SSC Descriptive exam model question paper in hindi | SSC Cgl descriptive paper pdf in hindi

SSC Descriptive exam model question paper in hindi

Model question paper-1 to 4 |  SSC Descriptive exam model question paper in hindi | SSC Cgl descriptive paper pdf in hindi-

Question listप्रश्न-. ‘राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. आप राजशेखर हैं। आप अपने अनुज अभिषेक को समय के सदुपयोग का महत्व बताते हुए एक पत्र लिखिए। 

प्रश्न-. ‘अनुच्छेद-370 मुद्दे एवं विवाद’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-.आप किशन जोशी हैं। आपके मित्र सुरेश ने अपने जन्मोत्सव के लिए आपको निमंत्रण पत्र भेजा है। अपने मित्र के जन्म दिवस के अवसर पर आप बधाई पत्र लिखिए। 

 

प्रश्न-. ‘राजद्रोह कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. आप समाचार-पत्र के संपादक के नाम एक पत्र लिखिए जिसमें आपके अपने क्षेत्र में व्याप्त असामाजिक तत्वों के कुप्रभाव का वर्णन किया गया हो। 

प्रश्न-. ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का प्रभाव’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-. अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत पत्र लिखें।

Ssc descriptive EXAM FREE BOOK READ HEREClick here free book PDF

SSC Descriptive exam Model question paper-1

प्रश्न-1. ‘राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति 

वास्तव में राष्ट्र निर्माण एक ऐसी परिकल्पना हैं जिसमें राष्ट्र से जुड़े हर पहलू का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कुछ लोग राष्ट्र निर्माण मात्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखते हैं, परन्तु राष्ट्र निर्माण मात्र राजनीति से नहीं होता राष्ट्र निर्माण होता है राष्ट्रवासी यह जान ले कि हमें अन्याय नहीं सहना हैं अन्याय नहीं करना हैं तो राष्ट्रवाद की वह बुनियाद पड़ेगी कि युगों के बीतने पर भी राष्ट्र की इमारत बुलंद रहेगी। 

राष्ट्र निर्माण में युवाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इसका कारण यह है कि आज देश के विकास एवं राष्ट्र निर्माण के लिए जो महत्त्वपूर्ण बिन्दू हैं वह है शिक्षा, उद्योगधंधे, सैन्य क्षमता, कृषि एवं राजनीति ये पाँच क्षेत्र ऐसे हैं जो किसी भी देश में अपने सम्पूर्ण शक्ति एवं क्षमताओं से कार्य करे तो उस देश के विकास को कोई नहीं रोक सकता। इन सभी क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है यह बात सभी जानते हैं। अगर स्वछंद की जगह युवा ऊर्जा स्वतंत्र हो, संगठित हो तथा उसे स्वस्थ मार्गदर्शन दिया जाय उसके मनोभाव तथा इच्छा शक्ति को सही मायने में समझा जाय उसके जोश को सही दिशा में गति दी जाय तो यह युवा शक्ति सफलता के झंडे गाड़ देगी, उस हर क्षेत्र में जहाँ उसका स्वस्थ दोहन किया जाएगा। 

आज युवा शक्ति के भीतर जोश तो है लेकिन जोश के साथ आक्रोश भी है। जोश के साथ आक्रोश का होना ठीक बात नहीं है, किन्तु यह आक्रोश निराधार नहीं है इसके पीछे असंख्य बजहें भी हैं। युवाओं के लिए देश में संसाधनों की कमी नहीं है न ही सम्भावनाओं की ही कमी है मगर कमी है किसी चीज की तो वह है युवा शक्ति को उन संसाधनों के दोहन के लिए सुनियोजित ढ़ग से तैयार न किये जाने की। युवा ऊर्जा का समुचित उपयोग देशहित में तभी हो सकता है जब उसके भीतर से आक्रोश ख़त्म किया जाय और उन्हें प्लेटफार्म के साथ-साथ स्वस्थ वातावरण भी उपलब्ध कराया जाय। 

