Self-confidence increase tip-कार्य को चुनौती के रूप में लें 

Self-confidence increase tip

Self-confidence increase tip- कार्य को चुनौती के रूप में लें 

लक्ष्य-सिद्धि के मार्ग में मनुष्य को अनेक कठिनाइयां एवं बाधाओं का सामना करना पड़ता है। संभव है कि कहीं – 

  • उसे आलस्य और प्रमाद घेर ले, 
  • राह में कुछ प्रलोभन मोहित करे, 
  • वह अनायास ही विपत्ति का अनुभव करने लगे, 
  • उसके मन में असुरक्षा का भाव उपज आए, 
  • उसे कड़ी स्प र्धा (Grinding Competition) सामने नजर आए और उसके मन में असफलता का भय पैदा हो जाए | आदि । 

जब हनुमान को यह अनुभूति हो गई कि उनका जीवन श्रीरामजी के कार्य के लिए ही है और उन्हें सीता की सुधि लेने का कार्यभार सौंपा गया है, तो उनका एकमात्र लक्ष्य था – सीता माता की खोज | लेकिन यह काम सहज नहीं था – एक ओर विशाल सागर और दूसरी ओर उनकी राह रोकने के लिए खड़ी सुरसा | सबसे पहले मैनाक पर्वत ने उनसे आग्रह किया – ‘हनुमान! थोड़ा विश्राम कर लो, तब चले जाना। लेकिन उनका उत्तर था – ‘रामकाज किए बिना मोहि कहां विश्राम ।’ मैनाक नहीं माना और ऊपर उठा। हनुमान ने उसे पैर से स्पर्श किया और वे आगे बढ़ गए। अब सुरसा मिली जो उन्हें खाना चाहती थी। उसने अपने मुख का जितना विस्तार किया, उतना ही वृहदाकार हनुमान ने अपनी दक्षता से किया और अंत में उससे आशीर्वाद प्राप्त कर वे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ गए।

इस उदाहरण से ये बातें स्पष्ट हो जाती हैं – 

  • हनुमान ने ‘सीता की खोज’ को एक चुनौती (Challenge) के रूप में स्वीकार किया था। 
  • चुनौती से संकल्पबद्ध होकर वे आलस्य व प्रमाद रूपी मैनाक के चंगुल में नहीं फंसे। 
  • उन्होंने साहसपूर्ण जोखिम भरे कार्य को अपनी योग्यता एवं दक्षता से पूरा किया। 
  • चुनौती ने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए उनका उत्साहवर्धन किया। 

आखिर ‘चुनौती’ है क्या? 

‘चुनौती’ प्रभावशाली व्यक्तित्व (Dynamic Personality) का एक विशेष आंतरिक गुण (Intrinsic Quality) है, जो प्रेरक-शक्ति रूप में लक्ष्य-सिद्धि के लिए व्यक्ति को साहसी, उत्साही और संघर्षशील बनने का आह्वान करता है | चुनौती…. 

  • व्यक्ति के अंदर कठिन-से-कठिन कार्य करने का साहस पैदा करती है,
  • उसे जोखिम भरे कार्य करने को प्रेरित करती है,
  • उसकी छिपी प्रतिभा (Latent Talent), योग्यता एवं क्षमता को बाहर निकालती है और 
  • कार्य-लक्ष्य की सिद्धि के लिए उसका उत्साहवर्धन करती है। 

इसलिए Travis White ने लिखा है – 

‘Dreams can often become challenging 

but challenges are what we live for.’

