SSC MTS descriptive book in hindi |Model question paper-31 to 35

SSC MTS descriptive book in hindi

SSC MTS descriptive book in hindi |Model question paper-31 to 35

Question list- प्रश्न-1. ‘स्टैंड अप इंडिया’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप सुधीर बंसल हैं। आप स्नातक I में विषय (संकाय) परिवर्तन के सम्बन्ध में प्राचार्य को आवेदन-पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए 

प्रश्न-2. आप मध्य प्रदेश सरकार के सचिव हैं। आप पदोन्नति के संबंध में शासनादेश संबंधी पन्न लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप भारत सरकार के सचिव हैं। आप किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति के संबंध में राजपत्र लिखिए।

प्रश्न-1. ‘भारत में ई-गवर्नेस’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप किसी राज्य सरकार के मुख्य सचिव के रूप में समाज कल्याण विभाग से अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों संबंधी सूचना की जानकारी हेतु एक पत्र लिखें। 

प्रश्न-1. ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी चुनौती’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप शिवम शुक्ला हैं एवं जबलपुर के एक महाविद्यालय में स्नातक के छात्र हैं। आप प्राचार्य को नियमगत दण्ड की माफी हेतु एक आवेदन पत्र लिखिए। 

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प्रश्न-1. ‘स्टैंड अप इंडिया’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : स्टैंड अप इंडिया

भारत में रोजगार सृजन एवं उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने 5 अप्रैल, 2016 को स्टैंड अप इंडिया नामक योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति और महिलाओं को नये उद्योगों को स्थापित करने में वित्तीय सहायता प्राप्त कराई जायेगी। स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत् केन्द्र सरकार द्वारा 10 लाख से 1 करोड़ तक का ऋण प्रदान किया जायेगा, ये उद्यम विनिर्माण, सेवा या व्यापार से संबंधित हो सकते हैं। उद्यम के मामले में 51 प्रतिशत शेयरधारिता व नियंत्रक हिस्सेदारी अनुसूचित जाति, अनुसूचति जनजाति या महिला के पास होनी चाहिए। 

‘स्टैंड अप इंडिया’ ‘स्टार्ट अप इंडिया’ का महत्त्वपूर्ण घटक है। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक बैंक शाखा द्वारा उपर्युक्त दोनों श्रेणियों (महिला और एस.सी./एस.टी) प्रत्येक को कम से कम एक-एक उद्यमी को उनकी उद्यम परियोजनाओं हेतु ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकारी और निजी सभी बैंकों को इसके तहत प्रतिशाखा न्यूनतम दो उद्यम परियोजानाओं को समर्थन उपलब्ध कराना होगा। 

इस योजना के अंतर्गत कार्यशील पूंजी के आहरण हेतु डेबिड कार्ड (रुपे कार्ड) ऋण प्राप्तकर्ता को प्रदान किया जायेगा। एन. सी. जी. री. सी के माध्यम से ऋण गारंटी के लिए 5000 करोड़ रुपये के कोष का निर्माण एवं ऋण प्रशिक्षण आवश्यकताओं, तथा ऋण को सुविधाजनक बनाने, तथा ऋण लेने वालों को व्यापक समर्थन किया जायेगा। वेब पोर्टल की सुविधा प्रदान की गयी है, जिसके तहत योजना का हिस्सा बनने के साथ-साथ सहायत्ता भी दी जायेगी। इस योजना के अर्हता हेतु प्रमाणन औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग से लेना होगा। 

‘स्टैण्ड अप योजना’ वंचित वर्गों मसलन एस.सी./ एस. टी. और महिला के लिए शुरू की गयी है, जिससे की देश की आर्थिक एवं सामाजिक विकास में सभी व्यक्तियों को बराबर भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इससे देश का विकास तीव्र गति से होगा। बड़ी आबादी संसाधन के रूप में परिवर्तित होगी। नये-नये उद्यमों के विकास से रोजगार की संख्या बढ़ेगी एवं नये-नये अवसर पैदा होंगे। देश की बेरोजगारी में कमी आयेगी। 

बाजार की गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका बढ़ने से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, इसलिए वह अपने परिवार या पत्ति के ऊपर निर्भर नहीं रहेंगी। इससे महिला सशक्तीकरण होगा। वही एस. सी./एस. टी. की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने से उनका महत्व आर्थिक समाज की मुख्यधारा में शामिल होगा। 