अगर हम युवा की परिभाषा गढ़ने चलें तो हमारे सामने जो मानक आता है वह 18 से 40 वर्ष की उम्र सीमा के व्यक्ति को युवा के रूप में परिभाषित करता हैं। ऐसा करने के पीछे पुख्ता वजह भी है क्योंकि इस उम्र सीमा के व्यक्ति के भीतर, जोश, ऊर्जा शक्ति, प्रबल कर्तव्य निष्ठा, नये-नये प्रयोग परीक्षण करने की क्षमता निहित होती हैं। तर्क वितर्क करना 

त्वरित निर्णय लेना, हर काम को ऊर्जा के साथ करना क्रान्ति और विकास का नया अध्याय लिखना, समय के साथ कदम दर कदम चलने का साहस एक युवा की सबसे बड़ी पूंजी होती है। सही शब्दों में अगर कहें तो किसी देश के सर्वांगीण विकास का मॉडल होता है उस देश का युवा। 

अगर सही मायने में युवा ऊर्जा, युवा शक्ति का उपयोग देश के विकास हेतु किया जाय तो युवा ऊर्जा देश का स्वस्थ भविष्य तय करने में सहायक सिद्ध होगी। युवा पीढ़ी को अनुभव कराना होगा कि वह देश को विकास की प्रथम और सबसे ताकतवर कड़ी है बिना उसके सहयोग के देश की उन्नति सम्भव नहीं है। न ही संभव है विकासशील भारत का विकसित बनाना। 

प्रश्न-2. आप राजशेखर हैं। आप अपने अनुज अभिषेक को समय के सदुपयोग का महत्व बताते हुए एक पत्र लिखिए। 

उत्तर : 

सी-3/36, प्रशांत विहार, 

नई दिल्ली, 

7 जुलाई, 2022

प्रिय अभिषेक, 

शुभाशीष। 

आज ही तुम्हारे अध्यापक श्री भागवत जी का पत्र मिला। यह जानकर अत्यंत दुःख हुआ कि तुम अपना समय पढ़ाई में न लगाकर व्यर्थ की बातों एवं कार्यों में लगा रहे हो। 

प्रिय भाई, समय एक अमूल्य वस्तु है। संसार में हर वस्तु दोबारा प्राप्त की जा सकती है, पर बीता हुआ समय नहीं। जो व्यक्ति समय के महत्व को नहीं पहचानता, उसे जीवन में असफलताओं का सामना करना पड़ता है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। जो विद्यार्थी समय का उपयोग सही ढंग से करता है, वही जीवन में उन्नति करता है। अत: समय के मूल्य को पहचानो और नियमित ढंग से अपनी पढ़ाई करो। यदि तुमने समय का सदुपयोग करना सीख लिया तो जीवन में कुछ भी कर पाना असंभव नहीं होगा। 

मुझे आशा है कि तुम समय के महत्व को पहचान कर अच्छी संगति में रहोगे और अपने अध्यापकों के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने का प्रयत्ल करोगे। पानेवाले का नाम व पता 

तुम्हारा अग्रज, अ.ब.स. 

राजशेखर 

SSC Descriptive exam Model question paper-2

प्रश्न-1. ‘अनुच्छेद-370 मुद्दे एवं विवाद’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : अनुच्छेद-370 मुद्दे एवं विवाद 

अनुच्छेद-370 जम्मू एवं कश्मीर राज्य को पर्याप्त स्वायत्तता देता था। जैसे-अलग संविधान, अलग झण्डा, अलग नागरिकता तथा कानून बनाने की स्वतंत्रता इत्यादि। विदेश विभाग, रक्षा एवं संचार केन्द्र सरकार के लिए आरक्षित थे। परिणामतः जम्मू एवं कश्मीर स्थायी निवास, सम्पत्ति स्वामित्व तथा मौलिक अधिकार के सम्बन्ध में अपना अलग नियम बना सकता था। यह राज्य से बाहर के भारतीयों को यहाँ पर सम्पत्ति खरीदने तथा यहाँ बस जाने से भी रोक सकता था। इसके कारण अनुच्छेद-19 का उल्लंघन हो रहा था। बहुत से विशेषज्ञ ऐसा मानते थे कि यहाँ अलगाववाद के विकास का एक मुख्य कारण अनुच्छेद-370 का होना है। इसलिए इसे हटाने की माँग चल रही थी और सत्ताधारी दल ने 2019 के अपने चुनावी घोषणापत्र में इस मुद्दे शामिल किया। 

