SSC Descriptive paper in hindi | Model question paper-26 to30

SSC Descriptive paper in hindi

SSC Descriptive paper in hindi | Model question paper-26 to 30

Question list-  प्रश्न-1. ‘आतंकवाद’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप मध्य प्रदेश राज्य सरकार के मुख्य सचिव हैं। आप खाद्य संरक्षण एवं महंगाई नियंत्रण हेतु किए गए प्रयासों के संबंध में संबंध अधिकारियों को पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘हमारी सामाजिक समस्यायें’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप प्रकाश वर्मा हैं। चरित्र-प्रमाण पत्र प्रदान करने के सम्बन्ध में आप प्राचार्य को एक आवेदन पत्र लिखिए।

प्रश्न-1. ‘धर्म निरपेक्षता संविधान का मूलभूत आदर्श’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप कक्षा के छात्र प्रतिनिधि हैं। आप महाविद्यालय में प्रवेश फीस की माफी के सम्बन्ध में प्राचार्य को एक आवेदन-पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. “कौशल भारत अभियान ” विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप शिक्षा मंत्री को उर्दू भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करने के सम्बन्ध में पत्र आवेदन-पत्र लिखिए।

प्रश्न-1. “ऑनलाइन शिक्षा एक नया प्रचलन/व्यवस्था है” विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप बीना दास बंजारे हैं। आप दिव्यांग होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत लिपिक रखने के सम्बन्ध में प्राचार्य को आवेदन-पत्र लिखिए।

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प्रश्न-1. ‘आतंकवाद’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर: आतंकवाद 

आतंकवाद का अर्थ किसी विनाशकारी शक्ति द्वारा विभिन्न तरीकों से भय की स्थिति को उत्पन्न करना है। किसी भी प्रकार के आतंकवाद से चाहे वे क्षेत्रीय हो, राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय हो सभी के कारण देश में असुरक्षा, भय और संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आतंकवाद की सीमा कोई एक राज्य, देश अथवा क्षेत्र नहीं है आज यह एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या के रूप में उभर रहा है। 

सिनेमाघरों, रेलगाड़ियों, भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बम विस्फोट द्वारा आतंक फैलाना एक आम घटना बन गयी है। सिनेमाघर में फिल्म देखते हजारों दर्शकों की बम के विस्फोट के कारण मृत्यु हो जाती है। रेल अथवा वायुयान में अपने गंतव्य की ओर बढ़ते यात्रियों की यात्रा बम के धमाके के साथ ही समाप्त हो जाती है आदि। 

आतंकवाद के प्रसारित होने के अनेक कारण हैं। लेकिन इसके मुख्य कारण दो हैं। सामाजिक और राजनीतिक अन्याय की अवधारणा से प्रेरित होकर आतंकवादी अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं। इसके लिए सामाजिक सरंचना में अपनी श्रेष्ठता को स्थापित करना तथा राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करना, सामाजिक संरचना से अभिप्राय, भाषा, क्षेत्र, जाति तथा धर्म से हैं। जहाँ इनकी श्रेष्ठता को अपने पक्ष में स्थापित करने तथा दूसरों पर प्रहार करने से हैं। वहीं राजनीतिक सरंचना से अभिप्राय वर्तमान शासन तन्त्र में विश्वास न कर स्वयं के मानदण्डों को स्थापित करने के लिए शासन सत्ता का विरोध करना।

आतंकवाद और आतंकवादी का अपना कोई धर्म या जाति नहीं होती है इसी कारण वह अन्य लोगों की जाति और धर्म का भी सम्मान नहीं करता और सभी के लिए भय का पर्याय होता है। आतंकवादी खुद तो सुरक्षा बलों के भय से आतंक की छाया से नरकीय जीवन जौता ही है वह उसके आस-पास रहने वाले लोगों पर भी दया नहीं करते। स्त्रियों के सतीत्व के साथ खिलवाड़ करना इनका हिंसक पशुओं का आम व्यवहार बन जाता है। ये वैयक्तिक सामूहिक सभी तरह की हत्याओं जैसे जघन्य अपराध आए दिन करते रहते हैं। 

अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति के लिए धन आदि की लूटपाट तथा अपहरण आदि के माध्यम से अपनी अनुचित मांगों को पूरा करने की चेष्टाओं में भी ये लोग लिप्त रहते हैं। इस प्रकार हिंसक आतंकवाद का सक्रिय स्वरूप और प्रभाव बड़ा ही घिनौना है।

