Ssc chsl,cgl previous year descriptive papers with solutions pdf in hindi | ssc chsl tier 2 books pdf free download

Ssc chsl,cgl previous year descriptive papers with solutions pdf in hindi

Ssc chsl,cgl previous year descriptive papers with solutions pdf in hindi ssc chsl tier 2 books pdf free download-ssc chsl29.09.2019

निबंध लेखन (50 अंक) 

प्रश्न : बढ़ती जनसंख्या एक खतरा 

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उत्तर : भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है लेकिन कुछ वर्षों में चीन से आगे निकलने के लिए तैयार है। इसलिए, सवाल यह है कि क्या भारत जनसंख्या वृद्धि को बनाए रख सकता है? उत्तर एक स्पष्ट नहीं है। जनसंख्या का दबाव मानव की बिगड़ती स्थिति का प्राथमिक कारण है। 

आज, भारत में अल्पपोषित बच्चों की सबसे बड़ी संख्या है, कुपोषित महिलाओं की सबसे बड़ी संख्या है, बड़ी संख्या में लोग अंग विफलता से पीड़ित हैं। भारत दुनिया में अनपढ़ बच्चों की सबसे बड़ी संख्या का घर भी है। इसके अलावा, भारत का मानव विकास सूचकांक कई अफ्रीकी देशों जितना कम है। जनसंख्या दबाव, इसलिए, स्पष्ट रूप से देश में बिगड़ती मानव स्थिति का एक कारण है। 

दशकों से, जनसंख्या दबाव ने कई खूबसूरत शहरों को भयानक गंदगी में बदल दिया है। इसने खुले स्थान, सतह के पानी, भूजल को मिटा दिया है तथा वायु और जल प्रदूषण को बढ़ा दिया है। पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि हैदराबाद में भूजल जल्द ही सूख जाएगा। आवास की बढ़ती मांग ने रियल एस्टेट एजेंटों को शहर और उसके आसपास झीलों, नदियों, जल निकायों, कृषि भूमि और पहाड़ियों का अतिक्रमण करने दिया है। 

कॉरपोरेट अस्पताल वायु प्रदूषण के कारण दिल और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों पर जोर देते हैं। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्कूल शहर में विकसित हो रहे हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता खराब हो गई है। भारत में हैदराबाद में सबसे अधिक जनसंख्या है। मुंबई में 50 प्रतिशत से अधि क लोग शौचालय के रूप में रेल पटरियों और फुटपाथ का उपयोग करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों और देश के अन्य हिस्सों में नौकरियों के सूखने के कारण आमद खतरनाक रूप से अधिक है। 

चेन्नई में, आबादी के दबाव ने शहर में और आसपास के 3,000 से अधिक जल निकायों को मिटा दिया है, जिससे शहर प्राधिकरण को विलवणीकरण संयंत्रों पर भारी धन खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा। झीलों के लुप्त होने, भूमिगत जल की कमी और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण बंगलौर की स्थिति बिगड़ती जा रही है। भारत की राष्ट्रीय राजधानी अपने पहले के स्वयं की एक छाया है। मानव अस्तित्व के लिए यह आवश्यक बुनियादी ढाँचा तेजी से गिर रहा है। 

हाल ही में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने घोषणा की है कि सात राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और झारखंड में 145 जिलों में परिवार नियोजन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए भारत जल्द ही ‘मिशन परिवार विकास’ शुरू करेगा। 

मिशन का लक्ष्य प्रति महिला तीन बच्चों की वर्तमान औसत से 2025 तक प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या 2.1 तक करना है। इन सात राज्यों की पहचान निम्न मानव विकास सूचकांक के आधार पर की गई है। भारत 2022 तक सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने के लिए तैयार है। बिगड़ती मानव और पर्यावरणीय परिस्थितियों के मद्देनजर, जनसंख्या में वृद्धि मानव दुख का एक अतिरिक्त कारण है। इसलिए, चीन के अनुभव से बढ़ती जनसंख्या वृद्धि की जाँच करना अनिवार्य है।

पत्र लेखन (50 अंक) 

प्रश्न : मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में अपने छोटे भाई को पत्र लिखें। 

