शिक्षाप्रद कहानियाँ-मेहनत का सुख

shikshaprad kahaniyan

मेहनत का सुख

मां यह सब्जी अच्छी नहीं है मुझे यह बेस्वाद लग रही है। शैली यह बात गुस्से में अपनी कटोरी पटकते हुए कहा।

मां ने शैली से का है ठीक है बेटा शाम को मैं सब्जी ठीक से बनाने की कोशिश करूंगी।

दोपहर के समय मां और उनकी बेटी शैली अपने खेत में गए। मां ने अपने खेत से आलू खोद खोद कर निकालना शुरू की और शैली उन आलू को उठाकर एक तरफ टोकरी में रखने लगी। खेत में यही काम करते करते शाम हो गई। रात होने से पहले मां और उनकी बेटी शैली दोनों अपने घर लौट आए। 

शैली दिन भर काम करके पूरी तरह से थक चुकी थी उन दोनों को भूख भी जोरो से लग रही थी। मां ने शैली के सामने जैसे ही खाना पड़ोसी तो शैली उन खानों पर टूट पड़ी और जल्दी-जल्दी खाने लगी। फिर खाते खाते शैली ने कहा मैं यह सब्जी सुबह वाले सब्जी से बहुत अच्छी लग रही है।

शैली ने जब पूरा खाना खा लिया तब मां ने कहा बेटी मुझे बहुत खुशी हुई कि तुम्हें अभी सब्जी बहुत अच्छी लगी पर तुम्हें मैं एक सच्चाई बताती हूं कि यह सब्जी सुबह वाली ही थी पर तुम्हें इस समय यह सब्जी इसलिए अच्छी लग रही है कि तुम थकी और भूखी थी क्योंकि शरीर से मेहनत करने के बाद खाना बहुत अच्छा लगता है। 

शिक्षाहर चीज की कीमत सही वक्त पर होती है

        

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