आतंकवाद के स्वरूप, कारण, सक्रियता और इसके प्रभाव को देखते हुए इसे समाप्त करने के लिए विश्व स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है। यदि आतंकवाद स्थानीय कारणों या केन्द्र सरकार के प्रति अंसतोष की उपज है तो उन कारणों को ढूंढकर व उन्हें दूर करके उसका उपचार सहज ही किया जा सकता है। यदि वह दुर्भावना से प्रेरित आतंकवाद है, तो ऐसे आतंकवाद को कुचल देने में ही भलाई है नहीं तो यह मानवता के लिए कैंसर कर रूप धारण कर लेगा। 

प्रश्न-2. आप मध्य प्रदेश राज्य सरकार के मुख्य सचिव हैं। आप खाद्य संरक्षण एवं महंगाई नियंत्रण हेतु किए गए प्रयासों के संबंध में संबंध अधिकारियों को पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

शासन सचिवालय मध्य प्रदेश सरकार भोपाल 

दिनांक 14.10.2016 

प्रेषक: 

मुख्य सचिव मध्य प्रदेश सरकार 

भोपाल।

सेवा में, 

मध्य प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी

विषयः खाद्य संकट से सुरक्षा हेतु प्रत्येक ग्राम/जिला स्तर पर दाल उत्पादन एवं संरक्षण हेतु।

महोदय, 

मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री……. द्वारा मुझे आपको यह सूचित करने का आदेश हुआ है कि खाद्यान्न संकट तथा महँगाई की दर को नियंत्रित करने हेतु इस वर्ष प्रत्येक गाँव और प्रत्येक जिला के किसानों से दाल उत्पादन तथा संग्रहण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ और समुचित व्यवस्था की जाये। इससे मध्य प्रदेश सरकार को महंगाई एवं खाद्यान्न आपूर्ति में पर्याप्त सहायता मिलेगी। 

हस्ताक्षर 

मुख्य सचिव प्रतिलिपिः

1. सामान्य जिला प्रमुखों को। 

प्रश्न-1. ‘हमारी सामाजिक समस्यायें’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : हमारी सामाजिक समस्यायें 

भारत एक विशाल देश है जहाँ विभिन्न धर्मों जाति व वेश-भूषा धारण | करने वाले लोग निवास करते हैं। दूसरे शब्दों में अनेकता में एकता हमारी पहचान और हमारा गौरव है। परन्तु अनेकता अनेक समस्याओं की जननी भी है। 

जाति, भाषा व रहन-सहन व धार्मिक विभिन्नताओं के बीच कभी-कभी सामंजस्य स्थापित रखना दुष्कर होती है। देश में व्याप्त प्रान्तीयता भाषावाद सम्प्रदायवाद या जातिवाद इन्हीं विभिन्नताओं का दुष्परिणाम है इसके चलते आज देश के सभी राज्यों में दंगे फसाद, मारकाट, लूट-खसोट आदि के समाचार प्रायः सुनने व पढ़ने को मिलते हैं। 

नारी के प्रति अत्याचार, तथा बलात्कार का प्रयास हमारे समाज की एक शर्मनाक समस्या है। प्राचीन काल में जहाँ नारी को देवी माना जाता था। आज उसी नारी की भावनाओं को दबा कर रखा जाता है। पुरुष का अहम् उसे अपने समकक्ष स्थान देने के लिए विरोध करता है। दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियाँ आज भी नारी को कष्टमय व असहाय जीवन जीने के लिए बाध्य करती है। केवल अशिक्षित ही नहीं अपितु हमारे कथित सभ्य समाज में भी दहेज का जहर व्याप्त है। प्रतिदिन कितनी ही नारियाँ दहेज प्रथा के कारण समाज की बर्बरता का शिकार हो जाती है अथवा जिन्दा जला दी जाती हैं। 

अन्धविश्वास व रूढ़िवादिता जैसी बुराई देश की प्रगति को पीछे धकेल देती है। अंधविश्वास और रूढ़िवादिता हमारे नवयुवकों को भाग्यवादिता की ओर ले जाती है। फलस्वरूप वे कर्महीन हो जाते हैं। अपनी असफलातओं में अपनी कमियों को ढूढ़ने के बजाय वह इसे भाग्य की परिणति का रूप दे देते हैं। 

