शिक्षाप्रद कहानी – घोड़ा और गधा

शिक्षाप्रद कहानियाँ- घोड़ा और गधा

घोड़ा और गधा

शिक्षाप्रद कहानी – एक व्यापारी जब भी अपना माल बेचने करीब के गांव में जाता तो को सारा माल गधे की पीठ पर लाद देता है।

एक दिन बहुत गर्मी पड़ रही थी। वह चिलचिलाती धूप गधे को बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसे चक्कर आने लगे वह व्यापारी अपने साथ घोड़े को भी ले जाता था। गधे ने अपने साथी घोड़े से कहा हे दोस्त बड़ी कृपया होगी यदि तुम मेरा कुछ  बोझ अपने पीठ पर लाद लोगे।मुझे गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही है अब मैं ज्यादा दूर तक नहीं चल सकता हूं इतनी भारी बोझ लेकर।

घोड़े ने गधे की बात सुनकर एठते हुए बोला बोझ उठाना ना मेरा काम नहीं है मैं असल में अरबी घोड़ा हूं। थोड़ी देर चलने के बाद गधे धड़ाम से नीचे गिर गया। उसके प्राण पखेरू उड़ गए। व्यापारी को किसी भी तरह अपना माल पास के गांव में पहुंचाना बहुत जरूरी था। उसने तुरंत गधा का सारा बोझ घोड़े पर लाद दिया और ऊपर से मृत गधे को भी घोड़े पर ला दिया ताकि उस गधे के खाल से कुछ रुपया कमाया जा सके।

शिक्षा-जो मित्र वक्त पर काम नहीं आता उसपर भी बुरा वक्त आ सकता है।

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