SSC Cgl previous year descriptive question paper with solution | Model question paper-9 to14

SSC Cgl previous year descriptive question paper with solution

SSC Cgl previous year descriptive question paper with solution | Model question paper-9 to14

Question listप्रश्न-. “शिक्षा का निजीकरण’ विषय पर लगभग 200 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-. आप, सुरेन्द्र कुमार, सरस्वती विहार नई दिल्ली के निवासी हैं। आपके मुहल्ले में गंदगी की भरमार है। आप अपने मुहल्ले की सफाई के संबंध में संबंधित स्वास्थ्य-अधिकारी को पत्र लिखिए। 

प्रश्न-. ‘कोरोना प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-. अपने पड़ोस में हुई चोरी की शिकायत के विषय में अपने क्षेत्र के थाना अधिकारी को एक पत्र लिखिए जिसमें उचित कार्यवाही हेतु निवेदन हो। 

प्रश्न-. ‘राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. आप रमेश चन्द्र हैं एवं रोहिणी नई दिल्ली के निवासी हैं। आप अपने क्षेत्र में बसों की कुव्यवस्था के बारे में सूचित करते हुए नवभारत टाइम्स के संपादक के नाम एक पत्र लिखिए। 

प्रश्न-. “ड्रग टेररिज्म वैश्विक सुरक्षा के समक्ष उभरता नया खतरा” विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. डिजिटल भुगतान के लाभों को बताते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखे। 

 

प्रश्न-. “भारत एवं क्वैड (guad) समूह” विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. आप उमेश हैं। आप दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाली किसी प्रदर्शनी का विवरण देते हुए अपने मित्र को इसे देखने के लिए आमंत्रित कीजिए। 

प्रश्न-. ‘ऑनलाईन परीक्षाः लाभ या हानि’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-. आप रंजन शर्मा हैं। आप अपने मित्र संजय को पत्र लिखिए जिसमें व्यायाम की महत्ता का वर्णन हो।

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SSC Cgl  descriptive model paper-9

प्रश्न-1. “शिक्षा का निजीकरण’ विषय पर लगभग 200 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर – शिक्षा का निजीकरण 

प्राचीन काल से ही शिक्षा मानव जीवन का अभिन्न अंग रही है। क्योंकि यह मस्तिष्क का संवर्धन कर दक्षता प्राप्ति द्वारा जीवन को संतोष जनक बनाती है। फिर भी, ऐसी धारणा है कि शिक्षा का सर्वव्यापीकरण 20वीं शताब्दी में ही सम्भव हुआ था। आज शिक्षा मानव की मूलभूत आवश्यकता बन गयी है। प्रत्येक व्यक्ति में सीखने और अपने आप को शिक्षित करने की ललक होती है और शिक्षा ही उसे आवश्यक ज्ञान द्वारा जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सुसज्जित करती है। 

आज शिक्षा वह नींव है जिस पर आधुनिक समाज के स्तम्भ खड़े हैं। अनौपचारिक एवं सस्ती शिक्षा आज अति विशिष्ट हो गयी है इसका कार्य क्षेत्र भी काफी विस्तृत हो गया है? इसने प्लेटो और अरस्तू के दिनों से लेकर और एक समय में भारत में सम्मानित गुरूकुल परम्परा से लेकर आज तक लम्बी यात्रा की है। अधिकांश देशों में इसका राष्ट्रीकरण हो गया है विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा देते समय विषय-वस्तु के संकट स्वीकृत सिद्धांतो एवं प्रक्रियाओं को स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन भारत जैसा विकासशील देश आर्थिक दबाव के कारण शिक्षा पर अधि क व्यय वहन नहीं कर सकता है। 

शिक्षा पर व्यय हमारे सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 2.8 प्रतिशत है जबकि विकसित देशों में सामान्यतः स्वीकृत मानदण्ड 6 प्रतिशत या उससे भी अधिक है। इसके फलस्वरूप जनसंख्या का एक बड़ा माग शिक्षा से वंचित रही है। 

आज शिक्षा के निजीकरण से अक्षमता, भ्रष्टाचार, शिक्षक, उपकरण, प्रयोगशालाएँ और पुस्तकालयों जैसे मानवीय संसाधनों के अपर्याप्त उपयोग को दूर किया जा सकता हैं जो हमारी शिक्षा पद्धति के अनिवार्य अंग बन गये हैं। लेकिन शिक्षा के निजीकरण का नकारात्मक पक्ष भी हैं। 

