शिक्षाप्रद कहानियां-सलीम का परिवार 

shikshaprad kahani in Hindi

सलीम का परिवार 

सलीम दिल्ली के ओखला इलाके में रहता था। जिसकी पास में ही एक पंचर सुधारने की दुकान थी जिससे वह अपना जीवन यापन करता था।सलीम की उम्र लगभग 26-27 हो चुकी थी सलीम अब निकाह(शादी) करना चाहता था। उसने सीलमपुर में रहने वाली फातिमा से निकाह कर लिया। निकाह को पूरे 5 वर्ष भी नहीं हुए थे कि सलीम अब दूसरा निकाह करना चाहता था। सलीम ने फिर अपनी इच्छा अनुसार एक ओर निकाह जामिया नगर में रहने वाली विधवा से किया। दोनों बीवियां सलीम के साथ ही रहती थी। सलीम के अनुसार वह अपने साथ चार बीवियां रख सकता है। 

सलीम के पास पंचर की दुकान के अतिरिक्त और कोई आय का स्रोत न था। उसके परिवार का खर्चा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था। परंतु फिर भी वह निकाह पर निकाह करता जा रहा था।सलीम की दूसरी शादी को 7 साल भी नहीं हुए थे कि उसने फिर एक ओर शादी की।इस बार उसने उस्मानपुर में रहने वाली रुकसाना, के साथ निकाह किया।अब सलीम के घर में तीन वीबियां हो चुकी थी, तीसरी वीबी से निकाह के वक्त उसकी उम्र लगभग 50 पार कर चुकी थी।

 सलीम का परिवार बढ़ता ही का रहा था, वह परिवार नियोजन को बिल्कुल भी तवज्जो नहीं देता था वह मानता था कि बच्चे अल्लाह की देन है।और फिर अल्लाह की देन से उसकी तीनों वीबियों को कुल मिलाकर 11 लड़के और 7 लड़कियां हुई। जिसमें से फातिमा के 4 लड़के और 2 लड़कियां, सायना के 3 लड़के और 3 लड़कियां, रुकसाना के 4 लड़के और 2 लड़कियां थी।सलीम का परिवार जिसे 4 लोगों का होना चाहिए था वह अब 21 लोगों का हो चुका था। सलीम पढ़ाई लिखाई में भी ज्यादा विश्वास नहीं रखता था और वह अपने लड़कों को दकान पर काम करवाने के केवल पंचर की दुकान से उसके परिवार की रोजी रोटी नहीं चल सकती। 

सलीम के बच्चे कभी कभी पूरे दिन भूखे रहते तो कभी कभी उन्हें केवल 1 समय का भोजन ही नसीब होता था। लेकिन सलीम अभी भी अपनी परिवार नियोजन न अपनाने की गलती को नहीं स्वीकारता था। सलीम अपने लड़कों से जो 14-15 साल के हो चुके थे पैसे कमाने की कहता परन्तु सलीम के लड़के न तो पढ़े लिखे थे और न ही किसी कार्य में कुशल थे।अब पानी सलीम के सर से ऊपर जा रहा था। वह बिल्कुल ही असहाय महसूस कर रहा था और करता भी क्यों न एक अकेला व्यक्ति आखिर कब तक 21 लोगों का भरण पोषण करेगा, वो भी एक छोटी सी पंचर की दुकान से। 

व्यक्ति जब मुसीबतों से घिर जाता है जाता है तब वह गलत रास्ते अपनाने पर मजबूर हो जाता है। सलीम के साथ भी यही हुआ और सलीम ने चोरी करना शुरू कर दिया। वह दिन में पंचर की दुकान पर बैठता और रात को किसी सुने घर में चोरी करके कुछ पैसे और समान ले आता। सलीम शुरुआत में कभी कभी असफल भी हुआ लेकिन धीरे धीरे वह चोरी करने के सभी हथकंडे जान चुका था। 

सलीम ने अपने दो बड़े बेटों आदिल और अब्दुल को भी अपने साथ शामिल कर लिया। अब तीनों लोग मिलकर अपनी वारदातों को अंजाम देते थे। वह किसी को चाकू दिखाकर तो कभी किसी को तलवार का डर दिखाकर लूट लिया करते थे। कभी कभी ज्यादा पैसों के लालच में वह पूरे परिवार की हत्या भी कर देते थे। वह बड़े ही शातिर तरीके से अपने काम को अंजाम देते थे और पुलिस की आंख में हर बार धूल झोंक देते थे। 