‘चुनौती’ का अंग्रेजी शब्द ‘CHALLENGE’ नौ अक्षरों से युत है और इसका प्रत्येक अक्षर (Letter) सफलता का गुण लिए है, जो इस शब्द की शक्ति को साकार करते हैं। आइए, इस शब्द का विश्लेषण कर इसकी विशेषताएं (Characteristics) देखें, नीचे दिए Diagram में : 

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स्पष्ट है,

जो व्यक्ति चुनौती स्वीकारने में नहीं हिचकिचाता, वह कर्त्तव्यपरायणता की भावना से कार्य को हाथ में लेकर एकाग्रमन से सफलतापूर्वक संपन्न कर लेता है। उसका साहस बड़े-से-बड़े भय को छिपा लेता है। यदि किसी कमजोर व्यक्ति के सामने जीवन-मृत्यु का संकट आ खड़ा हो और उसे किसी की जिंदगी बचानी हो, तो वह आग या बाढ़ में से अपने से भारी व्यक्ति को भी कंधे पर उठाकर निकल जाएगा और उसे बचा लेगा। 

– सेवान रोला एक छोटे-से पादरी के रूप में फ्लोरेंस गया था। वहां उसने देखा कि सब ओर गरीबी और दुःख का साम्राज्य छाया है। 

कारण – कुछ शक्तिशाली लोग शक्तिहीनों को लूटकर उन पर अन्याय कर रहे थे और ऐश कर रहे थे। उसी समय उसने संकल्प लिया कि ‘मैं इन दलितों के जीवन-स्तर को ऊंचा उठाऊंगा।’ यह कार्य उसके लिए चुनौतीपूर्ण था। उसने सारे प्रलोभन ठुकरा दिए और पूरी ईमानदारी से अपना लक्ष्य नजर के सामने रखा । उस समय लोरेजो द ‘मेंडिसी’ अपनी शक्ति के चरम सीमा पर था। लालच में न फंसने के बाद सेवान रोला को मौत का खौफ दिखाया गया, किन्तु वह विचलित नहीं हुआ और संघर्ष में जुटा रहा । अंत में वह मेंडिसी के निरंकुश व अत्याचारी कुशासन का तख्ता पलटने में सफल हो गया। उसने ऐसे राज्य की स्थापना की, जिसमें न्याय राज करेगा। इस उदाहरण में चुनौती की शक्ति सृजनात्मक है, जो मानसिक अनुकूलता को बढ़ावा देती है, लक्ष्य का निर्माण करती है और लक्ष्य की प्राप्ति कराती है, क्योंकि वह व्यक्ति के अंदर अभूतपूर्व साहस का भंडार सुरक्षित कर देती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण साहस के बारे में Francis Bacon ने लिखा है – 

‘Boldness is ever blind for it seethe not dangers and inconveniences.’ 

साहस सदैव अंधा होता है, क्योंकि यह खतरों और असुविधाओं को नहीं देखता है। 

चुनौतीपूर्ण कार्य के विजेता की विशेष खूबियां : 

1.उसके पास हमेशा कुछ नया करने का एक प्रोग्राम रहता है और वह अपनी तार्किक बुद्धि से हर समस्या का समाधान कर लेता है।

2. उसकी सोच सकारात्मक होती है। वह सदैव आशावादी होता है और आने वाले कल का सार्थक चिंतन करता है।

3. जो मौजूद है, उसी पर ध्यान केन्द्रित न करके वह इसका सार्थक चिंतन करता है कि ‘आगे क्या हो सकता है।’

4. वह बीते दिन की नहीं सोचता और न ही आने वाले कल की चिंता करता है, जिससे उसकी सकारात्मक सोच प्रभावित न हो।

5. वह आवश्यकता से अधिक चिंतन नहीं करता, जिससे वह चिंता, तनाव, भय और आशंका से सदैव मुक्त रहता है। 

6.उसकी दृष्टि उपलब्धियों पर रहती है, कठिनाइयों पर नहीं।

7. उसके पास कुछ अपने सिद्धांत होते हैं, जिन पर वह दृढ़ रहता है और किसी प्रकार के प्रलोभन से दूर रहता है।

8. वह ईश्वर पर दृढ़ विश्वास रखता है और किसी उपलब्धि का श्रेय केवल स्वयं को नहीं देता। इससे वह अहंकारी नहीं होता।

