SSC Descriptive Question Paper With Answer in Hindi

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SSC Descriptive Question Paper With Answer in Hindi

SSC MTS-28.01.2018निम्नलिखित विषयों में एक किसी एक विषय पर लगभग 250 शब्दों का निबंध लिखिए : (a) शिक्षा और जीवन (b) वर्षा ऋतु (c) मोबाइल फोन (d) क्रिकेट मैच (e) एक अच्छे नागरिक के उत्तदायित्व

2. पत्र लेखन (150 शब्द)

(a) कॉलेज लाइब्रेरी में नयी पुस्तकें मंगवाने के लिए पुस्ताकलयाध्यक्ष को पत्र लिखें।

(b) मित्रों के साथ जयपुर घूमने जाने की अनुमति के लिए अपने पिता को पत्र लिखें।

(c) बिजली का बिल समय से न मिलने पर बिजली अधिकारी को पत्र लिखें।

(d) कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र लिखे।

(e) गर्मी की छुट्टियाँ साथ बिताने का निमंत्रण देते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखें। 

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 उत्तर  (a) शिक्षा और जीवन 

“शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है। शिक्षा ही जीवन है।” -जॉन दवे

जॉन दवे द्वारा कथित उक्त वाक्यांश शिक्षा एवं जीवन के अन्योन्य संबंधों को उद्घटित करता है जिसमें वे शिक्षा के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं करते हैं। शिक्षाविद् जीवन को जीव वैज्ञानिक मान्यताओं से एक कदम आगे बढ़कर इसे एक दार्शनिक रूप में अभिव्यक्त करते हैं। जिसमें शिक्षा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मनुष्य अपने बौद्धिक प्रयासों से ही पशुवत जीवन से भिन्न सामाजिक जीवन की कल्पना कर सका है। शिक्षा मानव जीवन को विविध प्रकार से प्रभावित करके मानव विकास की कुंजी बनती है। 

पृथ्वी पर मनुष्य का अस्तित्व हजारों वर्षों से है। परन्तु विगत कुछ शताब्दियों में ही मनुष्य ने विकास के उस स्तर को प्राप्त किया है जो पहले संभव न था। इसका सबसे अधिक श्रेय शिक्षा को दिया जाना ही समीचीन होगा। शिक्षा ने मनुष्य के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन लाए है। उदाहरण के लिए आज हम जीवित रहने मात्र को जीवन न मानकर गरिमापूर्ण एवं नि:रोगी जीवन की कल्पना करते हैं। मनुष्य ने विज्ञान के क्षेत्र में अनवरत प्रगति करके असाध्य समझे जाने वाली बीमारियों का सफलता पूर्वक सामना किया है। गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए मानवाधिकारों की कल्पना की गई है। 

एक गुणवत्तापूर्ण जीवन की सुनिश्चित व्यक्ति के सदगुणों पर निर्भर करती है। जिसमें व्यक्ति के आचरण, व्यवहार एवं नैतिक मूल्यों का समावेश होता है। हम शिक्षा के माध्यम से उचित-अनुचित का भेद कर पाते हैं जो सही निर्णय लेने में हमारी सहायता करता है। शिक्षा का एक अन्य महत्त्वपूर्ण संबंध हमारे रोजगार से है। बेहतर शैक्षणिक पृष्ठभूमि रोजगार के अच्छे अवसर सृजित करती है। जो हमारे दैनिक आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति का अनिवार्य घटक है। शिक्षा का समाज को सही दिशा देने में भी योगदान है। शिक्षित समाज अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठ कर विचार करने में सक्षम होता है जिसमें सभी के हित की आकांक्षा होती है। 

आज किसी राष्ट्र की प्रगति का आकलन करना हो अथवा मानव विकास का अनुमान लगाना हो। शिक्षा को अनिवार्य रूप से एक मापदण्ड के रूप में स्वीकार किया जाता है। अत: यह धारणा आम हो चली है कि शिक्षा ही मानव के सर्वांगीण विकास की कुंजी है। शिक्षा का महत्त्व सर्वदेशीय एक सर्वकालिक है। इस बात को एक प्राचीन संस्कृत सूक्ति, “विद्या ददाति विनयम।” के माध्यम से समझा जा सकता है। यहाँ यह समझना भी आवश्यक होगा कि शिक्षा का अर्थ केवल विद्यालयी शिक्षा अथवा विश्वविद्यालयी शिक्षा तक सीमित नहीं है अपितु शिक्षा तो असीमित है। मनुष्य अपने जीवनकाल में किसी भी अवस्था में जो कुछ भी सीखता है वह उसकी शिक्षा का अंग समझा जाता है। 

इस प्रकार हम यह पाते हैं कि शिक्षा जीवन के सभी पहलुओं में सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है। एक शिक्षित व्यक्ति अपने ही नहीं अपितु दूसरों के जीवन को सुखमय एवं सुरक्षित बना सकता है। अत: जॉन दवे का वह कथन सार्थक प्रतीत होता है जिसकी चर्चा हमने निबंध की प्रस्तावना में की थी।

