SSC chsl previous year descriptive papers with solutions pdf in hindi |Model question paper-36 to 40

SSC chsl previous year descriptive papers with solutions pdf in hindi

SSC chsl previous year descriptive papers with solutions pdf in hindi

Question list-प्रश्न-1. ‘नक्सलवाद’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-2. आप चंदन शुक्ला हैं। एक शिक्षाविद्, आप बी. टेक. पाठ्यक्रम में सुधार के हेतु शिक्षा सचिव को आवेदन-पत्र लिखिए।

प्रश्न-1. ‘ई-शॉपिंग का बढ़ता चलन ‘ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-2. आप MGNREGA के उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखिए।

प्रश्न-1. ‘नकली प्रचारित वीडियो की चुनौती’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-2. आप विश्वविद्यालय में पुस्तकालय (लाइब्रेरी) की सुविधा के सम्बन्ध में कुलपति को एक आवेदन पत्र लिखिए।

प्रश्न-1. “जनसंख्या वृद्धि’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-2. किसी समाचार-पत्र के सम्पादक के नाम एक पत्र लिखिए जिसमें इक्कीसवीं शताब्दी में संचार माध्यम के रूप में इन्टरनेट की भूमिका पर आपके विचार व्यक्त हों।

प्रश्न-1. ‘भारत में विकलांगता’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-2. अपने मित्र के पास एक पत्र लिखिए जिसमें समाज के विकास में शिक्षा के महत्व को रेखांकित कीजिए।

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प्रश्न-1. ‘नक्सलवाद’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

उत्तर : नक्सलवाद नक्सलवाद कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के उस आन्दोलन का अनौपचारिक नाम है जो भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ। नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव नक्सलबाड़ी से हुई है। जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारुमजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 में सत्ता के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरूआत की। मजमूदार चीन के कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे। और उनका मानना था कि भारतीय मजदूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार है जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तन्त्र स्थापित हुआ है। फलस्वरूप कृषि पर उनका वर्चस्व स्थापित हो गया है। इस न्यायहीन दमनकारी वर्चस्व को केवल सशस्त्र क्रान्ति से ही समाप्त किया जा सकता है।

1967 में नक्सलवादियों ने कम्युनिस्ट क्रान्तिकारियों की एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई। इन विद्रोहीयों ने औपचारिक तौर पर स्वयं को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग कर लिया और सरकार के खिलाफ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी। 1971 के आन्तरिक विद्रोह और मजमूदार की मृत्यु के बाद यह आन्दोलन एकाधिक शाखाओं में विभक्त होकर अपने लक्ष्य और विचारधारा से विचलित हो गया।

आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीतिक पार्टी बन गये हैं और संसदीय चुनाव में भी भाग लेते हैं। लेकिन बहुत से संगठन अब भी छद्म लड़ाई में लगे हुये हैं। नक्सलवाद के विचाराधारात्मक विचलन की सबसे बड़ी मार आन्ध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश के कुछ भागों को झेलनी पड़ रही है।
नक्सलवादी आन्तरिक सुरक्षा के लिये एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। रेल पटरियों उखाड़ना, सुरक्षा बलों पर हमला एवं बैंक लूट में भी नक्सली शामिल हो गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में नक्सलवाद ने सामाजिक तनाव का रूप ले लिया है समृद्ध भूमिपतियों का शहरों की ओर पलायन हो रहा है। इससे खेती चौपट हो रही हैं। जमीन पर अधिकार को लेकर जातीय संघर्ष भी बढ़े हैं, साथ ही हिंसक संघर्ष भी देखने को मिल रहे हैं।

