Self confidence Story in Hindi-खाली समय को काटना काफी  कठिन होता है (It Is Too Difficult To Kill The Time) 

Self confidence Story in Hindi

Self confidence Story in Hindi-खाली समय को काटना काफी कठिन होता है (It Is Too Difficult To Kill The Time) 

1.खाली समय को दौना, ठीक वैसा ही है, जैसे पानी को पानी में भिगोना या साबुन को साबुन से धोना. जब व्यक्ति के पास करने को कुछ भी नहीं होता, तब उसका दिमाग नकारात्मक सोच की तरफ तेजी से दौड़ लगाता है. फिजूल एवम् अव्यावहारिक विचारों के कारण उसका दिमाग शैतान का घर बन जाता है. सच, खाली बैठने वाला पागलपन ढोता है.

2. सच तो यही है कि व्यक्ति बिना काम के एक क्षण भी नहीं बैठ सकता. फालतू बैठने पर फालतू की ही बातें सोचता है और अपनी व्यर्थता पर आँसू बहाता है, इसलिए अपेक्षित है कि व्यर्थता को व्यस्तता में बदलते रहा जाय. अगर हम अपनी दिनचर्या को नियमित कर लें तो फिर हमारे सामने कभी खाली वक्त होगा ही नहीं.

3. वैसे कुछ न कुछ करते रहना या कुछ न कुछ सोचते रहना, व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्ति है. धरती का हर प्राणी अपने आप में व्यस्त रहता है, वस्तुतः व्यस्तता ही प्रकृति है. सत्य तो यही है कि व्यक्ति व्यस्त रहकर ही जीवन का आनन्द उठा सकता है. व्यस्त रहकर ही अपने होने को सार्थक बना सकता है. इसलिए सदैव कुछ न कुछ करते रहिए.

4. व्यक्ति वस्तुतः सबसे अधिक खुद से ही डरता है, इसलिए खुद से कभी रूबरू होना नहीं चाहता है. खाली होते ही उसकी यात्रा खुद की ओर आरम्भ हो जाती है और खुद से बतियाने का उसमें साहस नहीं होता. इसीलिए व्यक्ति सदैव व्यस्त रहना चाहता है. खालीपन उसे काटने को दौड़ता है. अतः अपने दैनिक जीवन को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि कभी खाली न रहना पड़े. बिल्कुल खाली रहने का साहस या तो कोई पहुँचा हुआ सन्त कर सकता है, या फिर कोई पागल कर सकता है.

5. यदि आपके पास सब कुछ है, किन्तु काम नहीं है तो आपसे बड़ा दुर्भाग्यशाली दूसरा नहीं हो सकता. यदि आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे तो आपके हाथ का भी सब कुछ चला जायेगा. सब कुछ ही नहीं, तब खुद को संभालना भी मुश्किल हो जायेगा. देखा जाय तो परमात्मा ने सब कुछ देकर ही हमें यहाँ भेजा है. परन्तु ‘सब कुछ’ को सहजने और उसके सदुपयोग के लिए हमें सदैव सजग रहना होगा, सदैव सक्रिय रहना होगा.

6. याद रखें, समय सबसे बड़ा डॉक्टर है, समय सबसे बड़ी दवा है. बड़े से बड़ा घाव भी समय की छाँव में धीरे-धीरे भर जाता है. किन्तु खाली बैठने से जो घाव होता है, वह कभी नहीं भरता. खाली बैठने वाला तो बोझ है, इस धरा पर. बोझ है, समाज पर, अपने परिवार पर और अपने आप पर. इसलिए अपने आप को सदा व्यस्त रखिए, बोझ मत बनिए. 