(b) वर्षा ऋतु 

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के धन। 

तप्त धरा, जल से फिर 

शीतल कर दो

बादल गरजो! (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की उक्त पंक्तियाँ वर्षा ऋतु की मार्मिक आकांक्षा को प्रस्तुत करती हैं। यूँ तो वर्ष में सभी ऋतुओं का अपना-अपना महत्त्व है परंतु वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत मात्र ही मन में उत्साह भर देता है। वर्षा ऋतु के पूर्व जहाँ वैज्ञानिक वर्षा के पूर्व आकलन में जुट जाते हैं, तो आम नागरिक तपती गर्मी से छुटकारा पाने की अपेक्षा करते हैं। परंतु यह ऋतु बच्चे और किसानों के लिए सर्वाधिक उत्सुकता उत्पन्न करती है, जहाँ एक ओर बच्चे ऋतु की पहली बारिश में भीगने को उतावले रहते हैं तो दूसरी ओर किसान फसलों की सिंचाई के लिए समुचित बारिश होने की बाट देखते हैं। 

वर्तमान में वर्षा की मात्रा का पूर्वानुमान लगाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता ली जाती है जिसमें सुदूर संवेदी उपग्रह की मुख्य भूमिका होती है। अत एव अब वर्षा का सटीक पूर्वानुमान संभव हो सका है जिससे भावी वर्षा के अनुकूल आर्थिक-कृषि एवं आपदा प्रबंधन संबंधी उपाय करने में सरलता होती है जैसे- कम वर्षा के पूर्वानुमान स्थिति में संचित जल भण्डारों का युक्तियुक्त प्रयोग करना, सूखा राहत कोष का प्रयोग करना, कम जल लागत योग्य फसलों की बुआई की जाती है जबकि अधिक वर्षा के पूर्वानुमान की स्थिति में जल संग्रहण क्षेत्रों को गहरा करना, बाढ़ राहत के उपाय करना, जल सघन फसलों की बुआई इत्यादि शामिल है। 

भारत सहित अधिकांश देशों में वर्षा ऋतु का आगमन ग्रीष्म काल के उपरांत होता है। अत: यह ऋतु गर्मी से राहत देने वाली होती है। इस मौसम में मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी एवं पेड़ पौधे भी जीवंत हो उठते हैं। क्योंकि पतझड़ एवं ग्रीष्म ऋतु के अंतराल के बाद वर्षा जल की फुहार शुष्कता एवं जीर्णता को दूर कर देती है। इस ऋतु में नवीन पुष्पों एवं लताओं का पल्लवन होता है जिससे पर्यावरण रमणीय प्रतीत होता है। अत: यह ऋतु स्वतः ही स्फुर्ति एवं हर्ष का संचार करती है।

बच्चे इस ऋतु में अत्यधिक आनंदित होते हैं। वर्षा के जल में भींगना एवं बागवानी करना भला किसे रास नहीं आता है। किसानों के लिए यह ऋतु ना सिर्फ आनंद अपितु उनकी आजीविका के लिए निर्णायक होती है। सबसे बढ़कर सिंचाई के अन्य साधनों की अनुपलब्ध ता से वर्षा का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है। समुचित वर्षा होने पर ही वे राहत का अनुभव करते हैं जबकि आवश्यकता से कम अथवा अधिक वर्षा उनकी चिंता का कारण बनती है। समकालिक परिस्थितियों में जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की अनिश्चितता बढ़ी है। जिससे इस ऋतु के सकारात्मक पक्षों में कभी आने की आशंका प्रबल हो रही है |

यह विचार मन में आना स्वाभाविक है कि क्या भावी पीढ़ी वर्षा ऋतु के इस मनोरंजक पलों का आनंद उठा सकेगी अथवा नहीं? इसी संशय के चलते आज सारा विश्व जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए एकजुट हो चुका है। वर्ष 2015 का पेरिस जलवायु सम्मेलन इसका अनूठा उदाहरण है। अतः हमें यह कामना करनी चाहिए की हम अपनी इस प्राकृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ी के लिए संजोए रख सकेंगे। \

(c) मोबाइल फोन 

विज्ञान और अभियांत्रिकी ने नित नए आविष्कारों और नवाचार की राह को सरल बना दिया है। मोबाइल फोन की इसी कड़ी का एक महत्त्वपूर्ण उत्पाद माना जाता है। मोबाइल फोन के बढ़ते प्रयोग ने अब टेलीफोन के भारी भरकम इंन्फ्रास्ट्रक्चर और तारों के जाल से मुक्ति दी है। मोबाइल फोन की सहायता से हम हजारों मील दूर बैठे किसी व्यक्ति से सीधे संपर्क कर पाते हैं परंतु इसके बढ़ते प्रचलन ने कुछ चुनौतियाँ भी पेश की हैं जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। 

