शिक्षाप्रद कहानियाँ-गीध्दराज और गौरैया

शिक्षाप्रद कहानियाँ

गीध्दराज और गौरैया

शिक्षाप्रद कहानियाँ- एक बार एक बार गिद्धों के राजा गिधराज सारे पक्षियों को  ललकारा उसने कहा कि मैं सभी पक्षियों का राजा हूं। मैं सबसे ऊंचा उड सकता हूं और आसमान को भी छु सकता हूं।

यह बात सुनकर सभी पक्षियों ने चुप्पी साध ली लेकिन एक नन्ही गौरैया यह बात सुनकर चुप नहीं रही। गौरैया ने बोली अभिमान तो राजा रावण को भी नहीं रहा। मैं तुम्हें अकाश छूकर दिखाऊंगी।

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तभी दोनों में शर्त लग गई। शर्त में यह भी शामिल किया गया कि दोनों सिर पर कुछ रख के ऊपर उड़ेंगे।

गीध्दराज ने एक चलाकि चली। उसने अपने सिर पर रूई का एक बड़ा गोला को कपड़े में बांधकर रख लिया। जो देखने में बहुत बड़ा मालूम पड़ रहा था लेकिन वजन में हल्का था। गिरिराज ने बोला कि मैं सबसे भारी चीज ले कर ऊरुगा  और उसने गोरिया के सिर पर नमक की डली रख दी। जो देखने में छोटी थी मगर लेकिन भारी थी।

अब दोनों ने आसमान की तरह उडना चालू किया।गीध्दराज के सर पर रुई होने के कारण व रॉकेट की तरह ऊपर की तरफ उड़ने लगा जबकि नन्ही गौरैया के सिर पर भारी बोझ होने के कारण वह मुश्किल से उड पा रही थी। तभी आसमान से एक चमत्कार हुआ। आकाश में घूम रही बादलों के समूह गोराया पर तरस खाकर बरसने लगी अर्थात वर्षा होने लगा।

अब तो बाजी पलट गई। रूई के फाए पर बारिश की बूंद बढ़ने के कारण व भारी हो गया जबकि गोराया के सिर पर नमक होने के कारण वह बारिश में गल गया। अर्थात गोराया के सिर पर अब वजन गायब हो गया और गीध्दराज के सिर पर दुगना वजन हो गया। इसके कारण गीध्दराज को ऊपर की तरफ तेजी में उड़ना अब आसान नहीं था। और दूसरी तरफ गोराया के सिर पर वजन ना होने के कारण व तेजी से आकाश तक पहुंच गई। आकाश को छु कर वापस धरती पर आ गई और उसने शर्त जीत लिया।  वही गीध्दराज अपने भाग्य को दोष देते हुए आसमान मैं ही पंख फड़फड़ा रहा था।

शिक्षा- जो व्यक्ति अपने पास अभिमान अर्थात घमंड से चूर रहता है उसे भगवान से भी साथ नहीं मिलता।

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