Ssc chsl descriptive book in hindi pdf free download| SSC Descriptive exam model question 5 to 8

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Ssc chsl descriptive book in hindi pdf free download| SSC Descriptive exam model question 5 to 8

Question list-प्रश्न-. ‘कोरोना लॉकडाउन और वायु प्रदूषण’ शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. मुद्रा योजना के अंतर्गत बैंक से व्यवसाय ऋण प्राप्त करने के लिए बैंक प्रबंधक को एक पत्र लिखें। 

प्रश्न-. ‘भारत को केन्द्र एवं राज्यों के आपसी रिश्तों की पुनर्व्याख्या करने की आवश्यकता है’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-. मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरुकता अभियान के तहत समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखें। 

प्रश्न-. ‘प्रवासी कौशल विकास योजना’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-. पत्रकार वार्ता में शामिल होने के लिए एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के संपादक को आमंत्रण पत्र लिखें। 

प्रश्न-. ‘राष्ट्रीय एकता और बढ़ती क्षेत्रीयता’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने मित्र को एक बधाई पत्र लिखिए।

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SSC Descriptive exaM Model set-1

प्रश्न-1. ‘कोरोना लॉकडाउन और वायु प्रदूषण’ शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : कोरोना लॉकडाउन और वायु प्रदूषण 

कोरोना वायरस महामारी के कारण विश्व के अनेक देशों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। इस अवधि में वैश्विक एवं स्थानीय स्तर पर वायु की गुणवत्ता में काफी सुधार देखने को मिला। नासा की एक रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन ने प्रदूषण स्तर को कम करने में प्रभावी भूमिका अदा किया है। स्थानीय स्तर पर पहली बार कई वर्षों के बाद उत्तरी बिहार के कुछ जिलों से हिमालय पर्वत दिखाई दिया। यह स्पष्ट प्रमाण है कि इस दौरान प्रदूषण में कमी आई। 

लॉकडाउन के कारण निर्माण गतिविधियाँ, परिवहन, कारखाने इत्यादि पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इससे विशेष नुकसान अवश्य हुआ, लेकिन इससे निकलने वाले प्रदूषक गैसों, कणिकीय पदार्थों (PM.) के उत्सर्जन में कमी आई। ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसन्धान केन्द्र के आँकड़ों के आधार पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसकी पुष्टि की है। साथ ही वायु गुणवत्ता की जाँच केन्द्रों पर लॉकडाउन के आरम्भिक महीनों में बहुत दिनों बाद कणिकीय पदार्थों की वायु में उपस्थिति 100 के नीचे दर्ज किया गया। जबकि नई दिल्ली एवं उत्तर भारत के अन्य कई शहरों में प्रतिवर्ष शरद ऋतु एवं बसंत ऋतु के दौरान फसल अवशेष जलाने के दौरान धूम्र कोहरा का दमघोंटू चादर बन जाता है। 

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के कुछ मुख्य उत्सर्जक स्त्रोतों (वाहन, ऊर्जा संयंत्र, अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र इत्यादि) के बन्द होने से देखा गया कि उपर्युक्त अवधि में NO, का स्तर 52 प्रति घन मीटर से 15 प्रति घन मोटर (71%) तक गिर गया। 

हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, प्रदूषण पिछले कुछ वर्षों से निरन्तर कम हुआ है। 

वस्तुत: वायु प्रदूषण में कमी आने के अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे-इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना, स्वच्छ ईंधनों एवं स्वच्छ गतिविधियों को प्रोत्साहित करना इत्यादि। फिर भी कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में वायु की गुणवत्ता सुधारने में मदद किया है। 

प्रश्न-2. मुद्रा योजना के अंतर्गत बैंक से व्यवसाय ऋण प्राप्त करने के लिए बैंक प्रबंधक को एक पत्र लिखें। 

उत्तर : 