यह भविष्य में मुनाफे और निहित आर्थिक लाभों को लाती है। श्रेष्ठ स्कूलों में अत्यधिक शुल्क लिया जाता है जो समान्य भारतीय की सामर्थ्य से बाहर है। ये समर्थ और असमर्थ लोगों के बीच खाई उत्पन्न करती है। शिक्षा के निजीकरण ने समाज के उच्च वर्गों के स्वार्थ के लिए अमीरों और गरीबों के बीच विषमता को बढ़ाने का कार्य किया है। 

निजी क्षेत्र तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में ही रूचि लेता हुआ जान पड़ता है। इनमें से कुछ संस्थान विभिन्न मदों पर छात्रों से लाखों रूपया लेकर भी उन्हें बुनियादी सुविधाएँ नही दे पाते हैं। यह शिक्षा के निजीकरण के मूल उद्देश्यों को मात देता हैं। 

वैसे भी यदि निजी क्षेत्र प्राथमिक, उच्च विद्यालय शिक्षा में संलग्न है तो उनमें से अधिकांश संस्थानों में मुख्यतः सरकारी निधि या सहायता प्राप्त संस्थानों में अनुदान से प्राप्त से प्राप्त धन को अक्सर दूसरे नाम पर खर्च करके स्थिति का बदतर बना दिया जाता है। इस तरह के संस्थानों के शिक्षकों को शायद ही कभी पूरा वेतन दिया जाता हैं इसके साथ ही इनमें अनेक कमियाँ हैं। 

फिर भी शिक्षा के परिदृश्य से निजी क्षेत्र को बाहर रखना संभव नहीं है, क्योकि सरकारी निधि शिक्षा को सर्वव्यापक बनाने के आदर्श को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। देश के बहुत से क्षेत्रों में शिक्षा के लिए आधार- भूत सुविधायें तक नही हैं। इस प्रकार, निजी क्षेत्र में शिक्षा में संलग्नता आवश्यक बन गई है। 

प्रश्न-2. आप, सुरेन्द्र कुमार, सरस्वती विहार नई दिल्ली के निवासी हैं। आपके मुहल्ले में गंदगी की भरमार है। आप अपने मुहल्ले की सफाई के संबंध में संबंधित स्वास्थ्य-अधिकारी को पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

स्वास्थ्य अधिकारी, दिल्ली नगर निगम, टाउन हॉल, दिल्ली-110006 

दिनांक : 12 जुलाई, 2016 विषय : मुहल्ले की सफाई हेतु प्रार्थना पत्र 

माननीय महोदय, 

मैं आपका ध्यान अपने मुहल्ले जीवन नगर की दिन-पर-दिन बिगड़ती सफाई-व्यवस्था की ओर आकर्षित कर रहा हूँ। इस मुहल्ले में नियमित रूप से सफाई नहीं की जा रही। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं, पर उन्हें उठाने की कोई उचित एवं नियमित व्यवस्था नहीं है। इससे पहले भी मैं एक पत्र आपकी सेवा में भेज चुका हूँ, किंतु खेद है अभी तक कोई उपयुक्त कदम नहीं उठाया गया। हमने इस कार्य के लिए नियुक्त सफाई-कर्मचारियों से अनेक बार प्रार्थना भी की, परंतु उनके कानों पर तक नहीं रेंगी। हालांकि हम मुहल्लेवासी साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं फिर भी जगह-जगह कूड़े का पहाड़ बना है जिसे बिना नगर निगम की सहायता एवं संसाधन के हटाना संभव नहीं है। हम सब भी ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का एक अभिन्न हिस्सा बनना चाहते हैं। अत: हमारा निवेदन है कि इस समस्या पर तत्काल ध्यान देते हुए कुछ ऐसा उपाय किया जाय कि सफाई व्यवस्था में गुणात्मक सुधार हो सके। इसके लिए हमलोग आपका बहुत आभार मानेंगे। 

भवदीय, सुरेन्द्र कुमार सरस्वती विहार, दिल्ली -110088 

प्रश्न-1. ‘कोरोना प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : कोरोना प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान 