9.वह अपने दायित्व को भलीभांति समझता है और उसको ईमानदारी से पूरा कर लेता है। इससे उसके आत्मसम्मान की रक्षा होती है, आत्मविश्वास में निरंतर वृद्धि होती है और वह आत्मनिर्भर बन जाता है।

10. वह कार्य का प्लान बनाता है और जीत की तैयारी करता है। इस तैयारी (Preparation) के लिए उसके पास ये चीजें होती हैं – 

  • उद्देश्य (Purpose) 
  • सिद्धांत (Principle) 
  • योजना (Planning) 
  • अभ्यास (Practice) 
  • निरंतर प्रयास (Perseverance) और 
  • धैर्य (Patience) 

कुछ उदाहरण : 

किसी कार्य को चुनौती के रूप में लेना और चुनौतियों का सामना करना, ये दोनों स्थितियां अलग-अलग हैं। अतः चुनौती के स्वरूप को भलीभांति समझने के लिए यहां कुछ उदाहरण दिए जाते हैं – 

– एक धनिक अमेरिकन महिला स्वामी रामतीर्थ के पास आकर बोली – ‘महाराज, मेरा इकलौता बेटा मर गया है। उसके जाने से मेरा घर एकदम खाली हो गया है। मेरा सुख-चैन न जाने कहां गायब हो गया है। उसकी यादों के दिमाग में बराबर कौंधते रहने से मैं घोर दु:ख के दौर से गुजर रही हूं, कृपया मुझे कोई ऐसा मार्ग बताइये जिससे मैं इस हादसे से उबरकर आनंद प्राप्त कर सकुँ ।’ 

स्वामी रामतीर्थ ने कहा – ‘आनंद तो मिल जाएगा, मगर तुम्हें उसकी कीमत अदा करनी पड़ेगी।’ 

स्त्री ने कहा – ‘पैसे की मेरे पास कोई कमी नहीं है। आप जो कीमत कहें, मैं वह अदा करने को तैयार हूं।’ 

स्वामी जी ने कहा – ‘बाई, आनंद के राज्य में सोने-चांदी के सिक्के नहीं चलते। यह कहते हुए रामतीर्थ ने उसे एक हठी अनाथ बालक देते हुए कहा, ‘लो, इसे अपने पुत्र की तरह पालना, ताकि इसके पालन-पोषण में तुम्हारा ध्यान बंटे, तुम्हें पुत्र के मरने से जो सदमा लगा है उससे तुम उबर सको और आनंद प्राप्त कर सको।’ 

स्त्री ने कहा – “स्वामी जी, यह तो बड़ा मुश्किल काम है। मुझसे यह नहीं हो सकेगा। स्वामीजी बोले – ‘तो आनंद पाना भी बड़ा मुश्किल है। मैं तुम्हें उसकी प्राप्ति नहीं करा सकता।’ 

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इस उदाहरण से ये बातें सामने आती हैं – 

आनंद-प्राप्ति के लिए सबसे सरल उपाय यह है कि हम दूसरों को आनंद प्रदान करने की कला अपने स्वयं के भीतर विकसित करें, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। अमेरिकन स्त्री इसे कठिनाई का रूप दे रही है, जबकि चुनौती कठिनाई पर विजय प्राप्त कराने वाली शक्ति है, अर्थात् हमें साहसी बनाती है।

असंभव कार्य को संभव बनाने के लिए हमारे अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति का होना अनिवार्य है। इसके बिना तो चुनौती का अर्थ ‘कठिनाई’ से होगा, जबकि चुनौती’ किसी समस्या का समाधान कराने वाली शक्ति है।

निराशापूर्ण मामलों में चुनौती के रूप में कार्य को करना उसी तरह से होगा, जैसा कि इससे पूर्व उदाहरण में पादरी सेवान रोला ने अपने साहस से दलितों का उत्थान किया था। उसमें चुनौती का वास्तविक स्वरूप था। 