सेवा मे, 

क्षेत्रीय प्रबंधक महोदय केनरा बैंक, 

सोनीपत, हरियाणा दिनांक : 24 दिसम्बर, 2017

विषय : मुद्रा योजना के अंतर्गत व्यवसाय ऋण प्राप्त करने हेतु। 

मान्यवर, 

निवेदन के साथ सूचित करता हूँ कि मैं कंप्यूटर विज्ञान से अभियंता की डिग्री प्राप्त एक बेरोजगार युवक हूँ। मै अपने घर पर ही एक कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्था खोलना चाहता हूँ इस क्षेत्र के लोगों से बातचीत में मुझे इस कार्य के लिए भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ है। आप से आग्रह है कि मुझे इस योजना के क्रियान्वयन के लिए मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण प्रदान करने की कृपा करें। 

संलग्नक : सभी आवश्यक दस्तावेजों की छायाप्रति। 

धन्यवाद 

भवदीय अ.ब. स. 

SSC Descriptive exaM Model set-2

प्रश्न-1. ‘भारत को केन्द्र एवं राज्यों के आपसी रिश्तों की पुनर्व्याख्या करने की आवश्यकता है’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : भारत को केन्द्र एवं राज्यों के आपसी रिश्तों की पुनव्याख्या करने की आवश्यकता है। 

भारत का संविधान अपने स्वरूप में संघीय है तथा समस्त शक्तियाँ (विधायी, कार्यपालक और वित्तीय) केन्द्र एवं राज्यों के मध्य विभाजित हैं। यद्यपि केन्द्र एवं राज्य अपने-अपने क्षेत्रों में प्रमुख है, तथापि संघीय तंत्र के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए इनके मध्य अधिकतम सहभागिता एवं सहकारिता आवश्यक है। इस तरह संविधान ने केन्द्र राज्य सम्बन्धों को लेकर विभिन्न मुद्दों पर व्यवस्थाएँ स्थापित की हैं। 

1967 तक केन्द्र-राज्य संबंध व्यापक एवं सामान्य बने रहे क्योंकि केन्द्र एवं ज्यादातर राज्यों में एक ही दल का शासन था। 1967 के चुनाव में कांग्रेस 7 राज्यों में हार गई जिससे केन्द्र में उसकी स्थिति कमजोर हुई। इससे केन्द्र-राज्य सम्बन्धों के राजनीतिक परिदृश्य में नया परिवर्तन आया। राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारों ने कई मसलों पर केन्द्रीयकरण का विरोध किया। उन्होंने राज्यों की स्वायत्तता का मुद्दा उठाया और ज्यादा शक्तियाँ एवं वित्तीय स्रोतों की मांग की। इसने केन्द्र-राज्य संबंधों में टकराव एवं तनाव की स्थिति पैदा कर दी। 

हालांकि विधायी सम्बन्धों के लिए संविधान के भाग- LX के अनुच्छेद-245 से 254 तक प्रशासनिक सम्बन्धों के लिए संविधान के भाग-XI के अनुच्छेद-256 से 263 तक तथा वित्तीय सम्बन्धों के लिए भाग-XII के अनुच्छेद-264 से 300 तक युक्त-युक्त प्रबन्धन किया गया है। फिर भी बदलते परिदृश्य ने नये-नये विवादों तथा मुद्दों को जन्म दिया है। 

केन्द्र एवं राज्यों के मध्य मतभेद के कई कारण हैं जिनमें प्रमुख इस प्रकार हैं- केन्द्र-राज्य के मध्य वित्तीय भागीदारी, राज्य सूची के विषय पर केन्द्र द्वारा अतिक्रमण, राज्यपाल की नियुक्ति तथा राज्यपाल का बढ़ता हस्तक्षेप, विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना, राजनीतिक उद्देश्य के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का प्रयोग, अनुच्छेद-356 का अध्यारोपण आदि। हाल के दिनों में दिल्ली, अरुणाचल-प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली आदि राज्यों में राज्यपाल द्वारा अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति, बयानबाजी आदि क्रिया-कलापों से मतभेद उभरे हैं। हालांकि न्यायपालिका ने संविधान के प्रखर प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए विवादों का हल या निस्तारण किया है। 