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020 के अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार में 23.9% का संकुचन आया। 1996 में प्रारम्भ जी.डी.पी. की तिमाही गणना के बाद से यह अब तक का सर्वाधिक पतन है। 

चीन को छोड़कर अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का आकार इस अवधि में संकुचित हुआ है, लेकिन इसमें सर्वाधिक कमी, यहाँ तक कि कोरोना से बुरी तरह प्रभावित अमेरिका (9.1%) और इटली (17.7%) से भी अधिक, दर्ज की गई। 

हालांकि भारत सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज घोषित किया है, लेकिन आवश्यकता के अनुसार यह पर्याप्त नहीं लगता है। साथ ही इसके क्रियान्वयन की भी समस्या है। सरकार को इसे सरलता से लागू करने के लिए एक बेहतर क्रियान्वयन तंत्र बनाने की आवश्यकता 

चयनित क्षेत्रों में आईजीएसटी की प्राप्ति का अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव है। अर्थव्यवस्था में सकल वृद्धि दर में लगभग 1.5%, निर्यात एवं आयात में क्रमश: 7% तथा 6% की वृद्धि हुई है, रोजगार 4% तथा निवेश 1.3% बढ़ा है। इन क्षेत्रों में वृद्धि का संयुक्त प्रभाव है, कि इससे रोजगार एवं निवेश में योगदान मिला है। 

समर्थन एवं प्रोत्साहन के माध्यम से एक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करना है, ताकि निर्यात हेतु आयात प्रतिस्थापन पर दबाव कम हो। सरकार ने इन क्षेत्रों के साथ-साथ चयनित औषधि एवं चिकित्सा उपकरणों के लिए एक ऐसी नीति की घोषणा की है। लेकिन राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज के साथ, जिसके मूल्य एवं क्रियान्वयन में समस्या आ सकती है, इसे त्वरित रूप से लागू किया जा सकता है। 

प्रश्न-2. अपने पड़ोस में हुई चोरी की शिकायत के विषय में अपने क्षेत्र के थाना अधिकारी को एक पत्र लिखिए जिसमें उचित कार्यवाही हेतु निवेदन हो। 

उत्तर: 

सेवा में, थाना अधिकारी महोदय, 

थाना तिलकनगर, 

नई दिल्ली -110064 दिनांक : 6 जुलाई, 2016 विषय : पड़ोस में हुई चोरी के संबंध में शिकायत 

महाशय, 

निवेदन है कि कल रात हमारे पड़ोस में श्री दिनेशचंद्र अग्रवाल, फ्लैट-संख्या 615 के निवासी के घर में चोरी हो गई। 

श्री दिनेशचंद्र अग्रवाल सपरिवार एक विवाह में सम्मिलित होने के लिए जम्मू गए हुए हैं। चोरों को न जाने किस प्रकार इसकी जानकारी मिल गई और उन्होंने उनके घर को अपना निशाना बनाया। हम मुहल्ले वालों ने जब प्रात:काल उनके मकान का ताला टूटा हुआ देखा तो कुछ शक हुआ। अपने क्षेत्र की सुधार समिति के प्रधान और मंत्री के साथ उनके घर जाकर देखा कि उनके घर का सारा सामान बिखरा पड़ा है तथा दरवाजे खुले पड़े हैं। इसीलिए हमने यह उचित समझा कि इसकी सूचना तुरंत आप को दी जाए। 

आपसे अनुरोध है कि आप तत्काल आकर घटनास्थल का निरीक्षण करें और उचित कार्यवाही करें। 

धन्यवाद। 

भवदीय, 

अमितोज गौतम

फ्लैट सं. 613, जी.एच. 10.