2015 में नास्काम द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष में महिला उद्यमियों का आर्थिक गतिविधियों में हिस्सा गत वर्ष से लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। देश में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के तहत् ‘इंडिया एस्पिरेशन फंड’ और सिडबी मेक इन इंडिया लोन फॉर इंटरप्राइजेज नामक दो महत्त्वपूर्ण कोषों का निर्माण किया गया हैं। 

निष्कर्षः- यह योजना समाज और राष्ट्र के सभी तबकों का कायाकल्प कर सकती है। खासतौर से ‘स्टैण्ड अप’ वंचित वर्गों को मुख्या धारा से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान सुनिश्चित कर सामाजिक न्याय के साथ-साथ विकास को तीव्र कर सकती है। 

प्रश्न-2. आप सुधीर बंसल हैं। आप स्नातक I में विषय (संकाय) परिवर्तन के सम्बन्ध में प्राचार्य को आवेदन-पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय, रायपुर।

विषयः विषय (संकाय) परिवर्तन हेतु निवेदन 

महाशय, 

उपर्युक्त विषय के अंतर्गत मेरा निवेदन है कि कक्षा 12वीं में विज्ञान संकाय में अधिक अंक प्रतिशत आने के कारण आगे मैं बी.एस.सी. करना चाह रहा था, परंतु एक सप्ताह की कक्षाएँ पूरी करने पर; मुझे यह विषय कठिन तथा अरूचिकर महसूस हो रहा है। अपने भविष्य को देखते हुए मैं बी.एस.सी. की जगह बी.ए. लेकर कला-संकाय में स्नातक करना उचित समझ रहा हूँ। 

मेरो मनोदशा का अवलोकन करते हुए कृपया मुझे विषय परिवर्तन की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा करें। 

इसके लिए मैं आजीवन आपका आभारी रहूँगा। 

प्रार्थी : सुधीर बंसल 

कक्षा – बीएसी 

अनुक्रमांक – 187 

दिनांक : 24.12.2016 

प्रश्न-1. ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए 

उत्तर : प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रधानमंत्री ने 9 जून 2016 को गर्भवती महिलाओं के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से सुरक्षित मातृत्व योजना का शुभारम्भ किया। इस योजना का उद्देश्य मातृत्व मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर में कमी के साथ कुपोषण से मुक्ति दिलाना है। इसके तहत् प्रत्येक माह की निश्चित 9 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक और गुणवता युक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करना सुनिश्चित किया गया। गर्भवती महिलाओं को उनकी गर्भावस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही की अवधि के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जायेगा। 

इस योजना का उद्देश्य गुणवता पूर्ण प्रजनन एवं जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य रणनीति के तहत निदान तथा परामर्श सेवाओं सहित प्रसव पूर्व देखभाल की कवरेज के लिए परिकल्पना की गई हैं। इसके तहत प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा दूसरी या तिसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं को कम से कम एक प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित करना हैं। प्रसव पूर्व जाँच के दौरान, सभी उपयुक्त नैदानिक सेवाएँ उपयुक्त नैदानिक स्थितियों के लिए जाँच कोई भी नैदानिक स्थितियाँ जैसे की रक्ताल्पता , गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप, गर्भविधि आदि का उचित प्रबंध करना है। 

इसके तहत उन गर्भवती महिलाओं को जो किसी भी कारण से अपनी प्रसव पूर्व जाँच नहीं करा पाती हैं, उन्हें अतिरिक्त अवसर प्रदान करना, साथ ही प्रसूति सहायता को विस्तृत करना है। कुपोषण से पीड़ित महिलाओं में रोग का जल्दी पता लगाने, पर्याप्त और उचित प्रबंधन पर विशेष जोर देना है। किशोर और जल्दी गर्भ धारण पर विशेष ध्यान देना क्योंकि ऐसे गर्भधारण में जोखिम की ज्यादा संभावना होती हैं। 

यह योजना देश के तीन करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल करने के लिए शुरू किया गया है, इस अभियान के तहत लाभार्थियों को महीने की 9वीं तारीख को प्रसव पूर्व देखभाल जांच एवं दवाओं का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जायेगा। इसके लिए प्रधानमंत्री ने निजी एवं सरकारी दोनों स्तर के डॉक्टरों से आह्वान किया है।

इन सेवाओं को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध कराया जायेगा। इस योजना का लक्ष्य सभी गर्भवती महिलाओं तक पहुँचना है, पर विशेष रूप से यह प्रयास होगा की जिन्होनें इन सेवाओं का लाभ नहीं उठाया है उनपर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए एवं उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं तक पहुँच सुनिश्चित किया जाए। 