वर्तमान समय वैश्वीकरण का समय है और विकास करना राष्ट्र एवं राज्यों की पहली प्राथमिकता बन गयी है। 

यही कारण है कि आज सहकारी संघवाद जैसी अवधारणाओं के माध्यम से देश के विकास में राज्यों को समान भागीदारी अवश्यंभावी हो गया है। नीति आयोग जी.एस.टी. अधिनियम आदि के द्वारा न केवल राज्यों की सहभागिता बढ़ेगी, अपितु राष्ट्रनिर्माण के साथ-साथ राज्यों में विकास तथा रोजगार अवसर एवं आधारभूत संरचना को बल मिलेगा। 

हालांकि सरकारिया आयोग, पुंछी आयोग जैसे समितियों ने केन्द्र-राज्य सम्बन्ध को पुनर्व्याख्यापित करने के लिए अनेक सुझाव सुझाए थे लेकिन उभरते मतभेदों को देखते हुए एक बार फिर इसकी आवश्यकता जान पड़ रही है। 

बहरहाल राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखते हुए लोगों के कल्याण हेतु अच्छे शासन को सुनिश्चित करने हेतु नई चुनौतियों का किस तरह सामना किया जाए और गरीबी एवं निरक्षरता के उन्मूलन द्वारा भावी परिस्थितियों के अनुरूप सतत और तीव्र आर्थिक वृद्धि कैसे प्राप्त की जाए। इन सब के लिए आवश्यक है कि केन्द्र एवं राज्य सम्बन्ध को संविधान संगत एवं पारदर्शी बनाया जाए। 

प्रश्न-2. मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरुकता अभियान के तहत समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखें। 

उत्तर: सेवा में, श्रीमान संपादक महोदय, कर्मभूमि हिन्दी दैनिक, मुम्बई (महाराष्ट्र) विषय : मताधिकार के प्रति जागरुकता पत्र, महोदय, 

मै आप के समाचार पत्र के माध्यम से लोगों में मताधिकार के प्रति जागरुकता फैलने की अनुमति चाहता हूँ। 

प्रिय पाठकों जैसा कि आप जानते हैं कि राज्य में विधान सभा चुनावों की अधिसूचना निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की जा चुकी है। अत: अब वह समय आ गया है जब हम सभी अपने मताधिकार का प्रयोग करके भावी पाँच वर्षों के लिए अपने जनप्रतिनिधियों का चुनाव करें। आज भारत को विकास के साथ-साथ वौश्विक प्रतिदियों का मुकाबला करने के लिए सजग और विवेकशीन नीति निर्माताओं की आवश्यक्ता है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार यह हमारा दायित्व है कि हम अपने विवेक का प्रयोग करके सर्वोत्तम प्रत्याशी का चयन करें। अत: आप सबों से यह अनुरोध है कि भावी चुनावों में आप सभी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें तथा भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनें। 

धन्यवाद 

प्रार्थी 

अ.ब.स. विधानसभा सदस्य (महाराष्ट्र) 

SSC Descriptive exaM Model set-3

प्रश्न-1. ‘प्रवासी कौशल विकास योजना’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : प्रवासी कौशल विकास योजना 

प्रवासी कौशल विकास योजना विदेश मंत्रालय की एक पहल है। इसे 2017 में प्रारम्भ किया गया था। इसे लागू करने के लिए विदेश मंत्रालय एवं कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने समझौता किया है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम अपने प्रशिक्षण सहभागियों के माध्यम से विदेश मंत्रालय एवं कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय से विचार करके इसे लागू करेगा। 

इस योजना का लक्ष्य अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विदेश जाने वाले प्रवासियों को चयनित क्षेत्रों एवं रोजगार में प्रशिक्षण देना तथा प्रमाणपत्र देना है। 

सहयोग के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर अन्य सरकारी कौशल विकास योजना के तहत भी प्रवासी कामगार प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। 

