SSC chsl descriptive paper in hindi |Model question paper-21 to25

SSC chsl descriptive paper in hindi

SSC chsl descriptive paper in hindi |Model question paper-21 to25

Question list-प्रश्न-1. ‘भारतीय राज-व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. अपने मित्र को अपने बड़े भाई की शादी में सम्मिलित | होने के लिए निमंत्रण-पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. “डिजिटिल भारत के लिए ‘नेट तटस्थता (नेट न्यूट्रिएलिटी)’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. नेशनल बुक ट्रस्ट से कुछ पुस्तकें मंगाने के लिए एक पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘कोविड-19 के दौरान भारत की कमजोर चिकित्सकीय अवसंरचना’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. राज्य के मुख्य सचिव को गन्ना किसानों को नियम मूल्य से अधिक मूल्य प्रदान करने हेतु पत्र लिखें। 

प्रश्न-1. ‘कन्या भ्रूण हत्या एक अभिशाप’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव हैं। आप मंत्रालयों के बीच सूचना आदान-प्रदान के सम्बन्ध में एक पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप एक सरकारी अधिकारी हैं। आप निर्देशों का अनुपालन नहीं होने के संबंध में अनौपचारिक पत्र लिखिए।

Ssc descriptive EXAM FREE BOOK READ HEREClick here free book PDF

प्रश्न-1. ‘भारतीय राज-व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : भारतीय राज-व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यपाल भारत के किसी भी राज्य का मुख्य कार्यकारी अधिकारी है। राज्यपाल अपनी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग केन्द्र सरकार के अभिकर्ता के रूप में करता है। राज्यपाल राष्ट्रपति की तरह एक नाममात्र का संवैधानिक पद है और वह एक वास्तविक पदाधिकारी नहीं है। इसके बाद भी उसके पास व्यापक रूप से कार्यकारी, विधायी, वित्तीय और न्यायिक शक्तियाँ और कार्य हैं। 

भारतीय संविधान के अनुसार राज्यपाल के द्वारा राज्य की कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग किया जाता है। राज्यपाल राज्य के लिए मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और मुख्यमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। इसके साथ ही वह राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति करता है और राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और उसके सदस्यों को भी नियुक्त करता है। राज्य के अनेक महत्वपूर्ण अधिकारी राज्यपाल को अपने निर्णयों के विषय में सूचित करते हैं। हालांकि राज्य के राज्यपालों को राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है लेकिन अनुच्छेद 217 के प्रावधान के अन्तर्गत राष्ट्रपति इस प्रकार की नियुक्ति के पूर्व राज्यपाल से परामर्श करेगा। 

राज्यपाल की विधायी शक्तियों के अंतर्गत विधानमण्डल का सत्र बुलाने और इसे संबोधित करने का अधिकार है। वह राज्य की विधायिका बैठक को बुलाने, सत्रावसान करने और विधानसभा को भंग करने का अधिकार रखता है। राज्य विधायिका द्वारा पारित प्रत्येक बिल राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद कानून बन जाता है। इसके बाद भी वह एक विधेयक को अपनी अनुमति दे सकता है या इसे अपने पास रख सकता है या राष्ट्रपति के पास विचार करने के लिए भेज सकता है। वित्त विधेयक की अपेक्षा सामान्य विधेयकों को विधायिका के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है लेकिन यदि यही विधेयक पुनः उसके पास आता है तो राज्यपाल उसे नहीं रोक सकता है। कोई भी धन विधेयक राज्यपाल की अनुशंसा पर ही विधानसभा में पेश किया जाता है। संविधान में राज्यपाल को यह शक्ति है कि जब विधानसभा का सत्र न चल रहा हो तो इस अवधि में वह अध्यादेश प्रख्यायित करता है। 

