Short Motivational Story in Hindi- संतों की वाणी 

Short Motivational Story in Hindi- संतों की वाणी 

Short Motivational Story in Hindi- संतों की वाणी 

ख्वाजा हाफिज शीराजी ईरान के एक प्रसिद्ध संत हुए हैं। एक बार लो से उन्होंने यह मिसरा कहा–’बपै सज्जादः रंगीकुन पीरे मुगां गोयद।’ अर्थात अगर मुर्शिद हुक्म दे तो शराब से मुसल्ला रंग ले। इसे सुनते ही लोगों को गुस्सा आया कि ख्वाजा ने मुसल्ला (नमाज पढ़ते समय बैठने की चटाई या वस्त्रको शराब से रंगने की बात करके धर्म का अनादर किया है। उन्होंने काजी से इस बात की शिकायत कर दी। काजी ने जब उन्हें बुलाकर जवाब तलब किया तो वे बोले, “जो कह दिया सो कह दिया। उसे अब वापस नहीं ले सकता।” 

“मगर इसका मतलब तो बताइए।” काजी ने कहा। 

“इसका मतलब मैं नहीं जानता। सामने की पहाड़ी पर एक फकीर बैठा है, वही इसका मतलब बताएगा।” संत ने जवाब दिया। 

काजी जब उस फकीर के पास गया तो उसने काजी को एक अशर्फी देकर पास ही रहने वाली एक वेश्या से मिलने को कहा। काजी हैरान रह गया कि एक संत तो उससे शराब में मुसल्ला रंगने को कहता है, दूसरा उसे वेश्या के पास जाने को कहता है। जब वह उस वेश्या के पास पहुंचा तो वह कहीं बाहर गई हुई थी। सामने एक युवा लड़की खड़ी थी।

जब वह उसके पास गया तो वह रोने लगी। पूछने पर उसने बताया कि वह किस्मत की मारी है और भागकर यहां आ गई है। उसे अब कुकर्म करने को विवश किया जा रहा है। ज्यादा पूछताछ करने पर और उसकी गर्दन पर निशान देखकर काजी मारे खुशी के झूम उठा, क्योंकि वह लड़की उसकी खोई हुई बेटी ही थी। उसे कोई बचपन में ही भगा ले गया था। काजी समझ गया कि ख्वाजा ने बेटी से मिलवाने के लिए ही उसे वेश्या के पास भेजा था। 

वह बेटी को लेकर ख्वाजा के पास आया और उनसे अगला मिसरा कहने की विनती की। तब ख्वाजा ने यह मिसरा कहा–’के सालिक बेखबर न बवदज राहे रस्मे मंजिलहा।’ अर्थात मार्गदर्शक मंजिल की राह के भेद और रीति से अनजान नहीं होते। इसलिए वे जो भी कहते हैं, अनुचित नहीं होता।

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