शिक्षाप्रद कहानियाँ- खूंखार मगरमच्छ 

शिक्षाप्रद कहानियाँ- खूंखार मगरमच्छ 

खूंखार मगरमच्छ  

शिक्षाप्रद कहानियाँ – यह कहानी लगभग 100 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव रामपुर की आश्चर्यजनक घटना पर आधारित है।रामपुर एक छोटा मगर समृद्ध ग्राम था, जहां पर उपजाऊ भूमि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थी।साथ ही नदी एवं नदी के पास स्थित बाग बगीचे, खेत-खलियान गांव की शोभा में चार चांद लगा देते थे। 

सभी ग्रामवासियों का जीवन प्रकृति की छत्रछाया में बड़े ही सकुशल ढंग से व्यतीत हो रहा था। तभी गांव में कुछ ऐसा हुआ जिससे सभी गांव वालें भयभीत हो उठे। गांव की नदी में एक बूंखार मगरमच्छ आ गया था। वह नदी में पानी पीने जाने वाले जानवरों को अपना शिकार बनाने लगा, यहां तक कि उसने एक दिन दो गाय चराने वाले ग्वालों को भी अपना शिकार बना लिया। गांव में मगरमच्छ का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर किया क्या जाए|

गांव वालें अपने अथक प्रयासों के बावजूद भी उस मगरमच्छ का कुछ ना बिगाड़ सके। अब तक मगरमच्छ गांव के लगभग दस लोगों को अपना शिकार बना चुका था।अब सभी गांव वालें नदी किनारे जाने में भयभीत होते, अपने खेत खलिहानों तक न पहुंचने के कारण उनकी फसलों को भी बहुत नुकसान हुआ। 

लगभग एक महीना नदी एवं अपने खेतों से दूर रहने के बाद गांव वालों ने एक आश्चर्य जनक दृश्य देखा, उन्होंने देखा कि गांव की ही एक झोपड़ी में रहने वाली लड़की कोमल अपनी बकरियों के साथ नदी से वापिस आ रही थी। कोमल लगभग 13 साल की एक गरीब मगर नटखट लड़की थी। जो गांव में अपनी मां के साथ रहती थी, कोमल के पिताजी का देहांत उसके जन्म के 5 वर्ष बाद ही हो गया था।

अब परिवार के पालन पोषण के लिए कोमल बकरियां चराया करती और उसकी मां बकरियों का दूध बेचकर दोनों का पेट भरती थी।वह प्रतिदिन नदी किनारे बकरियों को चराने ले जाती एवं सकुशल वापिस आती, गांव वालों को इस घटना ने आश्चर्य में डाल दिया।जो गांव वाले कल तक कोमल का नाम भी नहीं जानते थे आज सभी उससे पूछने को इक्छुक है कि आखिर ये सब कैसे हो रहा है। 

जब गांव वालों ने कोमल से पूछा तो पता चला कि वास्तव में उसे मालूम ही नहीं कि नदी में कोई खूखार मगरमच्छ है। उसे अपनी बकरियों से ज्यादा कुछ पता नहीं था ना ही वह पता करना चाहती थी। एक दिन गांव वाले कोमल के साथ अपने पशुओं को भी नदी किनारे ले गए तब उन्होंने जो देखा वह उन्हें हैरान कर गया, उन्होंने देखा कि वह मगरमच्छ जो गांव का दुश्मन बना बैठा था, कोमल को देखते ही भगा खड़ा हुआ। ऐसा लगा मानो उसने अपना काल देख लिया हो। 

अब गांव वालों के मन में कोमल के लिए इज्ज़त और बढ़ गई थी, सभी लोग प्रतिदिन उसके साथ अपने पशुओं को भी नदी किनारे चराने के जाते और सकुशल वापिस आते।

सभी ग्राम वासियों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा अर्चना आरंभ की तथा नौ दिन की अखंड ज्योति भी प्रज्वलित की। गांव वालों की भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने नौवें दिन उनको दर्शन दिए, सभी गांव वालों ने मां दुर्गा को हाथ जोड़कर नमस्कार किया तथा दंडवत होकर अपनी समस्या सुनाई। 