विज्ञान की प्रगति ने मानव जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने का निरंतर प्रयास किया है। हमने संचार सेवा क्षेत्र में तार सेवा से लेकर मोबाइल सेवा तक का सफर तय किया है। मोबाइल फोन का आविष्कार संचार क्षेत्र में किसी क्रांति से कम नहीं है। अब व्यक्ति अपने घर से भौगोलिक दूरी पर होने के बाद की करीब होने का अनुभव करता है। मोबाइल फोन ने सुरक्षा सुनिश्चित करने, समय की बचत करने तथा आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नवीन स्मार्ट फोन ने तो करीब-करीब हमारी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति कर दी है जिस पर, इंटरनेट, जी.पी.एस. मनोरंजन, समाचार, समय प्रबंधन, आर्थिक कार्यकलाप, पठन-पाठन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ उपलब्ध है। अत: यह प्रतीत होना स्वाभाविक है कि इसकी अनुपस्थिति में आधुनिक जीवन शैली की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 

मोबाइल फोन की तुलना टेलीफोन से करने पर हम पाते हैं कि यह बड़े आकार और स्थिर टेलीफोन की तुलना में अत्याधिक सहज है। जिसे हम अपने पॉकेट में रखकर कहीं भी आ जा सकते हैं। साथ ही इसने लम्बे तारों को बिछाने तथा असंख्य खम्भों की स्थापना की आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया है। जिस कारण अब दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों तक भी इसका प्रसार हो सका है। साथ ही अब यह कम लागत पर भी उपलब्ध हुआ है। यही कारण है कि अब समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पास भी मोबाइल सेवा पहुँच सकी है। मोबाइल फोन ई-गवर्नेस का भी एक सशक्त माध्यम बन गया है जो ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन की भावना के अनुकूल है। 

जैसा कि हम जानते हैं कि विज्ञान वरदान के साथ-साथ अभिषाप की भी जननी है। हमें विज्ञान का कौन सा रूप प्राप्त होता है यह इसके दक्षतापूर्ण प्रयोग पर निर्भर करता है। मोबाइल फोन इसका अपवाद नहीं है। मोबाइल फोन का अतिशय प्रयोग समाज और जीवन में अनेक चुनौतियाँ भी उत्पन्न कर रहा है। इससे सर्वाधिक दुष्प्रभावित हमारी युवा पीढ़ी है जो मोबाइल फोन को ही सारा संसार मान बैठे हैं। इससे इनकी शारीरिक क्रियाशीलता नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई है आज दूर बैठे लोग भले ही मोबाइल के माध्यम से करीब आ गए है परंतु हमारे करीबीयों से हमारी दूरी बढ़ती जा रही है। किसी आलोचक ने सच ही कहा है 

“खुद से ज्यादा संभाल कर रखता हूँ मोबाइल अपना …….

क्योंकि रिश्ते सारे अब इसी में कैद हैं।” 

मोबाइल फोन ने समाज के अराजक तत्त्वों की क्रियाशीलता को भी बढ़ा दिया है जिससे वैमनस्य एवं वारदातों में भी वृद्धि हुई है अतः अब समय आ गया है कि हम मोबाइल फोन के सकारात्मक उपयोग को लेकर सतर्क और जागरूक हो जाएँ ताकि इसके नकारात्मक प्रभावों का सफलता पूर्वक सामना किया जा सके।

(d) क्रिकेट मैच 

भारत की अनुकूल प्राकृतिक दशाओं के कारण यहाँ अनेकों खेल खेले जा सकते हैं जैसे- तैराकी, दौड़, पैराग्लाइडिंग, स्की, क्रिकेट, फुटबॉल इत्यादि। परंतु इन सभी खेलों में भारत में सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट है। यही कारण है कि भारत में लगभग सभी भौगोलिक क्षेत्रों में क्रिकेट के अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम मौजूद है। यही नहीं भारतीय क्रिकेट टीम भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख टीम है जिसने दो बार विश्व कप एवं अनेकों अंतर्राष्ट्रीय शृंखलाएँ जीती है। इसी कारण भारतीय दर्शकों में क्रिकेट की लोकप्रियता में निरंतर वृद्धि हुई है। 

क्रिकेट का मैच निरंतर उत्साह एवं रोमांच उत्पन्न करता है। जिसमें हारने वाली टीम एवं जीतने वाली टीम के मध्य पूर्वधारणा बनाना संभव नहीं हो पाता है। क्रिकेट मैच को अधिक रोमांचक बनाने के लिए इसे तीन प्रारूपों में बाँटा गया है यथा-टेस्ट मैच, एकदिवसीय तथा 20-20 तीनों ही प्रारूप अपनी विशेषता एवं तीव्रता में अद्वितीय है। क्रिकेट मैच भारत के अतिरिक्त पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैण्ड, श्रीलंका, इंग्लैण्ड इत्यादि देशों में भी अत्यधिक लोकप्रिय है। 

क्रिकेट का मुकाबला दो टीमों के मध्य खेला जाता है। प्रत्येक टीम में ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। निर्णयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए दो एम्पायर होते हैं। खेल की शुरुआत दोनों टीमों के कप्तानों के बीच टॉस के माध्यम से होता है जिसमें टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी अथवा गेदबाजी करने का निर्णय लेती है। बल्लेबाजी करने वाली टीम के दो खिलाड़ी बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर उतरते हैं। जबकि गेदबाजी करने वाली टीम के सभी खिलाड़ी गेदबाजी करने तथा क्षेत्ररक्षण के लिए मैदान पर उतरते हैं। गेदबाज प्रत्येक ओवर में छ: गेर्दै फेकता है। जो एक मैच में निर्धारण ओवर फेंक सकता है। 