उन्होंने तर्क दिया कि कश्मीर को देश के साथ एकीकरण के लिए इस अनुच्छेद को हटाना पड़ेगा। पुनः सत्ता में आने के बाद उन्होंने अनुच्छेद-370 को हटा दिया। सरकार के इस कदम को आलोचक भारत के वर्तमान आर्थिक गतिहीनता के साथ जोड़कर देखते हैं। 

अनेक राजनीतिक विशेषज्ञ अनुच्छेद-370 की समाप्ति को असंवैधानिक मानते हैं तथा इसका विरोध करते हैं। हालांकि सुभाष कश्यप जैसे अधिकांश संविधान विशेषज्ञ इसे वैधानिक मानते हैं तथा इसमें कोई संवैधानिक दोष नहीं मानते हैं। 

कुछ राजनीतिज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से जम्मू एवं कश्मीर की सांस्कृतिक एवं जनांकिकीय संरचना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ध्यान देने वाली बात है कि अनुच्छेद-370 हटाने के अधिकांश विरोधी पाकिस्तान एवं चीन से हैं। जम्मू एवं कश्मीर चीन एवं पाकिस्तान से सटा सीमावर्ती राज्य है। जब अनुच्छेद-370 होता, तो राज्य सरकार की मिलीभगत से चीन एवं पाकिस्तान यहाँ पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को 

जन्म दे सकते थे। इस अनुच्छेद की समाप्ति के बाद शत्रु राष्ट्रों के लिए भारतीय राज्य क्षेत्र में इन गतिविधियों को चलाना कठिन होगा। 

प्रश्न-2.आप किशन जोशी हैं। आपके मित्र सुरेश ने अपने जन्मोत्सव के लिए आपको निमंत्रण पत्र भेजा है। अपने मित्र के जन्म दिवस के अवसर पर आप बधाई पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

3सी, कमला नगर 

20.07.2016 

प्रिय सुरेश, 

नमस्कार। 

तुम्हारा निमंत्रण-पत्र आज ही डाक से मिला। मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी तुम अपना जन्म-दिवस बड़ी धूमधाम से मना रहे हो। 

मेरी ओर से तुम्हे बहुत-बहुत बधाई। मैं भगवान से तुम्हारे शतायु होने की कामना करता हूँ एवं तुम्हारे उज्ज्वल भविष्य को शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। मैं इस अवसर पर अवश्य आऊँगा। 

घर में बड़ों को प्रणाम तथा छोटों को प्यार। 

तुम्हारा शुभचिंतक, 

किशन 

पाने वाले का नाम व पता                                                                                                 

अ. ब. स. 

SSC Descriptive exam Model question paper-3

प्रश्न-1. ‘राजद्रोह कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : राजद्रोह कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 

विधान प्रदत्त, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 8 फरवरी मंगलवार रात को देखने में आया। कश्मीरी, अल्पसंख्यक व दलित समुदाय के लोगों ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की तीसरी बरसी पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। प्रशासन के द्वारा उनके इस आयोजन पर रोक लगाई गायी तो इन लोगों ने देश विरोधी नारे लगाये जिनके द्वारा कश्मीर की आजादी तक जंग जारी रखने का ऐलान किया गया। 

भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों एवं मूल कर्तव्य वाले अनुच्छेदों क्रमश: 51 एवं 51 (क) में राष्ट्रीय प्रतीकों राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान तथा अन्य प्रतीकों को सम्मान करने तथा उसके प्रति आदर व्यक्त करने का प्रावधान करता है। इसके साथ ही इनका अपमान करने पर कानूनी बंदिशें भी लगाता है जिसके तहत जुर्माना तथा जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया गया है।

अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता प्रदान की गयी है। जिसके तहत भारत का नागरिक कहीं भी रह सकता है, जा सकता है सभा एवं संघ बना सकता है तथा अपनी बात को रख सकता है अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का ही सहारा लेकर व्यक्ति अपनी बातों को समाज के सामने रख सकता है।

वर्तमान में इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। एक तरफ जहाँ इसको व्यापक पैमाने पर प्रसारित किया जा रहा हैं वहीं दूसरी तरफ इसका दुरुपयोग हो रहा है। 

