शिक्षाप्रद कहानियाँ-मक्कार बंदर

शिक्षाप्रद कहानियाँ-मक्कार बंदर

मक्कार बंदर

शिक्षाप्रद कहानियाँ- एक जहाज कोलकाता की तरफ जा रहा था। उस जहाज में ढेर सारे मुसाफिर के साथ एक बंदर भी बैठा हुआ था। सफर करते-करते  अचानक  समुद्र में तूफान आ गया। जहाज ऊपर नीचे करने लगा और वह हिलने ने भी लगा। और कुछ देर के बाद नाव डूब गया। उस नाव में के ज्यादा कर मुसाफिर डूब गए। जो भी मुसाफिर बच गए वह किसी ना किसी के सहारे लेकर समुद्र के किनारे आने की प्रयास करने लगे। बंदर भी इसी प्रयास में था कि वह किसी तरह समुद्र के किनारे पहुंच जाए। तभी बंदर को एक बड़ी सी मछली उसे समुद्र में दिखाई दी।

बंदर ने मछली से दोस्ती कर ली और मुसीबत में उस से मदद मांगी। मछली बोली तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ मैं तुम्हें किनारे तक पहुंचा दूंगी। मछली बड़ी भोली थी। वह बंदर को लेकर किनारे की तरफ चल पड़ी। मछली ने रास्ते में बंदर से पूछा क्या तुम भारत देश के वासी हो। बंदर ने थोड़ा सोच कर होले से जवाब दिया हां। तब मछली ने दोबारा पूछा तुम तो कोलकाता से परिचित होगे। बंदर थोड़ी देर सोच में पड़ गया। कुछ होना बात उसने बोला हां हां क्यों नहीं कोलकाता तो मेरे लंगोटिया यार है। तभी मछली समझ गए कि उसकी पीठ पर कोई मक्कार बैठा हुआ है। उसने तुरंत पानी में गोता मारा और बंदर को उसके अपने हाल पर छोड़ कर चली गई।

शिक्षा- दोस्ती में ईमानदारी बरतनी चाहिए।

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