Ssc descriptive question paper with answer in hindi | SSC CGL TIER-3 previous year descriptive question paper

Ssc descriptive question paper with answer in hindi

Ssc descriptive question paper with answer in hindi | SSC CGL TIER-3 previous year descriptive question paper

ssc CHSL 10+2  descriptive question paper-18.09.2016

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों का निबंध लिखिए : 

स्वच्छ भारत मिशन

2. माना आप मोहन हैं। खेल सचिव को रियो ओलंपिक 2016 में भारत 

के प्रदर्शन के आकलन के बारे में और अगले ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए सुझाव पत्र। 

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उत्तर 

स्वच्छ भारत मिशन 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 145वें जन्मदिन के अवसर पर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का शुभारंभ किया। यह योजना अथवा अभियान-जन जागरुकता और जन सहभागिता पर आधारित है। इस अभियान का घोष वाक्य या स्लोगन “एक कदम स्वच्छता की ओर” है। यह अभियान पूरे भारत में सफाई के उद्देश्य को पूरा करने के लिए शुरू किया गया है। 

भारत सरकार द्वारा इससे पहले व्यक्तिगत स्वच्छता और पर्यावरणीय स्वच्छता को लेकर कई कार्यक्रम (जैसे-पूर्ण स्वच्छता अभियान, निर्मल भारत अभियान आदि) प्रारंभ किये गये थे, लेकिन ये अभियान ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुए। इस अभियान का मुख्य लक्ष्यों में शौच की प्रवृत्ति का उन्मूलन करना, मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करना, आधुनिक एवं वैज्ञानिक नगर निकाय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन अभिक्रियाओं को बढ़ावा देना, साफ-सफाई को लेकर निजी क्षेत्रों की भागीदारी को सुगम बनाना आदि – शामिल हैं। 

इस अभियान में बहुत ही रूचिपूर्ण तरीका इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें प्रत्येक व्यक्ति 9 लोगों को इससे जुड़ने के लिए आमंत्रित करेगा और फिर वे अगले 9 लोगों को जुड़ने के लिए आमंत्रित करेंगे और इस प्रकार यह शृंखला तब तक चलती रहेगी जब तक की भारत का प्रत्येक नागरिक इससे जुड़ नहीं जाता है। 

स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों का परिपालन यदि सही ढंग से एवं पूर्ण मनोवृत्ति के साथ किया गया तो 2019 के महात्मा गाँधी के 150वें जन्मदिन पर उनके गन्दगी मुक्त भारत के सपने को अवश्य साकार किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत प्रति व्यक्ति औसतन 6500 रुपये का नुकसान गंदगी की वजह से उठाता है। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य में सुधार लायेगा अपितु पर्यटन, व्यापार एवं जीवन स्तर आदि में भी तीव्र बदलाव लायेगा। 

2. सेवा में, 

खेल सचिव,

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार,

नई दिल्ली 

विषय : खेल सचिव को रियो ओलंपिक 2016 में भारत के प्रदर्शन के आकलन के बारे में और अगले ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए सुझाव 

महाशय, 

सबसे पहले आपको साक्षी मलिक और हिना सिद्ध के रियो ओलंपिक में पदक जीतने पर आपको हार्दिक बधाई। हालांकि यह गर्व का विषय है, किन्तु मान्यवर, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद हमारे देश को मात्र दो पदक प्राप्त होना, यह चिन्ता का विषय है। आज हमारा देश विज्ञान-प्रौद्योगिकी तथा अन्तरिक्ष आदि क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाने लगा है। लेकिन खेल की इस महा-प्रतियोगिता में हमारी स्थिति-केन्या एवं जमैका जैसे छोटे और गरीब देशों से भी दयनीय है। रियो ओलंपिक 2016 के अनुभव भारत के वैश्विक महाशक्ति होने पर प्रश्न-चिह्न लगाते हैं। 