भ्रष्टाचार भी हमारे देश में एक जटिल समस्या का रूप ले चुका है। सामान्य कर्मचारी से लेकर, ऊँचे पदों पर आसीन अधिकारी तक सभी भ्रष्टाचार के पर्याय बन गये हैं। जिस देश के नेतागण भ्रष्टाचार में डूबे हुए हो सामान्य व्यक्ति उससे परे कब तक रह सकता है। यह भ्रष्टाचार का ही परिणाम है कि देश में महँगाई तथा कालाबाजारी के जहर का स्वच्छंद रूप से विस्तार हो रहा है। 

जातिवाद की जड़ें समाज में बहुत गहरी हो चुकी हैं। ये समस्यायें आज की नही हैं अपितु सदियों, से पनप रही हैं। इसके परिणामस्वरूप सामाजिक विषमता पनपती है जो देश के विकास में बाधक बनती है। इसके अतिरिक्त भाई-भतीजावाद व कुर्सीवाद समाज में असमानता व अन्य समस्याओं को जन्म देता है। भारत की राजनीतिक समस्याओं के सामाधान के लिए सामाजिक स्तर पर जद्दो-जहद करने की आवश्यकता है। 

इन समस्याओं का हल ढूँढना केवल सरकार का ही दायित्व नहीं है। अपितु यह पूरे समाज तथा समाज के पूरे नागरिकों का उत्तरदायित्व है। इसके लिए जन जागृति आवश्यक है, जिससे लोग जागरूक बने व अपने कर्तव्यों को समझें। देश के युवाओं व भावी पीढ़ी पर यह जिम्मेदारी और भी अधिक बनती है। आवश्यक है कि देश के सभी युवा समाज में व्याप्त इन बुराईयों को मिटाने का प्रयास करें, यदि यह प्रयास पूरे मन से होगा तो उन सामाजिक बुराईयों को अवश्य ही जड़ से उखाड़ फेका जा सकता 

प्रश्न-2. आप प्रकाश वर्मा हैं। चरित्र-प्रमाण पत्र प्रदान करने के सम्बन्ध में आप प्राचार्य को एक आवेदन पत्र लिखिए।

उत्तर: सेवा में, 

प्राचार्य, शा. विज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर। 

विषय: चरित्र प्रमाण पत्र हेतु।

द्वारा: कक्षा-शिक्षक, कक्षा-बी.ए. प्रथम वर्ष (2015-16) 

महाशय, 

उपर्युक्त विषय के अंतर्गत निवेदन है कि मैं प्रकाश वर्मा, पिता श्री बाबूलाल वर्मा सत्र 2015-16 में स्नातक प्रथम वर्ष (बी.ए.) का छात्र था। मेरे पिताजी के कार्य स्थल स्थानांतरण के कारण हम कटनी स्थानांतरित हो रहे हैं। अब मुझे वहीं रहकर अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखनी पड़ेगी। अत: आप संस्थान में मेरे सालभर के क्रिया-कलापों तथा व्यवहार को देखते हुए चरित्र प्रमाण पत्र प्रदान करने की कृपा करें। 

मैं आपकी इस कृपा के लिए आजीवन आभारी रहूँगा। 

प्रार्थी

प्रकाश वर्मा

बी.ए.- प्रथम वर्ष 

अनुक्रमांक-234

दिनांक : 30.04.2016 

प्रश्न-1. ‘धर्म निरपेक्षता संविधान का मूलभूत आदर्श’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : धर्म निरपेक्षता संविधान का मूलभूत आदर्श 

किसी भी देश के समावेशी विकास के लिए यह आवश्यक है कि उस देश सभी नागरिकों को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए। तथा इसके लिए उन्हें विकसित होने के समान अवसर उपलब्ध कराए जाएँ। संभवत: इसी दर्शन को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान सभा ने संविधान को धर्मनिरपेक्ष चरित्र प्रदान किया गया। तथा संविधान के लगभग सभी भागों में धर्मनिरपेक्षता के महत्व को उद्घाटित करते हुए अल्पसंख्यकों को संरक्षण प्रदान किया गया है। 