राज्यपाल राष्ट्रपति की तरह राज्य की विधान परिषद् में कुछ सदस्यों को मनोनीत कर सकता है। ये सदस्य कला, विज्ञान, समाज सेवा एवं सहकारी आन्दोलन का विशेष व्यावहारिक ज्ञान रखते हैं। यदि राज्यपाल को अनुभव होता है कि राज्य विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो एक व्यक्ति को विधानसभा में मनोनीत कर सकता है। राज्यपालों की न्यायिक शक्तियों के अंतर्गत दोषी व्यक्ति को क्षमादान करने या उसके दण्ड को कम कर सकता है। राज्यपाल को यदि लगता है कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है तो वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए | राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट बनाकर भेजता है। यह सत्य है कि राज्यपाल राज्य | का एक संवैधानिक शासक है लेकिन वह एक रबड़ स्टाम्प नहीं है। राज्यपाल को कार्यकारी विधायी और वित्तीय क्षेत्रों में व्यापक अधिकार | प्राप्त हैं। वह स्वविवेक से भी कुछ शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। 

प्रश्न-2. अपने मित्र को अपने बड़े भाई की शादी में सम्मिलित | होने के लिए निमंत्रण-पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

(परीक्षा भवन) करोल बाग, नई दिल्ली, 

15 जून, 2016 प्रिय नवल, 

सप्रेम नमस्कार । 

तुम्हें यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मेरे बड़े भाई रजनीश का शुभ | विवाह 29 सितम्बर को होना निश्चित हुआ है। बारात बस द्वारा प्रात: पाँच बजे जयपुर के लिए प्रस्थान करेगी। विवाह की इस शुभ बेला पर तुम सादर आमंत्रित हो। कृपया निश्चित तिथि से एक-दो दिन पूर्व आकर हमें कृतार्थ करने का कष्ट करो जिससे हम सब मिलकर विवाह के उत्सव का भरपूर आनंद उठा सकें। 

पत्र के साथ विवाहोत्सव का कार्यक्रम भी संलग्न है।

पाने वाले का नाम व पता 

तुम्हारा अभिन्न हृदय, 

अ.ब.स. 

प्रश्न-1. “डिजिटिल भारत के लिए ‘नेट तटस्थता (नेट न्यूट्रिएलिटी)’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : डिजिटिल भारत के लिए ‘नेट तटस्थता (नेट न्यूट्रिएलिटी) 

सूचना एवं संचार माध्यमों को आधुनिकता का सबसे प्रमुख पैमाना माना जा सकता है जिससे हम कुछ पल में ही हजारों किमी. दूर बैठे किसी व्यक्ति से संवाद स्थापित कर सकते हैं। इस कड़ी में इंटरनेट प्रौद्योगिकी एक ‘मील का पत्थर साबित हुयी है। 

नेट तटस्थता को इंटरनेट की भेदभाव रहित, एक समान वितरण के लिए आवश्यक माना जाता है। इसके तहत कोई भी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी के लिए यह आवश्यक होता है कि वह अपने सभी उपभोक्ताओं को इंटरनेट के सभी उत्पादों की एक समान उपलब्धता सुनिश्चित करे। अर्थात् सेवा प्रदाता किसी उत्पाद के लिए इंटरनेट की विशेष गुणवत्ता जबकि अन्य उत्पादों के लिए इंटरनेट की निम्न गुणवत्ता उपलब्ध नहीं करवा सकेगी। जिससे सभी उत्पादों को इंटरनेट के माध्यम से फलने-फूलने के समान अवसर उपलब्ध हो सकें। 

विगत् कुछ वर्षों से भारत सहित विश्व के अधिकांश देशों में नेट तटस्थता को लेकर विवाद प्रारंभ हुआ है। जिसमें इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी पर कुछ इंटरनेट आधारित उत्पादों को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया गया है। इस संदर्भ में फेसबुक कंपनी की INTERNET.ORG नामक योजना विशेषरूप से उल्लेखनीय है। यद्यपि भारत में इस योजना को स्वीकृति नहीं दी गयी तदापि इसने नेट तटस्थता के मुद्दे को विमर्श के केन्द्र में ला दिया। इसके अतिरिक्त भारत में कुछ ई-शॉपिंग कंपनियों द्वारा सेवा प्रदाताओं से संभावित समझौतों का कड़ा प्रतिरोध देखने को मिला। 

