SSC cgl previous year descriptive papers with solution pdf in hindi |Model question paper-15 to20

SSC cgl previous year descriptive papers with solution pdf in hindi

SSC cgl previous year descriptive papers with solution pdf in hindi |Model question paper-15 to20

Question list-प्रश्न-1. ‘स्मार्ट शहर या स्मार्ट गाँव’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2, आप रमेश कुमार हैं। आपका एक मित्र ‘रवि’ बीमारी के कारण परीक्षा न दे सका। उस मित्र को एक प्रेरणा भरा पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘समान नागरिक संहिता: वर्तमान एवं भविष्य’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए

प्रश्न-2. पुस्तक विक्रेता को कुछ पुस्तकें मँगाने के लिए पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1, ‘चीनी वस्तुओं का भारत द्वारा बहिष्कार’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2, आप उमेश कुमार हैं। आप नगर निगम अधिकारी को पत्र लिखिए जिसमें अपने क्षेत्र की सफाई की अव्यवस्था का वर्णन तथा उसे सुधारने की प्रार्थना की गयी हो। 

प्रश्न-1. ‘परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और भारत : एक कठिन राह’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2, आप कुमार आनंद राज हैं। आप राष्ट्रपति द्वारा “बीर बालक पुरस्कार’ से सम्मानित अपने छोटे भाई को बधाई पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘इंटरनेट और निजता का अधिकार व सुरक्षा’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।

प्रश्न-2, यात्रा के दौरान रेल कर्मचारी के अभद्र व्यवहार की शिकायत करते हुए रेल-अधिकारी को एक पत्र लिखिए। 

प्रश्न-1. ‘वन बेल्ट वन रोड : भारत के लिए सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

प्रश्न-2. आप सुशील वधवा हैं। आप अपने मित्र संतोष को उसके पिता के देहांत पर सांत्वना देते हुए एक पत्र लिखिए।

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Model question paper-15

प्रश्न-1. ‘स्मार्ट शहर या स्मार्ट गाँव’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए।  

उत्तर : स्मार्ट शहर या स्मार्ट गाँव 

वर्तमान समय में भारतीय भू-पटल पर स्मार्ट शहर एवं स्मार्ट गाँव की अवधारणा बहुत व्यापक स्तर पर प्रचलित हो रही है। अत: भारतीय जनमानस में इसको जानने की कौतुहलता बनी है कि स्मार्ट शहर या स्मार्ट गाँव क्या है? क्या यह भारतीय समाज के लिए आवश्यक है? भारतीय जनमानस में इसकी क्या उपयोगिता है आदि। इन पूरी प्रक्रिया को जानने के लिए सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि स्मार्ट गाँव या स्मार्ट शहर क्या हैं? 

स्थानीय विकास को सक्षम करने और प्रौद्योगिकी की मदद से नागरिकों के लिए बेहतर परिणामों के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने तथा आर्थिक विकास को गति देने हेतु भारत सरकार द्वारा स्मार्ट शहर मिशन के अन्तर्गत स्मार्ट शहर में पर्याप्त जलापूर्ति, निश्चित विद्युत आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता, कुशल शहरी गतिशीलता, यातायात की चतुराई भरा प्रबंधन, जलापूर्ति प्रबंधन हेतु स्मार्ट मीटर, सुशासन, ई-गवर्नेस, नागरिक भागीदारी, टीकाऊ पर्यावरण, पार्को की व्यवस्था, सी.सी.टी.वी. कैमरों के माध्यम से अपराधियों पर निगरानी, नागरिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा विशेषकर महिला, बच्चों एवं बुजुर्गों की स्वास्थ्य एवं शिक्षा आदि का होना आवश्यक है। 

स्मार्ट शहर के अंतर्गत अलग-अलग व्यवसाय, तथा कौशल एवं जातीय तथा सामाजिक संरचना वाले लोग एक साथ रहते हैं। स्मार्ट शहर में रहने वाले लोग बुद्धिजीवी होते हैं तथा वे एक दूसरे के सहयोगी होते हैं एवं एक-दूसरे से जुड़कर जीवन दर्शन बदल देते हैं। 

भारत के आर्थिक समृद्धि में शहरों की महती भूमिका है। भारत का दो-तीहाई जीडीपी इन्हीं क्षेत्रो से आता है। स्मार्ट शहर आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है तथा अपने नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। 