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम अन्तर्राष्ट्रीय कौशल विकास केन्द्रों को स्थापित करेंगे। 

इस प्रशिक्षण के तहत विदेश जाने के पूर्व भाषा एवं व्यवहार कौशल का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त मूल्यांकन एवं प्रमाणन व्यवस्था द्वारा समर्थित होगा। 

इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम से ब्लू कॉलर कर्मचारियों को काफी लाभ होगा। इससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रोजगार का विकल्प अधिक होगा। साथ ही प्रशिक्षण के अन्तर्राष्ट्रीय प्रमाणपत्र से उनके श्रम का मूल्य भी अधिक प्राप्त होगा। विदेशी भाषाओं के ज्ञान से उन्हें विदेशों में रहने, संवाद स्थापित करने एवं रोजगार प्राप्त करने में सहजता होगी। उनके अन्दर विश्वास जगेगा। उनके सुरक्षा के लिए भी यह आवश्यक है। 

वर्तमान में भारत विश्व में सर्वाधिक भेजा हुआ धन प्राप्त करता है। केरल जैसा विकसित राज्य के अर्थव्यवस्था का भी यह मुख्य आधार है। ऐसे में सरकार का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर साबित हो सकता है। 

प्रश्न-2. पत्रकार वार्ता में शामिल होने के लिए एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के संपादक को आमंत्रण पत्र लिखें। 

उत्तर: 

702-अशोका रोड, 

नयी दिल्ली, 

दिनांक : 26 दिसम्बर, 2017 सेवा में, 103-अकबर रोड, दैनिक भास्कर नयी दिल्ली मान्यवर, 

दिनांक 29 दिसम्बर को स्वाभिमान संगठन द्वारा सायं 4 बजे सविध न भवन, अशोका रोड, नयी दिल्ली में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया जाना नियत हुआ हैं जिसमें स्वाभिमान संगठन के प्रमुख सदस्यों सहित माननीय अध्यक्ष महोदय ‘कृषक ऋण माफी’ के संबंध में अपनी बात रखेंगे। 

हम आशा करते हैं कि संदर्भित विषय पर आप संगठन का पक्ष जानने के लिए अवश्य पधारेंगे। कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में अधि क जानकारी के लिए आप दूरभाष संख्या : 0215-1412xxx पर संपर्क कर सकते हैं। 

धन्यवाद, 

प्रेषक का नाम 

क. ख. ग. संगठन कार्यकर्ता स्वाभिमान संगठन 

SSC Descriptive exaM Model set-4

प्रश्न-1. ‘राष्ट्रीय एकता और बढ़ती क्षेत्रीयता’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : राष्ट्रीय एकता और बढ़ती क्षेत्रीयता 

किसी भी देश का आधार उसकी एकता एवं अखण्डता में ही निहित होता है। भारत देश कई वर्षों तक गुलाम था। इसका सबसे कारण था आवाम के बीच एकता की कमी होना इस एकता की कमी का सबसे बड़ा कारण उस समय में सूचना प्रसारण के साधनों का न होना था साथ ही अखंड भारत पर कई संस्कृतियों ने राज किया इस कारण भारत देश में विभिन्न जातियों का विकास हुआ। शासन बदलते रहने के कारण एवं विचारों में भिन्नता के कारण मतभेद उत्पन्न होता गया। और देश में सबसे बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने राज किया और इन्होनें इस कमी का फायदा उठाकर फूट डालों एवं राज करो की नीति अपनाई। इसी एक हथियार के कारण अंग्रेजों ने भारत पर 200 वर्षों तक शासन किया। 

इससे जाहिर होता है कि देश का विकास शांति, समृद्धि एवं अखंडता एकता के कारण ही संभव है। कौमी लड़ाई देश की एकता को खोखला करती है। इससे न निजी लाभ होता है न ही राष्ट्रीय हित, आज भी हम कहीं न कहीं एकता में कमी के कारण अन्य देशों से पीछे हैं। जातिवाद के दल-दल में फंस कर हम देश की एकता को कमजोर कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इतिहास के पन्नों में है। सन् 1857 की क्रांति के विफल होने का कारण एकता में कमी ही था। मुगलों ने भी भारत पर शासन एकता की कमी के कारण ही किया था। 