अंतत: दूर संचार विनियामक संस्था टी. आर. ए. आई. ने सभी पक्षों से विमर्श के बाद अक्टूबर, 2017 में अपनी सिफारिशें दूरसंचार विभाग को सौंप दी जिसमें कुछ विशेष सूचीबद्ध सेवाओं तथा सेवा प्रदाता द्वारा मौलिक रूप से विकसित इंटरनेट उत्पादों के अतिरिक्त अन्य उत्पादों को विशेष लाभ नहीं दिया जा सकेगा। सूचीबद्ध सेवाओं में दूरसंचार विभाग द्वारा कुछ आपात सेवाओं तथा राष्ट्रहित की जनोपयोगी सेवाओं को शामिल किया जा सकता है। दूरसंचार विनियामक का उक्त निर्णय भारत में इंटरनेट सेवाओं के अबाध्य विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जिससे भारत की डिजिटल सेवाओं संबंधी प्रतिबद्धता में लाभ होगा। 

परंतु इसका एक दूसरा पहलू भी है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। वह यह कि भारत में अधिकांश इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियाँ दूरसंचार सेवाएँ भी उपलब्ध कराती हैं। वर्तमान में इंटरनेट के माध्यम से मैसेजिंग, फोन कॉल तथा लाइव विडियो कॉलिंग का बहुतायत में प्रयोग किया जा रहा है। जिससे दूरसंचार सेवा का बाजार निरंतर सिकुड़ता जा रहा है। इससे दूरसंचार कंपनियाँ अत्यधिक घाटे का सामना कर रही हैं। फलत: वे गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा पाने में विफल हो रही हैं। 

निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि नेट तटस्थता के प्रति एक व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। हाल ही में अमेरिका के संघीय दूरसंचार नियामक ने नेट तटस्थत के उल्लंघन की अनुमति प्रदान कर दी है। अत: भारत को ऐसी स्थिति का सामना करने के पूर्व किसी समाधान को प्राप्त कर लेना चाहिए। जिससे इंटरनेट के प्रसार के साथ-साथ दूरसंचार कंपनियों को भी बढ़ते घाटे से उबारा जा सके। 

प्रश्न-2. नेशनल बुक ट्रस्ट से कुछ पुस्तकें मंगाने के लिए एक पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

व्यापार प्रबंधक नेशनल बुक ट्रस्ट, 

ग्रीन पार्क, नई दिल्ली महोदय, 

आपका सूची-पत्र प्राप्त हुआ। मुझे निम्नलिखित पुस्तकों की शीघ्र आवश्यकता है। मैं इस पत्र के साथ पाँच सौ रुपये का एक ड्राफ्ट संलग्न कर रहा हूँ। शेष राशि वी.पी.पी. छुड़ाते समय दे दी जाएगी। कृपया नए संस्करण की पुस्तकें भेजें। 

धन्यवाद

1. देश-देश की कहानियाँ (यदुनाथ सिंह)

2. गोदान (मुंशी प्रेमचंद) 1 प्रति

3. हमारे वैज्ञानिक (डॉ. कोठारी)

4. रक्त की महिमा (यतीश चंद्र)

5. स्वतंत्रता सेनानी (आशा रानी) 4 प्रति 

पुस्तकें निम्नलिखित पते पर भेजें।

पाने वाले का नाम व पता 

अ.ब.स. 

भवदीय,

684, मुखर्जी नगर 

दिल्ली-110009

दिनांक : 12.07.2016 

प्रश्न-1. ‘कोविड-19 के दौरान भारत की कमजोर चिकित्सकीय अवसंरचना’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : कोविड-19 के दौरान भारत की कमजोर चिकित्सकीय अवसंरचना 

कोरोना महामारी आधुनिक विश्व के इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक है। मुख्य समस्या यह नहीं है कि वर्तमान परिदृश्य अनपेक्षित है, बल्कि मुख्य समस्या यह है, कि पूर्व में मानवता के समक्ष ऐसी गम्भीर बीमारियों से सामना हो जाने के बावजूद हमने इससे निपटने के लिए कोई बेहतर तैयारी नहीं कर पाए हैं। 