7.व्यस्त रहने वाला व्यक्ति कुछ न कुछ कर गुजरता है. मान कर चलें, खाली बैठने वाले का भाग्य भी खाली ही रहता है. खाली रहने पर हर मर्ज, हर दर्द उभर आता है. समय कोई वर्ष, मास या दिन नहीं होता, समय तो बस पल छिन होता है. और एक-एक पल का हिसाब रखना पड़ता है. अगर आपको समय के खाते में कर्जदान दर्ज नहीं होना है तो समय का सदुपयोग करिए, अपने आपको व्यस्त रखिए.

8. व्यस्त रहने का यह अर्थ नहीं है कि आप सदैव मुख्य कार्य में ही लगे रहें. काम के समय काम और आराम के समय आराम करिए. जब भी फुरसत मिले, कुछ न कुछ पढ़ें, बच्चों के साथ खेलें. मित्रों, परिजनों, सहकर्मियों के साथ गपशप करें. हँसे, हँसायें, आमोद-प्रमोद में समय बितायें. परन्तु कभी खाली न बैठें. खाली बैठना, छोटी सी जिन्दगी को और छोटी करना है.

9. खाली बैठना तो कायरों का काम है. यह दुनिया कायरों के लिए नहीं है. कायर व्यक्ति तो मृत्यु से पहले ही कई बार मर चुका होता है. और कर्मशील व्यक्ति एक बार ही मरता है, शानदार मौत मरता है. याद रखें, कर्म ही जीवन है, जीवन ही कर्म है और कर्म ही धर्म है. यही जीवन का मर्म है.

दृष्टान्त- एक बार एक राजा ने बड़ा अजीब प्रयोग किया. घोषणा करवा दी कि जो व्यक्ति बिना किसी काम के एकान्त में दस साल बिता देगा, उसे आधा राज्य दान में दे दिया जायेगा. हिम्मत करके केवल ‘हिम्मत सिंह’ नामक एक व्यक्ति दरबार में उपस्थित हुआ. वह मामूली पढ़ा-लिखा भी था, सो उसने शर्त रखी कि उसे उसकी इच्छानुसार पढ़ने लिखने की सामग्री उपलब्ध करवानी होगी. शर्त मान ली गई. उसे दूर एक नदी के किनारे स्थित एक छोटे मकान में रखा गया. चार दीवारी से बाहर निकलने एवम् किसी से मिलने व बात करने की उसे अनुमति नहीं थी, भोजन, पानी व पुस्तकों आदि की व्यवस्था उसकी इच्छानुसार कर दी जाती थी, उसे पर्ची लिख कर खिड़की पर रखनी पड़ती थी और तदानुसार खिड़की पर चुपचाप सामग्री रख दी जाती थी. हिम्मत सिंह इच्छानुसार भोजन करता और पुस्तकें पढ़ता, किन्तु बिना काम और एकाकीपन से जल्दी ही ऊबने लगा. कुछ लिखने लगा और लिख-लिख कर फाड़ने लगा. आखिर करे तो क्या करे ? धीरे-धीरे भूख कम हो गई, नींद गायब हो गई, नहाने धोने की रूचि भी कम हो गई. यही सोचता रहता कि दस साल कब पूरे होंगे. बिना काम इतना लम्बा समय पूरा होना मुश्किल ही था. अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था कि हिम्मत सिंह की हिम्मत जवाब दे गई. उसने खाना बन्द कर दिया, डॉक्टर बुलाया गया. डॉक्टर ने जाँच कर बताया कि हिम्मत सिंह पूर्णतः पागल हो चुका था. उसे तत्काल पागल खाने पहुँचाया गया. अर्थात् बिना काम आदमी या तो पागल हो सकता है या आत्महत्या कर सकता है. 

Self confidence Story- कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, काम का तरीका ही छोटा या बड़ा हो सकता है (No Work is Either Small or Big, But The Way of Working Makes it So) 

Self confidence Story in Hindi

1.यह कतई महत्वपूर्ण नहीं है कि आप कितना बड़ा काम कर रहे हैं, महत्वपूर्ण तो यही है कि आप छोटे से छोटे काम को भी कितने महत्वपूर्ण तरीके से कर रहे हैं. मान कर चलें, काम करने में आनन्द भी तब ही आता है, जब हर कार्य को महत्वपूर्ण समझा जाता है. आनन्द के बिना हर यात्रा अधूरी है, हर सफलता अधूरी है.