मीरा बाग, नई दिल्ली-110041 

प्रश्न-1. ‘राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति 

यद्यपि कई सदियों से बौद्धिक संपदा का संचालन करने वाले बहुत से कानूनी सिद्धांत विकसित हुए. तथापि उन्नीसवीं सदी के बाद ही बौद्धिक संपदा शब्द प्रचलन में आया यह कहा जाता है कि बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में इसने अमेरिका में अपना स्थान बना पाया। 

बौद्धिक संपदा अधिकार अस्थाई एकाधिकार है, जो राज्य द्वारा अभिव्यक्ति और विचारों के उपयोग के संबंध में लागू किये जाते हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार आम तौर पर गैर प्रतिद्वंदी वस्तुओं तक ही सीमित होते हैं। अर्थात् वे वस्तुएं जिनका एक साथ बहुत से लोगों द्वारा आनंद उठाया जा सकता है या प्रयोग किया जा सकता है। एक व्यक्ति द्वारा प्रयोग दूसरे को उसके प्रयोग से वंचित नहीं करता है। इसकी तुलना प्रतिद्वंदी वस्तुओं से की जा सकती हैं। जैसे की कपड़े, जो एक समय में केवल एक ही व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किये जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर गणित के एक फार्मले को एक साथ कई लोग प्रयोग कर सकते हैं। 

बौद्धिक संपदा अधिकारों की स्थापना एक लेन-देन को दर्शाती है, जो गैर प्रतिद्वंदी वस्तुओं के निर्माण में एकाधिकार शक्ति की समस्याओं के साथ, समाज के हित को संतुलित करता है। चूंकि लेन-देन और प्रासंगिक लाभ और समाज के लिए उसकी लागत बहुत से कारकों पर निर्भर करेगी, जो हर समाज और उत्पाद के लिए विशिष्ट है, व इष्टतम समयावधि जिसके दौरान अस्थाई एकाधिकार अधिकार बने रहने चाहिए।

1967 में एक संधि के तहत संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के रूप में इस संगठन का उत्तराधिकारी बना विश्व बौद्धिक संपदा संगठन। इसी समय से संयुक्त राज्य अमेरिका में इस शब्द का वास्तव में इस्तेमाल किया जाने लगा और 1980 में बेहन्डोल अधिनियम के पारित होने के बाद इसका सर्वसाधारण प्रयोग शुरू हो गया। 

बौद्धिक संपदा कानून के तहत, मालिकों को विभिन्न अमूर्त संपत्तियों, जैसे संगीत संबद्ध साहित्य और कलात्मक विचार खोज अविष्कार, शब्द, वाक्यांश, प्रतीक और डिजाइनों के संदर्भ में कुछ विशेष अधिकार प्रदान किये गये हैं। सामान्य प्रकार की बौद्धिक सम्पदा में शामिल है, कापीराइट, ट्रेडमार्क पेटेंट, औधोगिक डिजाइन अधिकार और कुछ अधिकारिक क्षेत्र में व्यापार रहस्य। 

बौद्धिक, दोनों के संदर्भ में विशेष अधिकारों के समूह है। प्रथम अधिकार कापीराइट कानूनों से आवृत है। जो रचनात्मक कार्यों, जैसे पुस्तकें फिल्में, संगीत, पेंटिग छाया चित्र और साफ्टवेयर को संरक्षण प्रदान करता है और कापीराइट अधिकार धारक को एक निश्चित अवधि के लिए पुन: उत्पादन पर या उसके रूपान्तरण पर नियंत्रण का विशेष अधि कार देता है। 

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि नई बौद्धिक संपदा अधिकार नीति भविष्य में भारत के विकास में भारत के विकास की एक महत्त्वपूर्ण आधारशीला होगी। उम्मीद है कि इस नीति के कार्यान्वयन के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को हल करने पर यह अपने मूल उद्देश्यों को प्राप्ति में सफल हो सकेगी। 

प्रश्न-2. आप रमेश चन्द्र हैं एवं रोहिणी नई दिल्ली के निवासी हैं। आप अपने क्षेत्र में बसों की कुव्यवस्था के बारे में सूचित करते हुए नवभारत टाइम्स के संपादक के नाम एक पत्र लिखिए। 

उत्तर: सेवा में, 

संपादक, नवभारत टाइम्स 

नई दिल्ली-110002 दिनांक : 16 जुलाई, 2016

विषय: बसों के परिचालन में कुव्यवस्था के संबंध में 

मान्यवर,

इस पत्र के माध्यम से मैं अपने क्षेत्र रोहिणी सेक्टर-29 में बसों की अव्यवस्था की ओर ‘दिल्ली परिवहन निगम के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ। आपसे अनुरोध है कि हमारे इस पत्र को ‘रीडर्स मेल’ स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित करने का कष्ट करें। 