नक्सलियों के बढ़ते प्रभाव व हिंसा को देखते हुये अब उनके खिलाफ कठोर कदम उठाये जाने की आवश्यकता है। नक्सलवाद से निपटने के लिये सरकार सेना के इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। सैन्य विशेषज्ञ मानते है कि नक्सल ऑपरेशन में सेना को सीधे शामिल किये बिना परोक्ष
तौर पर ही जरूरी मदद ली जानी चाहिये। स्थानीय पुलिस बलों को प्रशिक्षण देने में सेना महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वायुसेना को भी नक्सल विरोधी ऑपरेशनों से सीमित भूमिका के लिये तैयार किया जा सकता है। जैसे- सुरक्षा बलों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, नक्सल प्रभावित इलाकों के ऊँचाई से फोटो खींचना, दूरबीन से उनकी गतिविधियों पर नजर रखना जैसे अहम् कार्य शामिल हैं।

निष्कर्ष- सिर्फ पुलिस कार्रवाई से ही इस समस्या का हल नहीं निकाला जा सकता, आज हमें इस सत्य को स्वीकार करना ही होगा कि नक्सलवाद अपने मूल में कानून और व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक समस्या के साथ-साथ सामजिक और सांस्कृतिक समस्या भी है। इसका समाधान राजनीतिक तरीकों, आर्थिक- सामाजिक विकास और सांस्कृतिक समायोजन द्वारा ही हो सकता है।

प्रश्न-2. आप चंदन शुक्ला हैं। एक शिक्षाविद्, आप बी. टेक. पाठ्यक्रम में सुधार के हेतु शिक्षा सचिव को आवेदन-पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

शिक्षा सचिव,

मध्य प्रदेश शासन,

भोपाल,

विषयः बी. टेक, पाठ्यक्रम में संशोधन हेतु निवेदन

महाशय,
उपर्युक्त विषय के अंतर्गत हम ध्यान दिलाना चाहते हैं कि सत्र 2016-17 बी. टेक. के लिए जो संशोधित पाठ्यक्रम जारी किया गया है। उसमें एम.टेक. के पाठ्यक्रम के कुछ अध्याय जोड़ दिए गए हैं। जिससे 12वीं कक्षा उत्तीर्ण एक छात्र के लिए समझ पाना कठिन होगा तथा क्रमानुसार अध्ययन को ध्यान में रखकर पहले सरल तथा बाद में कठिन चरणों का संकलन किए जाने के सिद्धांत के विरुद्ध होगा। प्रथम दृष्टया यह पाठ्यक्रम तर्क संगत प्रतीत नहीं होता। कई विद्यार्थियों ने अपनी चिंता से मुझे अवगत कराया है।

अतः आप इस पर ध्यान आकृष्ट करते हुए संबंधित समिति को पाठ्यक्रम में सुधार के लिए आदेश देकर इसमें सुधार कराने की कृपा करें। इसके लिए हम सदैव आपके आभारी रहेंगे।

प्रार्थी- चंदनशुक्ला

प्रश्न-1. ‘ई-शॉपिंग का बढ़ता चलन ‘ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

उत्तर : ई-शॉपिंग का बढ़ता चलन

ऑनलाइन शॉपिंग का मतलब इंटरनेट से वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदने से है। ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए आप घर बैठे कोई भी चीज खरीद सकते है। जब “वर्ल्ड वाइड वेब” का कनसेप्ट आया तब से सामान और सेवा विक्रेता कम्पनीयों ने अपना समान उस व्यक्ति को ऑनलाइन बेचना शुरू किया जो घर पर या ऑफिस में अपना वक्त कम्प्यूटर या लैपटॉप पर गुजारते हैं। इस ऑनलाइन शॉपिंग के जरिये ग्राहक कई सारे प्रोडक्ट्स घर बैठे ऑनलाइन खरीद सकते हैं। जैसे हाउस होल्ड मैटेरियल, फूड-आइटम, कपड़े, फर्नीचर आदि। परन्तु अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि आपको इंटरनेट का प्रयोग करना आता हो तथा आपके पास वस्तुओं का पेमेंट करने के लिये कोई काई हो जैसे डेबिट, क्रेडिट या रुपे कार्ड इत्यादि।