– गुरु द्रोणाचार्य ने एक्लव्य को धनुर्विद्या सिखाने के लिए साफ इंकार कर दिया था, क्योंकि वह शूद्र पुत्र था। चूंकि बालक की धनुर्विद्या के प्रति इच्छा-शक्ति दृढ़ थी और उसने महान गुरु से विद्या सीखने और एक सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी बनने का संकल्प ले रखा था, द्रोणाचार्य के इंकार को चुनौती के रूप में स्वीकार कर वह चुपचाप जंगल में चला गया और वहां रहने लगा। उसने मिटटी से उनकी मूर्ति बनाकर उन्हें अपना साक्षात् गुरु मान लिया और उस मूर्ति के सामने शिष्य रूप में स्वयं ही अभ्यास के द्वारा विद्या सीखने लगा। वह विद्या में इतना निपुण हो गया कि एक दिन उसने एक साथ सात बाण चलाकर अर्जुन के कुत्ते का मुंह बांध दिया। यह आश्चर्यजनक समाचार सुनकर द्रोणाचार्य तुरंत एकलव्य के निकट दौड़े आए और उससे पूछा – ‘तुम्हारे गुरु कौन हैं?’ उसने उन्हीं की मूर्ति दिखाकर विनम्रता से कहा – ‘आप ही मेरे गुरुदेव हैं।’ उसी समय गुरु ने कहा – “तो फिर अपने सीधे हाथ का अंगूठा मुझे गुरु-दक्षिणा में भेंट करो।’ एकलव्य ने स्वयं ही अपना अंगूठा काटकर उनके श्री चरणों में भेंट किया और इस प्रकार अपनी चुनौती को साकार कर दिखाया।

यह उदाहरण हमारे जीवन को सफल बनाने में बड़े महत्त्व का है। इसमें एकलव्य की चुनौती के सभी गुणों का दिग्दर्शन है – जोखिम, साहस, लगनशीलता, उत्साह, मन की एकाग्रता, पॉजिटिव एटिट्यूड, समस्या समाधान (Problem-solving), नेतृत्व (Leadership), लक्ष्य आदि। यह घटना चुनौती का वास्तविक स्वरूप प्रकट करती है। 

– हेनरी फोर्ड विश्व में अपने समय के बड़े पूंजीपतियों में से एक थे और फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना कर कारों के सबसे बड़े निर्माता बन गए थे। 1920 में ऑटोमोबाइल बाजार में फोर्ड कम्पनी की दो तिहाई भागेदारी थी। हेनरी फोर्ड मैनेजमेंट की बजाय टैक्नीशियंस पर ज्यादा ध्यान देते थे और उन्हें अच्छा वेतन व सुविधाएं भी उपलब्ध कराते थे। लेकिन ‘वीक मैनेजमेंट’ का नतीजा यह निकला कि अगले 15 साल में फोर्ड को कोई मुनाफा नहीं हुआ और विश्व युद्ध द्वितीय शुरू होने से पहले उनका 20 प्रतिशत मार्केट शेयर भी गिर गया। उधर विश्व युद्ध में उनके इकलौते पुत्र Edsel Ford की मृत्यु हो गई। उद्योग क्षेत्र में यह समझा जाने लगा कि ऐसी विषम परिस्थिति में वृद्ध हेनरी फोर्ड के लिए अपनी कम्पनी का अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा। कहा जाता 

