सत्य घटना पर आधारित कहानियां-डेनियल लौट आया 

सत्य घटना पर आधारित कहानियां

सत्य घटना पर आधारित कहानियां-डेनियल लौट आया 

30 नवंबर, 2001 की सुबह एक पादरी डेनियल एक्शुक्कू और उसका दोस्त किंग्सले इरूका नाइजीरिया के ओवेरी कस्बे के निकट एक गांव में अपने पिता से मिल कर लौट रहे थे। डेनियल अपनी 20 साल पुरानी मर्सिडिज ड्राइव कर रहा था। मर्सिडिज तेज रफ्तार से चल रही थी कि अचानक उसके ब्रेक फेल हो गए। कार घाटी में गिरी और एक खम्भे से जा टकराई। डेनियल ने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी। अत: उसका सिर विंडस्क्रीन से टकराया और स्टियरिंग उसके सीने से टकराया। 

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डेनियल के दोस्त किंग्सले को भी झटका लगा लेकिन उसने सीट बेल्ट बांध रखी थी। उसे ज्यादा चोट तो नहीं आई लेकिन वह यह देखकर घबरा गया कि डेनियल की नाक से खून बह रहा था। डेनियल के सिर में गहरी चोट आई थी। थोड़ी देर में उसे खून की उल्टियां भी होने लगीं। उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल की गहन इकाई में ले जाया गया। 

उसकी पत्नी नेन्का भी वहां पहुंच गई। उसने देखा कि डेनियल अभी जिन्दा है, उसकी सांसें चल रही हैं। डेनियल ने मौत से लड़ते हुए नेन्का से कहा कि उसे उनके पारिवारिक डॉक्टर के अस्पताल में ले जाया जाए। वहां पहुंचने में करीब डेढ़ घण्टा लगा। इस दौरान उसने लगभग फुसफुसाते हुए अपनी पत्नी से कहा कि उसकी अतिम इच्छा यह है कि चर्च को अच्छी तरह से चलाया जाए। 

उसने चर्च संबंधी कुछ काम भी नेन्का को बताने की कोशिश की। लेकिन उसकी हालत इतनी खराब थी कि उसके शब्द उसके मुंह में ही रह गए और वह बेहोश हो गया। डेनियल को पारिवारिक डॉक्टर के अस्पताल ले जाया गया लेकिन वह डॉक्टर वहां मौजूद नहीं था। एक दूसरे डॉक्टर ने उसका परीक्षण किया और घोषणा कर दी कि डेनियल अब इस टनिया में नहीं है। वह तो रास्ते में ही मर गया था। 

नेन्का यह सुनकर स्तब्ध रह गई। लेकिन उसके जेहन में बाइबल में लिखा यह वाक्य कौंध रहा था कि औरत ने मत को फिर से जीवन दिया। वह डेनियल को जिन्दा देखना चाहती थी। उसका मन नहीं माना कि डेनियल मर चुका है | उसने ठान लिया कि कुछ करना है। वह पास में ही रह रहे अपने चाचा आकारान्कवा एम्युनल के घर गई और उनसे अपने पारिवारिक डॉक्टर को ढूंढ़ने को कहा। चाचा तब अपने डॉक्टर सेंट यूनिस क्लिनिक के डॉ. जोस्सी एन्यबूनिसा को लेकर आए। उसने भी डेनियल का डॉक्टरी परीक्षण किया और डेनियल की मौत की पुष्टि करते हुए मृत्यु का समय कार एक्सीडेन्ट के दिन रात 11.30 बजे निर्धारित किया। 

डॉक्टर ने डेनियल की मौत की रिपोर्ट लिखी और नेन्का से पूछा कि क्या वह शव को क्लिनिक के मुर्दाघर में रखवाना चाहेगी। लेकिन नेन्का ने मना कर दिया। इसके बजाय वह डेनियल के शव को डेनियल के पिता के घर और फिर उसके पास बने इकेडूरू अस्पताल के मुर्दाघर में ले गई। वहां के डॉक्टर ने भी डेनियल का परीक्षण किया। तब तक शुक्रवार की रात का एक बज चुका था। 

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उस मर्दाघर में कोल्ड स्टोरेज नहीं थे, इस कारण डेनियल के शव को केमिकल इंजेक्शन लगा दिए गए ताकि उसका शव सुबह तक सुरक्षित रहे। उसके शव को मुर्दाघर की टेबल पर लिटा दिया गया जहां दो और शव पडे हए थे। इसके बाद सब सोने चले गए। 

उसके बाद से अनहोनी घटनाओं का सिलसिला शुरु हुआ। मुर्दाघर के इचार्ज को मुर्दाघर की ओर से चर्च की प्रार्थनाओं की आवाजें आने लगीं। वह उठा और यह जानने के लिए मुर्दाघर के भीतर गया कि आखिर कौन वहां रह गया। लेकिन जैसे ही वह मुर्दाघर के अन्दर गया, आवाजें आनी बन्द हो गईं। वहां मृत तीन लोगों के सिवाय कोई भी नहीं था। उसने मुर्दाघर के चारों ओर चक्कर लगा कर देखा कि कहीं वहां तो कोई नहीं है। लेकिन उसे कोई भी दिखाई नहीं दिया। वह आश्चर्य में पड़ गया। फिर यह सोच कर कि शायद उसका भ्रम था, वह फिर सो गया। अभी गहरी नींद आई भी नहीं थी कि उसे संगीत और तालियां बजाने की आवाजें आईं। वह फिर मुर्दाघर के अन्दर गया, आवाजें फिर बन्द हो गईं। अब उसे चिंता होने लगी। वह फिर सोने गया लेकिन जब तीसरी बार आवाजें आईं तो वह घबरा गया। 