क्रिकेट मैदान में उपस्थित सभी खिलाड़ियों को निरंतर चौकन्ना एवं एकाग्र रहने की आवश्यकता होती है। दोनों टीमों को एक-एक बार क्रमशः रन बनाने तथा क्षेत्ररक्षण का अवसर मिलता है। सर्वाधिक रन बनाने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है। मैच में सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ी को ‘मैन ऑफ द मैच’ पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाता है। साथ ही विजेता टीम को अन्य पुरस्कार भी दिए जाते हैं। 

क्रिकेट मैच की लोकप्रियता का एक महत्त्वपूर्ण कारण इस खेल की शालीनता है जिसमें खिलाड़ियों को कठोर अनुशासन का पालन करना पड़ता है। एम्पायर का निर्णय सर्वोच्च समझा जाता है। एम्पायर से किसी भी प्रकार की अभद्रता नहीं की जाती है। उक्त प्रशंसनीय नियमों के चलते आज क्रिकेट की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है तथा यह विश्व के 100 से भी अधिक देशों में खेला जाता है।

(e) एक अच्छे नागरिक के उत्तरदायित्व 

वर्तमान वैश्विक परिदृष्य में सर्वाधिक लोकप्रिय शासन पद्धति लोकतांत्रिक पद्धति ही है। लोकतांत्रिक पद्धति ही के कारण आज हम प्रजा से नागरिक बन सके हैं। नागरिक बनने के साथ-साथ हमें अपनी सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त हुआ है। यह ध्यान देने योग्य है कि नागरिक बनने के कारण हमारे कुछ नैतिक उत्तरदायित्व भी उत्पन्न होते हैं। अर्थात् हम एक सजग नागरिक के रूप में अपने समाज और लोकतांत्रिक प्रणाली को दृढ़ता प्रदान करें जिसका अंतिम ध्येय हमारे राष्ट्र का सर्वांगिण विकास होना चाहिए। 

देश के नागरिकों को अपनी सरकार का चुनाव करने के लिए मताधिकार प्राप्त है जिसका प्रयोग करके हम जनहित एवं राष्ट्रहित में सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार का चुनाव करके देश की बागडोर सौंपे। मताधिकार का प्रयोग करना किसी भी देश के नागरिक का महत्त्वपूर्ण लोकतांत्रिक कर्तव्य है। इसके साथ ही नागरिकों का यह दायित्व है कि हम भ्रष्ट एवं संप्रदायिक उम्मीदवारों को शासन प्रणाली का हिस्सा न बनने दे। 

एक अच्छे नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक धरोहर के प्रति सम्मान प्रकट करे तथा उसे निरंतर संरक्षित करने का प्रयास करे। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि हम भ्रम वश रुढीवादी कुप्रथाओं का कतई समर्थन न करें। ऐसी सभी प्रथाएँ जो किसी भी रूप में समाजिक विद्वेष, स्त्री विरोधी, भेदभाव मूलक, सामाजिक प्रदूषण को जन्म देने में सहायक हों उनका त्याग किया जाना चाहिए। 

एक अच्छे नागरिक को रूढ़ीवादी विचारों एवं अंधविश्वासों का खण्डन करके नवीन वैज्ञानिक, तार्किक तथा मानवतावादी विचारों कान सिर्फ समर्थन करे अपित उसे अपनी जीवनचर्या का हिस्सा बनाए। राष्ट को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित शिक्षा ग्रहण करे तथा उसका प्रसार करें। यह ध्यान देने योग्य है कि एक शिक्षित समाज ही भावी पीढ़ी को बेहतर नागरिक बनाने में सहायक हो सकता है। 

अच्छे नागरिकों को देशविरोधी तत्त्वों का पुरजोर विरोध करना चाहिए तथा ऐसे लोगों को समाज में ख्याति प्राप्त करने का कोई अवसर नहीं देना चाहिए। नागरिकों को समाज के सभी वर्गों यथा भाषायी, धार्मिक अल्पसंख्यकों, वंचित वर्गों, दिव्यांगों का सम्मान करना चाहिए तथा इनके साथ सहानुभूति प्रकट करने के साथ ही इनकी सहायता भी करनी चाहिए ताकि समाज में समरसता तथा एकता बनी रहे। 

इस प्रकार हम पाते हैं कि नागरिकों के उत्तरदायित्व एक प्रगतिशील एवं समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहाँ यह कहना गलत न होगा कि अच्छे नागरिकों से ही अच्छे राष्ट्र का निर्माण होता है। 

 पत्र 

(a) कॉलेज की लाइब्रेरी में कहानी की नई पुस्तके मँगवाने के लए पुस्ताकलयाध्यक्ष को पत्र लिखें। \

उत्तर

सेवा में,

श्रीमान पुस्तकालयाध्यक्ष,

क, ख, ग. इंटर कॉलेज,

जोधपुर (राजस्थान)