मुख्य समस्या है, कि गम्भीर रूप से बीमार रोगियों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है और इससे निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय अवसंरचना की कमी है। रोगी न सिर्फ अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि जीवन-रक्षक उपकरणों (जैसे-वेन्टीलेटर्स) की सुविधा के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद कि सरकार और सामान्य सेवा प्रदाता महीनों से युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं तथा अपने सारे संसाधन इस संकट से निपटने के लिए जमा कर रहे हैं। 

इस परिस्थिति का एक कारण यह है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में फिलहाल एक ठहराव है, जिसका परिणाम है कि आयातित वेंटीलेटर बाजार का शेयर निरन्तर गिर रहा है, जो पिछले साल के लगभग 75% से गिरकर 4% से नीचे चला गया है। ऐसी स्थिति में हमारे पास एक अवसर था, कि अपने घरेलू स्वास्थ्य अवसंरचना एवं वितरण प्रणाली को मजबूत तथा विश्वस्तरीय बनाया जाए। 

हालांकि इसके लिए इच्छाशक्ति का न होना मुख्य चुनौती नहीं है, बल्कि ज्ञान की कमी है। बेहतर गुणवत्ता वाले वेंटीलेटर बनाने की तकनीक पर कुछ ही कम्पनियों का एकाधिकार है। वे इस जानकारी को साझा नहीं करते हैं और पेटेंट के माध्यम से अधिक-से-अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं। दुर्भाग्य से इसने बेईमान/अयोग्य कम्पनियों को निम्न गुणवत्ता वाले उपकरण बनाने से नहीं रोका है, जो वर्तमान परिस्थिति का लाभ ले रहे हैं। परिणामस्वरूप बाजार में दोषपूर्ण उत्पादों की भरमार हो गई है, जो सिर्फ समस्या को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। 

प्रश्न-2. राज्य के मुख्य सचिव को गन्ना किसानों को नियम मूल्य से अधिक मूल्य प्रदान करने हेतु पत्र लिखें। 

उत्तर: 

सेवा में, 

मुख्य सचिव, 

बिहार सरकार,

विषय : गन्ना किसानों को अधिक मूल्य के भुगतान हेतु। 

मान्यवर, 

सविनय आभार प्रकट करता हूँ कि राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष गन्ना किसानों को उनके उत्पादों के मूल्य पूर्ववत् से दो माह पूर्व प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। परंतु इस वर्ष घोषित मूल्य विगत् वर्ष की तुलना में नाम मात्र ही अधिक हैं। जिससे गन्ना किसान निराश है। 

देश में निरंतर बीज, उर्वरक एवं सिंचाई के साधनों के मूल्य बढ़ते जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त किसानों के लिए कृषि में अतिरिक्त निवेश के लिए काफी कम धन शेष बच पाता है। अत: आप से आग्रह है कि इस वर्ष गन्ने के मूल्यों में कम से कम 25 प्रतिशत की वृद्धि करें। ताकि गन्ने किसानों को मुद्रस्फीति का सामना करने में सरलता हों आप की महान कृपा होगी। 

धन्यवाद, 

भवदीय 

अ. ब. स. (सदस्य) 

राज्य किसान संघ 

प्रश्न-1. ‘कन्या भ्रूण हत्या एक अभिशाप’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : ‘कन्या भ्रूण हत्या एक अभिशाप’ गर्भ से लिंग परीक्षण के बाद बालिका शिशु को हटाना कन्या भ्रूण हत्त्या है। केवल लड़का पाने की परिवार में बुजुर्ग सदस्यों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए जन्म से पहले बालिका शिशु को गर्भ में ही मार दिया जाता है। ये सभी प्रक्रिया परिवारिक दबाव खासतौर से पति और ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा की जाती है। गर्भपात कराने के पीछे सामान्य कारण अनियोजित गर्भ है, जबकि कन्या भ्रूण हत्या परिवार द्वारा की जाती है। 