ऑनलाइन शॉपिंग से आप घर बैठे 24 घंटे किसी भी समय शॉपिंग कर सकते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग के जरिये आपको बहुत सारे उत्पाद की लिस्ट उपलब्ध होती हैं जो आप चाहें तो दूसरे प्रोडक्टों से आपस में तुलना कर सकते हैं। साथ ही आप सामानों की मूल्य का भी तुलना कर सकते हैं इससे आप अपने समय की बचत कर सकते हैं तथा घर बैठे सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं। अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते है तो शॉपिंग माल में पार्किग से हो रही दिक्कतों से भी अपने को बचा सकते हैं साथ ही अतिरिक्त धन की बचत कर सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के द्वारा अगर मंगाये गये सामान सें आप संतुष्ट ना हो तो उसे वापस भी कर सकते हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग के फायदें के साथ-साथ कुछ नुकसान भी है। अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो आप सामान्य शॉपिंग की तरह चीजों को छकर नहीं परख सकते। वस्तुओं को मोबाइल या कम्प्यूटर की स्क्रीन पर ही देखकर सामानों की खरीदारी करनी पड़ती हैं। ऑनलाइन शॉपिंग करते समय अगर कोई वस्तु पसन्द नहीं आयी तो उसके वापसी के लिये आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही पैसा वापसी में भी इंतजार करना पड़ सकता है। ऑनलाइन शॉपिंग करने के बाद वस्तुओं के लिये थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष- समाज के बदलते परिदृश्य में आज समय का अभाव तथा भागदौड़ भरी दिनचर्या का तेजी से विकास हो रहा है, ऐसे बदलते परिदृश्य में ई-शॉपिंग की गतिविधियाँ तेजी से बढ़जी जा रही है और इसमें निरन्तर बढ़ोतरी दिखाई पड़ रही है। किन्तु इसके लिये अभी व्यापक स्तर पर जनजागरूकता एवं कानूनी प्रावधान उपलब्ध नहीं है जिसके कारण यह
आम लोगों में अपनी पैठ बनाने में असफल है। साथ ही इंटरनेट की पहुँच और युवाओं में आने वाली जागरूकता तेजी से इसका विस्तार कर रही है। आवश्यकता इस बात की है कि इसको और सरल बनाते हुये तथा ग्राहक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे तर्कसंगत बनाया जाए।

प्रश्न-2. आप MGNREGA के उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखिए।

उत्तर : ‘म.प्र. रोजगार गारंटी परिषद्

क्र. 555/MG. NREGA – MP/12 भोपाल,

दिनांक 16/6/2016 प्रति,

1. कलेक्टर जिला कार्यक्रम समन्वयक

2. मुख्य कार्यपालन अधिकारी-1 अतिरिक्त जिला कार्यक्रम
समन्वयक
समस्त जिला पंचायत- मध्यप्रदेश

विषय : महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम क्रियान्वयन उत्कृष्टता एवं अन्य पुरस्कार वर्ष-2015-16

संदर्भ : आयुक्त, म.प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद् का अर्द्धशासकीय पत्र क्र. 231/ क दिनांक 14/6/16

भारत सरकार द्वारा महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की वर्षगांठ हर वर्ष 2 फरवरी को नई दिल्ली में MG NREGA मेले के रूप में मनाई जाती है। इस समारोह में भारत सरकार द्वारा राज्यों में योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य के लिए विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।

संदर्भित पत्र के अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों से प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई हैं। प्रत्येक जिले में विकास संबंधी विभिन्न प्रकार के उत्कृष्ट कार्य एवं नवाचार किए जाते हैं। जिसके संबंध में समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभागीय मंत्री को जिलों के द्वारा अवगत कराया जाता है। इस संबंध में माननीय मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिलों को उनके द्वारा किए गए नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यों को न केवल पुरस्कार अपितु व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए भी किसी न किसी श्रेणी में पुरस्कृत किए जाने हेतु अपना नामांकन अवश्य कराना चाहिए।
कृपया विभागीय मंत्री महोदय के निर्देशों का पालन कराया जाना सुनिश्चित करें।
आयुक्त-