इसके लिए एकल खिड़की प्रणाली का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि पी एम एस एम ए क्लीनिक आने वाली सभी गर्भवती महिलओं को जाँच का न्यूनतम पैकेज (गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान अल्ट्रासांउड सहित) तथा दवाएं जैसे की आई एफ ए सप्लीमेण्ट, कैल्शियम सप्लीमेंट आदि प्रदान की जायेगी। गर्भवती महिलाओं को मातृ एवं बाल सरंक्षण कार्ड तथा सुरक्षित मातृत्व पुस्तिकाएं दी जाएगी। 

वर्तमान में बढ़ती शिशु एवं मातृत्व मृत्यु दर पर काबू पाने में यह योजना मददगार होगी। साथ ही माता एवं बच्चे को स्वास्थ्य का समुचित प्रबंधन करेगी। यह माताओं की प्रसव परिस्थितियों में बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की ओर उठाया गया व्यापक कदम है, जिससे माताएं एवं बच्चे कुपोषण रहित एवं स्वस्थ हो सकें। 

प्रश्न-2. आप मध्य प्रदेश सरकार के सचिव हैं। आप पदोन्नति के संबंध में शासनादेश संबंधी पन्न लिखिए। 

उत्तर :

पत्र संख्या – 76/426/300 

दिनांक 21.10.2016 

मध्य प्रदेश सरकार, 

शिक्षा मंत्रालय, 

नई दिल्ली। कार्यालय आदेश शासनादेश से शिक्षा विभाग के निम्नांकित अधिकारियों/ कर्मचारियों का वर्तमान पद खण्ड शिक्षा अधिकारियों का पद वेतनमान [10,000 2000-22,000 से पदोन्नति होकर पद-जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्ति वेतन-श्रृंखला- 20,000-5000-35,000 में पदोन्नत किया जाता है: 

1.श्री संदीप वर्मा पुत्र श्री मनोज वर्मा, जिला जबलपुर में।

2. श्री नीतिश ठाकुर पुत्र श्री सुरेश ठाकुर, जिला कटनी में।

3. श्री दशरथ चंडाकर पुत्र श्री दिनेश ठाकुर, जिला मंडला में। 

प्रतिलिपि, सूचनार्थ- आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित है

1. निदेशक, शिक्षा-भाषा विभाग

2. श्री संदीप वर्मा

3. श्री नीतिश ठाकुर

4. श्री दशरथ चंडाकर 

हस्ताक्षर

अ.ब.स.

सचिव 

प्रश्न-1. ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 

भारत प्राचीन काल से लेकर आज तक एक कृषि प्रधान देश बना हुआ है। देश के संपूर्ण कार्य बल का 48.9% कृषि क्षेत्र में संलग्न है, वहीं जीडीपी में इसका योगदान का 14 प्रतिशत के करीब है। अतः आर्थिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह अत्यन्त आवश्यक है कि हम अपने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनायें। वर्तमान में देश के किसानों एवं कृषि दोनों की स्थिति दयनीय है। एक तरफ जहां कृषि के अलाभकारी व्यवसाय होने के कारण किसान स्वयं ही कृषि कार्य छोड़ रहे है, वहीं दूसरी ओर अतिवृष्टि, अनावृष्टि जलभराव और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की मार भी किसानों की कमर तोड़ देती है। 

ऋणजाल और उसके लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण, किसान न सिर्फ आत्महत्यायें कर रहे हैं, बल्कि छोटे किसान खेतिहर मजदूर बनने या फिर औद्योगिक संस्थानों में जाकर मजदूरी करने को विवश हो रहे हैं। 

वर्तमान सरकार इन्हीं चुनौतियों को मद्देनजर रखते हुए 13 जनवरी, 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मंजूरी दे दी। यह किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई हानि को किसानों के प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक कम करेगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत, किसानों को बीमा कम्पनियों द्वारा निश्चित, खरीफ की फसल के लिए 2% प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होगा। इसमें प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब हुई फसल के खिलाफ किसानों द्वारा भुगतान की जाने वाली बीमा का प्रीमियम को बहुत निम्न रखा गया है। जिनका प्रत्येक स्तर का किसान आसानी से भुगतान कर सके। यह योजना न केवल रबी और खरीफ की फसलों को बल्कि वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करती है। वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए किसानों को 5% प्रीमियम का भुगतान करना होगा। 