सामाजिक या परिवारिक दबाव तथा सामाजिक कुरीतियों को मुख्य रूप से कन्या भ्रूण हत्या का कारण माना जा सकता है। विज्ञान एवं तकनीकी का विकास सदैव मानव कल्याण के लिए होता है किंतु यह भी सत्य है कि इसका उतना ही उपयोग मानव के पतन के लिए भी होता है। किसी भी परिवार को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्यतः पुरुष को ही मानी जाती है। जिसके कारण हर दम्पत्ती लड़के को जन्म देना चाहता है। दूसरी ओर समाज में व्याप्त कुछ और भी ऐसी कुरीतियाँ हैं जिसके कारण लड़की को जन्म लेने से नहीं हो सकता जैसे दाह-संस्कार आदि। 

समाज में सामान्यतः यह प्रचलन है कि स्त्रियों को पराया धन समझा जाता है, जिसके कारण वह सिर्फ 20 या 25 साल तक या जब तक कि उनका विवाह न हो तब तक ही अपने माता पिता के आय का जरिया बन पाती है। इसके बाद वह ससुराल वालों के लिए कार्य करने लगती है। अत: समाज की सोच होती है कि पैसा उनपर खर्च करना ससुराल वालों को फायदा पहुंचाना है। 

कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक समस्या है। जिसे सामाजिक स्तर पर ही दूर किया जा सकता है। इसके लिए हमारी सरकार, पुलिस तथा प्रशासन समय-समय पर कन्या भ्रूण हत्या को रोकने का प्रयास किया है। कानून भी अपने स्तर पर समाज में जागरूकता लाता है। भ्रूण हत्या पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से सर्वप्रथम 1974 में सरकार द्वारा ‘मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट’ पारित किया गया इसके पश्चात् अल्ट्रासाउंड एवं अन्य मेडिकल मशीनों द्वारा लिंग परीक्षण को रोकने के लिए 1994 में ‘प्रसव पूर्व परीक्षण तकनीकी, अधिनियम’ पारित किया गया। इस अधिनियम के तहत यदि गर्भवति महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक हो या कम से कम दो गर्भपात हो चुके हों अथवा उसके परिवार में शारीरिक या मानसिक विकलांगता की पृष्ठभूमि रही हो तो ऐसी स्थिति में लिंग निर्धारण के लिए मेडिकल परीक्षण कराया जा सकता है। 

आज कन्या भ्रूण हत्या को रोकना बेहद आवश्यक हो गया है क्योंकि इसे न रोका गया तो सामाजिक असंतुलन समाज में व्याप्त हो जायेगी। 

परिणामतः वेश्यावृति, बलात्कार, अपहरण जैसी अनेक घटनायें जन्म ले सकती है, जो एक सभ्य समाज के लिए कैंसर के समान है। 

इस समस्या को मिटाने के लिये कानूनी एवं सामाजिक दोनों स्तरों पर कार्य करने की आवश्यकता है। कानूनी स्तर पर शख्त कानूनी प्रावधान करने की आवश्यकता है जिससे इसमें लिप्त लोगों को कठोर सजा दिलाया जा सके तथा सामाजिक स्तर पर व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है। जिससे लोगों में इसका प्रचार-प्रसार हो सके। 

प्रश्न-2. आप मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव हैं। आप मंत्रालयों के बीच सूचना आदान-प्रदान के सम्बन्ध में एक पत्र लिखिए। 

उत्तर :

संख्या 32/10/300 

मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग,

भाषा विभाग। 

दिनांक 10.10.2016

विषयः “राजभाषा हिन्दी के प्रयोग हेतु । 

सेवा में, 

मध्य प्रदेश राज्य के समस्त मंत्रालय एवं विभाग। अधोहस्ताक्षरी को राजभाषा हिन्दी के प्रयोग संबंधी शासनादेश संख्या 552/रा.भा./300 दिनांक 2/10/2016 की ओर ध्यान आकर्षित करने का निर्देश हुआ है कि उसके पालन तथा प्रयोग के प्रति अपेक्षित रूप से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे, आम नागरिकों (जनता) को सरकार की योजनाओं तथा निर्देशों को समझने में असुविधा हो रही है। 

अतः राज्य सरकार के सभी विभागों, कार्यालयों, संस्थाओं को पुनः निर्देश दिया जाता है कि भविष्य में संपूर्ण पत्राचार, सूचना-प्रसार राजभाषा हिन्दी में ही किया जाए। 