है कि अमेरिकी सरकार के पास एक योजना थी, जिसमें स्टुडिबेकर’ कार कंपनी को पर्याप्त ऋण देकर फोर्ड कंपनी को Take – over करने का प्रस्ताव था, अन्यथा फोर्ड कंपनी का राष्ट्रीयकरण हो सकता था। उस समय फोर्ड कंपनी के Financial Resources ‘जनरल मोटर्स कंपनी के बराबर थे, लेकिन फोर्ड कारों की सेल का हिस्सा जनरल मोटर्स की टर्नओवर के एक तिहाई बराबर था। दस वर्ष की आर्थिक मंदी, विश्वयुद्ध में पुत्र की मृत्यु, मैनेजरों का कंपनी से पलायन और वृद्ध हेनरी फोर्ड का गिरता स्वास्थ्य आदि ऐसे कारणों ने फोर्ड कंपनी को अनिश्चितता के कगार पर पहुंचा दिया था। 

उस समय हेनरी फोर्ड का पौत्र व उत्तराधिकारी (एडसिल फोर्ड का पुत्र) हेनरी फोर्ड-III की आयु बीस वर्ष की थी और उन्हें बिजनेस का कोई अनुभव नहीं था | उन्होंने अपने दादाजी की साख और कंपनी का अस्तित्व बचाने की जिम्मेदारी स्वयं संभालने का दृढ़ निश्चय किया और हेनरी फोर्ड-1 से कहा – “दादाजी, आप बिजनेस से पूरा रिटायरमेंट ले लें और मुझे स्वतंत्र रूप से इसे संभालने दें। हेनरी फोर्ड-III ने Rebuild of Ford Manage ment का कार्य चुनौती के रूप में ले लिया, हालांकि वह इस क्षेत्र में बिल्कुल अनुभवहीन थे। उन्होंने ‘साइंटिफिक मैनेजमेंट’ पद्धति पर कम्पनी चलाने की पूरी योजना बनाई और मैनेजमेंट विशेषज्ञ व अनुभवी Earnest E. Breech को Executive Vice-Presi dent पद पर नियुक्त किया । इस तरह हेनरी फोर्ड – III ने अपनी प्रतिभा व कुशलता और प्रभावी सोच से न केवल कम्पनी की साख बचाई, बल्कि उसे मजबूत नींव पर खड़ा करके सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया /* 

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि व्यापार में काम को चुनौती के रूप में लेना और प्रतिद्वन्द्वियों की चुनौतियों का सामना करना – ये दोनों स्थितियां शामिल होती हैं। बिगड़ी स्थिति को संभालना और फिर आगे सफलता के शिखर पर ले जाना आसान काम नहीं है, विशेषकर भयंकर प्रतिस्पर्धा के दौर में। इस पूरी प्रक्रिया में ‘चुनौती’ ही असंभव कार्य को संभव’ बनाती है, जो व्यक्ति की छिपी प्रतिभा, नई समझबूझ, साहस, संघर्ष-शक्ति आदि को बाहर खींच निकालती है और फिर नई व्यापार-तकनीक के प्रयोग से उसे सफलता दिलाती है। 

जीवन में उपलब्धियां हासिल करने में चुनौती के दो विशेष गुण काम आते हैं – जोखिम और साहस। 

सन् 1950 में इंगलैंड में जन्मे रिचर्ड ब्रेनसन ऐसे साहसी और सफल व्यक्ति हैं, जो अपनी शारीरिक कमजोरियों को पीछे धकेलते हुए व्यापार क्षेत्र में आगे बढ़े और बढ़ते ही रहे हैं। पिछले दिनों उन्हे ब्रिटेन का सर्वश्रेष्ठ व्यवसायी घोषित किया गया | उन्होंने सफलता के शिखर पर पहुंचने के लिए चुनौती के रूप में कई जोखिमें उठाकर नए आयाम बनाने की पहल की : 

मात्र 10 साल की उम्र में उन्होंने एक अखबार ‘Student at the age of sixteen’ निकाला, जिसका उद्देश्य था – स्कूलों को आपस में जोड़ना। स्कूल के हैडमास्टर ने ब्रेनसन को शाबासी देते हुए कहा, ‘मुझे तुम पर गर्व है, तुम एक दिन नाम कमाओगे।’ यह अखबार उनकी पहली उपलब्धि थी।