स्मार्ट शहर का विकास भौतिक, संस्थागत, सामाजिक एवं आर्थिक बुनियादी ढाँचे को एकीकृत करने से होता है। स्मार्ट शहर बनाने के लिए स्मार्ट मिशन के साथ अनेक केन्द्रीय योजनाएँ, जैसे अमृत, हृदय, डिजिटल भारत, कौशल विकास आदि चल रही हैं। 

स्मार्ट शहरों से बेरोजगारी दूर करने में सहायता मिलेगी साथ ही औद्योगिक मांग में बढ़ोत्तरी, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश व सतत् समावेशी विकास होगा। 

शहरों की ओर ग्रामीण पलायन रोकने हेतु केन्द्र सरकार ने ‘स्मार्ट गाँव’ की संकल्पना प्रदान की, जो ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। ग्रामीण विकास हमारे राष्ट्रीय विकास की ध री है। ग्रामीण विकास हेतु बहुत सी योजनाएँ एवं कार्यक्रम संचालित किये गये किन्तु आपेक्षिक परिणाम नहीं मिला। इसी बीच केन्द्र सरकार ने गाँवों को स्मार्ट बनाने हेतु ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीबन मिशन’ की घोषणा की है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण विकास की दिशा में एक अहम पहल किया गया है। इस योजना के अंतर्गत पंचायत स्तर के योजनाओं के पैसे का उपयोग किया जायेगा। यह योजना पहले से चली आ रही ‘पुरा’  (प्रोविजन फार अर्बन अमेनिटीज इन रूलर एरिया) का स्थान लेगी। साथ ही ग्रामीण विकास हेतु ‘आदर्श ग्राम योजना’ जो सांसदों द्वारा गोद लिये गये गाँव का विकास करेंगे। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क-संपर्क और तमाम आधुनिक विकास के कार्य शामिल हैं। 

ये योजनाएँ ग्रामीण विकास को समर्पित बड़ी पहल हैं जिसका लाभ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से देश के समग्न अर्थव्यवस्था लाभान्वित होगा। स्मार्ट गाँव के अन्तर्गत सौर उर्जा, स्ट्रीट लाइट, वाई-फाई, ई-लाइब्लेरी, खेल मैदान, कचरा प्रबंधन, चारागाहों का विकास, अस्पताल, विद्यालय आदि होंगे। 

स्मार्ट गाँव बनने से सतत् ग्रामीण विकास होगा। गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता पर्यावरणीय सुरक्षा का समाधान होगा। नक्सलवाद जैसी समस्या पर रोक लगाने में मदद करेगा। गाँव का आर्थिक विकास होगा जिससे देश समृद्ध होगा। 

अन्ततः कहा जा सकता है कि वर्तमान समय में स्मार्ट गाँव एवं स्मार्ट शहर दोनों की प्रासंगिकता यथावत है। यह संकल्पना गाँव एवं शहरों की बीच की दूरियों को कम करेगा, व्यवहारिक समस्याओं को दूर करने में मदद करेगा। 

प्रश्न-2, आप रमेश कुमार हैं। आपका एक मित्र ‘रवि’ बीमारी के कारण परीक्षा न दे सका। उस मित्र को एक प्रेरणा भरा पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

परीक्षा भवन विले पार्ले, मुंबई 

10 जून, 2016

प्रिय मित्र रवि. 

सप्रेम अभिवादन। 

मुझे यह जानकार अत्यंत दुख हुआ कि तुम बीमार होने के कारण बोर्ड की परीक्षा में शामिल न हो सके। इससे तुम्हारा एक वर्ष नष्ट हो गया। 

मित्र! इसे ईश्वर की इच्छा मानकर, स्वीकार करो। शायद इसमें भी कोई भलाई हो। तुम पिछले तीन महीने बीमार रहे थे, अतः परीक्षा की तैयारी भी पूरी नहीं हो पाई होगी। अब तुम पूरी तरह स्वस्थ होकर आगामी वर्ष की तैयारी में जी-जान से जुट जाना। यदि तुम आगामी परीक्षा में अधिकतम अंक ले पाओ, तब तुम्हें परीक्षा न दे पाने का दुख न होगा। कम अंक पाकर उत्तीर्ण होने से तो एक वर्ष परीक्षा न देना अधिक अच्छा है। तुम्हें तो पता ही है कि आजकल अच्छे महाविद्यालयों में नामांकन के लिए अच्छे अंक लाना कितना आवश्यक है। 

रवि! तुम किसी प्रकार की चिंता न करना। मैं अपनी परीक्षा के प्रश्न-पत्र एवं अन्य उपयोगी अध्ययन सामग्री तुम्हें भिजवा दूंगा। 

मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह तुम्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। पाने वाले का नाम व पता 

तुम्हारा प्रिय मित्र, अ.ब.स. 