रोहिणी, सेक्टर.29 में डी.डी.ए. ने बड़ी संख्या में फ्लैट्स बनाए हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग या तो निम्न स्तरीय सरकारी कर्मचारी हैं या अन्य निजी प्रतिष्ठानों में काम करते हैं। निम्न मध्यम वर्ग से संबंधित यहाँ के अधिकांश लोग बसों द्वारा अपने काम-काज पर जाते हैं; परंतु इस क्षेत्र में डी.टी.सी. बसों की सेवा नहीं के बराबर है, जिसके कारण यहाँ के निवासियों को काफी दूर पैदल जाकर अन्य स्थानों से बसें पकड़नी पड़ती है। यहाँ आस-पास नजदीक में मेट्रो रेलवे की सुविध | भी नहीं है। निजी सवारी गाड़ियाँ मनमाने किराये तो वसूलती ही हैं, मनमाने ढंग से चलती भी हैं। साथ-साथ इनका यात्रियों के साथ व्यावहार भी अत्यंत रूखा एवं अभद्र है। 

अतः आपसे निवेदन है कि इस क्षेत्र में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, केंद्रीय टर्मिनल, नेहरू प्लेस, भगत सिंह टर्मिनल तथा शिवाजी स्टेडियम के लिए अविलम्ब बस सेवाएं शुरू करवाने के निर्देश जारी करके यहाँ के निवासियों की कठिनाई दूर करने की कृपा करें। 

धन्यवाद। 

भवदीय, 

रमेशचन्द्र रोहिणी सुधार समिति, 

आनंद विहार, नई दिल्ली -110085 

प्रश्न-1. “ड्रग टेररिज्म वैश्विक सुरक्षा के समक्ष उभरता नया खतरा” विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : ड्रग टेररिज्म वैश्विक सुरक्षा के समक्ष उभरता नया खतरा 

वैश्विक आतंकवाद के फैलने तथा उसके पालन-पोषण में इग का महत्त्वपूर्ण योगदान है। आकड़ें बताते हैं कि दुनियाँ में डुग का जितना कारोबार होता है उसका एक बड़ा हिस्सा इन आतंकवादी संगठनों द्वारा उपयोग किया जाता है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसके लिए एक व्यापक रोड मैप तैयार करने तथा इस अपराध को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर बल दिया है। 

तुर्की में एक सम्मेलन में भाग लेते हुए अमेरिका और कोलंबिया के प्रतिनिधियों ने ड्रग ट्रैफकिंग पर चिंता जाहिर करते हुए इसके कोष के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने तथा इसे रोकने पर बल देते हुए कहा कि यह आतंकवाद को प्रोत्साहित करने का एक प्रमुख जरिया है। 

वर्ल्ड ड्रग रिर्पोट 2007 के अनुसार अफगानिस्तान से अफीम का अवैध व्यापार उसके कुल अफीम का 31 प्रतिशत किया गया। वहीं लैटिन अमेरिकी देशों ने 400 अन कोकीन का अवैध व्यापार किया जिसका बाजार मूल्य 2 बिलियन था। इसका कितना प्रतिशत आतंकवादी गतिविधियों पर खर्च होता है इसका सही-सही आँकड़ा उपलब्ध तो नहीं लेकिन यह अनुमान अवश्य लगाया जा सकता है, कि इसका एक बड़ा भाग इस पर खर्च होता हैं। 

आज विश्व के हर देश में यह ससस्या व्याप्त हो गयी है। आये दिन विश्व के किसी न किसी देश में ड्रग तस्करी की घटनायें देखने को मिलती रहती है। अफगानिस्तान, इरान अक्सर पाकिस्तान की सीमाओं से होकर बड़ी मात्रा में अफीम और हीरोइन को बाल्कन देशों के रास्ते यूरोप और अमेरिका तक पहुँचाया जाता हैं। अफगानिस्तान ईरान और पाकिस्तान का अफीम कारोबार वाला क्षेत्र गोल्डन शेंट के नाम से प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र एशिया के अवैध कारोबार के लिए कुख्यात है। 