सोलह साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर डिस्काउन्ट मूल्य पर अपने म्यूजिक रिकॉर्ड बेचना शुरू किया और 1972 में ‘वर्जिन रिकॉर्ड्स’ की स्थापना कर इसका पहला स्टुडियो ऑक्सफोर्डशायर (इंगलैंड) में खोला। । 1984 में ‘वर्जिन एयरलाइंस की स्थापना की, जो ब्रिटेन की दूसरे नम्बर की अन्तर्राष्ट्रीय उड़ान भरने वाली कम्पनी है। 

सॉफ्ट ड्रिंक्स के क्षेत्र में वर्जिन कोला’ के नाम अपनी कम्पनी शुरू की, जो अग्रणी बनने की ओर तेजी से बढ़ रही है।

1987 में उन्होंने अटलांटिक महासागर को पार किया गैस के गुब्बारे में बैठकर, जो विश्व का पहला सबसे बड़ा, गर्म गैस का गुब्बारा था । अब वे हॉट एयर बैलून में बैठकर विश्व भ्रमण करने की इच्छा शक्ति का विकास कर रहे हैं। 

उन्होंने जमीन के साथ ही पानी में भी चलने वाली कार से इंगलिश चैनल पार करने की योजना हाल ही में घोषित की है और यह कहा है कि वे बिना किसी सहायता के अपनी एक्वाड्रा कार से इंगलिश चैनल पार कर एक नया रिकॉर्ड बनाएंगे। यह कार पानी में 48 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से तैरती है और जमीन पर इसकी गति 160 कि.मी. प्रति घंटे से अधिक है। आंखों की कमजोरी और डिसलेक्सिक से पीड़ित रिचर्ड ब्रेनसन आज ब्रिटेन के ‘एडवेंचरेस’ उद्योगपति हैं। कोई भी सफल व्यापारी या उद्योगपति ‘बाधा’ और ‘असफलता से अछूता नहीं रहता है, लेकिन ब्रेनसन इन सबको पीछे छोड़कर आगे बढ़ते ही रहे हैं। वे न केवल व्यापारी वर्ग के लिए ‘रोल मॉडल हैं, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक प्रेरणादायी शख्स हैं, जो अपनी शारीरिक कमजोरियों के चलते स्वयं को असफल मान चुके हैं। जब भी ब्रेनसन का नाम लिया जाता है तो बस एक ही शब्द सामने आता है – “सफलता’, जिसे वे ‘चुनौती के द्वारा अर्जित करते हैं। चुनौतीपूर्ण कार्य के विजेता रिचर्ड ब्रेनसन के उक्त उदाहरण से ये बातें स्पष्ट हो जाती हैं – 

वे व्यापार में ‘जोखिम’ और ‘साहस’ को विशेष महत्त्व देते हैं | इन दोनों को सफलता का मूलमंत्र मानकर ब्रेनसन छोटी-सी उम्र में एक ‘न्यू एन्टरप्रिन्योर’ के रूप में सामने आए और अपनी प्रतिभा एवं क्षमता का सौ फीसदी इस्तेमाल कर नए-नए आयाम बनाने की पहल करते रहे, यानी कार्य को चुनौती-रूप में लेते रहे। 

अपने तरीके से लक्ष्यों का निर्माण कर उनका समयबद्ध ‘एक्शन प्लान’ बनाते हैं। 

अपनी दृढ़ इच्छा-शक्ति का विकास कर जोखिम, साहस, कठिन परिश्रम तथा आत्मविश्वास के साथ सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते चले जाते हैं। 

आने वाले कल को ध्यान में रखकर वे नए आयाम (Scope) का सार्थक चिंतन करते हैं और आज जो मौके उनके पास हैं, 

