शिक्षाप्रद कहानियाँ-छू नहीं सकता

shikshaprad kahani

छू नहीं सकता

एक बार की बात है जब गुरुदेव रविंद्र ठाकुर की समाज में ऊंचाइयों को छू रहे थे। उनकी इस बढ़ती हुई कीर्ती देखकर जब कुछ लोग उनके बारे में उल्टी-सीधी बातें समाज में फैला रहे थे। लेकिन गुरुदेव सहज और शांत भाव के थे। वे उन लोगों की सारी बातें सहन कर रहे थे।

लेकिन उनके दोस्त शरतचंद्र चटर्जी को यह तीखी आलोचना बर्दाश्त नहीं हो रहे थे। उन्होंने गुरुदेव को कहा आप इन लोगों का मुंह क्यों नहीं बंद कर देते इनकी आलोचकों को कब तक बर्दाश्त करेंगे।

गुरुदेव फिर भी शांत और सरल भाव में अपने दोस्त को बोले। जिस शास्त्र को लेकर मेरे खिलाफ जो लड़ाई करते हैं उसको तो मैं हाथ भी नहीं लगा सकता।

शिक्षाकुत्तों के भौंकने पर भी शेर खामोश रहते हैं

 

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