उत्तर :

53, गोदावरी अपार्टमेंट

दिल्ली-1

29 सितम्बर, 2020

प्रिय रोहित, 

मैं आपको मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में लिख रहा हूँ। यह शोध के निष्कर्षों के आधार पर हर दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाता है। 

शोध के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि मोबाइल फोन के उपयोग | से सिरदर्द, एकाग्रता की कमी, याददाश्त में कमी और थकान के साथ कई लक्षण हो सकते हैं। इन जोखिमों और लक्षणों को विशेष रूप से युवा लोगों में देखा जाता है क्योंकि वे मोबाइल फोन के सबसे अधिक उपयोगकर्ता हैं। स्मार्टफोन के उपयोग से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के अध्ययन से संकेत मिलता है कि कुछ उपयोगकर्ता विभिन्न लक्षणों को प्रदर्शित करते हुए स्मार्टफोन पर निर्भर या आदी हो जाते हैं। यह तेजी से अपनाने और यह युवा पीढ़ी के बीच तेजी से अपनाने और भारी उपयोग स्वरुप के कारण सामाजिक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्मार्टफोन के उपयोग और प्रभाव की जांच करने के लिए लायक है। 

यद्यपि स्मार्टफोन, उपयोगकर्ताओं को बहुत अधिक लाभ प्रदान करते हैं, लेकिन स्मार्टफोन के अत्यधिक या बाध्यकारी उपयोग से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि वे ऑनलाइन सोशल प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर सकते हैं या अत्यधिक उपयोग से सिरदर्द जैसी शारीरिक परेशानी से पीड़ित हैं, तो व्यक्ति चिंतित हो सकते हैं। कुछ चरम मामलों में, अत्यधिक उपयोग से भावनात्मक और मानसिक समस्याएँ, असहज और नींद की परेशानी हो सकती हैं। 

शारीरिक रूप से बीमार होना नींद की कमी और/या खराब गुणवत्ता और शारीरिक रूप से थकान महसूस करने जैसी चीजों में ही प्रकट होता है। दूसरी ओर, भावनात्मक बीमार व्यक्ति खुद को सीमित आमने-सामने बातचीत में प्रकट कर सकते हैं, जो दूसरों के साथ संबंध में की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, विशेष रूप से परिवार के सदस्यों को। ये सभी उपयोगकर्ताओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, यह देखते हुए कि भारतीय समाज पारस्परिक संबंधों के लिए सामर्थ्य संलग्न करता है। 

इसलिए, मैं आपको सलाह दूंगा कि आप अपने मोबाइल फोन का उपयोग केवल तभी करें जब अधिक आवश्यक हो, क्योंकि यह बहुत मूल्यवान समय बर्बाद करता है। चूंकि आप एक छात्र हैं, आप अपना समय बर्बाद नहीं कर सकते। 

मुझे उम्मीद है कि आप मेरी सलाह मानेंगे। 

कृपया मेरी तरफ से प्यारी माँ और पिताजी को सादर नमन और बिटू को प्यार दें। 

बहुत सारा प्यार के साथ, 

आपका बड़ा भाई 

मोहित 

SSC CGL29.12.2019

निबंध लेखन (250 अंक) 

प्रश्न : वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व 

उत्तर : आज जीवन के किसी क्षेत्र में सफल होने के लिए शिक्षा एक अत्यन्त महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है। शिक्षा का तात्पर्य होता है-क्षमता विकास, जिससे कि हम जीवन में आने वाली चुनौतियों एवं बाधाओं का सफलतापूर्वक सामना कर सकें। एक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति अपने ज्ञान का समुचित उपयोग करके स्वयं को आधुनिक विश्व के अनुरूप ढाल सकता है। आज दुनिया में अत्याधुनिक तकनीक की अपरिहार्यता बढ़ी है, इस परिप्रेक्ष्य में देखें तो शिक्षा पर हमारी निर्भरता आध निक विश्व की बढ़ती आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति हेतु नितान्त आवश्यक है। आज के समय में शिक्षाविहीन व्यक्ति को पूर्णतया अनुपयोगी समझा जाता है। आज के इस अत्याधुनिक विश्व में शिक्षा की महत्ता को कई स्तरों पर देखा जा सकता है। 

