शिक्षाप्रद कहानियां- कष्ट का कारण

शिक्षाप्रद कहानियां- कष्ट का कारण

यह बात उस समय की है जब महाभारत का युद्ध चल रहा था। भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेटे हुए थे। मगर उनके प्राण नहीं निकल रहे थे। अर्जुन अर्जुन को यह दृश्य देखा नहीं जा रहा था। उसने अपने धनुष से पताल लोक में तीर छोड़कर पताल के झड़ने का पवित्र पानी भीष्म पितामह पर छिड़का। फिर भी उनकी मृत्यु नहीं हुई और आत्मा को शांति नहीं मिली।

भीष्म पितामह ने अपने गर्दन को उठाकर आसपास देखा उनके चारों तरफ पांडव खड़े थे। भीष्म पितामह अपनी कातर दृष्टि से भगवान श्री कृष्ण को निहार रहे थे। तभी भीष्म पितामह ने कहा हे प्रभु श्री कृष्ण मुझे इस कष्ट से मुक्ति दिलाएं।

तभी श्री कृष्ण ने कहा अपने पाप देखा है  इसलिए यह यातना भोग रहे हैं। तभी पांडवों ने कहा भीष्म पितामह तो गंगाजल से भी पवित्र है फिर भी..? तो फिर श्री कृष्ण ने आगे कहा जब भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण हो रहा था उस समय आप वहां उपस्थित थे आप भी दूसरे की तरह मुख दर्शन बने हुए थे ना आपने दुशासन का हाथ पकड़ा और ना ही आप ने दुर्योधन को ललकारा। ऐसी गलती की सजा आप अभी भोग रहे हैं।

शिक्षापाप देखना पाप में भागीदारी बनने से भी कम नहीं है।

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