रमेश कुमार 

प्रश्न-1. ‘समान नागरिक संहिता: वर्तमान एवं भविष्य’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए

उत्तर : समान नागरिक संहिता: वर्तमान एवं भविष्य 

लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं में विधि के समक्ष समानता एक मूलभूत आदर्श है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान में विधि के समक्ष समानता को नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया है। समान नागरिक संहिता को इसी रूप में देखा जा सकता है। जिस प्रकार देश में समान अपराध संहिता का प्रावधान किया गया है। उसी प्रकार समान नागरिक संहिता भी संविधान सम्मत कही जाती है। 

ध्यातव्य है कि भारत में नागरिकों के लिए दीवानी मामलों में एक समानता नहीं है। मुस्लिम अल्पसंख्यको के लिए देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार ईसाई और पारसी अल्पसंख्यकों के लिए भी अलग-अलग दीवानी कानून हैं। हम जानते हैं कि संविधान के 44वें अनुच्छेद में देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता के संदर्भ में विचार विमर्श को प्रोत्साहन दिया गया है। जिसके संबंध में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। 

जहाँ एक पक्ष समान नागरिक संहिता को अल्पसंख्यक समुदाय की | महिलाओं के साथ न्याय के रूप में प्रस्तुत कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर इसे अनुच्छेद-25 तथा 26 के द्वारा अल्पसंख्यकों को प्राप्त धार्मिक संरक्षण पर कुठाराघात के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल ही में तीन तलाक के मुद्दे पर दिए गये एतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता के समर्थन का संकेत दिया है। 

समान नागरिक संहिता पर विचार करते समय हमें कुछ प्रमुख बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए इस प्रकार के व्यापक सुधारों के लिए आवश्यक है कि ऐसे प्रयास अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को कतई नुकसान नहीं पहुँचाएँ। ये सुधार मात्र समाज में महिलाओं के सशक्तीकरण से प्रेरित हों। एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार के सुधारों की पहल समुदाय विशेष के द्वारा की जाए तो संभावित प्रतिक्रियाओं को टाला जा सकेगा। 

अत: हमें देश के बुद्धिजीवी वर्ग से यह अपेक्षा करनी चाहिए की वे इस प्रकार के सुधारों के लिए देश में अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण में सहयोग करें। हमें अतीत में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं जहाँ सामाजिक सुधार की पहल कानून के माध्यम से करने का प्रयास किया गया परंतु जनजाग्रति के अभाव में यह अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। अत: समाज में इन सुधारों के पक्ष में समर्थन जुटाने की आवश्यकता है तभी विधिक प्रयास सार्थक परिणाम दे सकेंगे। 

प्रश्न-2. पुस्तक विक्रेता को कुछ पुस्तकें मँगाने के लिए पत्र लिखिए। 

उत्तर: सेवा में, 

व्यवस्थापक, किरण प्रकाशन प्रा. लि.

RU-67, पीतमपुरा,

दिल्ली -110034 

महोदय, 

मुझे निम्नलिखित पुस्तकों की आवश्यकता है। आपसे अनुरोध है कि ये पुस्तकें शीघ्र वी.पी.पी. से भेज दें। मैंने एक हजार रुपये की अग्निम धन-राशि भी मनीऑर्डर द्वारा दिनांक 05.07.2016 को भेज चुका हूँ। आशा है कि आपको मिल गई होगी। कृपया यह ध्यान रखें कि सभी पुस्तकें नए संस्करण की हों, तथा कटी-फटी न हों। उनकी पैकिंग सही हो तथा उन पर उचित कमीशन भी काटा गया हो।

धन्यवाद 

पुस्तकों की सूची:

1. किरण कम्प्यूटर ज्ञान-10 प्रतियाँ

2.किरण बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतता- 12 प्रतियाँ

3. किरण Common Errors in English- 12 प्रतियाँ (Anglo-Hindi)

4. किरण One Liner सामान्य ज्ञान –12 प्रतियाँ

5. किरण वस्तुनिष्ठ सामान्य हिन्दी –12 प्रतियाँ

पुस्तकें निम्नलिखित पते पर भेजें। 

क.ख.ग.                                        भवदीय,

22, मॉडल टाउन                           अ.ब.स.                      