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति सम्मान प्रकट किया गया है। इसी प्रकार मौलिक अधिकारों में भी धार्मिक स्वतंत्रता का प्रावधान अनुच्छेद-25 से 28 तक शामिल किया गया है। जिससे किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक आचरण, क्रियाकलापों और प्रबंधन संबंध | कार्यों से वंचित ना किया जा सके। इसके अतिरिक्त समानता संबंधी मौलिक अधिकारों के रूप में राज्य के लिए धार्मिक भेदभाव की मनाही की गयी है। जिससे सभी धार्मिक सम्प्रदायों के प्रति राज्य द्वारा एक समान दृष्टिकोण अपनाया जाए। 

जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक विविधता मूलक राष्ट्र है जिसमें विभाजनकारी तत्वों के लिए अनेक अवसर विद्यमान हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माताओं अल्पसंख्यक वर्गों के मन में संभावित भय को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 29 तथा 30 के माध्यम से उन्हें उनकी संस्कृति संबंधी अनेक सुरक्षात्मक उपाय प्रदान किये हैं। ताकि देश के सभी नागरिक चाहे वे किसी भी पंथ को मानने वाले हों स्वयं के लिए राष्ट्र में अपना समुचित प्रतिनिधित्व प्राप्त कर सके। देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था ने भी समय-समय पर अपने निर्णयों के माध्यम से संविधान के इस आदर्श की पुनर्पुष्टि की है। 

उदाहरण के लिए न्यायालय ने धर्मनिरपेक्षता को संविधान के मूल ढाँचे के रूप में मान्यता प्रदान की है। जिसे संविधान संशोधन के माध्यम से भी परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि संविध न में धर्मनिरपेक्षता के आदर्श को पर्याप्त संरक्षण प्रदान किया गया है। अत: अब हमारा यह कर्तव्य है कि हम संविधान के इस आदर्श को बनाए रखें तथा देश के समस्त नागरिकों में आपसी भाईचारे और बंधुत्व को कायम रखें, तभी हमारा देश प्रगति के मार्ग पर बढ़ सकेगा और भारत का विश्वगुरु बनने का स्वप्न साकार हो सकेगा। 

प्रश्न-2. आप कक्षा के छात्र प्रतिनिधि हैं। आप महाविद्यालय में प्रवेश फीस की माफी के सम्बन्ध में प्राचार्य को एक आवेदन-पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

प्राचार्य, शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, 

जबलपुर।

विषयः प्रवेश फीस माफी के संबंध में 

श्रद्धेय. 

सादर निवेदन है कि महाविद्यालय प्रशासन द्वारा गत वर्ष (2014-15) की तुलना में इस वर्ष (2015-16) फीस में [बी.ए.-अंतिम वर्ष (III)] में “1500 रुपये” की बढ़ोतरी की गई है, जिसके अंतर्गत लाइब्रेरी तथा सांस्कृतिक, रेडक्रॉस हेतु अतिरिक्त शुल्क में वृद्धि हुई है। इसके कारण बी. पी.एल. समूह के कुछ छात्रों पर अतिरिक्त व्यय भार पड़ रहा है जिसे हम (बी.पी.एल. समूह के विद्यार्थी) देने में असमर्थ हैं। यदि महाविद्यालय प्रशासन द्वारा बी.पी.एल. समूह को अतिरिक्त व्यय पर छूट देने का कोई प्रावधान हो तो, हमें इस सुविधा से लाभान्वित करें और हमारी ‘फीस-माफी’ की कृपा करें। 

आशा है कि आप इस ओर ध्यान देने की कृपा करेंगे। 

प्रार्थी A.B.C. 

बी.ए. दिनांक : 31.07.2016 

प्रश्न-1. “कौशल भारत अभियान ” विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : कौशल भारत अभियान कौशल यानि हुनर है वह ताकत है, जिससे कोई भी देश अपनी बुलदियो को छू सकता है। सच तो यह है कि कौशल, विकास की वह कुंजी है, जो विश्व मंच पर किसी भी देश की सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकती है। कौशल से कुशलता बढ़ती है। और कुशलता से समृद्धि एवं उद्यमशीलता बढ़ती हैं। 