अफगानिस्तान के अलावा एशिया में हेरोइन उत्पादन का दूसरा प्रमुख क्षेत्र म्यांमार, थाइलैण्ड और लाओस का क्षेत्र है। यह क्षेत्र गोल्डेन ट्रैगल के नाम से जाना जाता है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने ड्रग तस्करी के खिलाफ अमेरिका में आपरेशन ‘इटरसेप्ट’ चलाया था। भारत के कुछ क्षेत्रों में ड्रग तस्करों द्वारा घुसपैठ बनाने की बात सामने आयी है। जो एक चुनौती के रूप में विद्यमान है। भारत का पंजाब तथा हरियाणा प्रदेश वर्तमान में ड्रग के कारण चर्चा में रहा है जहाँ के अधिकांश युवा इस तरफ आकर्षित हो गये हैं। 

अगर व्यापक स्तर पर देखा जाय तो ड्रग तस्करी किसी एक देश की समस्या नहीं हैं बल्कि यह सम्पूर्ण विश्व के लिए एक गम्भीर चुनौती बनती जा रही है। तमाम संधियों एवं समझौतों के माध्यम से विश्व के विभिन्न देश ड्रग तस्करी पर लगभग प्रतिबंध लगाने के लिए प्रयासरत हैं। इन प्रयासों में पेरिस पैक्ट 2003 की भूमिका सर्वाधिक उल्लेखनीय है, जिसके अन्तर्गत 32 देशों एवं 22 संस्थाएँ सदस्य के रूप में शामिल हैं। अफगानिस्तान से अफीम तस्करी भारत की आन्तरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन कर उभर सकता है। ऐसे में डुग तस्करी एवं आतंकवाद को सम्मिलित रूप से नियंत्रित करने की आवश्यकता है। 

प्रश्न-2. डिजिटल भुगतान के लाभों को बताते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखे। 

उत्तर: 

प्रिय मित्र, 

अ. ब. स.

विगत दिनों मुझे नयी दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में आयोजित डिजिटल मेले में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। जिससे डिजिटल लेन-देन के प्रति मेरे विचारों में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है। मैं तुमसे इस विषय पर अपने अनुभव साझा करना चाहता हूँ। 

मित्र भारत सरकार ने देश में डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय भुगतान निगम नामक एक संस्था को इस कार्य के लिए गठित किया गया है। जो डिजिटल भुगतान की अनेक सुरक्षित एवं सरल विधियों का निर्माण कर रही है। भीम एप को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त अपने बैंक खाते से अपना मोबाइल नम्बर पंजीकृत करवा के भी बैंक खाते से भी शीघ्र भुगतान किया जा सकता है। 

डिजिटल भुगतान न सिर्फ सरल एवं अधिक सुविधाजनक ही है अपितु यह काले धन पर अंकुश लगाने में भी सहायक है। इसके माध्यम से हम अपने नकद धन की सुरक्षा के दायित्व से हैं इसके माध्यम से हम अपने नकद धन की सुरक्षा के दायित्व से भी मुक्त होते हैं। डिजिटल भुगतान नकदी पर आधारित अर्थव्यवस्था के कारण नोटो के मुद्रण में लगने वाली लागत में भारी कमी ला सकता है। 

अंततः मित्र मैं तुम्हें यह सुझाब दूंगा कि तुम शीघ्र ही डिजिटल भुगतान कार्यक्रम का हिस्सा बनों तथा अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम का हिस्सा बनने के लिए जागरूक करो। 

तुम्हारा मित्र

क. ख. ग. 

प्रश्न-1. “भारत एवं क्वैड (Quad) समूह” विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : भारत एवं क्वैड (Quad) समूह 

चार देशों-भारत, अमेरिका, जापान एवं ऑस्ट्रेलिया द्वारा आपसी सुरक्षा के सम्बन्ध में एक वार्ता मंच का विकास किया जा रहा है, जिसे चतुष्पक्षीय सुरक्षा मंच या क्वैड कहा जा रहा है। इसका अचानक विकास नहीं हुआ है, बल्कि यह धीरे-धीरे यह उभरा है। 2007 में इसका पहल जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने किया था। हालांकि यह ज्यादा प्रभावी नहीं था। 