 दिल्ली-110009                            दिनांक : 08.07.2016                              

 

प्रश्न-1, ‘चीनी वस्तुओं का भारत द्वारा बहिष्कार’ विषय पर लगभग 200-250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : चीनी वस्तुओं का भारत द्वारा बहिष्कार 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मई 2020 के अपने राष्ट्र के नाम सम्बोधन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की घोषणा की। इसने चीन में विनिर्मित वस्तुओं (मेड-इन-चाइना) के बहिष्कार के पक्ष में आन्दोलन का काम किया। 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बीच इस आन्दोलन ने एक नई दिशा प्राप्त की, जो चीन से आयात पर प्रतिबन्ध के रूप में सामने आया। 

चीन के साथ भारत का व्यापार सन्तुलन नकारात्मक है, क्योंकि भारत निर्यात की अपेक्षा आयात अधिक करता है। 2018-19 में चीन को भारतीय निर्यात 1.17 लाख करोड़ रुपये का, जबकि चीन से भारतीय आयात 4.92 लाख करोड़ रुपये का हुआ था। इससे संकेत मिलता है कि चीन की अपेक्षा भारत व्यापार के सम्बन्ध में चीन पर अधिक निर्भर है। 

सम्भवत: बड़ी चुनौती यह है कि अभी तक स्थानीय स्तर पर चीनी वस्तुओं के उचित विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। अखिल भारतीय व्यापार संघ उपर्युक्त आन्दोलन का मुख्य समर्थक है। हालांकि इसके राष्ट्रीय महासचिव को उम्मीद है कि 2021 के अन्त तक मात्र 20% आयात को भारत कम कर पाएगा। 

भारत को चीनी आयात को धीरे-धीरे कम करने योग्य बनाने के लिए, सरकार को विनिर्माण उद्योग को समर्थन करना होगा, उन्हें पूँजी उपलब्ध कराना होगा, ताकि वे कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता युक्त वस्तु उपलब्ध करा सकें। इसलिए बाजार में भी कई प्रकार की विभेदकारी तत्वों को शामिल करने की आवश्यकता है, जिससे स्थानीय वस्तुओं को प्रोत्साहन मिले। इसके बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगा, कि चीन भारत-चीन के व्यापार में बहुत अधिक नुकसान उठा पाएगा, क्योंकि अभी भी अनेक भारतीय बाजार हैं, जो चीन से आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं और वे बुरी तरह से प्रभावित होंगे। 

प्रश्न-2, आप उमेश कुमार हैं। आप नगर निगम अधिकारी को पत्र लिखिए जिसमें अपने क्षेत्र की सफाई की अव्यवस्था का वर्णन तथा उसे सुधारने की प्रार्थना की गयी हो। 

उत्तर: 

सेवा में, 

स्वास्थ्य अधिकारी, दिल्ली नगर निगम (पश्चिमी क्षेत्र)

राजौरी गार्डन, 

नई दिल्ली-110027

विषय : क्षेत्र की सफाई हेतु प्रार्थना पत्र। 

मान्यवर, 

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान सुभाष नगर, ब्लॉक 13 की सड़कों तथा उनके आस-पास गंदगी के ढेर और उससे उत्पन्न परेशानियों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। 

इस क्षेत्र में पिछले कई महीनों से जहाँ-तहाँ गंदगी के ढेर पड़े हुए हैं जिनसे न केवल दुर्गंध आती रहती है अपितु इनके कारण मक्खी, मच्छर तथा कीड़े-मकोड़े भी तेजी से पनप रहे हैं। इसके कारण हैजा, चेचक, मलेरिया, पेचिश आदि रोग फैलने की संभावना बढ़ती जा रही है। हमने अपनी ओर से ड्यूटी पर तैनात सफाई कर्मचारियों से अनेक बार प्रार्थना की तथा कई बार नगर निगम के अधिकारियों एवं सफाई निरीक्षकों तक अपनी बात पहुँचाई। लेकिन हमें अत्यंत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस विषय में कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

अत: आपसे अनुरोध है कि आप इस क्षेत्र में तैनात सफाई कर्मचारियों तथा स्वास्थ्य निरीक्षकों को उचित आदेश दें। आपसे विनती है कि आप इस क्षेत्र का स्वयं निरीक्षण करें जिससे कि आपको वस्तु-स्थिति का पता लग सके। 