देश को विकसित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को पूरे भारत में लगभग 40 करोड़ भारतीयों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 2022 तक प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से “कुशल भारत – कौशल भारत” योजना को शुरू किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित करके उनकी कार्य क्षमता को बढ़ावा देना है। मुख्य रूप से कौशल विकास योजना का उद्देश्य भारत के युवाओं के कौशल के विकास के लिए उन क्षेत्रों में अवसर प्रदान करना है जो कई वर्षों से अविकसित हैं। इसके साथ ही साथ विकास करके नये क्षेत्रों की विकास करना, तथा उन्हें विकसित करने के लिए प्रयास करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में, ‘कौशल विकास योजना’, केवल जेब में रुपये भरना ऐसा नहीं है, बल्कि गरीबों के जीवन को आत्मविश्वास से भरना है।” इसलिए इसके मुख्य उद्देश्य निम्न है: 

गरीबी के कारण जो बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं उनके अन्दर छिपे कौशल को विकसित करना। योजनाबद्ध तरीके से गरीब नौजवानों को संगठित करके, उनके कौशल को सही दिशा में प्रशिक्षित करके गरीबी का उन्मूलन करना। गरीबी को दूर करने के साथ-साथ गरीब लोगों, परिवारों तथा युवाओं में नया सामर्थ्य भर के आगे बढ़ने का आत्मविश्वास लाना तथा देश में नयी ऊर्जा लाने का प्रयास करना। सभी राज्यों और संघ राज्यों को संगठित करके आई.टी.आई. की इकाईयों के माध्यम से दुनियाँ में स्वयं को स्थापित करना। भारत की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या (जिनकी आयु 35 वर्ष से कम हैं) को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए कौशल एवं अवसर प्रदान करना। 

कौशल विकास योजना के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित करके भारत में बेरोजगारी की समस्या के निवारण में सहायता करना। उत्पादकता में वृद्धि, तथा गरीबी खत्म करने में सहायक, भारत में छिपी हुई योग्यता को बढ़ावा देने में सहायक। राष्ट्रीय आय के साथ-साथ प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि। लोगों की जीवन निर्वाह आय में वृद्धि। भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार आदि लाभ इस योजना से जुड़े है। 

निष्कर्ष- कौशल भारत-कुशल भारत अभियान को जागरूकता अभियानों के साथ सभी लोगों को उनके हुनर में कुशल करके भारत में बहु-आयामी समस्याओं का निराकरण करना है। प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में, मैं भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाने के लिए पूरे राष्ट्र को प्रतिज्ञा करने के लिए आह्वान करता हूँ। 

प्रश्न-2. आप शिक्षा मंत्री को उर्दू भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करने के सम्बन्ध में पत्र आवेदन-पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

शिक्षा मंत्री, 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, 

नई दिल्ली।

विषय: स्कूलों में अल्पसंख्यकों हेतु उर्दू को ऐच्छिक विषय के रूप में शामिल करने हेतु निवेदन।

महाशय, 

उपर्युक्त विषय के अंतर्गत निवेदन है कि आपकी सरकार द्वारा चुनावी घोषणा-पत्र में अल्पसंख्यकों के लिए कक्षा 11वीं तथा 12वीं में ऐच्छिक विषय के रूप में उर्दू भाषा को शामिल करने का प्रावधान किया गया था। परंतु आपकी सरकार के कार्यकाल के दो वर्षों के भीतर इस दिशा में प्रयास नहीं किया गया है। 

चुनाव पूर्व की गई आपके दल के घोषणा को ध्यान में रखकर ही हमारे समूह ने आपको समर्थन दिया था। पर आपके निष्क्रिय रवैय्ये से आहत होकर; हमारे समुदाय द्वारा यह पत्र आपको प्रेषित किया जा रहा है, इस आशा के साथ की भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। 

निवेदन है उचित कार्यवाही कर अनुगृहीत करें। 

आवेदक 

अ.ब.स. 

