शिक्षाप्रद कहानियाँ- रोहित और मोबाइल

शिक्षाप्रद कहानियाँ- रोहित और मोबाइल

रोहित और मोबाइल

शिक्षाप्रद कहानियाँ– रोहित अपने माता पिता के साथ मुंबई में रहता था। रोहित के पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और रोहित की मां बैंक में मैनेजर थी।रोहित अपने माता पिता का इकलौता पुत्र था। इसलिए वह माता पिता दोनों का लाडला था। रोहित जिस भी चीज की मांग करता वह उसे बिना किसी देर किए समय पर मिल जाती थी,जैसे स्मार्ट फोन, वीडियो गेम्स, मोटरसाइकिल आदि।

 रोहित के पिता सुबह 9 बजे अपने ऑफिस के लिए निकलते तथा उसकी मम्मी लगभग 10 बजे।रोहित 12 बजे अपने स्कूल से वापिस लौटता था। स्कूल के लौटने के बाद घर आकर अपना बैग किसी फालतू वस्तु जैसा फेंककर अपने मोबाइल में लग जाता था । वह घंटों घंटों तक मोबाइल में गेम्स खेलता रहता और सोशल मीडिया पर ज्यादातर समय बिताता था। माता पिता के अत्यधिक लाड प्यार ने उसे लापरवाह बना दिया था। इन सबके बीच वह इस बात से बिल्कुल अनभिज्ञ था कि वह अपने सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। 

समय बीतता जा रहा था और रोहित गेम्स तथा सोशल मीडिया की जकड़ में जकड़ता ही जा रहा था। हद तो तब हो गई जब रोहित अपनी त्रिमासिक परीक्षाओं में फेल हो गया और उसके माता पिता को स्कूल बुलाया गया। जब प्रिंसिपल ने उन्हें यह सब बताया तो उन्होंने रोहित को डांटने की बजाए कहा कि “कोई बात नहीं बच्चा है अगली बार पास हो जाएगा”!माता पिता के समर्थन से रोहित की पढ़ाई के प्रति लापरवाही और बढ़ती जा रही थी, अब तो वह किताब को छूता तक नहीं था। 

एक दिन जब रोहित अपने माता पिता के साथ बैठकर भोजन कर रहा था। तभी रोहित के पिता के पास एक फोन आया जिसके बाद उनके चेहरे पर मायूसी का भाव छा गया। उन्होंने खाना बीच में ही छोड़ दिया और रोने लगे।रोहित के पिता की आंखों ने आंसू टपक रहे थे। तभी रोहित और उसकी मां ने एक साथ जिज्ञासा से पूछा “क्या हुआ”? 

रोहित के पापा ने कोई जवाब नहीं दिया और वह अपने आंसू पोंछे जा रहे थे। कुछ देर बाद उन्होंने बताया कि उनके 

पिताजी यानी कि रोहित के दादादी जो कि गांव में रहते थे उनका स्वर्गवास हो गया है। रोहित के दादा दादी गांव में उसके चाचा के साथ रहते थे जो कि खेती करके अपना जीवन यापन करते थे।रोहित अभी तक केवल एक ही बार गांव गया था वह भी 5 वर्ष की उम्र में जब उसने अपना होश भी नहीं संभाला था। उसके बाद न ही कभी रोहित में गांव जाने की लालसा दिखी और ना ही उसे ले जाया गया। 

अगले दिन सुबह ही तीनों लोग अपनी कार से गांव की तरफ निकले और लगभग 3 घंटे की यात्रा के बाद वे अपने गांव पहुंचे। रोहित के पिता ने दादाजी की चिता को मुखाग्नि दी परन्तु वह बहुत ही विचलित प्रतीत हो रहे थे। शाम होते ही रोहित पिता से मुंबई वापिस लौटने के बारे में पूछने लगा, लेकिन उसके पिता लगभग तीन दिन तो गांव में ही रुकना चाहते थे जिससे कि वह स्वयं बड़े बेटे होने के नाते सभी कार्य अपने हाथ से कर सके। 

तीन दिन बाद जब सभी लोग मुंबई आने के लिए तैयार थे तभी रोहित के पिता से दादी की हालत नहीं देखी गई और उन्होंने दादी को भी अपने साथ मुंबई के जाने का फैसला किया। इस फैसले से रोहित की मां ज्यादा खुश नहीं दिखाई दे रही थी परन्तु जब रोहित के पिता ने उन्हें समझाया की कुछ ही दिनों की तो बात है वैसे भी उनकी तबीयत खराब रहती है कुछ दिन हमारे साथ रह लेंगी तो क्या फर्क पड़ जाएगा। 

और फिर वह लोग दादी को भी अपने साथ मुंबई के आए। रोहित की दादी अपनी कुर्सी पर से उठ नहीं सकती थी और न ही किसी बात का सही सही उच्चारण कर पाती थी अर्थात् किसी भी बात को ठीक ढंग से नहीं बोल पाती थीं। जैसे कि यदि उन्हें पानी चाहिए तो वह केवल पाआआआ……पाआआआ ही बोल पाती थी और जब उन्हें सुपाड़ी चाहिए होती थी तब वह केवल साआआ…… साआआ ही बोल पाती थी। 