उनका भरपूर फायदा उठाते हैं। 

आने वाली बाधा और असफलता का डर अपनी कल्पना शक्ति से बाहर रखते हैं और इस तरह वे अपनी सोच को सकारात्मक रूप देते रहते हैं। 

रचनात्मक कार्यों में रुचि लेकर वे अपने उत्साह को जीवित रखते हैं, जिससे वे अपनी कमियों को खूबियों में बदल देते हैं। 

Drydon ने कहा है – 

‘Fortune befriends the bold.’ ‘भाग्य साहसियों से मित्रता करता है।’ 

निष्कर्ष- 

किसी असंभव कार्य को संभव बनाने का एक सरल उपाय है – उस कार्य को चुनौती रूप में लेना । ऐसा करने से आपके अंदर अद्भुत साहस पैदा होता है, आपकी छिपी प्रतिभा (Latent Talent) और कार्य-क्षमता उभरकर सामने आती है, आप कुशलतापूर्वक उस काम को करने में पूरी शक्ति लगा देते हैं और विजेता बन जाते हैं, जैसे-किसी खेल में जब मुकाबला कड़ा होता है, तब खिलाड़ी अपनी छिपी प्रतिभा और शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन कर जीत हासिल कर लेता है। ऐसी जीत में वह अभूतपूर्व आनंद का एहसास करता है, जो उसके हौसले को बुलंद बनाए रखता है। 

सफलता का नाम ही जीवन है । ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं, जो हार का अनुभव किए बिना विजेता बन जाते हैं, लेकिन ऐसी जीत स्थायी नहीं रहती। असली सफलता वही है, जिसे हासिल करने में आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ा, कड़ा संघर्ष करना पड़ा। यह स्थायी सफलता कहलाती है। कारण – इसमें अतीत के कटु अनुभव होते हैं, जो निरंतर प्रगति के लिए आपकी याद में रहते हैं, जिससे आप उन गलतियों को फिर से दोहराने का साहस नहीं करते। 

चुनौती को स्वीकारने अथवा उसका सामना करने के लिए आपको चाहिए कि आप –

  • एक अच्छी खोजी-प्रवृत्ति वाला बनें,
  • कुछ नया सीखते रहने की आदत डालें,
  • जिम्मेदार व्यक्तियों की संगति में रहकर जिम्मेदारी स्वीकारने की आदत बनाएं,
  • अच्छे स्वाभिमान का निर्माण करें।
  • अपनी महत्त्वकांक्षा (Ambition) में कमी न आने दें, तभी 
  • आप ऊंची उपलब्धियों के लिए ऊंचे लक्ष्यों का निर्माण कर सकेंगे,
  • अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें,
  • नैतिक मूल्यों को सदैव व्यवहार में लाएं और
  • अपने साहस और उत्साह को सदैव जीवित रखें, जिससे आप संघर्ष-प्रिय बने रहें। 

याद रखें … 

जिंदगी में बिना जोखिम उठाए बड़ी सफलता हासिल नहीं होती। आप एक जगह नौकरी छोड़कर दूसरी जगह बड़ी पोजिशन में चले गए, यह कमाल आपके साहस ने किया । हो सकता है कि नई जगह पर आपको आशा के अनुरूप कामयाबी न मिले । यदि ऐसा आपने पहले से ही सोच लिया, तो आगे बढ़ने का साहस आप कभी न कर पाएंगे और जिंदगी में कभी आने वाले सुनहरे अवसर को भी नहीं पहचान पाएंगे। अतः आपको चाहिए कि बड़ी उपलब्धि 

हासिल करने के लिए आप कुछ-न-कुछ जोखिम उठाने का साहस करें। ध्यान रहे, भाग्य साहस से ही मित्रता करता है। 

हेनरी फोर्ड ने एक बार कहा था – 

‘I am looking for a lot of men with an infinite capacity for not knowing what cannot be done.’ मैं बहुत से ऐसे असीम क्षमता वाले लोगों की तलाश में हूं जो यह नहीं जानते कि क्या नहीं हो सकता।