इसके पश्चात जगत जननी मां दुर्गा ने अपने जवाब में कहां कि इस खूखार मगरमच्छ का अंत केवल कोमल द्वारा ही संभव है, तथा उन्होंने कोमल के पूर्वजन्म के बारे में बताया उन्होंने कहा “”कोमल जिसका पूर्वजन्म में सुमन नाम था, जब अपने विद्यालय से घर लौट रही थी तभी चार लोगों ने उसे अगवा कर उसका बलात्कार किया और उसकी निर्ममता से हत्या कर दी।सभी दरिंदे सबूतों के अभाव में कानून से तो बच गए लेकिन भगवान ने उन्हें कभी माफ नहीं किया और इस जन्म में उन्हें मगरमच्छ, सांप, बिच्छू तथा केंकड़े का रूप अपने पापों के अनुसार मिला है। यह खूखार मगरमच्छ उन्हीं चार लोगों में से एक है जिसका संहार केवल सुमन अर्थात् कोमल द्वारा ही संभव है”” इतना कहकर मां दुर्गा अदृश्य हो गई। 

इसके बाद गांव वालों ने मगरमच्छ को मारने के लिए एक योजना तैयार की। जिसमें उन्होंने कोमल के मुख के समान मुखौटे तैयार किए क्योंकि जो भी व्यक्ति कोमल जैसा प्रतीत होगा मगरमच्छ उसपर हमला नहीं करेगा। अगले दिन दशहरा था, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते है और गांव वाले इस मगरमच्छ रूपी बुराई को हमेशा के लिए मिटाना चाहते थे। दशहरे की सुबह सभी गांव वालें नदी के किनारे अपने-अपने मुखौटे पहनकर पहुंचे, मगरमच्छ गांव से जानवरों के इंतजार में नदी के बाहर आकर बैठा हुआ था।

सुबह की प्यारी धूप में मगरमच्छ की हल्की सी आंख लगी और जब उसने अपनी आंखें खोली तो लगभग 100 से ज्यादा कोमल जैसे दिखने वाले लोग उसे घेरे खड़े हुए थे। किसी के हाथ में तलवार थी तो किसी के हाथ में भाला, कोई मगरमच्छ को बांधने के लिए रस्सी पकड़े था तो कोई उसे वहीं आग लगाना चाहता था। मगरमच्छ चाह कर भी उनपर हमला नहीं कर सकता था क्योंकि सभी लोग कोमल जैसे प्रतीत हो रहे थे। तभी कुछ लोगों ने रस्सी से मगरमच्छ को नियंत्रण में ले लिया अब मगरमच्छ के पास बचने का कोई उपाय नहीं था, वह समझ चुका था उसकी मृत्यु निकट है। 

अब पूरे गांव वालों की नज़रें कोमल के ऊपर थी जो हाथ में भाला लेकर तैयार थी, कोमल ने भी बिना किसी हिचकिचाहट के अपना भाला मगरमच्छ के आर पार कर दिया। ऐसा लग रहा था मानो मगरमच्छ को कोमल नहीं बल्कि सुमन मार रही हो और कह रही हो कि तुम्हे दंड मिलने में देर हो गई तुम्हे तो उसी जन्म में तुम्हारे पापों की सजा मिलनी चाहिए थी, जब तुमने एक असहाय मासूम के साथ दुष्कर्म जैसा पाप किया था। 

मगरमच्छ के अंत के साथ ही गांव की खुशहाली वापिस लौट आई और अब सभी गांव वाले नदी किनारे नहाने तथा अपने पशुओं को चराने के लिए स्वतंत्र थे।

अतः कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को अपने बुरे कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ता है, यदि किसी कारणवश इंसान कानून से बच भी जाए तब भी वह भगवान के प्रकोप से नहीं बच सकता।

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