पंचतंत्र की कहानियां इन हिंदी बुक-दयालु फाख्ता 

पंचतंत्र की कहानियां इन हिंदी बुक

पंचतंत्र की कहानियां इन हिंदी बुक-दयालु फाख्ता 

एक बार किसी जंगल में एक शिकारी घूम रहा था। उसका कोई परिवार या मित्र नहीं था क्योंकि वह बहुत ही जालिम और भयानक था। वह सारा दिन पशु-पक्षियों का शिकार करता। उसका सारा जीवन इसी तरह जंगल में जानवरों का शिकार करते हुए बीता था। वह केवल इतना जानता था कि उसे पशु-पक्षियों को मार कर अपना पेट भरना है। ऐसा करने से उसे खुशी भी मिलती थी। 

एक दिन उसने एक मादा फाख्ता को पकड़ा और पिंजरे में डाल दिया। अचानक तेज बारिश होने लगी, वह सिर छिपाने के लिए बड़ा-सा पेड़ तलाश करने लगा। वह उसी पेड़ के नीचे आराम करने लगा, जिस पर उस मादा फाख्ता का नर अपने घोंसले में बैठा था। वह अपने घोंसले में अकेला बैठा अपनी पत्नी के घर वापस आने की प्रतीक्षा कर रहा था।

 जब उसकी पत्नी ने आवाज दी तो उसने उसे पहचान लिया और उसकी पुकार का उत्तर दिया। वे दोनों बहुत ही नेक थे। फाख्ता ने अपनी पत्नी से कहा कि भले ही उनकी जान चली जाए पर उन्हें अपने पेड़ के नीचे आए मेहमान के लिए अपना फर्ज निभाना चाहिए। उसकी पत्नी ने भी ऐसा ही करने का अनुरोध अपने पति से किया। 

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उन्होंने देखा कि शिकारी भूखा था और ठंड के मारे कांप रहा था। फाख्ता ने उसका स्वागत किया और उसके लिए आग का प्रबंध करने के लिए वह उड़ चला। पास के गांव से जलती हुई एक टहनी लेकर वह आया, जिसे उसने 

शिकारी के सामने गिरा दिया। टहनियों व सूखे पत्तों के लिए उसने अपना घोंसला नीचे गिरा दिया। जब आग जल गई तो उसने स्वयं ही आग में छलांग लगा दी ताकि उसका मांस भुन कर शिकारी के लिए भोजन बन जाए। वह नहीं चाहता था कि मादा फाख्ता को वह शिकारी अपना भोजन बनाए। 

शिकारी नर फाख्ता के बलिदान को देख बहुत भावुक हो गया। उसने आज तक स्वयं कभी किसी को कुछ नहीं दिया था, जबकि यहां उस भले पक्षी ने उसके भोजन के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए थे। शिकारी का दिल पूरी तरह से बदल गया। उसे एहसास हुआ कि वह आज तक कितने बुरे तथा पाप से सने कर्म करता आ रहा है। उसने तय किया कि वह आने वाले समय में एक नेक इंसान बनेगा और ऐसे काम करेगा, जिनसे दूसरों को मदद मिल सके। उसने शिकार करने का सारा सामान वहीं फेंक दिया। फिर उसने पिंजरा खोल कर मादा फाख्ता को भी उड़ा दिया। मादा फाख्ता को अपने पति से बहुत प्यार था, इसलिए वह उसके बिना जीवित नहीं रहना चाहती थी। जब उसने देखा कि उसका पति जल कर मर गया है तो वह भी आग में कूद गई। कहते हैं कि वे दोनों ही स्वर्ग में रहने वाले जीवों के रूप में बदल गए, अर्थात् उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। 

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इस घटना के बाद शिकारी के जीने का ढंग बिल्कुल बदल गया था। वह एक तपस्वी बन कर आश्रम में रहने लगा। वह अपना सारा समय ध्यान, पूजा-पाठ तथा दूसरों की सेवा में बिताता। एक दिन उसने जंगल में आग लगी हुई देखी। उसे लगा कि अपने पापों का प्रायश्चित करने का एक ही तरीका है, वह आग में झुलसते पशु-पक्षियों की जान बचाए। उसने कई पशु-पक्षियों के प्राणों की रक्षा भी की। उन्हें बचाते हुए वह उस आग में जलकर स्वाहा हो गया। उसे स्वर्ग मिला। इस तरह एक भले और नेक फाख्ता जोड़े के कारण एक दुष्ट शिकारी तपस्वी बन गया।

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