तात्पर्य यह है कि ईश्वर ने हमें सोचने और कार्य करने की असीम क्षमता दी है। दुर्भाग्य यह है कि सामान्यतः हम अपनी (प्राप्त) शिक्षा की झूठी सीमाओं में बंधकर सिर्फ यही जानते हैं कि हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते । यदि हम अपनी सीमाओं को एक समय के लिए भूल जाएं और उस कार्य को चुनौती के रूप में लें (जिसे हम ‘नामुमकिन’ समझते हैं), तो अपनी आत्म-शक्ति से प्रेरणा लेकर कल्पना शक्ति से नवीन सूझ-बूझ की उत्पत्ति करेंगे और उस कार्य को ‘मुमकिन’ बना देंगे। 

हेनरी फोर्ड की शिक्षा 14 वर्ष की उम्र के बाद नहीं हो पाई थी। वे इतने समझदार थे कि यह जानते थे कि ।-8 इंजन बनाया जा सकता है किन्तु इसका तकनीकि ज्ञान उनके पास नहीं था। उन्होंने अपने इंजीनियरों से 7-8 इंजन बनाने को कहा, लेकिन उनका जवाब था – ‘यह नामुमकिन है।’ फोर्ड अपनी इसी मांग पर अड़े रहे, जबकि इंजीनियर्स यह दोहराते रहे कि ‘हमें मालूम है कि क्या हो सकता है और क्या नहीं?v-8 इंजन बनाना असंभव है।’ कुछ महीनों बाद फोर्ड ने अपने इंजीनियरों से फिर कहा – “मुझे हर हालत में 7-8 इंजन ही चाहिए। कुछ दिन बाद वही लोग हेनरी फोर्ड का V-8 इंजन बनाकर ले आए। 

यह कैसे संभव हुआ? जब फोर्ड ने उनसे चुनौती के रूप में काम करने को कहा, तब उन्होंने अपनी शिक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर नई सूझ-बूझ का प्रयोग किया था। 

चुनौतीपूर्ण कार्य करने वाले व्यक्ति के लिए सपने उनके जीवन में बड़ा महत्त्व रखते हैं। विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी कहते हैं – 

‘बड़ी-बड़ी उपलब्धियां दो बार रची जाती हैं – 

पहली बार सपने में और दूसरी बार हकीकत में।’

सपने हमारी इस बात के लिए मदद करते हैं कि हम किसी भी चीज को उसके होने से पहले देख सकें । सपने हमें लक्ष्य प्राप्ति के लिए जोश, उमंग, उत्साह और ऊर्जा प्रदान करते हैं | हम प्रभावी सोच से योजना बनाते हैं, उसके कार्यान्वयन के समय अपनी प्रतिभा, नई सूझ-बूझ का प्रयोग करते हैं और फिर कठिन परिश्रम और संघर्ष के जरिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर लेते हैं। इस प्रकार हम अपने सपने का साकार रूप देखते हैं। 

किसी काम में लगे लोग बहुत अच्छे नतीजे हासिल कर लेते हैं, तो इसका कारण उनमें असामान्य योग्यता (Abnormal Ability) का होना नहीं है, बल्कि उनके द्वारा निरंतर किया गया प्रयास । अतः हमको चाहिए कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए हम निरंतर प्रयास करते रहें । यह तभी संभव है जब हम उन्हें चुनौती के रूप में लें और इसी भावना से हम लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम हो सकेंगे। 

Ravindra Nath Tagore ने कहा है – 

‘Dream is the wife who must talk, sleep is husband who silently suffers.’ अभिप्राय यह है कि हमेशा युवा और ऊर्जावान बने रहने के लिए आप सपने देखते रहें, क्योंकि जब आप सपने देखेंगे, तभी उन्हें हकीकत में भी बदल पाएंगे। 

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