एवं अन्य छात्र

दिनांक : 02.07.2016

प्रश्न-1. “ऑनलाइन शिक्षा एक नया प्रचलन/व्यवस्था है” विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : ऑनलाइन शिक्षा एक नया प्रचलन/व्यवस्था है 

कोविड-19 महामारी द्वारा विश्व पर कठोर आघात के साथ शिक्षा उन क्षेत्रों में से एक था, जो सबसे पहले बाधित हुआ। विद्यालय एवं महाविद्यालय तत्काल बन्द कर दिए गए, क्योंकि यहाँ पर लोग एक साथ जमा होकर शिक्षा ग्रहण करते हैं और विषाणु, व्यक्ति से व्यक्ति में फैलता है। इसने वर्तमान पीढ़ी की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक शिक्षा को दाव पर लगा दिया। बहुत से शैक्षणिक संस्थान, जिन्हें परम्परागत शैक्षणिक संस्थान सन्देह की नजर से देखते थे, ऑनलाइन शिक्षा के मंच के रूप में उभरकर आए। 

कम पसन्द के साथ ही विद्यालय एवं महाविद्यालय अब इस मंच को अपना रहे हैं, जो पहले कभी नहीं देखा गया। इसके परिणाम उत्साहवर्द्धक हैं। इसका अर्थ है कि एक बार यह संकट (कोरोना) समाप्त हो जाए, तो ऑनलाइन शिक्षा अन्धेरे में एक पतला रास्ता बन सकता है। 

छात्रों ने इस नए मंच को अच्छे से अपनाया है। वीडियो कॉलिंग वर्तमान पीढ़ी के लिए कोई नई बात नहीं है। बहुत से लोगों द्वारा पहले से ही अपने दोस्तों को देखने एवं उनसे देशभर तथा विश्वभर में बातें करने हेतु इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। 

ऑनलाइन शिक्षा को अपनाना सिर्फ इसका एक विस्तार है। साथ ही विद्यालय एवं महाविद्यालय के विपरीत इसकी कक्षाएँ अधिक लचीली हैं, क्योंकि शिक्षक एवं छात्र दोनों अपनी सुविधानुसार इसका समय निर्धारित कर सकते हैं। साथ-साथ अपने घर का काम भी कर सकते हैं। यह कक्षा की अवधि की अनिवार्यता को भी लचीला बनाता है। (कोई भी लगातार 6 घंटे तक स्क्रीन के ऊपर एक दिन में नहीं देखना चाहता है।) इसका अर्थ है, कि छात्र अपनी सुविधानुसार कक्षा की अवधि को छोटा कर सकते हैं, जैसा कि विश्वविद्यालय इत्यादि में नहीं हो पाता है। 

इसके अलावा यह मंच उन बच्चों को भी शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराता है, जिनकी क्षमता उच्च शैक्षणिक संस्थानों एवं राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के शिक्षकों तक पहुँचने की नहीं होती है। शिक्षा प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में नाम दर्ज कराने की अनिवार्यता को भी यह समाप्त करता है। 

भरी हुई पम्परागत कक्षा में जो बच्चा सवाल नहीं पूछ पाता है, वह भी यहाँ सवाल पूछ सकता है। 

हालांकि इसका सर्वोत्तम परिणाम तभी प्राप्त हो सकता है, जब प्रत्येक बच्चा तक एंड्रायड मोबाइल या अन्य उपकरण तथा उच्च इंटरनेट सम्पर्क पहुँचाया जाए। 

प्रश्न-2. आप बीना दास बंजारे हैं। आप दिव्यांग होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत लिपिक रखने के सम्बन्ध में प्राचार्य को आवेदन-पत्र लिखिए। 

उत्तर: सेवा में, 

प्राचार्य, शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, 

विलासपुर।

विषय: दिव्यांग होने के कारण लिपिक की सुविधा हेतु निवेदन 

महाशय, 

सविनय निवेदन है कि बी.ए. अंतिम वर्ष की वार्षिक परीक्षा की समय-सारणी प्रकाशित हो चुकी है जिसमें 30 मार्च, 2017 से परीक्षा प्रारंभ होने वाली हैं। मैं बीना दास बंजारे दिव्यांग श्रेणी की छात्रा हूँ, जिसे परीक्षा में उत्तर लेखन के लिए एक लिपिक की आवश्यकता है। मेरे आवेदन को स्वीकार कर वार्षिक परीक्षा के लिए लिपिक उपलब्ध कराने की कृपा करें। जिससे मैं सत्र 2016-17 की वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित हो सकूँ। 

कृपया अनुकूल कार्यवाही कर अनुगृहीत करें। 

प्रार्थी/आवेदनकर्ता 

बीना दास बंजारे 

अनुक्रमांक – 204 |

कक्षा – बी.ए. अतिम वर्ष 

दिनांक : 24.12.2016 

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