इस मतभेद को समझ लेने के बाद ही देश के कई महान स्वतंत्रता सेनानियों ने सबसे पहले इस मुश्किल को कम करने की कोशिश की। कई बड़े-बड़े नेताओं ने आजादी के लिए पहले लोगों को एकता का महत्त्व बताया। इसके लिए आजादी से पहले समाचार पत्रों एवं रेडियो प्रसारण का उपयोग किया गया। क्रान्तिकारी भले ही जेल में होते थे, लेकिन उस वक्त अपनी कलम के जोर पर उन्होंने देश में एकता का विकास किया उसी के परिणाम स्वरूप 1947 में देश को स्वतंत्रता मिली। 

स्वतंत्रता के बाद राज्य रूप में उभर कर आयी आन्ध्र प्रदेश का गठन इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। समय-समय पर अन्य क्षेत्रों जैसे नागालैण्ड, हरियाणा, गुजरात, झारखण्ड, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़ अनेक स्थानों पर अपनी क्षेत्रीय भावनाओं को साधनों के लिए आन्दोलन हुए, तथा परिणामस्वरूप छोटे-छोटें राज्यों का गठन हुआ। ___ इसका एक व्यापक दुष्परिणाम महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल एवं असम में देखा गया जहाँ क्षेत्रीयता के नाम पर उत्तर भारतीयों को शिकार बनाया गया तथा उन पर हमला किया गया। 

इससे राष्ट्रीय विचारधारा पर कुठाराघात हुआ एवं राष्ट्रीय एकता को ठेस पहुँचा। इससे यह स्थिति पैदा हुई कि व्यक्ति राष्ट्र हित को छोड़ स्वयं के हितों को साधने के लिए तरह-तरह के नफरत का सहारा लेने लगा। परिणामतः हमारा राष्ट्रीय दृष्टिकोण संकुचित हो गया। 

आज राष्ट्रीय एकता के लिए जरूरी है कि आज की पीढ़ी एवं पहले की पीढ़ी आपसी विचारों को व्यक्त करे एवं एक दूसरे को अपनी-अपनी स्थिति से अवगत कराये साथ ही एक हल की उम्मीद में ही बात-चीत शुरू की जाय। पीढ़ियों के बीच विवाद को मिल कर सुलझाया जाय क्षेत्रीय समस्याओं के लिए राष्ट्रीय एकता पर प्रहार न किया जाय तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना साकार हो पायेगा। 

प्रश्न-2. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने मित्र को एक बधाई पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

ए-10, पालम विहार, गुरुग्राम (हरियाणा) 

20 अक्टूबर, 2016 प्रिय कवीन्द्र. 

सप्रेम अभिवादन। 

आज ही समाचार-पत्र में तुम्हारा परीक्षा परिणाम तुम्हारे चित्र के साथ छपा देखकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई। बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों में तुमने इतनी उल्लेखनीय सफलता पाई है कि तुमने न केवल अपने विद्यालय की कीर्ति को बढ़ाया है, अपितु अपने माता-पिता और परिवार के यश-सम्मान में भी चार चाँद लगा दिए हैं। इस अवसर पर व्यक्तिगत तौर पर मेरी और मेरे परिवार की हार्दिक बधाई स्वीकार करो। परमात्मा तुम्हें भविष्य में भी ऐसी ही उल्लेखनीय सफलताएँ देते रहें और निरन्तर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते रहो यह मेरी शुभकामना है। 

चाचाजी और चाचीजी को भी मेरी ओर से इस अवसर पर बधाई।

पाने वाले का नाम व पता 

अ.ब.स. 

तुम्हारा अभिन्न मित्र, 

उमेश त्यागी 

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