हस्ताक्षर 

अ.ब.स. संयुक्त सचिव 

मध्य प्रदेश सरकार, भोपाल

प्रश्न-1. ‘बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद 

सुशान्त सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में पुनः भाई-भतीजावाद पर बहस छिड़ गई है। हालाकि उनकी रहस्यमयी मौत पर अधिकारियों द्वारा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था लेकिन कुछ हस्तियों एवं ट्विटर पर कुछ लोगों द्वारा इस मौत को बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद से किसी तरह सम्बन्धित बताया गया है। हालांकि अब आधिकारिक बयान में यह कहा गया है कि यह एक आत्महत्या थी। 

हाल ही में कंगना रनौत ने एक चैनल पर बॉलीवुड में प्रचलित भाई-भतीजावाद की संस्कृति की बात की, जिसके परिणामस्वरूप सुशान्त सिंह राजपूत की मृत्यु हुई। पहली बार 2017 में ‘कॉफी विथ करण’ के शो पर कंगना ने भाई-भतीजावाद का मुद्दा उठाया था और फिल्म निर्माता को इसका झण्डा उठानेवाला बताया था। 

एक हाल के टीवी साक्षात्कार में कंगना ने तापसी पन्नू और स्वरा भास्कर को ‘बी’ ग्रेड की अभिनेत्री तथा अवसरवादी बाहरी लोग कहा था। इस पर पनू ने कहा कि इससे पहले कि कोई फिल्म उद्योग में “बाँटो और राज करो” की नीति का उपयोग करने का प्रयास कर रहा है, मैं कहना चाहती हूँ, कि ये सच है, बाहरी लोगों और फिल्मी घराने वालों में काफी अन्तर होता है, लेकिन हम एक-दूसरे का नाम उछालने और बदनाम करके लड़ने की बजाय साथ मिलकर इस व्यवस्था से लड़ने का काम कर रहे हैं। 

सिमी ग्रेवाल ने कंगना के खुले विचारों की प्रशंसा की और ट्विट किया कि मैं कंगना की सराहना करती हूँ कि वह मुझसे अधिक बहादुर ओर साहसी है। सिर्फ मुझे पता है, कि कैसे एक प्रभावशाली व्यक्ति ने मेरे कॅरियर को तबाह करने का प्रयास किया है और मैं चुप रही। मैं नहीं जानती ‘कंगना स्पीक्स अर्णब’ को देखने के बाद आपलोग कैसा महसूस करते हैं, लेकिन मुझे इसने काफी उदास किया है। मैं परेशान हूँ कि सुशान्त सिंह राजपूत ने कितना बर्दाश्त किया और कई बाहरी लोग बॉलीवुड में ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं। 

प्रश्न-2. आप एक सरकारी अधिकारी हैं। आप निर्देशों का अनुपालन नहीं होने के संबंध में अनौपचारिक पत्र लिखिए। 

उत्तरः 

भारत सरकार 

समाज परिवार कल्याण विभाग 

नई दिल्ली 

संदीप शुक्ला, 

सचिव, 

मानव संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली। 

अर्द्धशासकीय पत्र क्रमांक 77/300 

दिनांक : 12.06.2016 

प्रिय श्री राजन जी, 

कृपया समाज कल्याण विभाग के पत्रांक 71/300 दिनांक 08/06/2016 को देखने का कष्ट करें। पत्र में दिए गए निर्देशों का समयानुसार पालन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण आवास-वितरण के कार्य में विलंब हो जाएगा। जिस कारण क्षेत्र में निवासरत बी.पी.एल. समूह को अधिक आर्थिक क्षति होगी तथा मंत्री महोदय द्वारा बताई गई तिथि तक कार्य पूरा न होने पर उनकी आलोचना हो सकती है। अत: कार्य की गंभीरता को समझते हुए इसका यथोचित रूप से पालन करें। शुभकामनाओं सहित 

आप का सद्भावी 

अ.ब.स. 

प्रतिलिपि : सील 

Click Here- SSC EXAM Essay 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

3 × three =