भारतीय संविधान के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र रूप से किसी के विचारों को व्यक्त करने के लिए पूर्ण अधिकार प्रदान नहीं करती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में उन आधारों को उल्लेख किया गया है, जिनके तहत राज्य भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है। इसके तहत ऐसे किसी भी भाषा या अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता नहीं दी जाती है। जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर आंच आए, सार्वजनिक कानून व्यवस्था खराब हो, शालीनता और नैतिकता पर आंच आये, अदालत की अवमानना हो, किसी की मानहानि हो, किसी अपराध के लिए प्रोत्साहन मिले तथा भारत की एकता, संम्प्रभुता और अखंडता को खतरा हो। 

संविधान द्वारा भाषण और अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता दी गयी है, ताकि लोग उन विचारों पर बहस और चर्चा करें जो व्यक्ति और राष्ट्र को समृद्ध बनाती है। सवाल उठाना हमारा अधिकार है लेकिन जेएनयू में जो हुआ | वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं इस प्रकार की गतितिधि पर त्वरित रोक लगाने की आवश्यकता है।

वर्तमान घटनाओं को देखते हुए राजद्रोह और अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता से संबंधित कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता हैं साथ ही नये कानूनों को बनाने तथा पुराने कानूनों को सही तरह से लागू करने की भी आवश्यकता है। जिससें ऐसी घटनाओं को रोका जाय नही तो यह विघटन की ओर राष्ट्र को अग्रसारित करेगा। 

प्रश्न-2. आप समाचार-पत्र के संपादक के नाम एक पत्र लिखिए जिसमें आपके अपने क्षेत्र में व्याप्त असामाजिक तत्वों के कुप्रभाव का वर्णन किया गया हो। 

उत्तर : सेवा में, 

संपादक, हिन्दुस्तान 

नई दिल्ली-110002

मान्यवर, 

मैं आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से पुलिस अधिकारियों का ध्यान उत्तम नगर क्षेत्र में व्याप्त असामाजिक तत्वों के बढ़ते आतंक तथा चोरी की घटनाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। 

इस क्षेत्र में आए दिन कोई-न-कोई चोरी, लूट या छीना-झपटी की घटना घटित होना सामान्य बात होती जा रही है। यहाँ समाज-विरोधी तत्वों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। बस-स्टैंड एवं पार्कों के पास छेड़छाड़ की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। आए दिन असामाजिक तत्व दुकानदारों तथा राहगीरों से गाली-गलौज करते दिखाई देते हैं। ऐसे लोगों को किसी का भय नहीं है। 

इस क्षेत्र के निवासियों ने पुलिस अधिकारियों से अनेक बार मौखिक तथा लिखित प्रार्थना की, मगर खेद का विषय है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा इस ओर थोड़ा भी ध्यान नहीं दिया गया। कई बार तो पुलिस के सामने ही ये शरारती तत्व लड़ते-झगड़ते देखे गए हैं। 

कृपया हमारे पत्र को अपने समाचार-पत्र में प्रकाशित करने का कष्ट करें ताकि इसे पढ़कर पुलिस के उच्च अधिकारी वर्ग एवं अन्य संबद्ध अधि कारी का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित हो तथा वे संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई हेतु निर्देश दें। 

सधन्यवाद। 

भवदीय,

कमल किशोर गर्ग

डब्ल्यू-जेड-72, शीशराम पार्क, 

उत्तम नगर,

नई दिल्ली -110059 

SSC Descriptive exam Model question paper-4

प्रश्न-1. ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का प्रभाव’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

उत्तर : भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का प्रभाव 

कोविड-19 वर्ष 2020 की पहली एवं सर्वाधिक बड़ी मानवीय आपदा है। 200 से अधिक देशों में कोरोना वायरस के मामले आने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च, 2020 को इसे वैश्विक महामारी घोषित किया। लॉकडाउन ने भारत जैसे तीन आर्थिक वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रभावित किया है। 

23 मार्च, 2020 को भारत सरकार द्वारा 21 दिन की तालाबन्दी (लॉकडाउन) घोषित कर दिया गया। सभी यातायात, आवागमन, सार्वजनिक एवं निजी कार्यालय जैसे स्थानों पर भीड़ जमा होने इत्यादि पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। अर्थव्यवस्था पर इसके गम्भीर प्रभाव पड़े। 