म. प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद्

प्रश्न-1. ‘नकली प्रचारित वीडियो की चुनौती’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

उत्तर : नकली प्रचारित वीडियो की चुनौती

सोशल मीडिया एक वरदान और अभिशाप दोनों है। सोशल मीडिया का एक अभिशाप नकली वायरल वीडियो है। यह एक अभिशाप है, क्योंकि यह दर्शकों के मन को प्रदूषित करता है और नागरिकों के बीच दरार, प्रतिद्वन्द्विता और शत्रुता उत्पन्न करता है। ये वीडियो राष्ट्र के लिए एक चुनौती है, क्योंकि इसने हिंसा और निर्दोष पीड़ितों की हत्याओं को बढ़ावा दिया है।
जनवरी और मार्च के प्रारम्भ (कोरोना के प्रकोप से पहले) के बीच नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में नकली वीडियो छाया हुआ था। एक नया कानून, जो तीन पड़ोसी देशों से आनेवाले लोगों, यदि वे मुस्लिम नहीं हैं, को भारत की नागरिकता प्रदान करता है।

सोशल मीडिया के विशाल नेटवर्कों के द्वारा कोरोना वायरस जो कोविड-19 बीमारी का कारण है, के बारे में भ्रामक खबरें फैलाई जा रही

असत्यापित घरेलू उपचारों को पेश करने से लेकर लोगों को गलत सलाह देने जैसे-आइसक्रीम और चिकेन जैसे खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह देना, षड्यंत्र के सिद्धान्तों का प्रचार करना इत्यादि गलत सूचनाओं से भारतीयों के फोनों को भर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नागरिकों को कोविड-19 सम्बन्धी अफवाहों पर ध्यान न देने के लिए कहने को मजबूर होना पड़ा।

देश में सोशल मीडिया के उपयोग का पैमाना गलत सूचनाओं के खिलाफ लड़ाई को जटिल बनाता है। फेसबुक की मैसेजिंग एप्लीकेशन व्हाटसएप के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है। इसके पास भारत में 400 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जहाँ 2017 में 468 मिलियन स्मार्टफोन थे।

नकली फैले वीडियो से लड़ने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि किसी भी स्रोत से प्राप्त वीडियो पर तब तक विश्वास नहीं किया जाए, जब तक विश्वसनीय स्रोत से वीडियो प्रमाणित न हो जाए। साथ ही प्रमाणीकरण के बिना इसे भेजना भी नहीं चाहिए।

प्रश्न-2. आप विश्वविद्यालय में पुस्तकालय (लाइब्रेरी) की सुविधा के सम्बन्ध में कुलपति को एक आवेदन पत्र लिखिए।
उत्तर:

सेवा में,

कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय,
रायपुर।

दिनांक 16.6.2016

विषय- विश्वविद्यालय परिसर में पुस्तकालय की माँग हेतु

महाशय,
उपर्युक्त विषय के अंतर्गत हमारा निवेदन है कि विश्वविद्यालय परिसर में पुस्तकालय के अभाव के कारण बहुत से छात्रों को पढ़ाई में असुविधा हो रही है। साथ ही साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम अंग्रेजी, गणित, भौतिकी, समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र विषयों से सम्बन्धित पुस्तकों की स्थानीय बाजार में भारी कमी है। अत: विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध है कि छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए तथा उनके गुणात्मक विकास के लिए विश्वविद्यालय परिसर में एक समृद्ध पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध कराने की कृपा की जाय। गत वर्ष शिक्षा मंत्री जी द्वारा भी पुस्तकालय की स्थापना के संबंध में घोषणा की गयी थी जो अभी तक वास्तविकता में परिणत नहीं हो पाई है।