धन्यवाद सहित। 

भवदीय,

उमेश कुमार 

सचिव, 

मोहल्ला सुधार समिति, 

सुभाष नगर, नई दिल्ली

परीक्षा भवन 

दिनांक: 6 जून, 2016 

प्रश्न-1. ‘परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और भारत : एक कठिन राह’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और भारत : एक कठिन राह 

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह 48 देशों का एक समूह है जो परमाणु उपकरण, सामग्री तथा प्रौद्योगिकी के निर्यात पर रोक लगाता है, जिसका प्रयोग परमाणु हथियार बनाने में होता है। प्रश्न है कि एनएसजी की आवश्यकता क्यों पड़ी? वर्तमान समय में सभी देश अपने को शक्तिशाली बनाने हेतु परमाणु हथियारों की होड़ लगे हैं, जो युद्ध के समय भयंकर परिणाम दायक है। एनएसजी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है ऐसे देशों को परमाणु हथियार सम्मपन्नता से रोकना है। यह समूह उन देशों को ही परमाणु सामग्री एवं प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराता है, जो जनकल्याण एवं उर्जापूर्ति हेतु प्रयोग करते हैं। उसके लिए उन देशों को एनटीपी अर्थात् परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करना पड़ता है। 

एनएसजी की स्थापना 1974 में भारत के प्रथम परमाणु परीक्षण के प्रतिक्रिया स्वरूप किया गया था। 1968 के परमाणु अप्रसार संधि के तहत यह निर्णय लिया गया कि 1 जनवरी, 1967 से पूर्व जो राष्ट्र परमाणु सम्मपन्न है, वे इसके सदस्य हो सकते हैं। स्वभाविक है कि भारत इस समूह का हिस्सा नहीं हो सकता क्योंकि तब तक भारत परमाणु सम्पन्न राष्ट्र नहीं था। भारत एनटीपी पर हस्ताक्षर नहीं करता है तथा इसे अन्यायपूर्ण बताकर विरोध करता है। इसके अनुसार महाशक्तियों (अमेरिका, फ्रांस, रूस आदि) ने पहले परमाणु हथियार का जाखिरा तैयार कर रखा है तथा भारत जैसे उभरते देशों पर निशस्त्रीकरण का आइ लेकर उसे संधि के रूप में प्रतिबंध थोपने का अनुचित एवं कुटिल प्रयास कर रहे हैं। 

भारत 2008 से ही एनएसजी में सदस्यता पाने के लिए प्रयासरत है, किन्तु आस्ट्रेलिया, चीन, मेक्सिको, स्विटजरलैंड आदि देशों ने विरोध किया। इनके अनुसार भारत को यदि सदस्यता ग्रहण करना है तो एनपीटी पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। भारत के लिए एनपीटी तो एक बहाना मात्र है। भारत का विरोध करने वाले देशों में ज्यादातर विरोध का कारण एनपीटी हस्ताक्षर कम, निजी कूटनीति अधिक है। 

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल होने हेतु भारत के राह में आने वाली कठिनायी निम्नवत है .

एनएसजी की सदस्यता हेतु एनपीटी पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य किन्तु भारत विरोध करता है तथा इसे भेदभाव पूर्ण मानता है। 

चीन एवं पाकिस्तान का प्रत्यक्षतः विरोध, कुछ देशों ने एनएसजी में भारत की सदस्यता हेतु अप्रत्यक्षत: विरोध जैसे- आयरलैण्ड, न्यूजीलैण्ड, स्विटजरलैण्ड, तुकी आदि।

एनएसजी की सदस्यता हेतु इसके 48 सदस्यों अर्थात् सम्पूर्ण सदस्यों की सहमति अनिवार्य है जो वर्तमान परिस्थितियों में सम्भव नहीं है।

संकीर्ण हितों के कारण देश के विपक्षी राजनीतिक दलों समेत एक विशेष किस्म के वैचारिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त बुद्धिजीवी वर्ग का विरोध। अब प्रश्न उठता है कि भारत को एनएसजी की सदस्यता क्यों जरूरी है? इस के प्रमुख कारण इस प्रकार है एनएसजी की सदस्यता से भारत को अपनी उर्जा आवश्यकताओं को पुरा करने में सहायता मिलेगा।

एनएसजी की सदस्यता से भारत को परमाणु तकनीकी एवं यूरेनियम बिना किसी समझौते से मिल जायेगा। परमाणु संयंत्रों से निकले कचरे का निस्तारण करने में भी सदस्य राष्ट्रों द्वारा सहायता मिलेगी। भारत 2023 तक 40 प्रतिशत उर्जा जरूरतों को अक्षय उर्जा से प्राप्ति का लक्ष्य रखा है जिसकों सहायता मिलेगी।

