 

किसी गांव के पास बरगद का एक विशाल पेड़ था। कौओं के एक जोड़े ने वहां अपना एक घोंसला बनाया। पति-पत्नी उसमें खुशी-खुशी रहने लगे। जल्दी ही उनके अंडों से बच्चे निकल आए। लेकिन वे नहीं जानते थे कि उनके जीवन में एक बहुत बड़ा संकट आने वाला है। 

उस पेड़ की खोखल में एक बड़ा सांप रहता था। वह पेड़ों पर चढ़ कर पक्षियों के नन्हे बच्चों को खा जाता था। जब बच्चों के माता-पिता घर आते तो वे अपने घोंसलों को खाली देख कर डर जाते। कौए को जब यह बात पता चली तो वह (परेशान हो गया। 

पंचतंत्र की कहानियाँ Short Story-सांप और कौए 

एक बूढ़ा सियार कौए का दोस्त था। वह उस पेड़ के पास ही रहता था। कौए ने अपनी परेशानी उसे बताई। कौए ने कहा कि वह उसे बच्चों के बचाव के लिए कोई उपाय सुझाए। 

सियार ने कहा कि वे लोग दुष्ट सांप से लड़ नहीं सकते, इसलिए उन्हें कोई तरकीब लड़ानी होगी ताकि वे खतरे से पीछा छुड़ा सकें। उसने उन्हें सलाह दी, “तुम शहर से किसी धनी के घर चोरी करने जाओ। वहां से कोई गहना उठा लो लेकिन यह ध्यान रहे कि वहां तुम्हें ऐसा करते हुए कोई देख जरूर ले।” 

“अरे नहीं, तब हम क्या करेंगे? वह तो हमें मार देगा,” कौए ने कहा। 

“तब तुम्हें पूरी फुर्ती से उड़ कर इस पेड़ के पास वापस आना होगा। यहां तुम उस गहने को उस खोखल में गिरा देना, जहां यह दुष्ट सांप रहता है। उस वक्त तुम्हारे पीछे आने वाले लोग तुम्हें ऐसा करते हुए देख लें, इस बात का अवश्य ध्यान रखना,” बूढ़े सियार ने अपनी योजना को स्पष्ट किया। 

पंचतंत्र की कहानियाँ Short Story-सांप और कौए 

कौओं ने उलझन के साथ पूछा, “ऐसा करने से हमें क्या लाभ होगा? तुम्हारी कोई बात हमारी समझ में नहीं आ रही है। वैसे हमें विश्वास है; तुम जो कुछ करोगे वह हमारे हित में ही होगा।” 

सियार मुस्कुरा कर बोला, “अरे, तब तुम मजे से पेड़ की शाखा पर बैठ कर मजे से देखना कि इससे क्या होता है? बस एक बात ध्यान रखो; सीधी लड़ाई तो मूर्ख लड़ते हैं। शत्रु को युक्ति से मिटाना ही बुद्धिमानी है।” 

अगले ही दिन कौए ने शहर के लिए उड़ान भरी। कुछ औरतें झील पर नहा रही थीं। उनके कपड़े और गहने किनारे पर रखे थे और नौकर उनकी देखरेख कर रहे थे। कौए ने झट से एक भारी-सा हार चोंच में उठा लिया। 

नौकर ने देखा कि कौए ने सोने का हार उठाया है, तो वह उसके पीछे डंडा ले कर भागा। कौआ सीधा बरगद के पेड़ की ओर उड़ चला। नौकर भी उसके पीछे-पीछे आने लगा। 

कौए ने बरगद के पेड़ पर आ कर हार को सांप की खोखल में गिरा दिया। फिर वह पेड़ की शाखा पर जा कर बैठ गया। वह देखना चाहता था कि अब क्या होगा। जब नौकर वहां आया तो उसे खोखल में पड़ा हार दिखाई दिया। पर वहां तो एक बड़ा-सा काला सांप भी बैठा था। हार लेने के लिए 

सांप को वहां से हटाना जरूरी था। हार बहुत कीमती था और हार वापस ले जाने पर मालकिन से इनाम मिलने की उम्मीद थी इसलिए उसने तय किया कि वह अपनी लाठी की मार से सांप को खत्म कर देगा। 

वह डरते-डरते सांप की खोखल के पास गया। उसने अपनी लाठी के एक ही वार से दुष्ट सांप का काम-तमाम कर दिया। इसके बाद उसने हार उठाया और शहर लौट गया। 

सांप और कौए की कहानियाँ 

कौआ अपनी पत्नी के साथ पेड़ से नीचे आया। उसने अपने दोस्त सियार का धन्यवाद दिया क्योंकि उसी की युक्ति से उसके शत्रु का नाश हुआ था। इसके बाद सभी पक्षी वहां खुशी-खुशी रहने लगे। अब उनके नन्हे बच्चों के लिए किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं था। इस प्रकार सियार ने सबको सिखा दिया था कि जहां बल काम न आए, वहां बुद्धि से काम चलाना चाहिए।

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