विषय- पुस्तकालय में कहानी की नई पुस्तकें मँगवाने हेतु। महोदय, सविनय सूचित करता हूँ कि हमारे कॉलेज के पुस्तकालय में विगत कुछ वर्षों से कहानी की नई पुस्तकों को शामिल नहीं किया गया है जबकि इस अवधि में अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाओं| की कहानी की पुस्तकों का विमोचन किया गया है। अत: पुस्तकालय में कहानियों की नवीन पुस्तकों का पर्याप्त अभाव हो गया है।

अत: आप से आग्रह है कि पुस्तकालय में कहानियों की नवीन पुस्तकों की उपलब्धता के लिए आवश्यक कदम उठाएँ। अपकी महान दया होगी।

धन्यवाद, दिनांक: 16 मार्च, 2018 प्रार्थी 

अ. ब. स. 

क. ख. ग. इंटर कॉलेज

(b) मित्रों के साथ जयपुर घूमने जाने की अनुमति के लिए अपने पिता को पत्र लिखें।

उत्तर

शान्तिकुंज छात्रावास,

द्वारिका, दिल्ली-110071

दिनांक- 17 मार्च, 2018 

सादर प्रणाम,

पिताजी आपको यह बताते हुए अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है है कि मेरी वार्षिक परीक्षा विगत 16 मार्च को समाप्त हो चुकी हैं। जिसमें मैं अपने निष्पादन से संतुष्ट हूँ। परिक्षोपरांत हुए अवकाश पर मैंने विचार किया है। जिस पर आपकी अनुमति अपेक्षित है। मैं अपने पर्यटन में कुछ ऐतिहासिक इमारतों का अवलोकन करके व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि सम्पूर्ण यात्रा के दौरान मैं और मेरे मित्र पूर्ण सावधानी बरतेंगे। तथा साथ-साथ सकुशल वापस लौटेंगे। आपसे आग्रह है कि मुझे शीघ्र ही पत्र लिखकर इस विषय पर अपनी अनुमति प्रदान करें। 

आपका आज्ञाकारी पुत्र 

क. ख. ग.

(c) बिजली का बिल समय से न मिलने पर बिजली अधिकारी को पत्र लिखें।

उत्तर

सेवा में,

मुख्य बिजली वितरण अधिकारी, 

आगरा नगर (उत्तर प्रदेश)

विषयः बिजली का बिल समय पर नहीं मिला। 

श्रीमान, मैं आपको सविनय सूचित करना चाहता हूँ कि मेरे मकान संख्या E- 269, हर्ष विहार (आगरा) का विगत् माह का बिजली का बिल अभी तक प्रदान नहीं किया गया है जिस कारण मैं अपना बिजली का बिल चुका पाने में असमर्थ हूँ। आप से विनम्र निवेदन है कि इस संबंध में उचित कार्यवाही करने की कृपा करें। जिससे मैं अपनी बिजली के बिल का भुगतान कर सकूँ।

धन्यवाद, प्रार्थी 

क. ख. ग. मकान सं. E-269 

हर्ष विहार (आगरा)

(d) कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र लिखे।

उत्तर

सेवा में,

श्रीमान संपादक महोदय,

कुरुक्षेत्र हिन्दी दैनिक,

मुम्बई कार्यालय (महाराष्ट्र)

विषय-कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के संबंध में,

महोदय,

मैं इस पत्र के माध्यम से आप का ध्यान तिलक नगर क्षेत्र में बिगड़ती कानून व्यवस्था की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। विगत् कुछ समय से यहाँ के पार्कों में अराजक तत्त्वों की उपस्थिति देखने को मिल रही है जहाँ वे लोग जुऔं खेलते हैं एवं आने जाने वाले लोगों को भी परेशान करते हैं। इस संबंध में नजदीकी पुलिस चौकी को भी सूचित किया गया परंतु कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई अत: आप से यह निवेदन है कि इस समस्या को अपने समाचार पत्र में प्रमुखता से शामिल करके सरकार तक हमारी बात पहुँचाने की कृपा करें। 

धन्यवाद, 

प्रार्थी 

क. ख. ग

(e) गर्मी की छुट्टियाँ साथ बिताने का निमंत्रण देते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखें।

उत्तर

261-आर्य नगर,

भोपाल,

मध्य प्रदेश

सादर नमस्कार,

प्रिय मित्र मैं यहाँ पर सकुशल हूँ। आशा है तुम भी स्वस्थ एवं कुशल होंगे। मैंने तुम्हें पत्र इस संबंध में लिखा है कि मैंने इस वर्ष अपनी गर्मियों की छुट्टियाँ देहरादून में बिताने का निर्णय लिया है। अत: मैं तुम्हें भी अपने साथ गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने का निमंत्रण देता हूँ। आशा है कि तुम शीघ्र ही इस संबंध में अपने माता-पिता की अनुमति लेकर मुझे सूचित करोगे। तुम्हारा प्रिय मित्र 

क. ख. ग.