शिक्षा के महत्व का एक महत्वपूर्ण आयाम यह है कि यह हमारे ‘स्व’ का विस्तार करके हमारे सोचने एवं विचार शक्ति को परिपक्व एवं आधुनिक बना देता है। शिक्षा बच्चों में ज्ञान का समावेश करके उन्हें समस्या समाधान, निर्णय-निर्माण आदि के सन्दर्भ में दक्ष बनाता है तथा उन्हें विभिन्न घटनाक्रमों एवं तथ्यों के सन्दर्भ में अद्यतन बनाता है। शिक्षा किसी भी अर्थव्यवस्था को ज्ञान अर्थव्यवस्था में रूपान्तरित करने का एक यंत्र है। शिक्षा के द्वारा ‘स्व’ का बोध होता है। अर्थात् अधिकारों, कर्तव्यों एवं समग्न दृष्टि के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। शिक्षा से जहाँ एक तरफ मानसिक बाधाओं एवं संकीर्णताओं से मुक्ति मिलती है वहीं दूसरी ओर आधुनिक विश्व में सार्थक परिवर्तन को प्रोत्साहन प्राप्त होता है। इससे व्यक्ति की सृजनात्मक शक्ति निखरती है। 

इस प्रकार निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि शिक्षा से व्यक्ति एवं समाज का परिष्कार होता है। इसके द्वारा हम अपने को एवं अपने समाज को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं तथा इसमें सार्थक परिवर्तन हेतु योगदान करते हैं। इसके द्वारा हमारी जीवन दृष्टि परिपक्व एवं परिमार्जित होती है। समग्रतः शिक्षा मनुष्य को मनुष्यता प्रदान करता है। 

पत्र लेखन (150 अंक) 

प्रश्न : आप सुनीता सुनील, गाँधी रोड, द्वारका, नई दिल्ली-110083 की रहने वाली हैं। आपको जी. डी. रेस्टोरेंट के प्रबन्धक को उनके रेस्टोरेंट में प्रदान की जाने वाली खराब सेवाओं एवं खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता के सन्दर्भ में पत्र लिखना है। 

सुनीता सुनील

23, गाँधी रोड द्वारका

नई दिल्ली-110083

25 अक्टूबर, 2020

प्रबन्धक , जी. डी. रेस्टोरेंट

डिफेंस कॉलोनी दक्षिणी दिल्ली 

विषय : रेस्टोरेंट में प्रदान की जाने वाली खराब सेवाओं एवं खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता के सन्दर्भ में। 

महाशय, 

मैंने आपके रेस्टोरेंट का काफी नाम सुना था, अतः मैंने अपने तीन मित्रों के साथ एक छोटे-से अवसर पर 24 अक्टूबर, 2020 को आपके रेस्टोरेंट की सेवा ली। 

मुझे बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि न केवल आपके रेस्टोरेंट के खाद्य पदार्थ गुणवत्ता की दृष्टि से बेहद खराब थे बल्कि इनके मूल्य भी अत्यधिक थे। हमें जो भोजन प्रस्तुत किए गए वे ज्यादातर अध पके एवं स्वादविहीन थे। हमने सुन रखा था कि आपके यहाँ का पनीर बटर मसाला काफी मशहूर है लेकिन उसकी गुणवत्ता औसत दर्जे की भी नहीं थी। 

हमें भोजन का ऑर्डर देने के बाद 45 मिनट इन्तजार करना पड़ा। जब हमने आपके यहाँ कार्यरत वेटर को भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की तो वह बड़े ही अभद्रता से पेश आया। उक्त स्थिति में सपरिवार बाहर किसी अच्छे रेस्टोरेंट में भोजन करने का उत्साह फीका हो गया। यह हमारे लिए एक बुरा अनुभव रहा। 

आशा करता हूँ कि आप मेरे शिकायत पर गम्भीरता से विचार करते हुए अपने यहाँ की सेवाओं एवं खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार हेतु प्रयास करेंगे। 

धन्यवाद,

आपका शुभेच्छु

सुनीता सुनील 

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