ऐसे में वर्तमान सरकार द्वारा प्रारम्भ की गयी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पुरानी खामियों को दूर करते हुए किसानों के कल्याण एवं कृषि सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास के रूप में नजर आती है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की कई नवाचारी पहलों में से एक है। इसमें प्रौद्योगिक उपयोगों को बढ़ावा दिया गया है। हालांकि इसमें यह चुनौतियाँ भी है कि इसमें किसानों की इन तकनीकी अनुप्रयोगों के संबंध में कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है, जिससे कुछ तत्कालिक समस्याएँ उभर रही हैं। परन्तु इसका निराकरण करना कोई कठिन कार्य नहीं होगा। 

फिलहाल इस योजना में बड़े या छोटे स्तर के किसानों के लिए अलग वर्गीकरण नहीं है, लेकिन बेहतर यहीं रहता कि इस पर भी ध्यान दिया जाये। इन सब बातों के अलावा इस योजना की सफलता के लिए केन्द्र व राज्य के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी। क्योंकि राज्यों को न केवल प्रीमियम सब्सिडी का आधा भार वहन करना होगा अपितु योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी की जिम्मेदारी मुख्यतः राज्य सरकारों पर ही है। अत: इस कार्यक्रम की आपेक्षित सफलता के लिए बेहतर केन्द्र-राज्य सहयोग की आवश्यकता होगी। 

प्रश्न-2. आप भारत सरकार के सचिव हैं। आप किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति के संबंध में राजपत्र लिखिए। 

अनुभाग-6 में प्रकाशनार्थ

उत्तर: 

राजपत्र भाग -3, अनुभाग-6

शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार,

नई दिल्ली दिनांक 25 जुलाई, 2016 

अधिसूचना

श्री संदीप शुक्ला आई.ए.एस. जो वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार में पद जिलाधीश, जिला जबलपुर मध्यप्रदेश में कार्यरत हैं। जिन्हें दिनांक 30.7.2016 से शिक्षा मंत्रालय में अवर सचिव के रूप में प्रतिनियुक्त किया जाता है। 

हस्ताक्षर अ.ब.स. 

सचिव 

भारत सरकार

अधिसूचना संख्या 45/9/300

उपर्युक्त अधिसूचना की प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ प्रेषित है

1. स्थापना शाखा, शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली।

2. कोषाधिकारी, नई दिल्ली।

3. मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश सरकार, भोपाल।

4. श्री संदीप शुक्ला आई.ए.एस. मध्यप्रदेश सरकार।

5. प्रबंधक, मुद्रणालय, नई दिल्ली। 

प्रश्न-1. ‘भारत में ई-गवर्नेस’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर: भारत में ई-गवर्नेस ई-गवर्नेस को डिजिटल प्रशासन या ऑन-लाइन प्रशासन भी कहा जाता है। इसका तात्पर्य इस बात से है कि सरकार द्वारा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग नागरिकों, व्यवसायियों और अन्य सरकारी अवयवों के बीच सुचनाओं और सेवाओं के विनिमय के लिये किया जाता है। ई-गवर्नेस का इस्तेमाल विधायिका, न्यायापालिका या कार्यपालिका द्वारा आन्तरिक कार्यकुशलता को बढ़ाने, सरकारी सेवाओं के उत्तम संचालन-परिचालन या प्रजातांत्रिक प्रशासन के सफल संचालन के लिए किया जा सकता है। 

ई-प्रशासन का वितरण सरकार से नागरिक या सरकार से उपभोक्ता, सरकार से व्यवसाय और सरकार से सरकार को है। ई-प्रशासन से उम्मीद की जाती है कि कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होगी, सुगमता बढ़ेगी, प्रशासन में पारदर्शिता आयेगी और सरकारी सेवाओं तक जनता की पहुंच में सुविध होगी।

ई-प्रशासन को ऑन-लाइन प्रशासन या इन्टरनेट आधारित प्रशासन समझा जाता है, अनेक गैर इन्टरनेट आधारित प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जा सकता है, जैसे टेलीफोन, फैक्स, एसएमएस तथा ब्लूटूथ अन्य प्रौद्योगिकी में शामिल हैं। 