दिनांक: 17 मार्च, 2018 

निबंध लेखन (250 अंक) 

SSC CGL TIER-3  08.07.2018

प्रश्न : नोटबंदी (विमुद्रीकरण) अपने लक्ष्य से कितना दूर रहा– निबंध लेखन (250 अंक) 

उत्तर : केन्द्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नोटबंदी (विमुद्रीकरण) के तीन प्रमुख लक्ष्यों का खाका खींचा था: नकदी की जमाखोरी को रोककर काला धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, नकली नोटों को रोकना और भारत में संचालित आतंकवादी समूहों के नकदी संचयन की प्रक्रिया को रोककर आतंकवाद से लड़ना। 

जब सरकार को प्रतीत हुआ कि बैंकिंग व्यवस्था में ढेर सारी अवैधानिक मुद्रा पहुँच रही हैं तो इसने विमुद्रीकरण कदम के नये उद्देश्यों को जोड़कर गोलपोस्टों को बदलना शुरू कर दिया। अत: डिजिटल लेन-देन और देश को एक “नकदी रहित” अर्थव्यस्था (बाद में एक ‘कम नकदी’ अर्थव्यवस्था के रूप में परिवर्तित) भी इस नीति की विशेषताओं में जोड़ा गया। भारत को एक ‘नकदी रहित’ अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य एक बाद की योजना के रूप में अधिक प्रतीत होता है। वांछित के बावजूद, पहले के आधिकारिक अधिसूचना में इन विशेषताओं को सूचीबद्ध नहीं किया गया था। 

30 अगस्त, 2017 को आरबीआई ने 2016-17 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की, जो बताता है कि 8 नवम्बर, 2016-जबसे नोटबंदी (विमुद्रीकरण) की घोषणा हुई थी और 30 जून, 2017 के बीच 98.8 प्रतिशत रद्दी किए गए मुद्रा नोट भारतीय बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके हैं। आश्चर्य में डालने वाले इस सांख्यिकी ने नोटबंदी के प्रभाव पर एक गंभीर प्रश्न वाचक चिह्न खड़ा किया, क्योंकि सरकार द्वारा यह प्रत्याशित था कि रद्द किए गए मुद्रा नोटों का एक बड़ा भाग बैंकिंग प्रणाली में वापस नहीं होगा। 

पाँच सौ और एक हजार वाले वैध मुद्रा नोटों की वापसी के कारण लगभग 15.44 ट्रिलियन रुपये मूल्य के मुद्रा नोटों (कुल मुद्रा का लगभग 86 प्रतिशत) को प्रचलन से हटा दिया गया। हालांकि 98.8 प्रतिशत प्रतिबंधि त नकदी मुद्रा नोट, नोटबंदी (विमुद्रीकरण) के बाद बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए। इसलिए यह आशा कि कर प्राधिकरण के विस्तृत जाँच से बचने के लिए नोटबंदी लोगों को अपने पास रखे अवैध नकदी नोटों को नष्ट करने के लिए मजबूर करेगी। 

विमुद्रीकरण को न्यायोचित ठहराने के क्रम में नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय ने दावा किया कि बीस हजार मिलियन मूल्य के जाली नोट प्रचलन में हैं। वास्तव में, प्रचलन में आए जाली नोटों की एक विशाल मात्रा को सरकार पहचानने में असमर्थ रही। 

आरबीआई को वार्षिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाँच सौ और एक हजार मूल्य वर्ग के जाली नोटों का अंकित मूल्य 2016-17 के दौरान केवल 410 मिलियन था। यदि जाली भारतीय मुद्रा नोटों का अंकित मूल्य इतना कम था तो आर्थिक गतिविधियों में नोटबंदी द्वारा इतनी बड़ी बाधा उत्पन्न होने का कारण क्या था? क्या यह प्रचलन में आए जाली नोटों पर नियंत्रण के लिए सुरक्षात्मक गुणों से युक्त जिन्हें दुहराना अत्यंत कठिन है को नये नोट छापना नहीं था ? 

जहाँ तक आतंकी वित्तपोषण के प्रभाव पर चिंतित होने की बात है तो इस तथ्य के बहुत कम साक्ष्य हैं जो इसका समर्थन करते हों कि नोटबंदी से इसमें काफी कटौती हुई है। 

निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि सरकार को इस बात की व्याख्या करनी चाहिए कि जब इस प्रकार के उद्देश्य को पूरा करने के लिए अनेक उपाय पहले से उपलब्ध हैं तो नोटबंदी के माध्यम से ऐसी बिस्मयकारी रणनीति अपनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

पत्र लेखन (150 अंक) 

प्रश्न : आप लोधी रोड नई दिल्ली के निवासी राजन/रजनी हैं। आपका चयन एक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में विपणन (मार्केटिंग) मैनेजर के रूप में हुआ है लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों के चलते आप नियोक्ता की आवश्यकता के अनुरूप तत्काल कार्यभार संभालने में असमर्थ हैं। उपर्युक्त उद्यम को अपनी असमर्थता के बारे में उचित कारणों के साथ एक पत्र लिखें जिसमें कार्यभार संभालने के लिए थोड़ा और समय देने की मांग की गई हो। 

उत्तर: 

लोधी रोड,

नई दिल्ली

मार्च 20, 2019 

जेनरल मैनेजर

अशोका इन्टरप्राइजेज जीटी रोड, गाजियाबाद

उत्तर प्रदेश 201001

विषय : आपको कम्पनी में नियुक्ति की तिथि की वृद्धि के सम्बन्ध में 

महाशय. 