फ्रांसीसी कंपनी, जैतापुर , महाराष्ट्र में परमाणु बिजली संयंत्र लगा रही है। अमेरिकी कंपनी गुजरात एवं आंध्र प्रदेश में संयंत्र लगाने की तैयारी कर रहीं हैं। 

इन सब हालातों के होते हुए भी वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती आर्थिक, सामरिक एवं राजनैतिक शक्तियों के कारण भारत को एनएसजी की सदस्यता से बहुत दिनों तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसी का रूप वर्ष 2006 में भारत-अमेरिका 123 सिविल परमाणु समझौता, भारत-फ्रांस असैन्य परमाणु समझौता, आस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु समझौता एवं हाल ही में जापान,भारत असैन्य परमाणु समझौता और इसी प्रकार के अन्य दशों के साथ समझौतों से भारत के एनएसजी की सदस्यता को मजबूती मिलती है। 

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत को अपने लक्ष्य के प्रति निरन्तर प्रयासरत रहना होगा और मजबूत कुटनीति पहल करते हुए विरोधियों को अपने पक्ष में करने की आवश्यकता है। 

प्रश्न-2, आप कुमार आनंद राज हैं। आप राष्ट्रपति द्वारा “बीर बालक पुरस्कार’ से सम्मानित अपने छोटे भाई को बधाई पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

(परीक्षा भवन) 

नई दिल्ली। 

10.06.2016

प्रिय समीर, 

शुभाशीर्वाद। 

आज के समाचार-पत्र में यह समाचार पढ़कर हृदय असीम प्रसन्नता से भर गया कि तुम्हें राष्ट्रपति द्वारा ‘वीर बालक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। मैं तुम्हें इस पुरस्कार प्राप्ति पर हार्दिक बधाई देता हूँ।

तुमने यह पुरस्कार पाकर हमारे परिवार की गौरवशाली परंपरा को चार चाँद लगाए हैं। इससे हम सबका मस्तक ऊँचा हुआ है। तुमने जिस बहादुरी का प्रदर्शन करके अपने साथियों की जान बचाई थी, वह घटना निश्चय ही अदम्य वीरता की परिचायक है। मैं आशा करता हूँ कि तुम भविष्य में इससे भी महान् कार्य करके हमें गौरवान्वित करते रहोगे। 

एक बार पुनः बधाई एवं शुभाशीष।

पानेवाले का नाम व पता                 

तुम्हारा शुभचिंतक, 

कुमार आनंद राज 

अ.ब. स. 

प्रश्न-1. ‘इंटरनेट और निजता का अधिकार व सुरक्षा’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : इंटरनेट और निजता का अधिकार व सुरक्षा 

इंटरनेट वैश्विक कंप्यूटरों का संजाल है जो विविध प्रकार के सूचना एवं संचार की सुविधा उपलब्ध कराता है, जहाँ अंतसंबंधित संजाल एक मानक संचार संहिता के तहत जुड़ा होता है। सामान्य शब्दों में वैश्विक सूचना संचार व्यवस्था में इंटरनेट सूचना राजमार्ग है, जिसके माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। उसने मानव जीवन को सहज एवं सुविधायुक्त बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका पहुँच तथा विस्तार वर्तमान में इतना व्यापक हो चुका है कि संपूर्ण विश्व एक गाँव के रूप में सिमट गया है। 

सूचनाओं का आदान-प्रदान हेतु अविष्कृत इंटरनेट आज ज्ञान का भण्डार बन चुका है मानवीय संस्कृति के प्रत्येक पहलु को इसने गति तथा उत्कृष्टता प्रदान की है। राजनीतिक क्षेत्र में इसने जनप्रतिनिधियों तथा जनता के मध्य संपर्क की दूरियों को इसने कम किया है जिससे समाज की मनोवृति जानने तथा उसके अनुरूप नीतियों के निर्माण में आसानी होती है। शासन में इंटरनेट के प्रयोग शासन, गुड-गवर्नेस बनने की दिशा में अग्रसर है। इसी प्रकार प्रशासन, आतरिक एवं बाह्य सुरक्षा, मिडिया, मनोरंजन, शिक्षा, बैंकिंग, परिवहन, व्यापार, पर्यटन, कृषि, चिकित्सा आदि के क्षेत्रों में भी इंटरनेट ने दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है। सरकारी सूचनाओं को जहाँ केवल प्रभावशाली व्यक्ति ही ले पाते थे, आज वह माउस के एक किल्क पर सर्वजन के लिए सुलभ है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तो इसने कई देशों की सरकारें बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