ई-प्रशासन पोषक विकास के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास तथा प्रयोग को प्रोत्साहित करता है। यह राष्ट्रीय सरकारों, क्षेत्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय तथा बहुदेशीय विकास संगठनों, संयुक्त राष्ट्र की ऐजेंसियों, शैक्षिक और शोध संस्थाओं, सिविल सोसाइटी समूहों और निजी क्षेत्रों के बीच पारस्परिक सहयोग को बढ़ाने में सुविधायें प्रदान करता है। यह जागरूकता बढ़ाकर, क्षमता का सृजन कर, तकनीकी सुझाव तथा सलाह देकर, शोध तथा विकास द्वारा, ज्ञान का आदान-प्रदान कर तथा भागीदारियां कायम कर यह इस कार्य को करता है। इसके द्वारा सरकार इन्टरनेट पर सूचनायें तथा सेवायें प्रदान करती है, जिससे नागरिकों को सरकार से सम्पर्क करने का मौका प्राप्त होता है, जो एक दशक पहले उपलब्ध नहीं था। इससे अनेक लाभ है:- जैसे सरकार और नागरिकों के बीच वृहत् सूचनाओं का आदान-प्रदान, ई-मेल की आसान सुविधा से सरकार से बराबर सम्पर्क साधने का अवसर नागरिकों को मिल जाता है। इन्टरनेट के प्रयोग से नागरिकों को अवश्य ही सरकार से संपर्क बनाने में सुविधा होती है। इसके द्वारा उद्योग-उन्मुख सेवायें सरकारी और निजी ग्राहकों को प्राप्त हो जाती है। विशेषज्ञों के जरिये ग्राहकों और स्टेक-होल्डरों में विश्वसनीयता बढ़ती है। ई-प्रशासन न केवल उत्पादकता संभावनाओं को बढ़ाता है।, बल्कि भ्रष्टाचार के मूल कारणों को भी दूर करने में मदद पहुंचाता है। इसके द्वारा नागरिकों को प्रमुख सुविधाओं औद्योगिक विकास, रोजगार, आंकड़ा संरक्षण तथा मास-मीडिया को नियमित करने में सहयोग मिलता है। 

लोगों के पास इन्टरनेट आदि की पर्याप्त सुविधायें प्राप्त नहीं है। और उसकी समस्याएं काफी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में सरकार के ई-प्रशासन से समुचित लाभ सम्भव नहीं है। 

बहुत कम लोग ही वेब या ई-मेल के जरिये सरकार से सम्पर्क साधना चाहते हैं। इन्टरनेट रखने वाले भी प्रायः फोन द्वारा ही सरकार से सम्पर्क करना चाहते हैं। 

अनेक देशों में ई-प्रशासन की असफलता का कारण हिस्सेदारी के बीच अपर्याप्त संचार साधनों के चलते सूचनाओं के आदान-प्रदान की कमी बताया गया है। हिस्सेदारों के बीच वैयक्तिक सम्पर्को से काम चला लिया जाता है। 

ई-प्रशासन को लागू करते समय पर्यावरणीय, सांस्कृतिक शैक्षिक तथा उपभोक्ता मुद्दों को ध्यान में रखना चाहिए। आय एवं अर्थव्यवस्था पर इसके पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखना तथा डिजिटल डिवाइड की बाधा को दूर कर इसे सफल बनाया जा सकता है। 

प्रश्न-2. आप किसी राज्य सरकार के मुख्य सचिव के रूप में समाज कल्याण विभाग से अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों संबंधी सूचना की जानकारी हेतु एक पत्र लिखें। 

उत्तर परिपत्र संख्या 26.4.94/शि.वि./300 

दिनांक 02.01.2016

समाज कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश सरकार भोपाल। 

मध्यप्रदेश सरकार प्रमुख-मुख्यमंत्री जी ने यह जानना चाहा है कि प्रदेश के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की कितनी लड़कियों को इस वर्ष 2015-16 में प्रवेश दिया गया है? 

वर्तमान में प्रदेश की शिक्षण संस्थाओं में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की कितनी छात्राएँ पढ़ रही हैं?

विगत तीन वर्षों की तुलना में उनकी संख्या में वृद्धि का प्रतिशत क्या है?

