शिक्षाप्रद कहानियाँ-अपना काम अपने भरोसे

शिक्षाप्रद कहानियाँ,

अपना काम अपने भरोसे

किसी गांव में श्याम नाम का एक किसान था। किस्मत की बात थी कि इस बार उसकी फसल बहुत अच्छी हुई। पूरा परिवार लहलहाती फसल को देखकर फूला नहीं समाया।  इसी दौरान उसके खेत में एक चिड़िया ने घोंसला बना लिया। उसमें वह अपने दो बच्चों के साथ चैन से रहने लगी। जब फसल काटने का समय आया तो श्याम अपने बेटे से बोला- ‘गोपाल सभी रिश्तेदारों को निमन्त्रण दे दो कि वे अगले शनिवार खेत पर आकर फसल काटने में हमारी सहायता करें।’

 यह सुनकर चिड़िया के बच्चे – बहुत घबराए और मां से कहने लगे, ‘हमारा क्या होगा। अभी तो हम पूरी तरह उड़ने लायक भी नहीं हुए। हैं।’ चिड़िया ने कहा, ‘तुम चिन्ता मत करो हमें कोई नहीं हटाएगा… क्योंकि जो इन्सान दूसरों के भरोसे । रहता है उसकी कोई मदद नहीं करता।

अगले शनिवार जब श्याम और गोपाल दोनों खेत पर पहुंचे, तो वहां : किसी भी रिश्तेदार को नहीं पाकर .. निराश हो गए। श्याम ने गोपाल से कहा, ‘लगता है हमारे रिश्तेदार हमसे ईर्ष्या करते हैं, इसीलिए नहीं । आए। अब तुम अपने सभी मित्रों को फसल काटने बुला लो।’ चिड़िया के बच्चे फिर डर गए। लेकिन उनकी मां ने उन्हें वही बात दोहराई और उन्हें निश्चित कर .’ दिया। 

अगले हफ्ते जब दोनों बाप-बेटे . खेत पर पहुंचे, तो वहां पर कोई नहीं था। श्याम ने गोपाल से कहा, ‘बेटा देखा तुमने, संब अपने बनने का नाटक करते हैं। लेकिन वक्त पर कोई काम नहीं आता। अब तुम बाजार जाओ और फसल काटने का सारा सामान ले आओ, कल से फसल हम दोनों मिलकर काटेंगे।’ चिड़िया ने जब यह सुना, तो बच्चों से कहने लगी, ‘चलो, अब जाने का समय आ गया है। 

जब इन्सान अपना काम स्वयं करने की ठान लेता है, तो फिर उसे न तो किसी के सहारे की जरूरत पड़ती है और न ही उसे कोई रोक सकता है।’ दूसरे दिन जब बाप-बेटे फसल काटने खेत पर आए, उससे पहले ही चिड़िया अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थान पर चली गई थी। 

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