2. किसी कार्य को यदि आप छोटा या घटिया समझ कर छोड़ देते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई दूसरा भी उसे नहीं करेगा. जो आज बड़े-बड़े काम कर रहे हैं, वे सब छोटे-छोटे काम करते हुये ही यहाँ तक आ पहुँचे हैं. सीधे ही शिखर पर कौन पहुँच सकता है ? इसलिए किसी भी कार्य को छोटा या घटिया न समझें.

3. यदि आप में लगातार कुछ न कुछ सीखने की ललक है, कुछ कर गुजरने की आपके चेहरे पर झलक है तो हर कार्य में महानता छलक उठेगी, बशर्ते कि आपके नजरिये में पूरा फलक हो. यदि आप अपने कार्य को सहजता सम्मान और स्वाभिमान के साथ अंगीकार कर लेते हैं तो फिर आपको कोई भी कार्य छोटा नहीं लगेगा, आपके लिए कोई भी कार्य छोटा नहीं रहेगा.

4. आपके हिस्से में चाहे छोटा या कम महत्व का काम आया हो, तब भी भगवान को धन्यवाद दो. अगर यह भी न मिलता, तब क्या कर लेते ? अपने आपको भाग्यशाली समझो कि आपके पास करने के लिए कुछ तो है. जरा उसकी भी सोचिए, जिसके पास कोई कार्य ही नहीं है. भाग्य को कभी दोष मत दो. दोष देना ही है तो अपनी कार्यप्रणाली को दो. आप अपने सकारात्मक सोच एवम् निरन्तर परिश्रम के माध्यम से किसी महत्वहीन कार्य को भी महत्वपूर्ण बना सकते हैं. तब आपके सामने ढ़ेर सारे कार्य होंगे.

5. काम कैसा भी हो, कहीं भी हो, कितना भी हो, बस काम होना चाहिए. काम ही हमारा पुरुषार्थ है, काम ही हमारा अर्थ है, काम ही हमारा धर्म है और काम ही मोक्ष है. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरूषार्थो में ‘काम’ कोमन है, काम विद्यमान है. काम के बिना तो हमारा जीवन ही व्यर्थ है, जहाँ काम होगा, वहाँ कामयाबी की कामना भी होगी. काम करने वाला हर व्यक्ति अपने काम में, अपने जीवन में सफल होना चाहता है. और सफलता के लिए काम नहीं, अपितु उसका तरीका अधिक महत्वपूर्ण है, काम के प्रति हमारा नजरिया सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. यहाँ ‘काम’ के दो अर्थ हैं-कार्य और यौन सम्बन्ध । दोनों में ही हमें सफलता चाहिए. दोनों में ही हमारा तरीका और नजरिया महत्वपूर्ण है.

6. जब ‘काम’ ही पूजा है, ‘काम’ ही अर्चना है, तब कोई काम घटिया कैसे हो सकता है. काम तो जीवन की प्रार्थना है, तब कोई काम अप्रार्थ्य कैसे हो सकता है. याद रखें, कर्म से अलग किसी स्वर्ग का कोई अर्थ नहीं हैं. प्रकृति ने प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी विशेषता के साथ पैदा किया है. इसलिए यदि व्यक्ति अपनी विशेषता का सदुपयोग अपने कार्य में करते हुए आगे बढ़ता है तो उसका हर कार्य ‘विशिष्टता’ की श्रेणी में आ जाता है.

7. सबसे छोटा, किन्तु अच्छा कार्य, बड़े उद्देश्य वाले घटिया कार्य से बढ़िया होता है. घटिया तरीके से कितना ही माल कमा लें, घटिये का परिणाम भी घटिया ही होता है. जब आप सब कुछ बढ़िया ही चाहते हैं, तब ‘काम’ ही घटिया क्यों चुनें. जो भी चुनना पड़े, उसे बढ़िया तरीके से करते चलें. यही सफलता का मूल मंत्र है.