उपर्युक्त मंत्रालय को पन्द्रह दिन के भीतर यथा तथ्य आँकड़े भिजवा दिये जाने चाहिए। 

हस्ताक्षर मुख्य सचिव

समाज-कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश सरकार, 

भोपाल।

प्रतिलिपिः आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित : 

निदेशक, स्कूली शिक्षा

2. निदेशक, कॉलेज शिक्षा

3. समस्त जिला शिक्षा अधिकारी

4. समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्य

5. समस्त महाविद्यालयों के कुल सचिव 

प्रश्न-1. ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी चुनौती’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी चुनौती 

चीन की विस्तारवादी रणनीति पहले सहमत सीमाओं/एलएसी पर विवाद को जन्म देती है। इसके बाद जब और जहाँ कहीं भी अवसर मिले, उसको भुनाना प्रारम्भ कर देती है। 

चीन के एक नारे “हिन्दी चीनी भाई-भाई” ने नेहरू को विश्वास दिलाया कि प्रादेशिक सीमाओं को लेकर कोई विवाद नहीं होगा और चीन मैकमोहन रेखा को स्वीकार कर लेगा। चीन ने न सिर्फ ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच 1914 ई. में निर्धारित मैकमोहन रेखा को अस्वीकार किया, बल्कि भारतीय सैनिकों पर हमला कर उन्हें काफी क्षति भी पहुँचाया। नेहरू को लगा कि पीठ में छुरा घोंपा गया है। 

चीन एक अलग रणनीति में विश्वास करता है, जो उसकी विस्तारवादी रणनीति से प्रेरित है। वह प्रारम्भ में अस्थायी बुनियादी ढाँचे का निर्माण करता है और यदि चुनौती नहीं प्रस्तुत किया गया तो अन्ततः स्थायी परिसम्पत्ति का निर्माण कर लेता है। अतीत में इसके कई उदाहरण सामने आए हैं। हाल ही में उसने पैंगोंग झील के उत्तर में फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्र के साथ-साथ कोंगका ला के पास तथा गलवान घाटी के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। ये सब एक सोची-समझी योजना के तहत है कि जब भी हम अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं तो हमें इसका लाभ होगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चीन 1962 से ही सीमा के काफी नजदीक तक अपनी जमीन पर सड़क एवं बुनियादी संरचनाओं का निर्माण कर रहा है, जिससे यह विवादित सीमा क्षेत्र के पास आसानी से पहुँच सके और हमारी जमीन पर दावा ठोक सके। 

इसलिए सड़क निर्माण के लिए चीनी दबाव के सामने झुकने की बजाय अपनी नीति का पुनर्निर्माण करना चाहिए। साथ ही घुसपैठ का मुकाबला करने के लिए छोटे सामरिक ऑपरेशन भी प्रारम्भ करना चाहिए, जिससे एक दृढ़ सन्देश दिया जा सके कि हम झुकेंगे नहीं। इसके लिए हमें एलएसी पर आपसी सम्बन्धों के नियमों को बदलने की आवश्यकता है। धीमी गति से सड़क निर्माण जैसी किसी भी अन्य प्रतिक्रिया को गलत तरीके से हमारी कमजोरी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। 

प्रश्न-2. आप शिवम शुक्ला हैं एवं जबलपुर के एक महाविद्यालय में स्नातक के छात्र हैं। आप प्राचार्य को नियमगत दण्ड की माफी हेतु एक आवेदन पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

प्राचार्य, विज्ञान महाविद्यालय, 

जबलपुर। 

दिनांक: 15.06.2016

विषय : निर्धारित दण्ड से मुक्ति हेतु । महाशय, 

सविनय निवेदन है कि मैं मुकेश कुमार बी.एस.सी. (II) द्वितीय वर्ष सत्र (2015-16) का छात्र हूँ। मुझे कक्षा में उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं होने के कारण वार्षिक-परीक्षा में शामिल न करने का दण्ड दिया गया है। आपसे हार्दिक विनती है कि इस दण्ड से मुझे मुक्त कर मेरी व्यक्तिगत समस्या को समझने की कृपा की जाय। मेरे परिवार में मेरी दिव्यांग माँ तथा दो भाई-बहन हैं। रोजगार के लिए मैं सुबह उठकर समाचार पत्र बाँटने का कार्य करता हूँ। इस दौरान अपरिहार्य कारणों से विलम्ब हो जाने के कारण कई बार मैं अपनी कक्षा में उपस्थित नहीं हो पाता हूँ। घर में आय का साधन न होने के कारण पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन मेरे लिए अनिवार्य है। साथ-साथ मैं अपनी पढ़ाई भी जारी रखना चाहता हूँ।

अत: श्रीमान से प्रार्थना है कि आप मेरी व्यक्तिगत समस्याओं पर मानवतापूर्ण दृष्टि रखते हुए मुझे वार्षिक परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें। 

आपका विनीत छात्र – शिवम शुक्ला 

बी.एस.सी. ।। वर्ष 

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