इस बार वह सीधा डेनियल के पिता के घर गया। वहां जाकर उसने डेनियल के पिता से कहा कि जब से उनके बेटे का शव मुर्दाघर में आया है, अजीबोगरीब घटनाएं हो रही हैं और वह सारा किस्सा सुना दिया। डेनियल के पिता ने उसे दिलासा दी कि उसका बेटा ईश्वर का भक्त था, इसीलिए ऐसा हो रहा होगा। डेनियल का शव उसी मुर्दाघर में शनिवार को दिन भर पड़ा रहा। पर कोई और घटना नहीं हुई। इससे नेन्का का यह विश्वास और दृढ़ हो गया कि उसका पति फिर जिन्दा हो जाएगा। उसने सबसे कहा कि उसके पति के शव को ओनित्सा के चर्च में ले जाया जाए जहां रेन्हार्ड बोन्के उपदेश देने वाले हैं। डेनियल के पिता ने उसे समझाया कि डेनियल मर चुका है। अब ऐसा करने से कोई फायदा नहीं है। पर नेन्का अड़ी रही। तब डेनियल के पिता ने कहा, ‘अच्छा, मैं उसके शव को सात बार बाइबल की किताब से थपथपाऊंगा। अगर इस पर भी वह नहीं उठा तो समझ लेना कि डेनियल मर गया है और अब कभी नहीं लौटेगा।’

डेनियल के पिता ने ऐसा किया, लेकिन डेनियल के शव में कोई हरकत नहीं हई। फिर भी नेन्का नहीं मानी। वह जिद पर अड़ी रही कि डेनियल के शव को बोन्के की प्रार्थना सभा में ले जाया जाए। डेनियल के पिता ने सोचा कि अगर ऐसा नहीं किया तो जिंदगी भर नेन्का उसे दोष देती रहेगी। इसलिए उसने डेनियल के शव को रविवार 2 दिसम्बर को बोन्के की प्रार्थना सभा में ले जाने का विचार किया। 

जब वे शव को ले जाने लगे तो मुर्दाघर का इंचार्ज अड़ गया। उसने कहा कि मुर्दाघर से कोई शव बाहर गया तो उसके लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी। आखिर वह इस बात पर राजी हुआ कि शव को नए कपड़े पहना कर ताबूत में बंद कर बिना किसी को बताए ले जाया जाए और वापस यहीं लाकर रखा जाए। 

डेढ़ घण्टे में रास्ता तय कर वे लोग डेनियल के शव को ताबूत में लेकर ओनित्सा के चर्च में पहुंचे। लेकिन वहां जब सिक्योरिटी गार्ड्स ने देखा कि कुछ लोग एक ताबूत लेकर चर्च में आ रहे हैं तो उन्होंने उन्हें रोक दिया और चर्च प्रांगण तुरंत छोड़ने को कहा। नेन्का उनके सामने गिड़गिड़ाई कि उसे अपने पति के शव को अंदर ले जाने दें। आखिर पसीज कर सिक्योरिटी गार्ड्स ने ताबूत खोलकर देखा कि उसमें शव ही है या कोई बम तो नहीं है। तब उन्हें अन्दर ले जाने की अनमति दे दी गई। ताबूत खोलकर शव को बच्चों के कक्ष में लिटा दिया गया और वहां गार्ड्स उसके आसपास खड़े हो गए। 

इस सबके बारे में रेन्हार्ड बोन्के को कुछ भी पता नहीं था। वे मुख्य हॉल में सीढियों पर चढ कर अपना उपदेश देते रहे। इसी दौरान गार्ड्स ने देखा कि शव का पेट थोडा हिला। उन्होंने गौर से देखा कि शव सांस लेने की कोशिश कर रहा है। तुरंत उन्होंने सबको बताया और लोगों ने शव के हाथ के दस्ताने, मौजे, कमीज उतार दी और उसके पूरे शरीर की मसाज करने लगे। एक पंखा भी वहां लगा दिया जिससे उसे खुली हवा मिल सके। 

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आखिर दो दिन बाद रविवार की शाम को सवा पांच बजे डेनियल ने आंखें खोली। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। डेनियल को इस कारण वहां से उठाकर चर्च सेंक्चूअरी ले जाया गया। वहां पहली बार डेनियल धीरे-धीरे बोला ‘पानी-पानी । उसे पानी पिलाया गया और फिर गर्म चाय दी गई। उस समय वह किसी को पहचान नहीं पा रहा था। लेकिन शाम ढलते-ढलते वह सामान्य होता गया। 

यह घटना ऐसी हैरतअंगेज है कि यकीन करना मुश्किल है। लेकिन सैकड़ों लोगों ने देखा। डेनियल बुरी तरह घायल था, उसे घंटों ताबूत में बंद रखा गया। दो दिन तक उसने सांस नहीं ली थी, उसके हृदय ने काम करना बंद कर दिया था। उसे घातक रसायनो का इजेक्शन दिया गया था। इसके बावजद वह फिर से जिन्दा हो गया। यह एक चमत्कार है और इस चमत्कार का श्रेय उसकी विश्वास का जाता है कि डानयल फिर जिन्दा हागा या फिर भगवान डेनियल की अगाध श्रद्धा थी, कौन जाने। 

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