किसी व्यक्ति का वह अधिकार जिसके द्वारा वह अपनी निजी सूचना किसी अन्य व्यक्ति अथवा समाज से सुरक्षित अथवा गोपनीय रख सकता है, “निजता का अधिकार” कहलाता है। प्रश्न उठता है कि जहाँ इंटरनेट का पहुँच व उपादेयता समाज में इतना व्यापक हो वहाँ ” व्यक्ति की निजता” क्या सुरक्षित रह सकती है? यह सत्य है कि जितनी असानी से वहाँ से सूचना प्राप्त की जाती है, उतनी ही आसानी से स्वयं के बारे में सूचनाएँ सार्वजनिक होती है। इसी कारण व्यक्ति को बैंकिंग फ्रॉड, ई-मेल हैक, गोपनीय दस्तावेज की चोरी आदि जैसी घटनाएँ वर्तमान में घट रही है। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकीलिक्स मामला, पनामा पेपर्स प्रकरण आदि उससे व्यक्ति खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। अनचाहे, अश्लिल संदेश, आपत्तिजनक पोस्ट तथा टिप्पणी इत्यादि की समस्या इसी तकनीक की देन है। साइबर क्राइम तथा अपराध के नये-नये तरीकों को भी इसने इजाद किये हैं। उग्रवादियों तथा आतंकवादियों को भी इसने अपराध के नये तरीके प्रदान किये हैं। जिससे उनका पीछा करना बहुत मुश्किल हो गया है। हाल के आतंकी घटनाओं में आतंकियों ने इसे ही संचार एवं संपर्क का माध्यम बनाया है।

हालांकि विसंगतियाँ एवं आलोचनाएँ अपनी जगह पर है, किन्तु इंटरनेट के फायदे अपनी जगह पर है। इसके सकारात्मक पहलू इसके नकारात्मक पहलू की अपेक्षा अल्यधिक महत्त्व वाले हैं। आज समस्त दुनियाँ इंटरनेट-मय हो चुका है। इसका प्रकाश दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं अत: आवश्यकता है इसके कमियों को तकनीकी, वैधानिक एवं सामाजिक उपायों द्वारा सुधार कर इसे और उपयोगी बनाया जाय। 

प्रश्न-2, यात्रा के दौरान रेल कर्मचारी के अभद्र व्यवहार की शिकायत करते हुए रेल-अधिकारी को एक पत्र लिखिए। 

उत्तर:

सेवा में, 

मुख्य प्रबंधक 

उत्तर रेलवे, चंडीगढ़

विषय : रेल-कर्मचारी के अभद्र व्यवहार की शिकायत

महोदय, 

मैं आपका ध्यान राजधानी एक्सप्रेस में टिकट चेकर (क्र.सं. 5608) के अभद्र व्यवहार की ओर दिलाना चाहता हूँ। 

दिनांक 15.07.2016 को रात्रि 8 बजे नई दिल्ली स्टेशन से मैं इस गाड़ी में बैठा। मेरी सीट आरक्षित थी। थोड़ी देर में चेकर एक अन्य यात्री को लेकर आया और उसे मेरी सीट पर बिठाने लगा। मैंने अपना आरक्षण दिखाया तो वह अभद्र व्यवहार करने पर उतर आया। टिकट चेकर ने उस यात्री से सीट दिलाने के बदले पचास रुपये रिश्वत ली थी। मेरी सारी यात्रा कष्टपूर्ण रही। 

आशा है, आप इस टिकट चेकर के विरुद्ध उचित कार्यवाही करेंगे, ताकि अन्य यात्रियों को इस प्रकार की स्थिति का सामना न करना पड़े। 

धन्यवाद सहित। 

भवदीय, 

अ.ब.स. 