इस प्रकार उनकी अतिरिक्त सेवा की आवश्यकता थी जो कि रोहित के माता पिता अच्छे ढंग से कर रहे थे। लेकिन जब रोहित के माता पिता घर पर नहीं रहते थे तब सारी जिम्मेदारी रोहित की ही थी , कि वह दादी की अच्छे ढंग से देखभाल करे। परन्तु रोहित अपने मोबाइल और लैपटॉप में व्यस्त होने के कारण दादी पर कम ही ध्यान दे पाता था। 

एक दिन जब रोहित अपने मोबाइल में गेम खेल रहा था कि तभी दादी को प्यास लगी और उन्होंने रोहित को आवाज लगाई रोहित कभी भी एक बार में नहीं सुनता था। इसलिए दादी के बार बार पाआआ…. पाआआआ कहने पर वह उठा और उन्हें पानी देकर आया और फिर अपने गेम में व्यस्त हो गया। दादी ने रोहित को एक बार फिर आवाज लगाई वह रोहित से काआआ….. कााआआ अर्थात् कम्बल लाने के लिए कह रही थी। 

रोहित एक विशेष गेम में बहुत दिनों से जीत नहीं पा रहा था और रोहित की भाषा में बोले तो वह बहुत दिनों से “चिकन डिनर” नहीं कर पर रहा था। रोहित ने ठान लिया था कि आज कुछ हो जाए में चिकन डिनर करके ही मानूंगा।उधर दादी उसे लगातार पुकारे जा रही थी।रोहित जैसे ही अपने गेम में आउट हुआ गुस्से में उठकर गया और दादी को कम्बल देकर आया। अब रोहित ने फिर गेम खेलना शुरू किया इस बार रोहित गेम में बहुत आगे तक पहुंच चुका था और उसके जीतने की संभावनाएं बढ़ती ही जा रही थी कि तभी दादी ने रोहित को फिर से आवाज लगाई। वह रोहित से सआआआआ…. साआआआ कहती हुई सुनाई पड़ रही थी लेकिन रोहित किसी है हालत में अपना गेम छोड़कर नहीं जाना चाहता था। 

दादी की आवाज में इस बार तेजी और भय दोनों था। जिसे रोहित समझ नहीं पा रहा था, वह सोच रहा था कि दादी शायद सुपाड़ी के लिए बुला रही है। लेकिन उनके साआआआ…….. साआआआ का अर्थ इस बार सुपाड़ी नहीं बल्कि सांप था। जो स्टोर रूम से धीरे धीरे रोहित के कमरे की ओर बढ़ रहा था।सांप जैसे ही रोहित के कमरे के पास पहुंचा दादी की आवाज और तेज हो गई लेकिन रोहित तो अभी एक काल्पनिक चिकन डिनर करने में व्यस्त था। 

गेम में केवल चार लोग ही बचे थे जिनमें से दो रोहित की टीम के थे और दो विपक्षी टीम के। परन्तु रोहित यह नहीं जानता था कि एक पांचवा भी उसके कमरे के बाहर आकर बैठ चुका है, जो उसके काल्पनिक चिकन डिनर को वास्तविकता में बदल सकता है। 

रोहित ने जैसे ही अपनी AWM बंदूक से गेम में अंतिम व्यक्ति को मारा तभी उस सांप ने रोहित के पलंग पर पहुंचकर उसे ड्स लिया। वह रोहित जिसे इस समय जीत कि खुशी होनी चाहिए थी वह जोर जोर से चीखने चिल्लाने लगा। सांप रोहित की चीख सुनकर खिड़की से बाहर चला गया। अब रोहित ने तुरंत अपने पापा को फोन लगाया और उन्हें पूरी बात बताई। रोहित के पापा को घर आने में कम से कम 30 मिनट का समय लगता इसलिए उन्होंने एक पड़ोसी को फोन किया जो रोहित को तुरंत अस्पताल ले गया। लेकिन तब तक सांप का जहर रोहित के शरीर में फ़ैल चुका था और वह बेहोशी की हालत में था। 

रोहित के माता पिता सीधे अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से अपने बच्चे का हाल पूंछा। तब डॉक्टर ने कहा कि जहर पूरे शरीर में फ़ैल चुका है। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे है और आगे अब सब भगवान के हाथ में है। डॉक्टरों के अथक प्रयास और सबकी दुआओं के कारण दो दिन बाद रोहित को होश आया। होश आते ही उसने सबसे पहले दादी का नाम किया जो कि इस समय घर पर थी।जब उससे पूछा गया कि वह दादी को क्यों पुकार रहा है तब उसने पूरी घटना के बारे में बताया। 

जब रोहित घर पहुंचा तो सीधा अपनी दादी के पास गया और उनकी गोद में सिर रखकर रोने लगा। दादी ने रोहित के सिर पर हाथ फेरा।रोहित ने कहा कि दादी अब से मैं आपकी हर एक बात मानूंगा और अब मोबाइल ना चलाकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दूंगा। दादी यह सुनकर मुस्कुरा दी जिससे रोहित के चेहरे पर भी हल्की मुस्कान आ गई। इसके बाद रोहित की मां ने सबके लिए खाना परोसा और फिर बाकी कि बातें खाना खाते समय हुई। 

अतः कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को सोशल मीडिया और गेम्स की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन जीना चाहिए।

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