यातायात बन्द होने से श्रम एवं कच्चे माल की आपूर्ति कमजोर हुई। इससे विभिन्न उद्योगों में उत्पादन में कमी आई और समय पर वस्तुओं का वितरण चुनौतीपूर्ण होने लगा। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में भारी गिरावट आई। 

तालाबन्दी के कारण लाखों लोगों की नौकरी चली गई या उन्होंने नौकरी छोड़ दी। असंगठित क्षेत्र पर अधिक प्रभाव पड़ा। मनरेगा, 2005 के अन्तर्गत कार्यरत श्रमिकों पर काम न मिलने के कारण बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। अद्यतन अध्ययन के आधार पर कुछ अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि भारत में इससे लगभग 40 मिलियन नौकरियाँ गई हैं (MRD Report)| इसमें अधिकांश असंगठित क्षेत्र से हैं। जिनकी नौकरियों नहीं गई, उनके वेतन में कटौती हुई। ऐसे में लोगों की आर्थिक स्थिति में काफी गिरावट आई। असंगठित क्षेत्र एवं दिहाड़ी श्रमिकों की आर्थिक हालत बेहद खराब होने लगी, क्योंकि इनके पास ऐसी विपरीत परिस्थितियों के लिए कोई सुरक्षित जमा पूँजी नहीं होती हैं। साथ ही इनका काम भी ऑनलाइन प्रकृति की अपेक्षा भौतिक उपस्थिति पर आधारित होता है।

आय में कमी आने से माँग कमजोर हुआ। इससे कृषि एवं औद्योगिक उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद नष्ट हो गए। बहुत से कारखाने बन्द हो गए (उदाहरण-एटलस साइकिल)। भविष्य में इससे मुद्रास्फीति की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि उत्पादन कम होने से आपूर्ति पक्ष कमजोर होगा।

उत्पादन, बाजार एवं आय पर नकारात्मक प्रभाव के कारण सरकारी राजस्व में कमी आई। विश्व बैंक तथा अन्य महत्वपूर्ण संगठनों ने भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर को इस वर्ष नकारात्मक होने का अनुमान लगाया है। दूसरी तरफ सरकार पर स्वास्थ्य व्यय एवं सामाजिक सुरक्षा व्यय का भार बढ़ा है। इससे राजकोषीय उत्तरदायित्व को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगी। 

हालाँकि सरकार एवं रिजर्व बैंक (RBI) ने महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए अनेक उपायों की घोषणा की है, लेकिन जैसा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा, ये उपाय सिर्फ अल्पावधि के लिए है और समस्या अति गम्भीर होने के कारण वांछित परिणाम नहीं दे सकते हैं। 

इन सब के दौरान सरकार के पास चीन से नाराज विभिन्न बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर अपने यहाँ बुलाने का बेहतर अवसर है। 

प्रश्न-2. अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत पत्र लिखें। 

उत्तर: सेवा में,

मुख्य चिकित्सा अधिकारी,

लाला लाजपतराय अस्पताल,

कानपुर नगर (उ.प्र.)

विषय : अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था के संबंध में, 

महोदय, इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अस्पताल परिसर में व्याप्त अव्यवस्था की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। अस्पताल से संबद्ध एम्बुलेन्स सेवा की स्थिति दयनीय है स्थिति यह है कि एम्बुलेन्स सेवा के अंतर्गत केवल एक वाहन ही सुचारु रूप से कार्य कर पा रहा है। इसके अतिरिक्त मरीजों के कक्ष अस्वस्थ्यकर एवं जर्जर स्थिति में हैं। साथ ही अस्पताल परिसर में स्वच्छता के प्रति भी गम्भीर लापरवाही देखी जा सकती है। अत: आप से आग्रह है कि उक्त अव्यवस्थाओं का शीध्र संज्ञान लेकर समुचित कदम उठाएँ।

धन्यवाद, 

प्रार्थी 

अ. ब. स. पत्रकार (दैनिक आज)

दिनांक : 24 दिसम्बर, 2017 

Click Here- SSC EXAM Essay 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

ten − ten =