नि:सन्देह रियो ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि स्थिति बदली नहीं जा सकती है। इसके लिए जैसा कि प्रधानमंत्री ने एक टास्कफोर्स गठित किये जाने की घोषणा की है,के तहत एक पारदर्शी, सशक्त एवं दीर्घकालिक निकाय की स्थापना की जाए, क्योंकि अब समय आ गया है कि भारतीय ओलपिक संघ का कायाकल्प किया जाए। भारतीय खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें विश्वस्तरीय सुविधा, प्रशिक्षक, पोषण, आधुनिक संसाधन आदि उपलब्ध कराया जाए। 

इसके अतिरिक्त यदि हमें अगले ओलंपिक (टोक्यो) में बेहतर प्रदर्शन करना है तो हमें अपनी खेल संस्कृति में आमूलचूल बदलाव लाना होगा, क्योंकि भारत में जितनी लोकप्रियता एवं सोहरत क्रिकेट को प्राप्त है उतनी राष्ट्रीय खेल हॉकी को भी नहीं। अतः अब अन्य खेलों के लिए भी विशेष ध्यान दिये जाने की जरूरत है। मान्यवर आशा है कि आपको हमारा सुझाव पसंद आएगा। 

भवदीय 

मोहन परीक्षा भवन

दिनांक : 18.09.2016 

ssc cgl tier 3 previous year solved paper-19.3.2017

प्रश्न-1. “भूकंप के समयः क्या करें, क्या न करें” विषय पर लगभग 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. ऑनलाइन परीक्षा के लाभ-हानि विषयक संपादक को पत्र।

उत्तर : 1. भूकंप के समय:क्या करें, क्या न करें 

प्रकृति जब कुपित होती है, तो उसके दुष्परिणाम भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के रूप में समान आते हैं। जब भूकंप आता है तो धरती काँप उठती है एवं चारों तरफ तबाही के मंजर देखने को मिलते हैं। कुपित प्रकृति विनाश का तांडव करती है, जिसके सामने मानव असहाय नजर आता है। भूकंपों की वजह से जान-माल की क्षति होती है जिससे उबरने में वर्षों लग जाते हैं। अब प्रश्न उठता है कि भूकंप क्या है? भूमि के कंपन को भूकंप कहते हैं। पृथ्वी के अन्दर होने वाली घटनाओं के परिणामस्वरूप जब धरातल का कोई भाग अकस्मात् काँप उठता है तो उसे भूकंप कहते हैं। 

जब भी भूकंप आता है, हम में से ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि क्या करना है और क्या नहीं करना है। घर में ही रहना है या बाहर भागना है। बाहर हैं तो क्या करना है। क्योंकि भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसे किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता, न ही वैज्ञानिक पूर्वानुमान ही लगा सकते कि कब आयेगा। ऐसे भूकंप के समय कुछ ऐसी सावधानियाँ हैं, जिसको बरतने से हम इस तरह की आपदा से खुद को बचा सकते हैं। ये सावधानियाँ इस प्रकार हैं 

भूकंप आने पर शीघ्र घर, विद्यालय या दफ्तर से निकलकर खुले मैदान में जायें। बड़ी भवनों, वृक्षों, बिजली के खम्भों आदि से दूर रहे।

बाहर जाने के लिए लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करें, क्योंकि लिफ्ट पेंडुलम की तरह हिलकर दीवारों से टकरा सकती है। बिजली जाने से भी वे रूक सकती हैं। 

कहीं फंस गये तो दौड़ें नहीं क्योंकि इससे भूकंप का ज्यादा असर पड़ता है। 

भूकंप आने पर खिड़की, अलमारी, पंखे, ऊपर रखे सामानों से दूर हट जायें ताकि इनके गिरने एवं शिशे टूटने से ज्यादा चोट न आये।

यदि आप बाहर नहीं निकल पाते हैं तो टेबल, बेड, डेस्क जैसे मजबूत फर्नीचर के नीचे घुस जाएँ तथा उनके पैर कसकर पकड़ लें ताकि झटकों से वे खिसके नहीं।