अत: आप छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द पुस्तकालय की सुविधा प्रदान करने की कृपा करें।

प्रार्थी
समस्त विद्यार्थी

स्नातकोत्तर- संकाय

प्रश्न-1. “जनसंख्या वृद्धि’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

उत्तर : जनसंख्या वृद्धि हमारे देश में अनेक जटिल समस्याएँ हैं जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न कर रही हैं। जनसंख्या वृद्धि भी देश की इन्हीं जटिल समस्याओं में से एक है। सम्पूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। परन्तु जिस गति से हमारी जनसंख्या बढ़ रही है उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब यह चीन से भी अधिक हो जायेगी। हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मात्र पाँच दशकों में यह 33 करोड़ से 100 करोड़ के आँकड़ें को पार कर गयी है।

देश में जनसंख्या वृद्धि के अनेक कारण हैं। सर्वप्रथम यहाँ की जलवायु प्रजनन के लिए अधिक अनुकूल है। इसके अतिरिक्त निर्धनता, अशिक्षा, रूढ़िवादिता तथा संकीर्ण विचार आदि भी जनसंख्या वृद्धि के अन्य कारण हैं। देश में बाल-विवाह की परंपरा प्राचीन काल से थी जो आज भी गाँवों में विद्यमान है यह भी जनसंख्या वृद्धि का एक कारण है। साथ ही शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। परिवार नियोजन के महत्त्व को अज्ञानतावश लोग समझ नहीं पाते हैं। इसके अतिरिक्त पुरुष समाज की प्रधानता होने के कारण लोग लड़के की चाह में कई संतानें उत्पन्न कर लेते हैं। परन्तु इसका उचित भरण-पोषण करनेकी सामर्थ्य न होने पर निर्धनता व कष्टमय जीवन व्यतीत करते हैं।

देश ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपार सफलताएँ अर्जित की हैं जिसके फलस्वरूप जन्मदर की वृद्धि के साथ-साथ मृत्युदर में कमी आई है। कुष्ठ, तपेदिक व कैंसर जैसे असाध्य रोगों का इलाज सम्भव हुआ है जिसके कारण भी जनसंख्या अनियंत्रित गति से बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त जनसंख्या में बढ़ोतरी का मूल कारण है अशिक्षा और निर्धनता। आँकड़े बताते हैं कि जिन राज्यों में शिक्षा स्तर बढ़ा है और निर्धनता घटी है वहाँ जनसंख्या की वृद्धि दर में भी ह्रास हुआ है। बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि प्रान्तों में जनसंख्या वृद्धि दर सबसे अधिक है क्योंकि इन प्रांतों में समाज की धीमी तरक्की हुई है।

देश में जनसंख्या वृद्धि की समस्या आज अत्यंत भयावह स्थिति में है जिसके फलस्वरूप देश को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। देश में उपलब्ध साधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतन्त्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है। इन लोगों को अपनी आम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्ष करना

बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाना देश के चहुंमुखी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि इस दिशा में सार्थक कदम नहीं उठाये गये तो वह दिन दूर नहीं जब स्थिति हमारे नियंत्रण से दूर हो जायेगी। सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि परिवार नियोजन के कार्यक्रमों को और विस्तृत रूप दें। जनसंख्या वृद्धि की रोकथाम के लिए सभी स्तरों अपितु सामाजिक, धार्मिक, एवं व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास आवश्यक है, इसके लिए व्यापक जनअभियान छेड़ा जाना चाहिए।