आज आपका नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ। पत्र के अनुसार आपने मुझे 25 मार्च, 2019 से अपनी कम्पनी में विपणन (मार्केटिंग) मैनेजर के रूप में कार्य करने का सुअवसर प्रदान किया है। इसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी हूँ। तथापि, कुछ अपरिहार्य दुखद घटनाओं के चलते मैं नियुक्ति की निर्धारित तिथि को अपना कार्यभार संभालने में असमर्थ हूँ। 

मेरे परिवार पर वज्रपात पड़ा है। मेरी माताजी इसी माह की 18 तारिख को हमें छोड़कर स्वर्ग सिधार गईं। यह दुखद घटना तब घटी जब हम | अपने पिताजी की पदोन्नति, छोटे भाई का एमबीए में दाखिला और आपकी कम्पनी में मुझे नौकरी मिलने के उपलक्ष्य में हमलोग एक छोटा-सा उत्सव | मना रहे थे। घर का सबसे बड़ा पुत्र होने के कारण इस दुखद घटना ने स्वयं मुख्य पर भी एक बड़ी जिम्मेदारी डाल दी है। हमलोग के समुदाय में निध न के बाद होने वाले धार्मिक कर्मकांडों की प्रक्रिया 14 दिनों तक चलती है। 

इसलिए, मैं आपसे विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि मेरी नियुक्ति तिथि को 5 अप्रैल तक बढ़ाने की कृपा प्रदान की जाए। 

धन्यवाद सहित! 

आपका विश्वासपात्र 

राजन 

पत्र लेखन (50 अंक) 

प्रश्न : आप लोधी रोड, नई दिल्ली की रहने वाली महिमा/जसप्रीत हैं। आप अपने छोटे भाई टिंकू को समझाते हुए एक पत्र लिखें कि यदि वह अपना अपनी जीवन में एक अच्छा करिअर बनाना चाहता है तो उसे उन सभी क्रियाकलापों को तत्काल छोड़ देना चाहिए जो उसे उसके/उसकी लक्ष्य से भटकाते हैं। उसे सुझाव दें कि वह सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर अपना ध्यान केन्द्रित करे। आपका पत्र 150 से अधिक शब्दों का नहीं होना चाहिए। 

उत्तरः

लोधी रोड, नई दिल्ली

18 सितम्बर, 2018 प्रिय टिंकू, 

मैं तुमको यह पत्र बहुत आशा और चिन्ता के साथ लिख रहा हूँ। 

सबसे पहले तुम्हें 10वें वर्ग की परीक्षा में सफल होने की बधाई। तुम्हारी 10वीं की परीक्षा के परिणाम अच्छे रहे लेकिन हमलोग तुमसे इससे अच्छे परिणाम की आशा कर रहे थे। क्योंकि हमलोग जानते हैं कि तुम सफलता के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करने में सक्षम हो। यही कारण है कि हमलोगों ने तुम्हें छात्रावास में रहकर अध्ययन करने के लिए भेजा है ताकि तुम एक बेहतर करिअर बना सको। 

टिंकू, याद रखो किसी भी अच्छे चीज के लिए मूल्य चुकाना पड़ता है। यदि तुम एक अच्छा कॅरिअर बनाना चाहते हो तो तुम्हारा ध्यान सिर्फ अध्ययन पर केन्द्रित होना चाहिए। यह एक मात्र मुल्य है जिसे तुम अपनी सफलता के लिए चुकाते हो लेकिन इसका अर्थ है कि तुम्हे अपने को ध्यान भंग होने से बचाना होगा। कई बार ऐसा होता होगा जब तुम्हें भी अपने अन्य साथियों की भाँति मनोरंजन और व्यर्थ की बातों में भाग लेने की इच्छा होती होगी, लेकिन यह मनोरंजन तुम्हें लम्बे समय तक काम नहीं आएँगे। 

तुम्हें पत्र लिखने का कारण यह नहीं है कि मैं तुम्हें नैतिक भाषण , बल्कि इसका कारण है तुम्हारे भविष्य के बारे में हमारी चिन्ता। हमलोग यहाँ से तुम्हें सिर्फ परामर्श दे सकते हैं लेकिन भविष्य तुम्हारे हाथ में है। 

कृपया अपना ध्यान रखना। प्यार एवं स्नेह के साथ! 