क्वैड की चर्चा पुनः तेज हो गई, जब चीन ने अपनी आक्रामक एवं हिन्द-प्रशान्त क्षेत्र में विस्तारवादी नीति को प्रारम्भ किया। इसको प्रति सन्तुलित करने के लिए भारत, जापान, अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया ने पुनः नवम्बर, 2017 में क्वैड समूह को स्थापित किया। इसकी पहली बैठक आसियान सम्मेलन के एक दिन पूर्व आयोजित हुई। सभी राष्ट्रों के विदेश मंत्री समरूप हितों एवं हिन्द-प्रशान्त क्षेत्र में बदलते परिदृश्य पर चर्चा हेतु मनीला में एकत्रित हुए। क्वैड 1.0 (प्रथम चरण) के पतन के बाद आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय सम्बन्धों ने क्वैड 2.0 के एजेण्डा को आकार दिया। 

चीन की बढ़ती आक्रामकता, अत्यधिक सैन्य हस्तक्षेप, अधिग्रहण एवं साम्राज्यवाद की नीति इत्यादि ने चारों देशों के राष्ट्रीय हितों को साथ-साथ चोट पहुंचाई है। क्वैड के 2017 में पुनउँदय ने बदलते भू-राजनीति, विशेषकर हिन्द-प्रशान्त क्षेत्र में, खतरे का संकेत दे दिया है। 

भारत चीन से दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर, जहाँ चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियाराणा (CPEC) बनाकर भारतीय सम्प्रभुता को क्षति पहुँचाई है। दूसरी तरफ हिन्द महासागर क्षेत्र में मोतियों की माला सिद्धान्त’ के तहत भारत को घेरने की नीति पर चल रहा है। इसके अलावा सीमा पर निरन्तर अवैध अतिक्रमण एवं दिन-प्रति-दिन की झड़प जारी है। क्वैड समूह की सबसे कमजोर कड़ी और सर्वाधिक प्रभावित (चीन से) पक्ष भारत है। यह स्वयं को इस समूह के केन्द्र में देखता है। भारत कोई भी औपचारिक सैन्य समूह के रूप में 

क्वैड को स्थापित नहीं करना चाहता है, क्योंकि वह गुटनिरपेक्षता की नीति का पालन करता है। इसके साथ ही सैन्य गठबन्धन बनाने से भारत के मध्य एशिया, विशेषकर रूस के साथ सम्बन्धों पर नकारात्मक प्रभाव आने की सम्भवना है, जो कि इसका मुख्य रक्षा भागीदार है। 

प्रश्न-2. आप उमेश हैं। आप दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाली किसी प्रदर्शनी का विवरण देते हुए अपने मित्र को इसे देखने के लिए आमंत्रित कीजिए। 

उत्तर: 

173, गांधी विहार, 

नई दिल्ली। 

दिनांक : 12.12.2016

प्रिय मित्र रंजीत, 

नमस्ते। 

तुमने कई बार दिल्ली आने को लिखा, पर आते नहीं हो। इस पत्र को पढ़ते ही तुम यहाँ के लिए चल पड़ो, क्योंकि यहाँ के प्रगति मैदान में ‘अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक प्रदर्शनी’ लगी हुई है, जो 10 दिसम्बर से 9 जनवरी, 2017 तक खुली रहेगी। 

यह प्रदर्शनी देखने योग्य है। इसमें भारत की भिन्न-भिन्न भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शन के लिए रखी गई हैं। यहाँ पाँच सौ से अधिक प्रकाशकों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। यहाँ छोटी-बड़ी, लंबी-चौड़ी, मोटी-पतली, भिन्न-भिन्न रंगों की जिल्दों वाली पुस्तकें देखते ही बनती हैं। शायद ही कोई विषय होगा, जिसकी पुस्तक यहाँ नहीं हो। लोग बड़े चाव से पुस्तकें खरीदते हैं।

यहाँ अमेरिका, इंग्लैंड, रूस और जापान के स्टॉल देखने योग्य हैं। इन्हें देखकर तुम हैरान रह जाओगे। प्रदर्शनी विविधता से पूर्ण है। हस्त शिल्प, खादी, ग्रामोद्योग की अन्य सुन्दर वस्तुएं भी उपलब्ध हैं। 

अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना। 

तुम्हारा स्नेही,

अ.ब.स. उमेश 

प्रश्न-1. ‘ऑनलाईन परीक्षाः लाभ या हानि’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : ऑनलाईन परीक्षाः लाभ या हानि 

सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं अथवा कंपनियों द्वारा इंटरनेट आधारित परीक्षा व्यवहृत कराने की प्रणाली को ऑनलाईन परीक्षा कहते हैं। इसे इलेक्ट्रानिक मूल्यांकन अथवा ई-मूल्यांकन भी कहते हैं। इसमें परीक्षार्थी कहीं भी उपलब्ध दूरस्थ नियंत्रित केंद्रों पर जाकर धन एवं परिवहन के व्यय को कम करते हुए परीक्षा देता है, जहाँ नकल की संभावनाएँ निर्मूल हो जाती है। 

ऑनलाईन परीक्षा प्रणाली की अनेक विशेषताएँ हैं जिनमें कुछ इस प्रकार है- ऑनलाईन परीक्षा के माध्यम से धोखाधड़ी को रोका जा सकता है। साथ ही परीक्षा परिणामों की निष्पक्षता को सुनिश्चित किया जा सकता है। इसके माध्यम से त्रुटिरहित मूल्यांकन, नकल समस्या का निराकरण, संस्था द्वारा परीक्षा आयोजित कराने में होने वाले धन के व्यय में कमी, दूरस्थ संस्थानों के लिए अत्यधिक उपयोगी, समय का बचत, कागज का उपयोग न किये जाने के कारण पर्यावरण हितैषी भी है। छात्रों को भी दूर स्थित संस्थानों के परीक्षा देने में होने वाले व्यय में कमी तथा त्वरित मूल्यांकन आदि।

ऑनलाईन परीक्षा में अनेक विशेषताओं के साथ कुछ खामियाँ भी मौजूद हैं, जैसे- तकनीकी विशेषज्ञों की अत्यधिक आवश्यकता, इस प्रकार के परीक्षाओं के आयोजन हेतु अवसंरचना (अधिक संख्या में कंप्यूटरों तथा वातानुकूलित भवनों) का अभाव, केवल वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं के लिए उपयोगी, आत्मनिष्ठ या व्यवहारिक ज्ञान का मूल्यांकन संभव नहीं, छात्रों को कंप्यूटर का ज्ञान होना अनिवार्य आदि। 

अत: सूचना प्रौद्योगिकी के युग में जहाँ विश्व, ग्लोबल गाँव में बदल चुका है। आज पारंपरिक रूप से परीक्षा कराना संभव नहीं हो पायेगा आवश्यकता है इसके नकारात्मक पक्षों को सुधार कर इसे युक्तिसंगत बनाने की। 

प्रश्न-2. आप रंजन शर्मा हैं। आप अपने मित्र संजय को पत्र लिखिए जिसमें व्यायाम की महत्ता का वर्णन हो। 

उत्तर : 

2/5, नया बाजार, 

रोहतक। 

दिनांक : 10.07.2016

प्रिय मित्र संजय, 

सप्रेम अभिवादन। 

तुम्हारा पत्र मिला। यह पढ़कर मन को दुःख पहुंचा कि इन दिनों तुम्हारा स्वास्थ्य अच्छा नहीं चल रहा है। मुझे विभिन्न स्रोतों से पता चला है कि आजकल तुम अपना अधिकांश समय अपने कमरे में ही व्यतीत करते हो। अनावश्यक घूमना-फिरना और समय गवाना अच्छी बात नहीं है। लेकिन हमारे जीवन में खेलों एवं व्यायाम का भी अपना महत्व है। 

मित्र! तुम्हें प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। इससे शरीर के अनेक रोग स्वयं ही दूर हो जाते हैं। प्रात:कालीन व्यायाम हमें ताजगी एवं चुस्ती से भर देता है। इससे हमारी मांसपेशियाँ अधिक सक्रियता से काम करने लगती हैं। तुम्हें यह कहावत तो याद होगी कि ‘A sound mind in a sound body’, अर्थात् स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। इस प्रकार व्यायाम बहुत ही उपयोगी है। मैं चाहता हूँ कि तुम भी प्रतिदिन एक घंटा व्यायाम पर व्यतीत करो। इससे तुम्हें एक मास में ही काफी लाभ दिखाई देगा। आशा है, तुम मेरे परामर्श पर अवश्य ध्यान दोगे। 

पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में। पानेवाले का नाम व पता 

तुम्हारा अभिन्न मित्र, अ.ब.स. 

रंजन शर्मा

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