भारत सरकार ने विगत वर्षों में इस दिशा में अनेक कदम उठाये हैं परन्तु इसे सार्थक बनाने के लिए और भी अधिक कठोर कदम उठाना आवश्यक है। देश के स्वर्णिम भविष्य के लिए हमें कुछ ऐसे निर्णय भी लेने चाहिए जो वर्तमान में भले ही अरूचिकर लगे परन्तु दूरगामी परिणाम अवश्य ही सुखद हो। जैसे अधिक बच्चे पैदा करने वालों का प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर बहिष्कार भी एक प्रभावी हल हो सकता है।

प्रश्न-2. किसी समाचार-पत्र के सम्पादक के नाम एक पत्र लिखिए जिसमें इक्कीसवीं शताब्दी में संचार माध्यम के रूप में इन्टरनेट की भूमिका पर आपके विचार व्यक्त हों।

उत्तर :

नई दिल्ली

“किरण टाइम्स”
नया टोला पटना

महाशय,

विषय -“इक्कीसवीं शताब्दी में संचार माध्यम के रूप में इन्टरनेट की भूमिका।”

जैसा कि विदित है मानव सभ्यता की विकास-प्रक्रिया और संचार माध्यम के विकास में गहरा संबंध है । आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संचार क्रांति ने तहलका मचा रखा है। इन्टरनेट के आगमन ने दुनिया के विभिन्न देशों को एक-दूसरे के नजदीक ला दिया है । आज कुछ ही क्षणों में लोग ब्रिटिश म्यूजियम और न्यूयॉर्क पुस्तकालय से सूचनाओं का संग्रह कर सकते हैं। लोग किसी भी संभाषण में इंटरनेट की मदद से भाग ले सकते हैं। आज इंटरनेट इतना महत्त्वपूर्ण हो गया है कि लोग संचार माध्यम संबंधी कोई भी गतिविधि करने से पहले इंटरनेट की खोज करते हैं। चाहे दोस्तों से बात करनी हो या किसी ‘चैट शो’ में भाग लेना हो इंटरनेट सबसे अच्छा साधन बनता जा रहा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इसे सर्वजन सुलभ बनाया जा सके । इन्टरनेट की महती भूमिका को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि वर्तमान शताब्दी (इक्कीसवीं शताब्दी) इन्टरनेट शताब्दी होगी।

आपका विश्वासी
क ख ग

प्रश्न-1. ‘भारत में विकलांगता’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

उत्तर : भारत में विकलांगता शारीरिक रूप से विकलांग वे लोग होते हैं जो अपनी किसी शरीरगत हीनता के कारण समाज में सामान्य जीवन यापन में असमर्थ हो जाते हैं। इनमें लंगड़े लूले, अंधे, बहरे, गूंगे, जीर्ण तथा जराग्रसित व्यक्ति होते हैं। साथ ही वह अपनी व्यक्तिगत, शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक सीमाओं और परिस्थितियों के कारण अपना जीवन सामान्य रूप से बिताने में असमर्थ हैं। वे अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के कारण अपना सामान्य जीवन बिना सहायता के नहीं बिता सकते और इस प्रकार असंतुलन एवं असामंजस्य उनके जीवन की विकट समस्यायें बन जाती हैं। उनका व्यवहार और सामाजिक प्रकार्यत्मकता दूषित और कठिन हो जाती है और वे समाज पर एक भार बन जाते हैं।

विकलांग व्यक्तियों की श्रेणी में सामान्य रूप से वे व्यक्ति सम्मिलित किये जाते हैं, जो शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दृष्टि से असंतुलित हैं। भारतीय सरकार के समाज कल्याण विभाग ने बाधित व्यक्तियों को चार भागों में विभाजित किया है। नेत्रहीन, बधिर और मूक, मानसिक दृष्टि से मंदित, और शारीरिक दृष्टि से विकलांग।