तुम्हारा बड़ा भाई 

जसप्रीत

निबंध लेखन (50 अंक) 

प्रश्न : ‘वृद्धावस्था एवं सामाजिक सुरक्षा’ पर 250 शब्दों में एक निबंध लिखें 

उत्तर:वृद्धावस्था मानव जीवन का सबसे असुरक्षित अवस्था है जब सामाजिक सुरक्षा की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। हालांकि विकसित देश विभिन्न प्रकार के सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का निर्माण कर प्रौढ़ नागरिकों की देखभाल करते हैं लेकिन विकासशील देशों में इस प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। 

वृद्ध लोगों की देखभाल के लिए उन्हें रुपये-पैसों, चिकित्सीय ध्यान और सामाजिक समर्थन की आवश्यकता पड़ती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान विश्व सामाजिक सुरक्षा के प्राचीन प्रतिरूप से बहुत तेजी से दूर होता जा रहा है जिसके अंतर्गत संयुक्त परिवार हुआ करते थे और वृद्धजनों का ध्यान रखा जाता था। वर्तमान में, भारत में वृद्धजनों में अकेले रहने की प्रवृत्ति बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है क्योंकि उनके बच्चे अपने काम के सिलसिले में दूरस्थ स्थानों पर रह रहे हैं। इसलिए वृद्धावस्था के लिए सुरक्षा हमारे समाज के लिए एक चिंता का विषय बनती जा रही है। इस परिप्रेक्ष्य में, भारत सरकार ने वृद्धजनों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। 

सरकार ने वृद्ध लोगों पर राष्ट्रीय नीति (NPOP), 1999 घोषित की है। यह नीति राज्यों को वित्तीय और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आश्रय और वृद्धजनों की अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रखने, विकास में न्यायसंगत हिस्सेदारी, दुर्व्यवहार से रक्षा और शोषण को रोकने तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सेवाएँ उपलब्ध कराने पर जोर देती है। 

बाद में, “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव और कल्याण अधि नियम वर्ष 2007 में पारित किया गया। यह अधिनियम माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की भलाई और उनके जीवन-यापन के प्रावधान सुनिश्चित करता है। यह अधिनियम माता-पिता वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण की उचित व्यवस्था के लिए उनके बच्चों/सम्बन्धियों आदि को न्यायाधिकरण द्वारा बाध्यकारी और वादयोग्य बनाता है, अबहेलना की स्थिति में वरिष्ठ नागरिकों द्वारा अपने सम्बन्धियों को स्थानांतरित संपत्ति का निरसन (वापसी) हो सकता है, वरिष्ठ नागरिकों के परित्याग के लिए दंड का प्रावधान है, निर्धन वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम, पर्याप्त चिकित्सीय सुविधा और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सपंत्ति तथा जान की सुरक्षा का उचित प्रावधान इस अधिनियम में किया गया है। 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वृद्ध नागरिकों (IPOP) के लिए 1992 से एकीकृत कार्यक्रम का एक केन्द्रीय क्षेत्र योजना लागू किया है। इस योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को आश्रम, भोजन, चिकित्सीय देखभाल और मनोरंजन का सुअवसर उपलब्ध कराना और उत्पादक तथा सक्रिय जीवन के लिए उत्साहवर्द्धन कर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इस योजना के अंतर्गत गैर-सरकारी स्वैच्छिक संगठनों, पंचायती राज संस्थानों वृद्धाश्रमों, विराम देखरेख आश्रमों और अनवरत देखभाल आश्रमों, बहु-सेवा केन्द्रों, चल-चिकित्सा देखरेख इकाइयों, अल्झाइमर रोगियों डिमेन्शिया रोगियों के लिए दिन में देखभाल करने वाले केन्द्रों, वृद्ध लोगों के लिए भौतिक चिकित्सा केन्द्रों आदि को वित्तीय सहायता (जम्मू-कश्मीर, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों को 95 प्रतिशत और शेष राज्यों को 90 प्रतिशत) उपलब्ध करायी जाती है। यह कार्यक्रम मुख्यत: गैर-सरकारी/स्वैच्छिक संगठनों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। 

इस दृष्टि को ध्यान में रखकर वृद्ध लोगों पर राष्ट्रीय नीति, 1999 के समान राज्य का दायित्व, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के देखभाल एवं कल्याण, 2007 के अंतर्गत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान वृद्धजनों के विविध स्वास्थ्य विषयक परेशानियों के समाधान हेतु वयोवृद्ध लोगों के स्वास्थ्य के देखरेख के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPHCE) शुरू किया था। एनपीएचसीई का मूल उद्देश्य राज्य जन स्वास्थ्य प्रदत्त सुविधा वाले प्राथमिक तंत्र द्वारा वृद्धजनों को स्वास्थ्य देखभाल की समर्पित सुविधा प्रदान करना, माध्यमिक और तृतीयक स्तर जिसमें उपलब्ध सेवाएँ भी शामिल हैं। यह कार्यक्रम देश के 24 राज्यों केन्द्रशासित प्रदेशों और 8क्षेत्रीय जरा चिकित्सा केन्द्रों में चल रहा है। अब तक यह कार्यक्रम 93 CHCs, 4439PHCs और 28767 उपकेन्द्रों में विस्तृत है। 

निष्कर्ष में हम देख सकते हैं कि सरकार ने वृद्धजनों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं। हालांकि भारत जैसे विशाल देश की बड़ी जनसंख्या को देखते हुए इन कार्यक्रमों के प्रसार पर प्रश्नचिह्न उठ सकता है। इसलिए प्रयास करना चाहिए कि देश में कोई भी व्यक्ति वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा से बचित न रह सके। 

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