इन सब चोरी चकारी, हत्या , लूटपाट का सलीम पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह अपने परिवार को लगातार बढ़ाता ही गया। उसने कभी भी परिवार नियोजन संबंधी उपकरणों जैसे कि निरोध आदि का उपयोग भी नहीं किया। जिसका परिणाम पूरा परिवार भुगत रहा था। बीतें 4 वर्षों में सलीम ने अपनी तीन अलग अलग वीबीयों से 3 और बच्चे पैदा किए, अब सलीम का परिवार 21 से बढ़कर 24 पर पहुंच चुका था। यह एक सूखी परिवार से लगभग 6 गुना ज्यादा बड़ा था।सलीम का परिवार इतना बड़ा हो चुका था कि उससे क्रिकेट की दो टीम बन सकती थी वह भी दो अंपायर सहित। 

धीरे धीरे चोरी का पैसा भी उनके परिवार के लिए कम पड़ने लगा।अब सलीम ने एक और गलत कदम उठाया और बच्चों की किडनेपिंग करना शुरू कर दिया । सलीम और उसके बेटे, बच्चों को स्कूल के बाहर से, खेल के मैदान से किडनैप किया करते और फिर उनके परिवार वालों से पैसा मांगा करते थे। बच्चों के परिवार वाले डर जाते थे कि कहीं बच्चे को कुछ कर न दे इसलिए वह पुलिस को बताने की बजाए सलीम को पैसा दे दिया करते थे। वह किसी से 2 लाख, 5 लाख तो किसी से 10 लाख भी मांगा करते थे। 

फिर एक दिन सलीम और उसके लड़कों ने खेल परिसर से एक 9 वर्षीय लड़की को किडनैप किया। फिर उन्होंने फिरौती को रकम मांगने के लिए उसके परिवार को फोन लगाया, लेकिन सलीम नहीं जानता था कि वह एक केंद्रीय मंत्री की लड़की है। मंत्री की बेटी की किडनैपिंग से पूरे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। शहर में जगह जगह नाकेबंदी कर दी गई, सभी वाहनों की तलाशी ली जाने लगी। दिल्ली पुलिस के सबसे काबिल अफसरों को यह मामला सौंपा गया। परन्तु मंत्री जी का आदेश था कि जब तक मेरी बेटी वापिस नहीं आ जाती पुलिस कुछ नहीं करेगी। 

अब मंत्री जी और पुलिस दोनों किडनैपर के फोन का इंतजार कर रहे थे। परन्तु सलीम समझ चुका था इस बार वह फंस चुका था इसलिए उसने फोन करने की बजाय लड़की को मार के मामला खत्म करने की कोशिश की। 

सलीम और उसके लड़कों ने बड़ी ही निर्ममता से उस मासूम की हत्या कर दी और उसे पास वाले नाले में फेंक दिया। पुलिस को शहर से थोड़ी दूर नाले में एक लड़की की लाश की खबर मिली, जब पुलिस ने उसकी शिनाख्त की तो पता चला कि वह मंत्री जी की ही बेटी है। 

पुलिस ने आस पास के इलाकों में खोजबीन शुरू कर दी, तभी पुलिस को एक खंडहर में सलीम और उसके लड़के छिपे हुए मिले।पुलिस को देखते ही उन लोगों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। पुलिस ने उनसे सरेंडर करने को कहा परन्तु वह नहीं माने और गोलियां चलाते रहे। तभी एक गोली वहां पर मौजूद पुलिस वाले को लगी और फिर 

पुलिस ने उनका एनकाउंटर करते हुए सलीम और उसके बेटों को मौत के घाट उतार दिया। 

सलीम की मौत के बाद उसका परिवार बिल्कुल ही बिखर गया, कुछ बच्चे होटल में काम करने लगे तो कुछ बच्चे चौराहे पर भीख मांगकर अपना पेट भरने लगे।सायना ने मोहल्ले में ही रहने वाले रफीक से निकाह किया और अपना नया परिवार बसाया। 

आखिर में एक चौंकाने वाली बात पता चली कि जिस केंद्रीय मंत्री की लड़की को सलीम और उसके लड़कों ने मारा था। वह केंद्रीय मंत्री जनसंख्या नियंत्रण एवं परिवार नियोजन मंत्री थे। 

अतः कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को अपना परिवार छोटा ही रखना चाहिए और परिवार नियोजन को महत्व देना चाहिए। क्योंकि परिवार जितना छोटा होगा आवश्यकताएं और जरूरतें उतनी ही कम होंगी। छोटा परिवार सुखी परिवार!

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