इन सभी विकलांगताओं के लिए अलग-अलग कारण उत्तरदायी हैं। नेत्रहीनता का सामान्य अर्थ दृष्टि के पूर्ण अभाव से है। परन्तु वास्तव में कुछ अन्य प्रकार के नेत्रहीन व्यक्ति पूर्ण रूप से दृष्टि रहित नहीं होते हैं। वहीं बधिर वह व्यक्ति है जिसे सुनने की शक्ति उसके साधारण जीवन के उद्देश्य के लिए अकार्यात्मक हो गयी है। वहीं वाक् विकलांगता का कारण श्रवण क्षमता की कमी या उसका विकास उपयुक्त न होने से हैं।

भारत में 2011 के जनगणना के आकड़ों के अनुसार विकलांग लोगों की संख्या दो करोड़ अस्सी लाख के आस-पास है। विकलांगों की इतनी बड़ी संख्या वास्तव में एक चिंता का विषय है। क्योंकि इनके लिए चलाई जाने वाली सामाजिक योजनाओं के कारण अर्थव्यवस्था पर एक व्यापक अतिरिक्त भार पड़ता है।

यद्यपि विकलांग व्यक्तियों की समस्या प्राकृतिक एवं अनचाही होती है। जिससे समाज का कोई भी व्यक्ति कभी भी प्रभावित हो सकता है इसलिए समाज एवं सरकार की यह नैतिक जिमेदारी बनती है कि वह इनके उच्चतम जीवन यापन के लिए विशेष कदम उठायें। संविधान के अनुच्छेद 41 में यह व्यवस्था की गयी है कि राज्य बेराजगारों, वृद्धों, बीमारों एवं बाधितों के लिए अधिकार, शिक्षा एवं जन सहायता से संबन्धित कार्यक्रमों का आयोजन करेगा।

इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारतीय संविधान में विकलांगों के लिए सरकारी सेवाओं में अलग से आरक्षण की गयी है। पहले 3 प्रतिशत थी जिसे अब बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही प्रध नमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांगों के प्रति सामाजिक भेद-भाव को समाप्त करने की अपील के साथ उनका नया नामकरण ‘दिव्यांग’ किया, जो विकलागों के प्रति एक सामाजिक सम्मान है।

निष्कर्ष :- आज विकलांगों के लिये सरकारी एव निजी स्तर पर जो भी कदम उठाये जा रहे हैं वह पर्याप्त नहीं है इसे और बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए नये कानूनों की आवश्यकता है। आज सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की संभावनाएँ सीमित हो रही है और निजी क्षेत्र में बढ़ नहीं रही है। जहाँ उनके साथ भेद-भाव की संभावना अधिक है। वहां पर कठोर नियम बनाने की अवाश्यकता है।

प्रश्न-2. अपने मित्र के पास एक पत्र लिखिए जिसमें समाज के विकास में शिक्षा के महत्व को रेखांकित कीजिए।

उत्तर :

परीक्षा भवन

प्रिय मित्र,
नमस्ते.

इधर तुम्हारा कोई पत्र नहीं मिला । आजकल मैं अपने गाँव के कुछ नवयुवकों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर वयस्क शिक्षा का कार्यक्रम चला रहा हूँ।

देखो मित्र ! मेरा मानना है कि शिक्षा के अभाव में व्यक्ति अपने जीवन में न सही व्यक्तित्व को स्थापित कर पाता है और न ही कीर्तिलाभ ही अर्जित कर सकता है। कहने की जरूरत नहीं कि कम संसाधन से युक्त होने के बावजूद जापान या कोरिया जैसे देश शिक्षित जनता के सहारे विश्व के अग्रणी देशों में गिने जाते हैं। जबकि विशाल जनसंख्या वाला तथा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध भारत शिक्षा तथा तकनीकी ज्ञान के अभाव में आधुनिकता की तेज दौड़ में लगातार पीछे छूटता जा रहा है। अतः सभी प्रकार की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक समस्याओं से निजात पाने के लिए शिक्षा के महत्व को समझना जरूरी है।मुलाकात होने पर विशेष बात होगी । अपने माता-पिता से मेरा सादर प्रणाम कहना।
पता:-
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