कोठी नं. 1218 

सेक्टर-7, चंडीगढ़।

परीक्षा भवन

दिनांक:  20.07.2016 

प्रश्न-1. ‘वन बेल्ट वन रोड : भारत के लिए सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष’ विषय पर लगभग 200- 250 शब्दों में एक निबंध लिखिए। 

उत्तर : वन बेल्ट वन रोड : भारत के लिए सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष 

भारत ने चीन द्वारा प्रस्तुत ‘वन बेल्ट वन रोड योजना’ का बहिष्कार किया है, क्योंकि इसके द्वारा बन्दरगाहों पर निगरानी पोस्ट एवं नौसैन्य अड्डों के माध्यम से भारत को घेरने का प्रयास किया जा सकता है। चीन भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है तथा भारत अपने हितों की सुरक्षा की दृष्टि से इस परियोजना से स्वयं को अलग रखा है। 

वन बेल्ट वन रोड (ओबोर) तथा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपेक), जो कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजर रहा है, के कारण अपनी सम्प्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए भारत-चीन का विरोध करता रहा है। 

भारत ने ओबोर सम्मेलन का बहिष्कार करके सही किया है, क्योंकि इसका मुख्य भाग (सीपेक) अवैध है। इसका कारण है कि यह पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से अधिकृत कश्मीर से गुजरता है। साथ ही यहाँ के लोगों पर पाकिस्तान द्वारा निरंकुश शासन किया जाता है। भारत को ओबोर के विरोध में बोलना लाभदायक है। 

चीन ओबोर को 500 बिलियन डॉलर के वैश्विक परियोजना के रूप में प्रस्तुत कर रहा है (124 बिलियन डॉलर के प्रारम्भिक कोष के साथ), जो एशिया, अफ्रीका एवं यूरोप के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभान्वित करेगा। चीन ने भारत के पड़ोसी देशों में बड़े-बड़े संरचनात्मक निवेशों को प्रस्तावित किया है। पाकिस्तान में 57 बिलियन अमेरिकी डॉलर, बांग्लादेश में 25 बिलियन तथा श्रीलंका में 1.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। चीन ने भारत पर ओबोर में शामिल होने के लिए दबाव बनाया है, जबकि वह जानता है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ओबोर भारत की सम्प्रभुता को आघात पहुँचाता है, बलूचिस्तान और पी.ओ.के. में बढ़ते आईएसआईएस के आतंकवादी चुनौतियों द्वारा इसे और बढ़ाया जाएगा, ताकि भारतीय क्षेत्र में अस्थिरता उत्पन्न हो। 

नए शीत युद्ध के दौरे में चीनी सरकार द्वारा ओबोर के माध्यम से भूराजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश को जा रही है। इस परियोजना से भारत जैसी आर्थिक एवं सामाजिक रूप से प्रगतिशील तथा विकासशील देशों को सिर्फ हानि है, न कि कोई लाभ |

हालाकि कुछ विशेषज्ञों का विचार है कि इससे बाहर रहकर भारत को भविष्य के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में काफी नुकसान हो सकता है। लेकिन इस परियोजना के तहत जिस तरह से साझीदारों को ऋण प्रदान किया जा रहा है, उससे देश कर्ज जाल में फंसते जा रहे हैं। साथ ही किसी भी हाल में सम्प्रभुता से समझौता करना भी उचित नहीं है। 

प्रश्न-2. आप सुशील वधवा हैं। आप अपने मित्र संतोष को उसके पिता के देहांत पर सांत्वना देते हुए एक पत्र लिखिए। 

उत्तर: 

1474, गंगा अपार्टमेंट्स, सेक्टर-29, नोएडा-201301 

12 जुलाई, 2016 

प्रिय संतोष, 

तुम्हारे पूजनीय पिताजी के अचानक और असामयिक निधन के समाचार को सुनकर गहरा आघात लगा। पिछले महीने ही तो मैं उनसे मिला था। उस समय वह पूरी तरह स्वस्थ और प्रसन्न थे। घंटों उन्होंने मुझसे बातें की थीं। इस दुखद समाचार पर तो अभी भी विश्वास नहीं हो पा रहा। 

प्रिय मित्र! परमात्मा की लीला अज्ञात है। उसके निर्णय में कोई बाधा नहीं पहुँचा सकता। हम सब तो मात्र कठपुतलियाँ हैं। हमारे अधिकार में तो केवल निष्काम भाव से अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहना है। इस समय तुम्हारी माताजी के दुःख की मैं कल्पना कर सकता हूँ। तुम अपने को सँभालना और माताजी को भी। ईश्वर पर विश्वास रखो कि वह करुणा-सागर ही हमारे कष्टों का निवारण करेगा। । ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में तुम्हें और तुम्हारे परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने का साहस तथा धैर्य प्रदान करें तथा दिवंगत आत्मा को सद्गति दें।

पाने वाले का नाम व पता 

अ. ब. स.

तुम्हारे दु:ख में सहभागी,  

सुशील वधवा 

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