कोई मजबूत चीज न हो तो किसी मजबूत दीवार से सटकर अपने शरीर के नाजूक हिस्सों जैसे- सिर, चेहरा आदि को हाथ या मजबूत चीज से ढंककर घुटने के बल टेक लगाकर बैठ जायें।

भूकंप के समय अगर आप किसी चलती गाड़ी में हों तो जितनी जल्दी हो सके गाड़ी को रोक लें, तब तक गाड़ी में बैठे रहें जब तक भूकंप के झटके आ रहे हों साथ ही गाड़ी को इमारत, पेड़, पुल एवं बिजली के खम्भे से दूर रखें।

यदि आप या अन्य लोग मलबे में दब गए हों तो माचिस न जलाएँ क्योंकि गैस आदि लीक होने से आग का खतरा हो सकता है। मलबा हटाने के लिए हाथ-पैर न चलाएँ तथा मुँह को रूमाल से ढक लें। । बचाव कर्मी का ध्यान आकर्षित करने के लिए दीवार या पाइप पर हाथों से थाप दें। जब कोई उपाय न हो तभी जोर से आवाज लगायें। 

बचाव के लिए हेल्प लाइन नम्बर का सहयोग लें देश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा होने पर मदद के लिए 1070 नम्बर पर कॉल करें। 

2.भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से होने वाले जन-धन की हानि को नियंत्रित तो नहीं किया जा सकता है परन्तु विवेकपूर्ण प्रबंधन द्वारा इसे न्यून किया जा सकता है। इसके लिए समाज को पारिवारिक स्तर पर जागरूक करना चाहिए एवं लोगों को इसके प्रबंधन एवं नियंत्रण हेतु जानकारी देना चाहिए। सेवा में, 

श्री संपादक जी,

दैनिक नवभारत, दिल्ली।

प्रिय महोदय, 

आप के लोकप्रिय दैनिक के माध्यम से मैं ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली के लाभ एवं हानि से परीक्षार्थियों को अवगत कराना चाहता हूँ। 

वर्तमान समय में हमारे देश में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में ऑनलाइन परीक्षा की चारों तरफ सराहना हो रही है। इसके क्या कारण हैं? भारतीय समाज में भ्रष्टाचार का व्यापक स्तर पर बोलबाला है, जिससे हमारे देश में होने आयोजित वाली प्रतियोगिता परीक्षाएँ भी अछूती नहीं है। भ्रष्टाचार एवं धोखाधड़ी से छुटकारा पाने के लिए इस प्रकार की परीक्षा प्रणाली को युक्तियुक्त बनाया गया है। इस परीक्षा प्रणाली को से अनेक लाभ दिखाई दे रहे हैं, जैसे – धोखाधड़ी को रोका जा सकता है, परीक्षा परिणाम को सुनिश्चित किया जा सकता है, त्रुटिरहित मूल्यांकन, नकल समस्या का निराकरण, शीघ्र परिणामों की घोषणा, समय की बचत, परीक्षार्थियों के परिवहन व्यय में बचत, कागज मुक्त होने के कारण पर्यावरण हितैषी, दूरस्थ संस्थानों के लिए उपयोगी आदि। 

परन्तु इन विशेषताओं के साथ ऑनलाइन परीक्षा के कुछ नकारात्मक पक्ष भी हैं, जैसे – इस परीक्षा के माध्यम से केवल वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न ही पूछे जा सकते हैं, जिससे परीक्षार्थियों के मौलिकता का पता नहीं चल पाता है, परीक्षार्थियों को कम्प्यूटर का ज्ञान होना आवश्यक है, हैंकिग का खतरा इत्यादि बरकरार है। 

अगर इन तमाम नकारात्मक पक्षों को सुधार लिया जाये तो ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली भारतीय परीक्षार्थियों के लिए लाभप्रद साबित होगी। 

अत: संपादक महोदय से विनम्न निवेदन है कि इस पत्र को अपने दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित कर कृतार्थ करें। 

दिनांक : 25.03.2017

आपका सद्भावी 

अ.व.स.

सचिव, विद्यार्थी परिषद्

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