8. हर व्यक्ति हर कार्य नहीं कर सकता, हर कार्य उसके हिस्से में आ भी नहीं सकता. इसलिए जो भी कार्य मिले या जिसे आप चयनित करें, उसे पूरे सम्मान एवम् अपने ढंग से करते चलें. एक दिन यही कार्य सर्वोत्तम हो जायेगा. यदि आप अपने कार्य से प्रसन्नता एवत् प्रेरणा प्राप्त करते हैं, यदि आप अपने कार्य के प्रति सदैव उत्साहित रहते हैं तो आपका कार्य आपके लिए ही नहीं, सबके लिए महत्वपूर्ण हो जायेगा.

9. जब कोई व्यक्ति किसी सड़क किनारे छोटा सा ढाबा खोलता है और उसे किसी फाइव स्टार से कम नहीं आंकता है, तो यही ढाबा कल होटल में बदल सकता है और परसों ‘फाइव स्टार होटल भी बन सकता है. जब कोई व्यक्ति एक छोटी सी दुकान करता है, किन्तु अपना व्यवहार, अपना नजरिया किसी बड़े शौरूम अथवा डिपार्टमेण्टल स्टोर के मालिक जैसा रखता है तो उसकी दुकान किसी से कम नहीं होगी. उसे अपने व्यवसाय में आनन्द आयेगा और बहुत संभव है, एक दिन यह छोटा सा व्यवसाय बहुत बड़े व्यवसाय में बदल जायेगा.

दृष्टान्त- ‘श्मशान घाट’ पर लकड़ी की टाल लगाने वाला एक व्यवसायी अपने धन्धे से खुश नहीं था. सदा हीन भावना से ग्रस्त रहता था. एक दिन वह किसी मैनेजमेन्ट गुरु के पास पहुँचा और बताया कि वह अपना धन् IT बदलना चाहता है. उसे कोई सम्मानजनक व्यवसाय बताया जाय. इस पर गुरु ने समझाया-‘देखिए, वर्तमान धन्धे में कोई बुराई नहीं है, न तो कोई लकड़ी के भाव कम करवाता है और न कोई उधार ले जाता है. ऐसे धन्धे में घाटे की कोई संभावना ही नहीं है. यह मत भूलिए कि एक दिन तुम्हारा मृत शरीर भी इसी श्मशान घाट पर लाया जायेगा. जब तुम्हारे शरीर का दाह संस्कार भी तुम्हारी टाल की लकड़ियों से ही किया जायेगा, तब तुम्हारी आत्मा को कितना सुकुन मिलेगा. याद रखो, ‘श्मशान’ से पवित्र स्थान दूसरा नहीं होता. जरा अपनी टाल को व्यवस्थित कर लो. सूखी एवम् हल्की लकड़ियाँ रखो. आस-पास पूरी सफाई रखो, अगरबत्ती जलाओ. पीपल-चंदन आदि की लकड़ियाँ सीमित मात्राओं में सबको निःशुल्क उपलब्ध कराओ. घी, नारियल, फूल आदि सामग्री भी टाल पर रखना आरम्भ करो, ईंधन एवम् फर्नीचर आदि के प्रयोजनार्थ एक टाल किसी अन्य स्थान पर भी स्थापित कर सकते हो. अपने धन्धे को कभी घटिया मत समझो. यदि तुमने अपनी टाल बन्द कर दी तो फिर तुम्हें ‘श्मशान घाट’ पर टाल हेतु कभी जगह नहीं मिलेगी, व्यवसाय को महज व्यवसाय ही मत समझो, लोगों को सुविधायें उपलब्ध करवाने का माध्यम भी समझो.’ व्यवसायी सन्तुष्ट होकर अपनी टाल पर लौट आया. 

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